Q51. निम्नलिखित में से कौन-सा निबन्ध संग्रह वासुदेव शरण अग्रवाल का है? व्याख्या: ‘पृथिवी पुत्र’ वासुदेव शरण अग्रवाल का अत्यंत प्रसिद्ध निबंध संग्रह है। इनके अन्य प्रमुख निबंध संग्रहों में ‘कल्पवृक्ष’, ‘माता भूमि’, ‘कला और संस्कृति’ और ‘वाग्धारा’ शामिल हैं।
(a) पृथिवी पुत्र
(b) ठूंठा आम
(c) हमारी सांस्कृतिक एकता
(d) युग और साहित्य
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Q52. “अज्ञेय के संदर्भ में यह ‘मौन’ मित कथन है, कहने और कहने के बीच अन कहना है, तथा और गहरे स्तर पर आत्मदान का भाव है, जहाँ बोलना मानों आक्रमण है, मौन ही अपने को दे देता है ।” व्याख्या: हिंदी के मूर्धन्य आलोचक डॉ. रामस्वरूप चतुर्वेदी ने अपनी प्रसिद्ध आलोचनात्मक पुस्तक ‘हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास’ में अज्ञेय की काव्य-भाषा और उनकी जीवन-दृष्टि का विश्लेषण करते हुए यह बात कही थी। वे अज्ञेय के ‘मौन’ को एक सृजनात्मक अभिव्यक्ति और आत्मदान का भाव मानते हैं।
उपर्युक्त कथन किस आलोचक का है ?
(a) नामवर सिंह
(b) केदारनाथ सिंह
(c) रामस्वरूप चतुर्वेदी
(d) अशोक वाजपेयी
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Q53. निम्नलिखित में से सुमेलित युग्मों पर विचार कीजिए: व्याख्या: दिए गए सभी उपन्यास और उनके उपन्यासकार पूरी तरह सुमेलित हैं:
उपन्यास – उपन्यासकार
I. क्याप – मनोहर श्याम जोशी
II. दौड़ – ममता कालिया
III. पंख वाली नांव – पंकज बिष्ट
IV. पटरंग – मृणाल पाण्डेय
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) केवल I और II सही हैं।
(b) केवल II और III सही हैं।
(c) केवल III और IV सही हैं।
(d) I, II, III और IV चारों सही हैं।
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I. क्याप — मनोहर श्याम जोशी (इस उपन्यास के लिए इन्हें 2005 में साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला)।
II. दौड़ — ममता कालिया (महानगरीय जीवन और अंधी दौड़ पर आधारित चर्चित उपन्यास)।
III. पंख वाली नांव — पंकज बिष्ट (समकालीन कथाकार पंकज बिष्ट का महत्वपूर्ण उपन्यास)।
IV. पटरंग — मृणाल पाण्डेय (स्त्री जीवन और पारिवारिक ताने-बाने पर लिखा गया उपन्यास)।
Q54. निम्नलिखित में से किस कहानीकार का संबंध ‘सचेतन कहानी’ आन्दोलन से नहीं था ? व्याख्या: ‘सचेतन कहानी’ आंदोलन का प्रारंभ डॉ. महीप सिंह के संपादन में प्रकाशित ‘आधार’ पत्रिका के ‘सचेतन कहानी विशेषांक’ (1964) से माना जाता है। इस आंदोलन से महीप सिंह, गिरिराज किशोर, हिमांशु जोशी और गंगाप्रसाद विमल जैसे लेखक गहराई से जुड़े थे।
(a) गिरिराज किशोर
(b) हिमांशु जोशी
(c) कृष्ण बलदेव वैद
(d) गंगाप्रसाद विमल
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Q55. कवि – काव्य पंक्तियाँ व्याख्या: कवियों और उनकी पंक्तियों का सही मिलान इस प्रकार है:
