UKPSC Lecturer Exam – History (Paper I) – 31 May 2026 (Answer Key)

UKPSC Lecturer Exam – History (Paper I) – 31 May 2026 (Answer Key)

Q141. सूची -I को सूची – II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए :
सूची-I (मौर्यकालीन प्रान्त)-        सूची-II (राजधानी)

A. उत्तरापथ                   –           1. पाटलिपुत्र
B. दक्षिणापथ                 –           2. तक्षशिला
C. प्राच्य                        –           3. तोषलि
D. कलिंग                      –           4. सुवर्णगिरि
कूट :
A B  C D
(a) 2 4 1 3  
(b) 1 2 3 4
(c) 4 3 2 1
(d) 3 1 24

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Answer – (a)

व्याख्या: मौर्य काल में सम्राट अशोक के समय साम्राज्य 5 प्रमुख प्रांतों (चक्रों) में विभाजित था। इन प्रांतों और उनकी राजधानियों का सही मिलान इस प्रकार है:
A. उत्तरापथ (उत्तर-पश्चिमी प्रांत) — 2. तक्षशिला
B. दक्षिणापथ (दक्षिणी प्रांत) — 4. सुवर्णगिरि
C. प्राच्य / प्रासी (पूर्वी/मध्य प्रांत) — 1. पाटलिपुत्र
D. कलिंग (तटीय प्रांत) — 3. तोषलि
अतः सही कूट अनुक्रम 2, 4, 1, 3 यानी विकल्प (a) है।

Q142. चोल साम्राज्य की प्रशासनिक इकाइयों को आरोही क्रम में व्यवस्थित करें:
कुर्रम

मंडल
नाडु
कोट
(a) कुर्रम, नाडु, कोट्टम, मंडल
(b) नाडु, कुर्रम, मंडल, कोट्टम
(c) मंडल, कोट्टम, नाडु, कुर्रम
(d) कोट्टम, कुर्रम, मंडल, नाडु

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Answer – (a)

व्याख्या: चोल प्रशासन अपनी सुगठित स्थानीय स्वायत्त शासन व्यवस्था के लिए प्रसिद्ध था। साम्राज्य का प्रशासनिक विभाजन बड़े से छोटे क्रम में इस प्रकार था: मंडलम (प्रांत) → कोट्टम/वलनाडु (कमिश्नरी/जिला समूह) → नाडु (जिला) → कुर्रम/कोट्टम (गाँवों का समूह)
चूँकि प्रश्न में आरोही क्रम (छोटे से बड़ा) पूछा गया है, इसलिए सबसे छोटी इकाई पहले आएगी: कुर्रम नाडु → कोट्टम → मंडल

Q143. निम्न में से किसने ‘विचित्रचित्त’ की उपाधि धारण की ?
(a) नरसिंह वर्मन
(c) पुलकेशिन I
(b) महेन्द्र बर्मन I
(d) पुलकेशिन II

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Answer – (b)

व्याख्या: पल्लव वंश के महान और प्रतापी राजा महेन्द्रवर्मन प्रथम (600–630 ई.) एक अत्यंत कुशल शासक होने के साथ-साथ महान कवि, संगीतकार और वास्तुकार भी थे। उनके बहुआयामी और अनोखे विचारों के कारण उन्हें ‘विचित्रचित्त’ (अनोखे मस्तिष्क वाला) की उपाधि दी गई थी। उन्होंने प्रसिद्ध हास्य नाटक ‘मत्तविलास प्रहसन’ की रचना भी की थी और रॉक-कट (चट्टानों को काटकर) मंदिर निर्माण की ‘महेन्द्र शैली’ की शुरुआत की थी।

Q144. निम्नलिखित सम्प्रदायों में से कौन सा एक शैव सम्प्रदाय नहीं है ?
(a) पाशुपत
(b) कापालिक
(c) लिंगायत
(d) वैभाषिक

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Answer – (d)

