Q31. किस पल्लव राजा ने मामल्लपुरम शहर की स्थापना की और वहाँ शिलाखंडों को काटकर रथ मंदिरों का निर्माणकराया ? व्याख्या: पल्लव वंश के सबसे प्रतापी राजा नरसिंहवर्मन प्रथम को ‘मामल्ल’ (महान मल्ल या पहलवान) की उपाधि प्राप्त थी। उन्होंने अपने इसी नाम पर समुद्र तट के पास ‘मामल्लपुरम’ (आधुनिक महाबलीपुरम, तमिलनाडु) शहर बसाया। वहाँ उन्होंने विशाल पत्थरों को तराशकर एकाश्मक (Monolithic) ‘रथ मंदिरों’ (जैसे धर्मराज रथ, अर्जुन रथ आदि) का निर्माण करवाया, जिन्हें ‘सप्त पैगोडा’ भी कहा जाता है।
(a) महेन्द्रवर्मन प्रथम
(b) नरसिंहवर्मन प्रथम
(c) परमेश्वरवर्मन I
(d) नंदिवर्मन
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Q32. बुद्ध के पिछले जन्म से जुड़ी जातक कथाएँ सुत्तपिटक के किस निकाय से संबंधित हैं ? व्याख्या: बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथ ‘सुत्तपिटक’ के 5 बड़े विभाग (निकाय) हैं। इनमें से पाँचवाँ निकाय ‘खुद्दक निकाय’ (Khuddaka Nikaya) है, जो आकार में छोटा लेकिन ग्रंथों की संख्या में सबसे बड़ा है। इसी खुद्दक निकाय के अंतर्गत ‘जातक’ ग्रंथ आता है, जिसमें महात्मा बुद्ध के पूर्व जन्मों की 500 से अधिक कहानियां (जातक कथाएँ) संकलित हैं।
(a) दीघ निकाय
(b) मज्झिम निकाय
(c) संयुक्त निकाय
(d)खुद्दक निकाय
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Q33. पूर्व मध्यकालीन तमिल साहित्य के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए : व्याख्या: कथन I सही है: 10वीं शताब्दी में वैष्णव आचार्य नाथमुनि ने 12 अलवार संतों के भजनों को इकट्ठा करके ‘नलयिरा दिव्य प्रबन्धम’ नामक पवित्र ग्रंथ में संकलित किया था। इसे तमिल वेद भी माना जाता है। कथन II गलत है: नयनार (शैव) संतों के भजनों का संकलन 10वीं-11वीं शताब्दी में नम्बि आन्दार नम्बि (Nambi Andar Nambi) द्वारा किया गया था (न कि तिरुवल्लुवर द्वारा)। तिरुवल्लुवर ने सुप्रसिद्ध नीतिपरक ग्रंथ ‘तिरुक्कुरल’ लिखा था। नम्बि आन्दार नम्बि का यही संकलन आगे चलकर शैवों के पवित्र ‘तिरुमुराई’ ग्रंथ का आधार बना।
I. दसवीं शताब्दी में नाथमुनि ने अलवार के भजनों को नलयिरा दिव्य प्रबन्धम नामक ग्रंथ में संकलित किया था ।
II. नयनार संत के भजनों को 10वीं शताब्दी में तिरूवल्लुवर द्वारा संकलित किया गया और यह संकलन शैवों के प्रमुख ‘तिरूमुराई’ ग्रंथ का आधार बना ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन सा/से सही है/हैं ?
(a) केवल I
(b) केवल II
(c) दोनों I और II
(d) न तो I न ही II
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Q34. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित है ? व्याख्या: इस प्रश्न में केवल विकल्प (d) ही सही सुमेलित है; ‘मालतीमाधव’ और ‘उत्तररामचरित’ जैसी महान कृतियों के लेखक भवभूति हैं। बाकी सभी विकल्प गलत सुमेलित हैं, उनके सही लेखक इस प्रकार हैं:
(पुस्तक) – (लेखक)
(a) हम्मीर रासो – पद्मगुप्त
(b) विक्रमांकदेवचरित – शूद्रक
(c) सौन्दरानन्द – बिल्हण
(d) मालती माधव – भवभूति
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Q35. निम्नलिखित में से कौन सा अभिलेख हर्षवर्द्धन के संबंध में जानकारी नहीं देता है ? व्याख्या: उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले में स्थित ‘भीतरी स्तंभ अभिलेख’ (Bhitari Inscription) गुप्त राजवंश के राजा स्कंदगुप्त से संबंधित है, जिसमें हूणों के आक्रमण और उनकी पराजय का विवरण मिलता है। इसका हर्षवर्धन से कोई संबंध नहीं है। जबकि बाँसखेड़ा और मधुबन ताम्रपत्र स्वयं हर्षवर्धन के हैं, और पुलकेशिन द्वितीय का ‘एहोल अभिलेख’ हर्ष और पुलकेशिन के बीच नर्मदा नदी के तट पर हुए युद्ध (जिसमें हर्ष की पराजय हुई थी) की जानकारी देता है।
