UKPSC Lecturer Exam - Paper I -Hindi - 30 May 2026 (Answer Key)

UKPSC Lecturer Exam – Paper I (Hindi) – 30 May 2026 (Answer Key)

May 31, 2026

Q81. ‘बीसलदेव रासो’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह पाँच खण्डों में विभाजित है।

II. इसके तीसरे खण्ड में राजमती का विरह-वर्णन है ।
III. चौथे खंड में भोजराज का अपनी पुत्री को मालवा ले जाना वर्णित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-कौन से सही हैं ?
(a) केवल I और III

(b) केवल I और II
(c) I, II और III सभी
(d) केवल II और III

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Answer – (D)

व्याख्या: नरपति नाल्ह द्वारा रचित ‘बीसलदेव रासो’ आदिकाल की एक श्रेष्ठ श्रृंगारिक रचना है। इसके संदर्भ में तथ्यों का विश्लेषण इस प्रकार है:

कथन I गलत है: यह ग्रंथ पाँच खंडों में नहीं, बल्कि चार खंडों में विभाजित है।

कथन II सही है: इसके तीसरे खंड में राजा बीसलदेव के उड़ीसा चले जाने पर रानी राजमती के बारहमासा विरह का मर्मस्पर्शी वर्णन है।

कथन III सही है: इसके चौथे खंड में राजमती के पिता मालवा के राजा भोजराज द्वारा अपनी पुत्री को वापस मालवा ले जाने और अंत में बीसलदेव के वहाँ जाकर राजमती को पुनः चित्तौड़ लाने का वृत्तांत है। (नोट: खंड-1 में विवाह और खंड-2 में राजा का उड़ीसा प्रस्थान वर्णित है)।

Q82. ‘सन्देश रासक’ किसकी रचना है ?
(a) अमीर खुसरो की

(b) अब्दुल रहमान की
(c) अब्दुर्रहीम खानखाना की
(d) विजयदेव सूरि की

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Answer – (B)

व्याख्या: ‘सन्देश रासक’ 12वीं-13वीं शताब्दी के जैनतर कवि अब्दुल रहमान (अद्दहमाण) द्वारा रचित एक अत्यंत प्रसिद्ध अपभ्रंश काव्य है। यह हिंदी साहित्य का पहला ‘विरह काव्य’ माना जाता है, जिसमें विक्रमपुर की एक विरहिणी के विरह की कथा कही गई है। किसी भी मुस्लिम कवि द्वारा हिंदी/अपभ्रंश में लिखा गया यह पहला ग्रंथ है।

Q83. निम्नलिखित विद्वानों और उनके द्वारा दिए गए गोरखनाथ के समय को सुमेलित कीजिए :
A. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल         –        I. 11वीं शती

B. पीतांबरदत्त बड़थ्वाल          –        II. 13वीं शती
C. राहुल सांकृत्यायन            –        III. 9वीं शती
D. आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी –        IV. 845 ई.
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर का चयन कीजिए:
A B C D
(a) III, IV, II, I

(b) II, I, IV, III
(c) I, III, III, IV
(d) IV, III, II, I

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Answer – (B)

व्याख्या: नाथ पंथ के प्रणेता गोरखनाथ के समय को लेकर विद्वानों में काफी मतभेद हैं, जिनका सही सुमेलन इस प्रकार है:

  1. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल — II. 13वीं शती
  2. पीतांबरदत्त बड़थ्वाल — I. 11वीं शती
  3. राहुल सांकृत्यायन — IV. 845 ई. (9वीं शती का पूर्वार्द्ध)
  4. आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी — III. 9वीं शती

अतः सही कूट A-II, B-I, C-IV, D-III के संयोजन से विकल्प (b) सत्य है।

Q84. नीचे दिए गए विकल्पों में से उचित विकल्प को चुनकर रिक्त स्थान की पूर्ति कीजिए :
________ और महाराज पृथ्वीराज चौहान का जन्म एक ही दिन हुआ था और दोनों ने एक ही दिन यह संसार भी छोड़ा।
(a) नरपति नाल्ह

(b) अमीर खुसरो
(c) विद्यापति
(d) चन्दबरदाई

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Answer – (D)

व्याख्या: हिंदी के प्रथम महाकवि चन्दबरदाई और महाराज पृथ्वीराज चौहान के विषय में यह उक्ति अत्यंत प्रसिद्ध है कि दोनों का जन्म एक ही दिन हुआ था और दोनों की मृत्यु भी एक ही दिन (गजनी में) हुई थी। इसी संदर्भ में यह पंक्ति भी प्रसिद्ध है: “एक थाल जनम, एक थाल मरन।”

Q85. ‘भविसयत्त कहा’ किसकी रचना है ?
(a) स्वयंभू की

(b) धनपाल की
(c) हेमचन्द्र की
(d) मुनि जिन विजय की

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Answer – (B)

व्याख्या: ‘भविसयत्त कहा’ (भविष्यदत्त कथा) 10वीं शताब्दी के अपभ्रंश के प्रसिद्ध कवि धनपाल की अनूठी रचना है। यह एक लोक-कथा पर आधारित प्रबंध काव्य है, जिसमें एक साधारण व्यापारी भविष्यदत्त के चरित्र और उसके संघर्षों के माध्यम से नैतिक व धार्मिक उपदेश दिए गए हैं। डॉ. याकोबी ने इसे ‘रोमांटिक महाकाव्य’ कहा है।

