UKPSC Lecturer Exam - Paper I -Hindi - 30 May 2026 (Answer Key)

UKPSC Lecturer Exam – Paper I (Hindi) – 30 May 2026 (Answer Key)

May 31, 2026

Q121. राम-भक्ति काव्य की दृष्टि से कवि और उनकी रचनाओं को सुमेलित कीजिए :
कवि                 –          रचना
A. ईश्वरदास    –        I. हनुमानबाहुक

B. केशवदास   –        II.भरतमिलाप
C. तुलसीदास –        III. रामचंद्रिका
D. विष्णुदास   –         IV. रामायण-कथा
नीचे दिए गए कूट से सही विकल्प चुनें:
A B C D
कूट :
(a) I, II, III, IV

(b) II, III, I, IV
(c) I, IV, II, III
(d) IV, III, II, I

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Answer – (B)

व्याख्या: रामकथा से संबंधित कवियों और उनकी कृतियों का सही सुमेलन इस प्रकार है:

  1. ईश्वरदास — II. भरतमिलाप (सत्यवती कथा के लेखक ईश्वरदास की यह एक प्रसिद्ध रामकथा संबंधी कृति है)
  2. केशवदास — III. रामचंद्रica (1601 ई. में रचित, जिसे ‘छंदों का अजायबघर’ कहा जाता है)
  3. तुलसीदास — I. हनुमानबाहुक (बाहु पीड़ा से मुक्ति के लिए रचित, जो कवितावली का ही एक हिस्सा मानी जाती है)
  4. विष्णुदास — IV. रामायण-कथा (ग्वालियर के राजा डूंगरेंद्र सिंह के आश्रय में 1442 ई. में रचित प्रारंभिक रामकथा)

अतः कूट अनुक्रम A-II, B-III, C-I, D-IV होने से विकल्प (b) सही है।

Q122. निम्नलिखित अष्टछाप के कवियों में से वल्लभाचार्य के शिष्य नहीं हैं :
(a) कृष्णदास

(b) सूरदास
(c) नन्ददास
(d) कुंभनदास

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Answer – (C)

व्याख्या: अष्टछाप (8 कवि) में चार शिष्य वल्लभाचार्य के थे और चार उनके पुत्र विट्ठलनाथ के थे। नंददास और छीतस्वामी, गोविंदस्वामी, चतुर्भुजदास गोसाईं विट्ठलनाथ के शिष्य थे, वल्लभाचार्य के नहीं। सूरदास, कुंभनदास, परमानंददास और कृष्णदास वल्लभाचार्य के शिष्य थे।

Q123. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने तुलसीदास के बड़े ग्रंथों की संख्या पाँच मानी है।
निम्नलिखित में से उनका चयन कीजिए :
I. रामचरितमानस

II. पार्वतीमंगल
III. जानकीमंगल
IV. विनयपत्रिका
V. कवित्त रामायण
VI. दोहावली
VII. गीतावली
नीचे दिये गये कूट से सही विकल्प चुनिए :
कूट :
(a) I, II, III, IV, V

(b) I, IV, V, VI, VII
(c) II, III, IV, V, VI
(d) I, II, III, V, VI

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Answer – (B)

व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने तुलसीदास की प्रामाणिक 12 रचनाओं में से 5 को बड़ा (महाकाव्य/विशाल ग्रंथ) और 7 को छोटा माना है। पाँच बड़े ग्रंथ इस प्रकार हैं:
रामचरितमानस (I)
विनयपत्रिका (IV)
कवित्त रामायण / कवितावली (V)
दोहावली (VI)
गीतावली (VII) (पार्वतीमंगल और जानकीमंगल छोटे ग्रंथों की श्रेणी में आते हैं)

अतः विकल्प (b) सही कूट है।

Q124. निम्नलिखित ग्रंथों को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए।
ग्रंथ                                          –          रचनाकार
A. कवि-कुल- कल्पतरु         –        I. भिखारीदास

B.ललितललाम                    –        II. चिंतामणि
C. भावविलास                     –        III. मतिराम
D. काव्यनिर्णय          –        IV. देवनीचे
दिए गए कूट से सही उत्तर का चुनाव कीजिए:
कूट :
A B C D

(a) IV, III, II, I
(b) III, II, I, IV
(c) II, III, IV, I
(d) II, III, I, IV

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Answer – (C)

व्याख्या: रीतिकालीन रीतिबद्ध काव्यांग-निरूपण ग्रंथों का सही मिलान इस प्रकार है:

  1. कवि-कुल-कल्पतरु — II. चिंतामणि (यह एक सर्वांग-निरूपक ग्रंथ है)
  2. ललितललाम — III. मतिराम (यह प्रसिद्ध अलंकार ग्रंथ है)
  3. भावविलास — IV. देव (महाकवि देव की प्रथम रचना)
  4. काव्यनिर्णय — I. भिखारीदास (काव्यशास्त्रीय सिद्धांतों का व्यावहारिक ग्रंथ)

इस मिलान के अनुसार कूट A-II, B-III, C-IV, D-I विकल्प (c) में स्थित है।

Q125. कबीरदास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. कवि के रूप में कबीर जीवन से बहुत दूर हैं।

II. कबीर का काव्य प्रतीकों से भरा पड़ा है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) कथन I एवं कथन II दोनों सही हैं।

(b) कथन I एवं कथन II दोनों गलत हैं।
(c) कथन I सही है, कथन II गलत है।
(d) कथन I गलत है, कथन II सही है।

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Answer – (D)

व्याख्या:

कथन I गलत है: कबीर जीवन से बहुत दूर नहीं हैं, बल्कि वे जीवन और समाज के सबसे नजदीक रहने वाले यथार्थवादी कवि हैं। उनकी कविता का सीधा सरोकार लोक-जीवन के व्यावहारिक पक्षों से है।

कथन II बिल्कुल सही है: कबीर का पूरा काव्य प्रतीकों (जैसे: झीनी-झीनी बीनी चदरिया, जल में कुंभ, कुंभ में जल है आदि) और रूपकों से भरा हुआ है, जिसके माध्यम से उन्होंने दार्शनिक बातें समझाई हैं।

Q126. बंशीधर ने किस ग्रंथ पर ‘अलंकार रत्नाकर’ नामक टीका लिखी थी ?
(a) प्रबोध चंद्रोदय पर

(b) काव्य-विवेक पर
(c) भाषाभूषण पर
(d) कवि-कुल- कल्पतरु पर

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Answer – (C)

व्याख्या: मारवाड़ के महाराज जसवंत सिंह द्वारा रचित प्रसिद्ध अलंकार ग्रंथ ‘भाषाभूषण’ पर कवि बंशीधर ने ‘अलंकार रत्नाकर’ नाम से एक विस्तृत और महत्वपूर्ण टीका लिखी थी, जो इस ग्रंथ को समझने के लिए अत्यंत सहायक सिद्ध हुई।

Q127. निम्नलिखित में से अलंकार निरूपक आचार्य नहीं है:
(a) जसवंत सिंह

(b) भूषण
(c) बेनी ‘प्रवीन’
(d) मतिराम

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Answer – (C)

व्याख्या: बेनी प्रवीन रीतिकाल के प्रमुख ‘रस निरूपक’ आचार्य हैं, जिन्होंने ‘नवरस तरंग’ नामक सुप्रसिद्ध रस-विवेचन ग्रंथ लिखा था, वे अलंकार निरूपक नहीं हैं।

Q128. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. बिहारी की रस-व्यंजना का पूर्ण वैभव उनके अनुभावों के विधान में दिखाई पड़ता है।

II. बिहारी की कविता शृंगारी है, पर प्रेम की उच्च भूमि पर नहीं पहुँचती, नीचे ही रह जाती है।
बिहारी के संबंध में शुक्लजी का / के कौन सा/से कथन सही है/हैं ?
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) कथन I एवं II दोनों सही हैं।

(b) कथन I एवं II दोनों गलत हैं।
(c) कथन I सही है, किन्तु कथन II गलत है ।
(d) कथन II सही है, किन्तु कथन I गलत है ।

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Answer – (A)

व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने ‘बिहारीलाल’ की समीक्षा करते हुए ये दोनों बातें कही हैं:

कथन I सही है: बिहारी ने भावों को प्रकट करने वाले ‘अनुभावों’ (जैसे आँखों के इशारे, चेष्टाएँ) का ऐसा बारीक ताना-बाना बुना है कि वह अद्भुत है। (उदा: “कहत, नटत, रीझत, खीझत…”)

कथन II भी सही है: शुक्ल जी ने मर्यादावादी आलोचक होने के नाते लिखा है कि बिहारी की कविता मुख्य रूप से शृंगारी और विलासी है, उसमें प्रेम का वह गहरा, उदात्त और आध्यात्मिक रूप नहीं मिलता जो घनानंद या सूफियों में मिलता है। इसलिए वह प्रेम की उच्च भूमि पर नहीं पहुँचती।

Q129. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. मतिराम ने भावसिंह के आश्रय में ‘ललितललाम’ की रचना की थी।

II. मतिराम का ‘छन्दसार’ ग्रंथ शंभुनाथ सोलंकी को समर्पित है।
III. ‘नैनपचासा’ मतिराम द्वारा रचित है।
मतिराम के संबंध में उपर्युक्त कथनों में से कौन-कौन से सही हैं ?
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) केवल I और III

(b) केवल I और II
(c) I, II और III सभी
(d) केवल II और III

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Answer – (B)

व्याख्या: महाकवि मतिराम के संदर्भ में तथ्यों का विश्लेषण इस प्रकार है:

कथन I सही है: मतिराम ने बूँदी के राजा भावसिंह हाड़ा के आश्रय में अपना सबसे प्रसिद्ध अलंकार ग्रंथ ‘ललितललाम’ लिखा था।

कथन II सही है: इनका ‘छन्दसार’ (जिसे वृत्तकौमुदी भी कहते हैं) छंद-शास्त्रीय ग्रंथ शंभुनाथ सोलंकी को समर्पित है।

कथन III गलत है: ‘नैनपचासा’ मतिराम की नहीं, बल्कि रीतिकाल के कवि नेवाज की रचना है। अतः केवल कथन I और II सही होने से विकल्प (b) सही उत्तर है।

Q130. ‘भाषायोगवासिष्ठ’ की भाषा क्या है ?
(a) राजस्थानी मिश्रित खड़ी बोली

(c) राजस्थानी – ब्रजभाषा प्रभावित खड़ी बोली
(b) पंजाबी – ब्रजभाषा मिश्रित खड़ी बोली
(d) ब्रजभाषा मिश्रित खड़ी बोली

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Answer – (C)

व्याख्या: रामप्रसाद निरंजनी द्वारा सन् 1741 ई. में रचित ‘भाषायोगवासिष्ठ’ को आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने “खड़ी बोली गद्य का पहला परिमार्जित ग्रंथ” माना है। चूँकि यह खड़ी बोली के विकास का शुरुआती दौर था, इसलिए इसकी खड़ी बोली पर राजस्थानी और ब्रजभाषा का स्पष्ट व्याकरणिक प्रभाव दिखाई देता है।

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