व्याख्या: वैभाषिक बौद्ध धर्म की हीनयान शाखा से संबंधित एक प्रमुख दार्शनिक संप्रदाय है, जिसका विकास मुख्य रूप से कश्मीर में हुआ था। इसके विपरीत, पाशुपत (जिसके प्रवर्तक लकुलीश थे), कापालिक (जो भैरव को अपना आराध्य मानते थे) और लिंगायत (या वीरशैव, जिसके प्रवर्तक अल्लभ प्रभु और बसवेश्वर थे) ये तीनों भगवान शिव की उपासना करने वाले सुप्रसिद्ध शैव संप्रदाय हैं।

Q145. सूची-I को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर को चुनिए :
सूची-I(ग्रन्थ)               –         सूची-II(रचनाकार)

A. चतुर्वर्ग चिन्तामणि      –           1. हेमाद्रि
B. विवाद चिन्तामणि       –           2. वाचस्पति मिश्र
C. स्मृति विवेक              –           3. शूलपाणि
D. वीरकम्पराय चरितम्    –           4. गंगा देवी
कूट :
A B C D
(a) 1 2 3 4
(b) 2 1 4 3
(c) 3 2 1 4
(d) 4 3 2 1

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Answer – (a)

व्याख्या: प्राचीन और मध्यकालीन साहित्यिक ग्रंथों व उनके रचनाकारों का सही मिलान इस प्रकार है:
A. चतुर्वर्ग चिन्तामणि — 1. हेमाद्रि (ये देवगिरि के यादव राजाओं के दरबार में मंत्री और प्रकांड विद्वान थे)
B. विवाद चिन्तामणि — 2. वाचस्पति मिश्र (मिथिला के सुप्रसिद्ध न्यायशास्त्र और स्मृति ग्रंथकार)
C. स्मृति विवेक — 3. शूलपाणि (बंगाल के प्रसिद्ध धर्मशास्त्री और लेखक)
D. वीरकम्पराय चरितम् — 4. गंगा देवी (विजयनगर साम्राज्य के कुमार कंपन की पत्नी, जिन्होंने अपने पति की मदुरै विजय का संस्कृत महाकाव्य में वर्णन किया है। इसे ‘मदुरा विजयम’ भी कहते हैं)
अतः सही अनुक्रम 1, 2, 3, 4 यानी विकल्प (a) है।

Q146. परमार शासक भोज द्वारा लिखित महत्त्वपूर्ण ग्रन्थों पर विचार कीजिए। इन कथनों में से कौन सा/से सत्य है/हैं ?
1. ‘समरांगण सूत्रधार’ प्राचीन भारतीय वास्तुशास्त्र से संबंधित ज्ञान कोशीय ग्रन्थ है ।

2. ‘सरस्वती कंठाभरण’ संगीत से संबंधित ग्रन्थ है ।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर दीजिए:
कूट :
(a) केवल 2 सही है ।

(b) न तो 1 और न ही 2 सही है।
(c) 1 और 2 दोनों सही हैं ।
(d) केवल 1 सही है।

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Answer – (d)

व्याख्या: धारा नगरी के राजा भोज (परमार वंश) इतिहास में अपनी विद्वत्ता के लिए विख्यात थे। उनके ग्रंथों का विश्लेषण इस प्रकार है:

‘समरांगण सूत्रधार’ राजा भोज द्वारा लिखित वास्तुशास्त्र (Architecture), नगर नियोजन और यंत्र-विज्ञान से संबंधित एक अत्यंत प्रसिद्ध ज्ञानकोशीय (Encyclopedic) ग्रंथ है। (कथन 1 बिल्कुल सही है)

‘सरस्वती कंठाभरण’ संगीत का नहीं, बल्कि काव्यशास्त्र और व्याकरण (Rhetoric & Grammar) से संबंधित एक अत्यंत विख्यात ग्रंथ है। (अतः कथन 2 गलत है)