Q86. “आध्यात्मिक रंग के चश्मे आजकल बहुत सस्ते हो गए हैं। उन्हें चढ़ाकर जैसे कुछ लोगों ने ‘गीत गोविंद’ के पदों को आध्यात्मिक संकेत बताया है, वैसे ही विद्यापति के इन पदों को भी। सूर आदि कृष्णभक्तों के भंगारी पदों की भी ऐसे लोग आध्यात्मिक व्याख्या चाहते हैं।”
उपर्युक्त कथन किसका है ?
(a) बाबू श्यामसुंदर दास का

(b) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का
(c) हजारीप्रसाद द्विवेदी का
(d) पीताम्बरदत्त बड़थ्वाल का

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Answer – (B)

व्याख्या: यह हिंदी आलोचना इतिहास की सबसे प्रसिद्ध पंक्तियों में से एक है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने इतिहास ग्रंथ में विद्यापति की कविताओं की समीक्षा करते हुए उन विद्वानों पर तीखा व्यंग्य किया था जो विद्यापति की विशुद्ध श्रृंगारिक और कामुक पंक्तियों को रहस्यवादी या आध्यात्मिक मान रहे थे। शुक्ल जी का स्पष्ट मत था कि विद्यापति मूलतः श्रृंगार के कवि हैं।

Q87. निम्नलिखित कवियों और उनकी रचनाओं को सुमेलित कीजिए :
कवि                             –          रचनाएँ
A. जगनिक               –        I. खुमानरासो

B. नरपति नाल्ह         –        II. बीसलदेव रासो
C. दलपति विजय       –        III. परमाल रासो
D. भट्ट केदार             –        IV. जयचन्द्र प्रकाश
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करते हुए सही विकल्प चुनिए :
A B C D
(a) III, II, I, IV

(b) I, II, III, IV
(c) II, I, III, IV
(d) IV, I, II, III

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Answer – (A)

व्याख्या: आदिकालीन वीरगाथा काव्यों और उनके रचयिताओं का सही मिलान इस प्रकार है:

  1. जगनिक — III. परमाल रासो (जिसका एक अंश ‘आल्हाखंड’ लोक में बहुत प्रसिद्ध है)
  2. नरपति नाल्ह — II. बीसलदेव रासो
  3. दलपति विजय — I. खुमानरासो
  4. भट्ट केदार — IV. जयचन्द्र प्रकाश

इस मिलान के अनुसार कूट का सही अनुक्रम A-III, B-II, C-I, D-IV बनता है, जो विकल्प (a) में है।

Q88. ‘गोरखनाथ’ के गुरु कौन थे ?
(a) मत्स्येन्द्र नाथ

(b) उपेन्द्र नाथ
(c) जितेन्द्र नाथ
(d) सत्येन्द्र नाथ

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Answer – (A)

व्याख्या: नाथ संप्रदाय के आरंभकर्ता और प्रसिद्ध योगी गोरखनाथ के गुरु मत्स्येन्द्रनाथ (मछंदरनाथ) थे। मत्स्येन्द्रनाथ पहले बौद्ध धर्म के सहजयान (वज्रयान) शाखा से जुड़े थे, बाद में इन्होंने योग मार्ग चलाया। इन्हें चौरासी सिद्धों और नवनाथों दोनों में गिना जाता है।

Q89. निम्नलिखित में से किन-किन कवियों ने नीति-काव्य लिखे हैं?
I. लाल कवि

II. गिरधर कविराय
III. वृंद
IV. सूदन
V. मुबारक
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) केवल I, II और III ने

(b) केवल II और III ने
(c) केवल II, III और IV ने
(d) केवल II, III, IV और V ने

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Answer – (B)

व्याख्या: हिंदी साहित्य (विशेषकर रीतिकाल) में सूक्तियों और कुंडलियों के माध्यम से समाज को व्यावहारिक ज्ञान देने वाले विशुद्ध नीति-कवियों में गिरधर कविराय और वृंद का नाम सर्वोपरि है।

गिरधर कविराय की ‘कुंडलियाँ’ और वृंद का ‘वृंद सतसई’ नीति काव्य के उत्कृष्ट उदाहरण हैं।

जबकि लाल कवि ने वीर रस प्रधान ‘छत्रप्रकाश’ लिखा, सूदन ने ‘सुजान चरित’ (वीर काव्य) लिखा, और मुबारक श्रृंगारिक कवि थे। अतः केवल II और III सही होने से विकल्प (b) सही है।

Q90. ‘जसहर चरिउ’ निम्नलिखित में से किसकी रचना है ?
(a) पुष्पदन्त की

(b) लुईपा की
(c) स्वयंभू की
(d) अब्दुर्रहमान की

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Answer – (A)

व्याख्या: ‘जसहर चरिउ’ (यशोधर चरित) 10वीं शताब्दी के अपभ्रंश के महाकवि पुष्पदन्त द्वारा रचित एक महत्वपूर्ण काव्य ग्रंथ है। इसमें राजा यशोधर के जीवन और उनके जन्म-जन्मांतर के दुखों तथा अंत में जैन धर्म की दीक्षा लेने का धार्मिक वर्णन मिलता है। पुष्पदंत की अन्य विख्यात रचनाओं में ‘महापुराण’ और ‘णायकुमार चरिउ’ (नागकुमार चरित) शामिल हैं।

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