Q71. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने वीरगाथा काल के अन्तर्गत साहित्यिक पुस्तकों में किसे नहीं रखा है ? व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने इतिहास ग्रंथ में आदिकाल (वीरगाथा काल) के अंतर्गत जिन 12 पुस्तकों के आधार पर नामकरण किया था, उन्हें दो वर्गों में विभाजित किया था: अपभ्रंश की पुस्तकें (4): विजयपाल रासो, हम्मीर रासो, कीर्तिलता, कीर्तिपताका। देशभाषा काव्य की पुस्तकें (8): खुमान रासो, बीसलदेव रासो, पृथ्वीराज रासो, जयचंद्र प्रकाश, जयमयंक जस-चंद्रिका, परमाल रासो (आल्हा का मूल रूप), खुसरो की पहेलियाँ और विद्यापति पदावली। चूँकि ‘खुमान रासो’ को शुक्ल जी ने देशभाषा काव्य के अंतर्गत रखा था न कि अपभ्रंश या विशुद्ध साहित्यिक भाषा की पुस्तकों में, इसलिए विकल्प (b) सही उत्तर है।
(a) विजयपाल रासो को
(b) खुमान रासो को
(c) कीर्तिलता को
(d) कीर्ति पताका को
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Q72. आचार्य रामचन्द्र शुक्ल ने निम्न में से किन आधारों पर सिद्धों और योगियों की रचनाओं को शुद्ध साहित्य की कोटि में शामिल नहीं किया ? व्याख्या: आचार्य शुक्ल जी ने सिद्धों (सरहपा आदि) और नाथ योगियों (गोरखनाथ आदि) की बानियों को ‘शुद्ध साहित्य’ न मानकर धार्मिक या सांप्रदायिक उपदेश माना है। इसके पीछे उनके दो मुख्य तर्क थे: कथन II सत्य है: शुक्ल जी के अनुसार, “ये रचनाएँ शुद्ध साहित्य के अंतर्गत नहीं आतीं, क्योंकि इनमें केवल सांप्रदायिक शिक्षा का समावेश है।” कथन IV सत्य है: वे मानते थे कि इन धार्मिक उपदेशों का “जीवन की स्वाभाविक सरणियों, परिस्थितियों और अनुभूतियों से कोई सीधा संबंध नहीं है।” चूँकि कथन II और IV शुक्ल जी के मूल तर्कों को दर्शाते हैं, इसलिए विकल्प (d) सही है।
I. इनकी रचनाएँ परिष्कृत हिंदी में न होकर बोलचाल की भाषा में थीं।
II. इनकी रचनाओं में मात्र सांप्रदायिक शिक्षा का समावेश था।
III. इनकी रचनाओं में योग की शब्दावलियों का अतिशय प्रयोग था ।
IV. इनकी रचनाओं का जीवन की स्वाभाविक सरणियों एवं अनुभूतियों से कोई संबंध नहीं था ।
नीचे दिए गए कूट की सहायता से सही विकल्प चुनिए :
(a) केवल I और II
(b) केवल II और III
(c) केवल I और III
(d) केवल II और IV
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Q73. निम्नलिखित साहित्येतिहासकारों और उनके द्वारा घोषित हिंदी के प्रथम कवियों को सुमेलित कीजिए : व्याख्या: विभिन्न इतिहासकारों के अनुसार हिंदी के प्रथम कवि का सही मिलान इस प्रकार है:
साहित्येतिहासकार – प्रथम कवि
A. शिव सिंह सेंगर – I. सरह पाद
B. राहुल सांकृत्यायन – II. स्वयंभू
C. रामकुमार वर्मा – III. शालिभद्र सूरि
D. गणपतिचन्द्र गुप्त – IV. पुष्य
दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए:
A B C D
(a) IV, I, II, III
(b) II, I, III, IV
(c) IV, II, I, III
(d) III, II, IV, I
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शिव सिंह सेंगर — IV. पुष्य या पुंड कवि (7वीं शताब्दी)
राहुल सांकृत्यायन — I. सरह पाद या सरहपा (769 ई. – यह मत सर्वमान्य है)
रामकुमार वर्मा — II. स्वयंभू (जैन कवि, अपभ्रंश के प्रथम कवि)
गणपतिचन्द्र गुप्त — III. शालिभद्र सूरि (रचना ‘भरतेश्वर बाहुबली रास’, 1184 ई.)
