UKPSC Lecturer Exam - Paper I -Hindi - 30 May 2026 (Answer Key)

UKPSC Lecturer Exam – Paper I (Hindi) – 30 May 2026 (Answer Key)

May 31, 2026

Q111. ‘पुष्टिमार्ग’ के अनुसार ‘मर्यादाजीव’ की विशेषता है –
(a) भगवान के अनुग्रह पर भरोसा रखना

(b) वेद की विधियों का अनुसरण करना
(c) सांसारिक सुखों में लिप्त रहना
(d) लोकमर्यादा का आचरण करना

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Answer – (B)

व्याख्या: वल्लभाचार्य ने पुष्टिमार्ग में जीवों के तीन भेद बताए हैं— प्रवाह जीव, मर्यादा जीव और पुष्टि जीव।

Q112. ‘भक्तमाल’ किसकी रचना है ?
(a) नाभादास की

(b) नन्ददास की
(c) कृष्णदास की
(d) चतुर्भुजदास की

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Answer – (A)

व्याख्या: ‘भक्तमाल’ (लगभग 1585 ई.) रामभक्ति शाखा के प्रसिद्ध कवि नाभादास की अमर कृति है। इसमें ब्रजभाषा (छप्पय छंद) में लगभग 200 भक्तों के चरित्र और उनकी भक्ति की महिमा का गान 108 छप्पयों में किया गया है। हिंदी साहित्य के इतिहास लेखन के शुरुआती स्रोतों में इसका स्थान बहुत महत्वपूर्ण है।

Q113. संतकाव्य के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. इसमें शास्त्रीय ज्ञान की जरूरत पर बल दिया गया है।

II. इसमें आत्मानुभूति की प्रामाणिकता मिलती है
III. इसमें वर्णाश्रम व्यवस्था का समर्थन दिखाई देता है ।
IV. इसमें सदाचार पर बल दिया गया है
उपर्युक्त में से कौन-सा / कौन-से कथन सही है/हैं ?
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) केवल I

(b) केवल I और II
(c) केवल II और IV
(d) केवल IV

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Answer – (C)

व्याख्या: निर्गुण संतकाव्य (जैसे कबीर, रैदास, दादू की वाणी) की प्रवृत्तियों को देखें तो:

कथन I गलत है: संतों ने शास्त्रीय या पुस्तकीय ज्ञान की जगह ‘आँखिन देखी’ यानी लोक-अनुभव को महत्व दिया।

कथन II सही है: संत काव्य में अपनी खुद की आत्मानुभूति और आंतरिक अनुभव की प्रामाणिकता सर्वोपरि है।

कथन III गलत है: संतों ने वर्णाश्रम (जाति-पाति और छुआछूत) व्यवस्था का कड़ा विरोध किया था, समर्थन नहीं।

कथन IV सही है: सभी संतों ने जीवन में शुद्धता, सदाचार, शील और नैतिक मूल्यों पर बहुत गहरा बल दिया। अतः कथन II और IV सही होने के कारण विकल्प (c) सत्य है।

Q114. ‘सीस पगा न झगा तन पै, प्रभु ! जानै को आहि, बसै केहि ग्रामा ।
धोती फटी सी, लटी दुपटी अरु पाँय उपानह को नहीं सामा ।।’
उपर्युक्त पंक्तियाँ किस कवि की हैं ?
(a) रसखान की

(b) नरोत्तमदास की
(c) सूरदास की
(d) कृपाराम की

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Answer – (B)

व्याख्या: यह ब्रजभाषा के प्रसिद्ध खंडकाव्य ‘सुदामा चरित’ की सबसे लोकप्रिय पंक्तियाँ हैं, जिसके रचयिता नरोत्तमदास हैं। जब दरिद्र सुदामा कृष्ण से मिलने द्वारका पहुँचते हैं, तब द्वारपाल कृष्ण को सुदामा की दशा का वर्णन करते हुए यह बात कहता है कि उनके सिर पर न पगड़ी है और ना ही शरीर पर कोई ढंग का कपड़ा (झगा) है।

Q115. रचना – रचनाकार के निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए :
रचना               –          रचनाकार
I. चित्रावली     –        उसमान

II. मधुमालती  –        मंझन
III. मृगावती    –        कुतुबन
IV. हँसजवाहिर –       नूर मोहम्मद
उपर्युक्त में से कौन-से युग्म सही हैं ?
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) केवल I, II

(b) केवल I, II, III
(c) केवल I, III, IV
(d) उपर्युक्त सभी

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Answer – (B)

व्याख्या: सूफी प्रेमाख्यानक काव्यों और उनके रचयिताओं का मिलान करने पर:
I. चित्रावली — उसमान (बिल्कुल सही, 1613 ई.)
II. मधुमालती — मंझन (बिल्कुल सही, 1545 ई.)
III. मृगावती — कुतुबन (बिल्कुल सही, 1503 ई.)
IV. हँसजवाहिर — नूर मोहम्मद (यह गलत है; ‘हँसजवाहिर’ के रचनाकार कासिम शाह हैं, जबकि नूर मोहम्मद की रचनाएँ ‘इन्द्रावती’ और ‘अनुराग बाँसुरी’ हैं)।