A. भवानीप्रसाद मिश्र – I. राजा चुपके से काटता है चक्कर रात में नये नये भेष में अलग अलग घात में
B. अरुण कमल – II. जिस तरह हम बोलते हैं, उस तरह तू लिख
C. नरेश मेहता – III. राजा के सर पर हैं कितने सींग, हवाएँ बोलेंगी एक दिन
D. राजेश जोशी – IV. कागा बोले मोर अटरिया / इस पाहुनबेला में तूने, चौमासा क्यों किया पिया ?
उपर्युक्त काव्य पंक्तियों को उनके कवि के साथ सुमेलित कीजिए और निम्नलिखित उत्तर विकल्पों में से सही उत्तर विकल्प का चयन कीजिए:
A B C D
(a) II, I, IV, III
(b) II, III, IV, I
(c) II, III, I, IV
(d) III, I, II, IV
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भवानीप्रसाद मिश्र — II. जिस तरह हम बोलते हैं, उस तरह तू लिख (उनकी विख्यात कविता ‘कवि और कविता’ से)।
अरुण कमल — I. राजा चुपके से काटता है चक्कर रात में नये नये भेष में… (इनकी प्रसिद्ध राजनैतिक-सामाजिक व्यंग्य कविता)।
नरेश मेहता — IV. कागा बोले मोर अटरिया / इस पाहुनबेला में तूने, चौमासा क्यों किया पिया? (प्रकृति और लोक संवेदना से जुड़ी पंक्ति)।
राजेश जोशी — III. राजा के सर पर हैं कितने सींग, हवाएँ बोलेंगी एक दिन (उनकी तीखी प्रतिरोधी कविता की पंक्ति)।
अतः सही अनुक्रम A-II, B-I, C-IV, D-III के अनुसार विकल्प (a) सत्य है।
Q56. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: व्याख्या: कथन I बिल्कुल सही है: यह आचार्य रामचंद्र शुक्ल के निबंध ‘कविता क्या है’ की मूल आत्मा है। कविता मनुष्य को उसके संकुचित स्वार्थों से ऊपर उठाकर समष्टि (लोक) से जोड़ती है। कथन II गलत है: शुक्ल जी के अनुसार, ज्यों-ज्यों सभ्यता बढ़ती जाएगी, कृत्रिमता बढ़ेगी, जिससे मनुष्य के हृदय और प्रकृति के बीच की दूरी बढ़ेगी। ऐसे में हृदय को सजीव रखने के लिए कविता की आवश्यकता और अधिक बढ़ती जाएगी, न कि कम होगी। साथ ही, जटिल वातावरण के कारण कवि-कर्म मुश्किल होता जाएगा, आसान नहीं।
कथन I. : कविता ही मनुष्य के हृदय को स्वार्थ- संबंधों के संकुचित मण्डल से ऊपर उठाकर लोक-सामान्य भाव-भूमि पर ले जाती है।
II. : ज्यों-ज्यों हमारी वृत्तियों पर सभ्यता के नये-नये आवरण चढ़ते जाएँगे त्यों-त्यों कविता की आवश्यकता कम होती जाएगी और दूसरी ओर कवि – कर्म आसान होता जाएगा ।
उपर्युक्त कथनों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सही है ?
(a) कथन I और कथन II दोनों सही हैं तथा कथन II कथन I की सही व्याख्या करता है ।
(b) कथन I और कथन II दोनों सही हैं, किन्तु कथन II कथन I की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) कथन I सही है, किन्तु कथन II गलत है ।
(d) कथन I सही नहीं है, किन्तु कथन II सही है ।
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Q57. प्रकाशन वर्ष के अनुसार निम्नलिखित संस्मरणों का कौन-सा अनुक्रम सही है ? व्याख्या: इन संस्मरण विधा की कृतियों का कालक्रम इस प्रकार है: अतः सही ऐतिहासिक कालानुक्रम विकल्प (d) है।
(a) के साथ, वे दिन वे लोग, ज्यादा अपनी कम परायी, जिनके साथ जिया
(b) वे दिन वे लोग, पथ के साथी, जिनके साथ जिया, ज्यादा अपनी कम परायी
(c) वे दिन वे लोग, पथ के साथी, ज्यादा अपनी कम परायी, जिनके साथ जिया
(d) पथ के साथी, ज्यादा अपनी कम परायी, वे दिन वे लोग, जिनके साथ जिया
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‘पथ के साथी’ (महादेवी वर्मा) — 1956 ई.