अतः सही कूट A-IV, B-I, C-II, D-III के संयोजन से विकल्प (a) सत्य है।
Q74. “शुक्लजी ने प्रथम बार हिंदी साहित्य के इतिहास को कविवृत्तसंग्रह की पिटारी से बाहर निकाला । पहली बार उसमें श्वासोच्छ्वास का स्पन्दन सुनाई पड़ा।” – हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन के संदर्भ में यह कथन किसका है ? व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल के इतिहास लेखन के क्रांतिकारी बदलाव की सराहना करते हुए आधुनिक आलोचक डॉ. बच्चन सिंह ने अपने ग्रंथ ‘हिंदी साहित्य का दूसरा इतिहास’ में यह बात कही थी। शुक्ल जी से पहले मिश्रबंधु आदि के इतिहास ग्रंथ केवल कवियों के जीवनवृत्त का संग्रह (बायोग्राफी) मात्र थे, लेकिन शुक्ल जी ने पहली बार युगीन परिस्थितियों और प्रवृत्तियों के आधार पर इतिहास को जीवंत रूप दिया।
(a) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का
(b) डॉ. नगेन्द्र का
(c) डॉ. बच्चन सिंह का
(d) गणपतिचन्द्र गुप्त का
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Q75. निम्नलिखित रचनाओं में से कौन-सी आदिकालीन गद्य-साहित्य के अन्तर्गत नहीं है/हैं? व्याख्या: ‘उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण’ (दामोदर शर्मा), ‘राउलवेल’ (रोडा कवि – यह शिलांकित चम्पू काव्य है जिसमें गद्य-पद्य दोनों हैं), और ‘वर्णरत्नाकर’ (ज्योतिरीश्वर ठाकुर) — ये तीनों आदिकालीन गद्य साहित्य की अत्यंत प्रसिद्ध रचनाएँ हैं। जबकि ‘जयमयंक जस-चंद्रिका’ (II) मधुकर कवि द्वारा रचित एक काव्य ग्रंथ (पद्य) है, गद्य नहीं। अतः केवल II गद्य-साहित्य के अंतर्गत नहीं आता, जिससे विकल्प (b) सही है।
I. उक्ति-व्यक्ति-प्रकरण
II जयमयंक जस-चंद्रिका
III. राउलवेल
IV. वर्णरत्नाकर
(a) केवल I और II
(b) केवल II
(c) केवल II और IV
(d) केवल IV
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Q76. निम्नलिखित विद्वानों और उनके द्वारा किए गए हिंदी साहित्य के आरंभिक कालखण्ड के नामकरण को सुमेलित कीजिए : व्याख्या: आदिकाल के नामकरण और उनके प्रस्तोता विद्वानों का सही सुमेलन इस प्रकार है: इस मिलान के अनुसार वर्णानुक्रम का कूट A-IV, B-V, C-II, D-I, E-III बनता है, जो विकल्प (b) में पूर्णतः सही दर्शाया गया है।
नामकरण – विद्वान
A. संधिकाल एवं चारणकाल – I. राहुल सांकृत्यायन
B. वीरकाल – II. मिश्र बंधु
C. प्रारंभिक काल – III. जार्ज ग्रियर्सन
D. सिद्ध-सामन्त-काल – IV. रामकुमार वर्मा
E. चारणकाल – V. विश्वनाथप्रसाद मिश्र
दिए गए कूट से सही विकल्प चुनिए :
A B C D
(a) II, III, IV, V
(b) IV, V, II, I, III
(c) I, II, III, IV, V
(d) V, IV, III, II, I
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Q77. “अगर उनकी (जैनों की रचनाओं के ऊपर से ‘जैन’ विशेषण हटा दिया जाए तो वे योगियों और तांत्रिकों की रचनाओं से बहुत भिन्न नहीं लगेंगी।” – यह कथन निम्नलिखित में से किस आलोचक का है ? व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सिद्धों, नाथों और जैनों की रचनाओं को धार्मिक कहकर साहित्य कोटि से बाहर कर दिया था। इसके प्रतिवाद में आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी ने अपने ग्रंथ ‘हिंदी साहित्य का आदिकाल’ में यह तर्क दिया था कि यदि जैनों की रचनाओं को केवल धार्मिक होने के कारण हटा देंगे, तो नाथों और सिद्धों की तरह वे भी ओझल हो जाएँगी, जबकि ये सभी तत्कालीन अंतःसाधना और लोक जीवन की प्रामाणिक अभिव्यक्तियाँ हैं।
