UKPSC Lecturer Exam - Paper I -Hindi - 30 May 2026 (Answer Key)

UKPSC Lecturer Exam – Paper I (Hindi) – 30 May 2026 (Answer Key)

May 31, 2026

Q131. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने रीतिकाल का आरंभ किस कवि से माना है ?
(a) केशवदास से

(b) कुलपति मिश्र से
(c) चिंतामणि त्रिपाठी से
(d) सेनापति से

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Answer – (C)

व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने ‘हिंदी साहित्य का इतिहास’ में स्पष्ट रूप से लिखा है कि यद्यपि कालक्रम के अनुसार केशवदास (1555 ई.) पहले आते हैं, किंतु रीतिकाल की अखंड परंपरा चलाने और लक्षण-ग्रंथों की परिपाटी की दृष्टि से रीतिकाल का वास्तविक आरंभ चिंतामणि त्रिपाठी (1643 ई.) से मानना चाहिए। केशवदास को शुक्ल जी ने ‘कठिन काव्य का प्रेत’ कहा है और उन्हें भक्ति काल के अंतर्गत स्थान दिया है।

Q132. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. रीतिकाल का खड़ी बोली गद्य प्रायः मिश्रित भाषा में है ।

II. रीतिकाल में निर्मित खड़ी बोली गद्य अधिकांशतः टीकानुवादों में है।
III. ब्रजभाषा के सम्पर्क से मुक्त शुद्ध गद्य उन्नीसवीं सदी से पूर्व नहीं मिलता ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-कौन से सही हैं ?
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) केवल I और II

(b) केवल II और III
(c) केवल I और III
(d) I, II, III सभी

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Answer – (D)

व्याख्या: आधुनिक काल से पहले (विशेषकर रीतिकाल में) खड़ी बोली गद्य की स्थिति के संदर्भ में तीनों ही कथन सत्य हैं:

कथन I सत्य है: इस काल का खड़ी बोली गद्य शुद्ध नहीं था, वह ब्रजभाषा, राजस्थानी, फारसी और पंजाबी के शब्दों से बुरी तरह मिश्रित था।

कथन II सत्य है: रीतिकाल में खड़ी बोली गद्य का प्रयोग स्वतंत्र रचनाओं में कम, बल्कि संस्कृत या ब्रजभाषा के ग्रंथों के ‘टीकानुवाद’ (टीका और अनुवाद लिखने) में अधिक हुआ।

कथन III सत्य है: ब्रजभाषा और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं के प्रभाव से मुक्त एकदम खड़ी बोली का परिष्कृत और शुद्ध रूप 19वीं सदी (भारतेन्दु युग और उससे ठीक पहले) से पूर्व देखने को नहीं मिलता।

Q133. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. रीतिमुक्त काव्य में प्रेम की उदात्तता है।

II. रीतिमुक्त काव्य का उद्देश्य काव्य की शिक्षा देना है
III. रीतिमुक्त कवि वेदना को प्रेमी रूप में अपना भाग्य समझता है ।
उपर्युक्त में से कौन-सा /से कथन सही है/हैं ?
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) केवल II और III

(b) केवल III
(c) केवल I और II
(b) केवल I और III

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Answer – (B)

व्याख्या: घनानंद, बोधा, आलम और ठाकुर जैसे ‘रीतिमुक्त’ (स्वच्छंद) कवियों के काव्य की निम्नलिखित विशेषताएँ हैं:

कथन I सही है: रीतिमुक्त काव्य में शास्त्रीय बंधनों से परे प्रेम की अत्यंत पवित्र, गंभीर और उदात्त (ऊंची) अभिव्यक्ति है।

कथन II गलत है: रीतिमुक्त कवियों का उद्देश्य कभी भी किसी को ‘काव्य की शिक्षा देना’ या लक्षण ग्रंथ लिखना नहीं था। वे अपनी आत्मा की पुकार पर लिखते थे (जैसा घनानंद ने कहा: “लोग हैं लागी कवित्त बनावत, मोहि तो मोर कवित्त बनावत”)।

कथन III सही है: रीतिमुक्त कवि विरह की वेदना या दुःख से भागते नहीं हैं, बल्कि उसे अपने प्रेम का भाग्य और आभूषण समझकर सहर्ष स्वीकार करते हैं।

Q134. ‘रसरंग’ किसकी रचना है ?
(a) पजनेस की

(b) ग्वाल की
(c) तोषनिधि की
(d) ध्रुवदास की

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Answer – (B)

व्याख्या: ‘रसरंग’ रीतिकाल के अंतिम प्रसिद्ध रीतिबद्ध कवि ग्वाल कवि (नाभाजी के समकालीन) की रचना है। ग्वाल कवि रसिकता और भाषा के चमत्कार के लिए जाने जाते हैं। इनकी अन्य प्रसिद्ध रचनाओं में ‘यमुनालहरी’, ‘भक्तभावन’ और ‘कविहृदयाभरण’ शामिल हैं।

Q135. निम्नलिखित में से कौन-सा कवि अपने ‘भैड़ीवों’ के लिए प्रसिद्ध था ?
(a) करन कवि

(b) ग्वाल कवि
(c) बेनी बंदीजन
(d) बेनी प्रवीन

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Answer – (C)

व्याख्या: रीतिकाल के कवि बेनी बंदीजन (जो भड़ौआ या ‘भैड़ीवों’ विधा के लिए विख्यात थे) अपनी व्यंग्यात्मक और हास्य प्रधान कविताओं के लिए जाने जाते थे। ‘भड़ौआ’ (भैड़ीवों) एक ऐसी काव्य शैली थी जिसमें किसी व्यक्ति या सामाजिक कुरीति पर अत्यंत तीखा, अश्लील या हास्यप्रद व्यंग्य (पैरोडी) किया जाता था। इन्होंने ‘भड़ौआ संग्रह’ नाम से ग्रंथ भी लिखा।