Q147. मुक्तापीड ललितादित्य निम्न में से किस वंश से सम्बन्धित था ?
(a) कदम्ब

(b) लोहर
(c) कार्कोट
(d) उत्पल

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Answer – (c)

व्याख्या: ललितादित्य मुक्तापीड (724-760 ई.) कश्मीर के कार्कोट राजवंश के सबसे शक्तिशाली और पराक्रमी सम्राट थे। उन्हें “कश्मीर का सिकंदर” भी कहा जाता है, क्योंकि उन्होंने तिब्बत, लद्दाख और मध्य एशिया से लेकर भारत के बड़े हिस्से (कन्नौज के राजा यशोवर्मन को हराकर) पर विजय प्राप्त की थी। उन्होंने ही कश्मीर के विश्वप्रसिद्ध मार्तंड सूर्य मंदिर का निर्माण करवाया था।

Q148 ‘ब्रह्मसूत्र’ की रचना निम्न में से किसने की थी ?
(a) शंकराचार्य

(b) बादरायण
(c) रामानुज
(d) माध्वाचार्य

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Answer – (b)

व्याख्या: वेदान्त दर्शन (Vedanta Philosophy) के मूल आधार स्तंभ ग्रंथ ‘ब्रह्मसूत्र’ (जिसे वेदान्त सूत्र भी कहा जाता है) की रचना महर्षि बादरायण ने की थी। इस ग्रंथ में उपनिषदों के दार्शनिक सिद्धांतों को संक्षिप्त सूत्रों में पिरोया गया है। आगे चलकर आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और मध्वाचार्य जैसे महान दार्शनिकों ने इसी ब्रह्मसूत्र पर अपने-अपने प्रसिद्ध भाष्य (Commentaries) लिखे थे।

Q149. ‘मिलिन्दपन्हों’ किस भाषा में लिपिबद्ध किया गया था ?
(a) पालि

(b) प्राकृत
(c) संस्कृत
(d) अपभ्रंश

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Answer – (a)

व्याख्या: ‘मिलिन्दपन्हों’ (जिसका अर्थ है – ‘मिलिन्द के प्रश्न’) एक अत्यंत प्रसिद्ध बौद्ध ग्रंथ है। इसमें यूनानी (इण्डो-ग्रीक) राजा मिनाण्डर (मिलिन्द) और बौद्ध भिक्षु नागसेन के बीच हुए गहन दार्शनिक संवाद का संग्रह है। बौद्ध धर्म के सिद्धांतों को सरल रूप में समझाने वाला यह ग्रंथ मूल रूप से पालि भाषा में लिखा गया था। इस संवाद के बाद राजा मिनाण्डर ने बौद्ध धर्म अपना लिया था।

Q150. समुद्रगुप्त द्वारा पराजित किये गये राजाओं में निम्नलिखित में से कौन सा राजा आर्यावर्त का नहीं है ?
(a) रुद्रदेव

(b) नागदत्त
(c) बलवर्मा
(d) व्याघ्रराज

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Answer – (d)

व्याख्या: प्रयाग प्रशस्ति के अनुसार, गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त ने उत्तर भारत (आर्यावर्त) और दक्षिण भारत (दक्षिणापथ) के लिए दो अलग-अलग नीतियां अपनाई थीं:

  • रुद्रदेव, नागदत्त और बलवर्मा आर्यावर्त (उत्तर भारत) के राजा थे, जिनका समुद्रगुप्त ने ‘प्रसभोद्धरण’ (समूल नाश) कर उनके राज्यों को सीधे गुप्त साम्राज्य में मिला लिया था।
  • इसके विपरीत, व्याघ्रराज महाकांतार (मध्य भारत/उड़ीसा-मप्र की सीमा का वनाच्छादित क्षेत्र) के राजा थे, जो दक्षिणापथ (दक्षिण भारत) के राजाओं की सूची में आते हैं। समुद्रगुप्त ने उनके प्रति ‘ग्रहण-मोक्षानुग्रह’ (जीतकर मुक्त करने) की नीति अपनाई थी।

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