(a) आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी का
(b) आचार्य रामचन्द्र शुक्ल का
(c) डॉ. नगेन्द्र का
(d) डॉ. नामवर सिंह का
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Q78. विद्यापति की प्रसिद्ध रचना ‘कीर्तिलता’ के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए। व्याख्या: कथन II सत्य है: इसकी भाषा को विद्यापति ने स्वयं ‘अवहट्ट’ कहा है, जो मूलतः पूर्वी अपभ्रंश का ही एक रूप है। कथन III और IV गलत हैं: इस रचना में तत्सम शब्दों का पूर्ण बहिष्कार नहीं है, बल्कि संस्कृत के शब्द बहुतायत में प्रयुक्त हुए हैं। साथ ही इसकी पांडुलिपि जॉर्ज ग्रियर्सन ने नहीं, बल्कि महामहोपाध्याय हरप्रसाद शास्त्री ने नेपाल के राजकीय पुस्तकालय से खोजी थी।
I. इसमें राजा कीर्तिसिंह की वीरता एवं उदारता का वर्णन है।
II. यह पूरबी अपभ्रंश में लिखी रचना है।
III. इसमें तत्सम शब्दों का पूर्ण बहिष्कार है।
IV. इसकी पांडुलिपि जार्ज ग्रियर्सन ने खोजी थी।
उपर्युक्त में से कौन-सा /से कथन सही है/ है ?
कूट :
(a) केवल I
(b) केवल I एवं II
(c) केवल I, II एवं III
(d) केवल II एवं IV
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कथन I सत्य है: ‘कीर्तिलता’ में विद्यापति ने अपने आश्रयदाता राजा कीर्तिसिंह की वीरता, उदारता और जौनपुर के सुल्तान की मदद से उनका खोया राज्य वापस पाने का ऐतिहासिक वर्णन किया है।
Q79. ‘पृथ्वीराज रासो’ में कुल समय हैं- व्याख्या: महाकवि चंदबरदाई द्वारा रचित हिंदी के प्रथम महाकाव्य ‘पृथ्वीराज रासो’ में अध्यायों या खंडों को ‘समय’ कहा गया है। इस महाकाव्य में कुल 69 समय हैं और इसमें 68 प्रकार के छंदों का प्रयोग किया गया है (छंदों की अधिकता के कारण ही इसे छंदों का अजायबघर कहा जाता है)। इसका सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण खंड ‘कनवज्ज समय’ (कन्नौज युद्ध) माना जाता है।
(a) 60
(b) 64
(c) 69
(d) 72
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Q80. निम्नलिखित रचनाओं को उनके रचनाकारों के साथ सुमेलित कीजिए : व्याख्या: आदिकालीन जैन रास काव्यों और उनके रचयिताओं का सही मिलान इस प्रकार है:
रचना – रचनाकार
A. नेमिनाथ रास – I. जिनधर्म सूरि
B. रेवंतगिरि रास – II. शालिभद्र सूरि
C. स्थूलभद्र रा – III. सुमति गणि
D. भरतेश्वर बाहुबली रास – IV. विजयसेन सूरि
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
A B C D
(a) III, IV, I, II
(b) II, I, III, IV
(c) I, III, IV, II
(d) IV, II, III, I
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A. नेमिनाथ रास — III. सुमति गणि (1213 ई.)
B. रेवंतगिरि रास — IV. विजयसेन सूरि (1231 ई.)
C. स्थूलभद्र रास — I. जिनधर्म सूरि (1209 ई.)
D. भरतेश्वर बाहुबली रास — II. शालिभद्र सूरि (1184 ई.)
इस मिलान के अनुसार कूट A-III, B-IV, C-I, D-II बनता है, जो विकल्प (a) में दिया गया है।