(a) बाँसखेड़ा ताम्रपत्र अभिलेख
(b) एहोल अभिलेख
(c) भीतरी अभिलेख
(d) मधुबन ताम्रपत्र
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Q36. निम्न में से किस शासक ने हिमालय पर चेर राजवंश के राजचिह्न ‘धनुष’ को अंकित किया ? व्याख्या: संगम काल के चेर वंश के राजा नेदुनजेरल अदन (Nedunjeral Adan) के बारे में तमिल परंपराओं और काव्यों में कहा गया है कि उसने उत्तर भारत पर विजय प्राप्त की थी और अपनी सेना को हिमालय तक ले गया था। वहाँ उसने हिमालय पर्वत की चट्टानों पर चेर राजवंश का शाही राजचिह्न ‘धनुष और बाण’ अंकित किया था। इसी कारण उसे ‘इमयवरम्बन’ (हिमालय की सीमा वाला) भी कहा जाता है।
(a) नेदुनजेरल अदन
(b) उदियनजेरल
(c) कुत्तुवन
(d) सेनगुत्तुवन
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Q37. निम्नलिखित में से कौन सा संगम काल का व्यापारी समूह पहली सदी ई. पूर्व के अलगरमलाई शिलालेख में बताएगए ‘कोलूवनिकन’ से जुड़ा था ? व्याख्या: तमिलनाडु के मदुरै के पास अलगरमलाई (Alagarmalai) में मिले तमिल-ब्राह्मी शिलालेखों में प्राचीन तमिल समाज के विभिन्न व्यापारियों का उल्लेख है। इसमें प्रयुक्त शब्द ‘कोलूवनिकन’ (Koluvanikan) मुख्य रूप से ‘अनाज/दालों के व्यापारियों’ (Grain Merchants) के लिए उपयोग किया जाता था। संगम काल में अनाज का व्यापार सबसे महत्वपूर्ण आंतरिक व्यापारों में से एक था।
(a) दासों के व्यापारी
(b) अनाज के व्यापारी
(c) हलों के व्यापारी
(d) कपड़े के व्यापारी
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Q38. महावंश और दीपवंश के अनुसार, अशोक ने किसके प्रभाव से बौद्ध धर्म की शिक्षा ग्रहण की ? व्याख्या: श्रीलंका के बौद्ध ग्रंथों ‘दीपवंश’ और ‘महावंश’ के अनुसार, सम्राट अशोक अपने बड़े भाई सुसीम के सात वर्षीय पुत्र (अशोक के भतीजे) ‘निग्रोध’ नामक एक छोटे भिक्षु के शांत और गंभीर व्यवहार को देखकर अत्यंत प्रभावित हुए और बौद्ध धर्म की ओर आकर्षित हुए। इसके बाद उन्होंने मोग्गलिपुत्त तिस्स से दीक्षा ली। (ध्यान दें: दिव्यवदान या अन्य उत्तर भारतीय ग्रंथों में उपगुप्त का नाम आता है, लेकिन सिंहली ग्रंथों के अनुसार उत्तर ‘निग्रोध’ है)।
(a) उपगुप्त
(b) निग्रोध
(c) पार्श्व
(d) वसुमित्र
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Q39. निम्नलिखित में से कौन सा शहर कुषाणों ने पहली शताब्दी के अंत में तक्षशिला में बसाया था ? व्याख्या: तक्षशिला (वर्तमान पाकिस्तान) के पुरातात्विक क्षेत्र में तीन प्रमुख प्राचीन शहरों के खंडहर मिलते हैं — भीर ढेड़ (सबसे पुराना), सिरकप (यूनानियों/पार्थियनों द्वारा बसाया गया) और सिरसुख (Sirsukh)। सिरसुख शहर को कुषाण राजाओं (संभवतः कनिष्क या उसके समकालीन) ने पहली शताब्दी ईस्वी के अंत में कुषाण स्थापत्य कला के अनुसार एक किले के रूप में बसाया था, जिसकी दीवारें सीधी और भारी पत्थरों की बनी थीं।
(a) सिरसुख
(c) अग्रोहा
(b) शाकल
(d) संघोल
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Q40. ‘अशोकावदान’ के अनुसार, अशोक की माता का नाम क्या था ? व्याख्या: बौद्ध ग्रंथ ‘अशोकावदान’ (Ashokavadana) के अनुसार बिंदुसार की रानी और सम्राट अशोक की माता का नाम ‘शुभद्रंगी’ था, जो चंपा शहर के एक ब्राह्मण की पुत्री थीं। उन्हें ‘जनपदकल्याणी’ भी कहा जाता था। अन्य बौद्ध ग्रंथों (जैसे महावंश टीका) में उनका नाम ‘धर्मा’ भी मिलता है, लेकिन विशेष रूप से ‘अशोकावदान’ ग्रंथ के संदर्भ में शुभद्रंगी नाम ही प्रामाणिक माना जाता है।
(a) शुभद्रंगी
(b) कल्याणी
(c) धर्मा
(d) देवी
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