Q116. ‘विनयपत्रिका’ और ‘कवितावली’ किसकी रचनाएँ हैं ?
(a) तुलसीदास की

(b) सूरदास की
(c) कबीरदास की
(d) महर्षि वाल्मीकि की

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Answer – (A)

व्याख्या: ‘विनयपत्रिका’ (गीतिकाव्य, जिसमें तुलसीदास ने कलयुग के खिलाफ राम के दरबार में अपनी अर्जी लगाई है) और ‘कवितावली’ (कवित्त और सवैया छंद में रचित रामकथा) दोनों ही गोस्वामी तुलसीदास के 12 प्रामाणिक ग्रंथों में शामिल हैं। इन दोनों ग्रंथों की रचना तुलसीदास जी ने ब्रजभाषा में की थी।

Q117. निम्नलिखित वैष्णव आचार्यों और उनके दार्शनिक मतों को सुमेलित कीजिए :
आचार्य                        –          दार्शनिकमत
A. मध्वाचार्य              –        I. द्वैताद्वैत

B. निम्बार्काचार्य         –        II. शुद्धाद्वैत
C. रामानुजाचार्य         –        III. द्वैतवाद
D.वल्लभाचार्य             –        IV. विशिष्टाद्वैत
नीचे दिए गए कूट से सही विकल्प चुनें:
A B C D[/toggle]
(a) I, II, III, IV

(b) III, II, IV, I
(c) II, I, III,I V
(d) III, I, IV, II

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Answer – (D)

व्याख्या: भक्ति आंदोलन के आधारभूत दार्शनिक सिद्धांतों और आचार्यों का सही सुमेलन इस प्रकार है:

  1. मध्वाचार्य — III. द्वैतवाद
  2. निम्बार्काचार्य — I. द्वैताद्वैत (सनक संप्रदाय)
  3. रामानुजाचार्य — IV. विशिष्टाद्वैत (श्री संप्रदाय)
  4. वल्लभाचार्य — II. शुद्धाद्वैत (रुद्र संप्रदाय / पुष्टिमार्ग)
    अतः कूट का सही अनुक्रम A-III, B-I, C-IV, D-II बनता है, जो विकल्प (d) में दिया गया है।

Q118. ‘पुष्टिमार्ग’ के प्रवर्तक कौन थे ?
(a) वल्लभाचार्य

(b) रामानंद
(c) हरिवंश महाप्रभु
(d) निम्बार्काचार्य

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Answer – (A)

व्याख्या: शुद्ध भक्ति और कृष्ण के स्वरूप की साधना के लिए आचार्य वल्लभाचार्य ने ‘पुष्टिमार्ग’ की स्थापना की थी। “पुष्टि” का अर्थ भागवत पुराण के अनुसार ‘पोषणं तदनुग्रहः’ अर्थात् भगवान का अनुग्रह या कृपा ही है। इसी मार्ग को आगे बढ़ाकर उनके पुत्र विट्ठलनाथ ने ‘अष्टछाप’ के कवियों की स्थापना की थी।

Q119. अष्टछाप के कवियों का निम्नलिखित में से सही विकल्प कौन-सा है ?
I. सूरदास, कृष्णदास, परमानंददास, कुंभनदास

II. नाभादास, ईश्वरदास, विष्णुदास, सूरदास
III. अनंतानंद, सुखानंद, रामानंद, सुरसुरानंद
IV. अग्रदास, रामचरणदास, नाभादास, कृष्णदास
(a) I
(c) II
(b) III
(d) IV

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Answer – (A)

व्याख्या: महाप्रभु वल्लभाचार्य और उनके पुत्र गोसाईं विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित ‘अष्टछाप’ (8 कृष्णभक्त कवि) के पहले विकल्प में शामिल सूरदास, कृष्णदास, परमानंददास और कुंभनदास चारों ही इसके प्रामाणिक स्तंभ हैं (ये चारों वल्लभाचार्य के शिष्य थे)।

Q120. तुलसीदास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. अवधी और ब्रजभाषा पर तुलसीदास का पूर्ण स्वामित्व है ।

II. देशकाल की दुर्दशा का स्वर कवितावली में सुनाई पड़ता है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनें:
कूट :
(a) कथन I एवं कथन II दोनों सही हैं।

(b) कथन I एवं कथन II दोनों गलत हैं।
(c) कथन I सही है, किन्तु कथन II गलत है।
(d) कथन I गलत है, किन्तु कथन II सही है।

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Answer – (A)

व्याख्या: गोस्वामी तुलसीदास हिंदी साहित्य के आकाश के देदीप्यमान नक्षत्र हैं:

कथन I बिल्कुल सही है: तुलसीदास की सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि उनका अवधी (उदा. रामचरितमानस) और ब्रजभाषा (उदा. विनयपत्रिका, कवितावली) दोनों पर समान और पूर्ण अधिकार था।

कथन II भी सही है: तुलसीदास ने अपने युग की सामाजिक और आर्थिक दुर्दशा, अकाल तथा भुखमरी का अत्यंत यथार्थपरक चित्रण ‘कवितावली’ के उत्तरकांड में किया है (जैसे: “किसबी, किसान-कुल, बनिक, भिखारी, भाट…”)।

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