Q136. आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने केशवदास पर ‘रामचन्द्रिका’ में निम्नलिखित में से किस रचना से कई स्थानों पर ज्योंका त्यों संवादों की नकल करने का आरोप लगाया है ?
(a) रामायण से

(b) हनुमन्नाटक से
(c) प्रसन्नराघव से
(d) रामचरितमानस से

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Answer – (B)

व्याख्या: आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी और अन्य समीक्षकों का मत है कि केशवदास ने अपनी प्रसिद्ध कृति ‘रामचंद्रिका’ (1601 ई.) को बहुत जल्दबाज़ी (कहा जाता है कि एक ही रात में) में लिखा था। इस कारण उन्होंने संस्कृत के प्रसिद्ध नाटक ‘हनुमन्नाटक’ और ‘प्रसन्नराघव’ के कई संवादों और श्लोकों का सीधे ब्रजभाषा में अनुवाद करके अपनी रचना में रख लिया।

Q137. ‘अभिधा उत्तम काव्य है; मध्य लक्षणा लीन।
अधम व्यंजना रस बिरस, उलटी कहत नवीन । ।’
उपर्युक्त पंक्तियाँ किसकी हैं ?
(a) देव की

(b) भूषण की
(c) केशवदास की
(d) मतिराम की

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Answer – (A)

व्याख्या: शब्द शक्तियों (अभिधा, लक्षणा और व्यंजना) के महत्व को प्रतिपादित करने वाली यह रीतिकाल की सबसे प्रसिद्ध पंक्तियों में से एक है, जिसके रचयिता महाकवि देव हैं। देव ने इस दोहे के माध्यम से ‘अभिधा’ शब्द शक्ति (सीधे और सरल अर्थ) को काव्य के लिए सबसे उत्तम माना है, जो कि सामान्यतः संस्कृत आचार्यों के मत से थोड़ा अलग दृष्टिकोण था।

Q138. निम्नलिखित कवियों को उनके आश्रयदाताओं के साथ सुमेलित कीजिए :
कवि                 –          आश्रयदाता
A. मतिराम      –        I. राजा प्रतापसिंह

B. कुलपति मिश्र –      II. राजा मंगलसिंह
C. मंडन          –        III. महाराजा रामसिंह
D. सोमनाथ     –        IV.महाराजा भावसिंह
नीचे दिए गए कूट से सही विकल्प चुनिए :
कूट :
A B C D
(a) III, I, II, IV

(b) IV, III, II, I
(c) I, IV, III, II
(d) IV, II, I, III

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Answer – (B)

व्याख्या: रीतिकालीन कवियों और उनके राजाओं/आश्रयदाताओं का सही सुमेलन इस प्रकार है:

  1. मतिराम — IV. महाराजा भावसिंह हाड़ा (बूँदी नरेश, जिनके आश्रय में इन्होंने ‘ललितललाम’ लिखा)
  2. कुलपति मिश्र — III. महाराजा रामसिंह (जयपुर, जिनके अनुरोध पर इन्होंने ‘रस रहस्य’ लिखा)
  3. मंडन — II. राजा मंगलसिंह
  4. सोमनाथ — I. राजा प्रतापसिंह (भरतपुर के महाराजा सूरजमल के पुत्र)

अतः कूट संयोजन A-IV, B-III, C-II, D-I विकल्प (b) में पूर्णतः सही है।

Q139. “अति सूधो सनेह को मारग है, जनैकु सयानप बाँक नहीं।”यह पंक्ति किस कवि की है ?
(a) कबीर की

(b) सूरदास की
(c) घनानंद की
(d) हरिऔध की

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Answer – (C)

व्याख्या: यह प्रेम की पीर के अमर गायक घनानंद का सबसे प्रसिद्ध सवैया है। इसमें वे प्रेम के सीधे और निष्कपट मार्ग का वर्णन करते हुए कहते हैं कि प्रेम का रास्ता अत्यंत सीधा और सरल है, यहाँ पर चतुराई या टेढ़ेपन (बाँक) की कोई जगह नहीं होती। यहाँ केवल वही चल सकता है जो अपने अहंकार को पूरी तरह त्याग देता है।

Q140. रचना और रचनाकार के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
रचना               –          रचनाकार
I. कोकसाग     –        घन आनंद

II.भाषाभूषण   –        भूषण
III. अपरोक्ष-सिद्धान्त –         महाराजा जसवंत सिंह
IV. द्रोणपर्व     –        कुलपति मिश्र
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सुमेलित हैं ?नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) केवल I एवं II

(b) केवल II एवं III
(c) केवल I, III एवं IV
(d) केवल I एवं IV

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Answer – (C)

व्याख्या: दिए गए युग्मों का विश्लेषण इस प्रकार है:
कोकसार — घनानंद (बिल्कुल सही है, यह इनकी प्रसिद्ध रीतिमुक्त रचना है)।
भाषाभूषण — भूषण (यह गलत है; ‘भाषाभूषण’ अलंकार ग्रंथ महाराजा जसवंत सिंह का है, जबकि महाकवि भूषण की रचनाएँ ‘शिवराज भूषण’ और ‘छत्रसाल दशक’ हैं)।
अपरोक्ष-सिद्धान्त — महाराजा जसवंत सिंह (बिल्कुल सही है, यह इनका वेदांत विषयक ग्रंथ है)।
द्रोणपर्व — कुलपति मिश्र (बिल्कुल सही है, इन्होंने महाभारत के द्रोणपर्व का अनुवाद किया था)।
इस प्रकार केवल I, III और IV सुमेलित होने के कारण विकल्प (c) सही उत्तर है।

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