‘ज्यादा अपनी कम परायी’ (उपेन्द्रनाथ अश्क) — 1959 ई.
‘वे दिन वे लोग’ (शिवपूजन सहाय) — 1965 ई.
‘जिनके साथ जिया’ (अमृतलाल नागर) — 1973 ई.
Q58. बंगाल के अकाल पर केन्द्रित रिपोर्ताज है-
(a) खून के छींटे
(b) त्रण बोले कण मुस्काएं
(c) तूफानों के बीच
(d) लक्ष्मीपुरा
व्याख्या: रांगेय राघव द्वारा रचित ‘तूफानों के बीच’ (1946) रिपोर्ताज हिंदी साहित्य में रिपोर्ताज विधा का एक मील का पत्थर है। लेखक ने बंगाल के भीषण अकाल और महामारी के दौरान वहाँ का दौरा किया था और भुखमरी से मरते लोगों की कारुणिक व जीवंत स्थिति का इसमें वर्णन किया था।Show Answer/Hide
Q59. निबंधकार महावीर प्रसाद द्विवेदी के विषय में निम्नलिखित में से कौन सा/से कथन सही है/हैं ?
I. महावीर प्रसाद द्विवेदी औपचारिक की जगह अनौपचारिक निबन्ध लेखन में ज्यादा प्रवृत्त थे ।
II. इन्होंने ‘हंस का नीर-क्षीर विवेक’ शीर्षक से अनौपचारिक निबंधों का लेखन किया ।
III. इन्होंने ‘जिज्ञासु’ छद्म नाम से भी निबन्ध लेखन किया ।
IV. निबन्ध-लेखन के कारण इन्हें ‘भाषा का जादूगर’ भी कहा जाता है।
(a) केवल I, II और III सही हैं।
(b) केवल I, II और IV सही हैं।
(c) केवल II और III सही हैं।
(d) केवल I और II सही हैं।
व्याख्या: कथन II और III बिल्कुल सही हैं: महावीर प्रसाद द्विवेदी जी ने ‘सरस्वती’ पत्रिका में ‘जिज्ञासु’ और ‘सुकवि किंकर’ जैसे विभिन्न छद्म नामों से भी निबंध लिखे। उन्होंने ‘हंस का नीर-क्षीर विवेक’ जैसी साहित्यिक टिप्पणियों और अनौपचारिक/गंभीर निबंधों की रचना की। कथन I गलत है: द्विवेदी जी अनौपचारिक नहीं, बल्कि वैचारिक, विचारात्मक और औपचारिक निबंध (जैसे ‘कवि और कविता’, ‘प्रतिभा’) लिखने में अधिक प्रवृत्त थे। कथन IV गलत है: हिंदी साहित्य में ‘भाषा का जादूगर’ आचार्य शिवपूजन सहाय को कहा जाता है, महावीर प्रसाद द्विवेदी को नहीं।Show Answer/Hide
Q60. श्रीधर पाठक ने ‘श्रांत पथिक’ की रचना किस छंद में की है ? व्याख्या: द्विवेदी युग के स्वच्छंदतावादी कवि श्रीधर पाठक ने प्रसिद्ध अंग्रेजी कवि गोल्डस्मिथ की रचना ‘द हरमिट’ (The Hermit) का खड़ी बोली में ‘श्रांत पथिक’ नाम से पद्यानुवाद किया था। इस लंबी कविता की रचना उन्होंने लोक-धुन और लोक-छंद ‘लावनी’ (या रोला-लावनी मिश्रित छंद) में की थी, जिससे खड़ी बोली में एक अद्भुत लय और प्रवाह पैदा हुआ।
(a) रोला
(b) लावनी
(c) सवैया
(d) कवित्त
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