UKPSC Lecturer Exam - Paper I -Hindi - 30 May 2026 (Answer Key)

UKPSC Lecturer Exam – Paper I (Hindi) – 30 May 2026 (Answer Key)

May 31, 2026

Q101. कृष्ण-भक्ति काव्य के प्रमुख कवि नंददास की रचनाओं का निम्नलिखित में से कौन-सा विकल्प सही है ?
I. रासपंचाध्यायी, भंवरगीत, रूपमंजरी, रसमंजरी

II. सिद्धान्त के पद, केलिमाला, हितचौरासी, नाममंजरी
III. साहित्यलहरी, दानलीला, रूपमंजरी, भंवरगीत
IV. रुक्मणीमंगल, रागगोविंद, मलारराग, प्रेमवाटिका
(a) II
(b) I
(c) III
(d) IV

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Answer – (B)

व्याख्या: अष्टछाप के सबसे विद्वान कवियों में गिने जाने वाले नंददास की रचनाओं का सही समूह ‘रासपंचाध्यायी, भंवरगीत, रूपमंजरी, रसमंजरी’ है।

Q102. कबीर के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए
I. कबीर की विचारधारा के केन्द्र में हिन्दुओं-मुसलमानों का शोषित-प्रताड़ित वर्ग था ।

II. कबीर का सौंदर्यबोध पारंपरिक और आदर्शवादी है।
III. कबीर की भाषा परिष्कृत है।
उपर्युक्त में से कौन-सा / कौन-से कथन सही है/है?
(a) केवल I सही

(b) केवल II सही
(c) केवल III सही
(d) केवल II और III सही

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Answer – (A)

व्याख्या: कबीरदास के काव्य और दर्शन का मूल्यांकन करने पर स्पष्ट होता है कि:

कथन I बिल्कुल सही है: कबीर ने समाज के सबसे निचले, शोषित और प्रताड़ित वर्ग (चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान) को अपनी मर्मस्पर्शी वाणी का मुख्य विषय बनाया।

कथन II गलत है: कबीर का सौंदर्यबोध पारंपरिक और आदर्शवादी नहीं, बल्कि यथार्थवादी और विद्रोही था। वे बाह्य सौंदर्य के स्थान पर आंतरिक या आत्मिक पवित्रता को सुंदर मानते थे।

कथन III गलत है: कबीर की भाषा परिष्कृत (व्याकरण सम्मत शुद्ध) नहीं है; विद्वानों ने उनकी भाषा को ‘सधुक्कड़ी’ या ‘पंचमेल खिचड़ी’ कहा है, जिसमें लोक-भाषाओं के शब्द घुले-मिले हैं।

Q103. निम्नलिखित कृष्ण-भक्त कवियों में से कौन ‘सखी-संप्रदाय’ से सम्बद्ध है ?
(a) स्वामी हरिदास

(b) गोस्वामी हितहरिवंश
(c) हरि व्यास देव
(d) छीतस्वामी

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Answer – (A)

व्याख्या: कृष्णभक्ति के अंतर्गत स्वामी हरिदास ने ‘सखी-संप्रदाय’ (जिसे ‘हरिदासी संप्रदाय’ या ‘टट्टी संप्रदाय’ भी कहा जाता है) की स्थापना की थी। इस संप्रदाय में निकुंज-बिहारी श्री कृष्ण की आराधना ‘सखी भाव’ से की जाती है। स्वामी हरिदास प्रसिद्ध संगीत सम्राट तानसेन के गुरु भी थे।

Q104. निम्नलिखित रचनाओं में से कौन-सी तुलसीदास द्वारा रचित है / हैं ?
I. रामध्यान मंजरी

II. गीतावली
III. भक्तमाल
IV. रामायण महानाटक
(a) केवल II
(b) केवल I एवं II
(d) केवल I
(c) केवल III एवं IV

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Answer – (A)

व्याख्या: दिए गए विकल्पों में से केवल ‘गीतावली’ ही गोस्वामी तुलसीदास की प्रामाणिक रचना है। अन्य रचनाओं के वास्तविक रचनाकार इस प्रकार हैं: ‘रामध्यान मंजरी’ स्वामी अग्रदास की है, ‘भक्तमाल’ नाभादास की प्रसिद्ध कृति है, और ‘रामायण महानाटक’ प्राणचंद चौहान की रचना है।

Q105. निम्नलिखित में से संत-काव्य परंपरा के कवि हैं:
I. दादूदयाल

II. मलूकदास
III. नन्ददास
IV. नरोत्तमदास
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) I, III

(b) I, II
(c) I, III, IV
(d) I, II, III, IV

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Answer – (B)

व्याख्या: निर्गुण भक्तिधारा की ज्ञानाश्रयी (संत) काव्य परंपरा के अंतर्गत दादूदयाल और मलूकदास (जिन्होंने लिखा था: “अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम”) आते हैं। इसके विपरीत, नंददास अष्टछाप के सगुण कृष्णभक्त कवि हैं तथा न्रोत्तमदास सगुण कृष्णभक्त कवि हैं जो अपने ‘सुदामा चरित’ काव्य के लिए जाने जाते हैं।

Q106. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
I. लक्षण ग्रंथ लिखने वाले रीतिकालीन कवि आचार्य की कोटि में नहीं आ सकते।

II. रीतिकालीन कवियों के लक्षण ग्रंथ साहित्यशास्त्र का सम्यक् बोध कराने में समर्थ हैं।
III. रीतिकालीन लक्षण ग्रंथकार कवियों ने अलंकार एवं रस के क्षेत्र में मौलिक विवेचन किया है।
रीतिकाल के संबंध में रामचन्द्र शुक्ल का / के कौन-सा / कौन-से कथन सही है/हैं?
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :

(a) केवल I
(b) केवल II और III
(c) केवल I और III
(d) I, II, III सभी

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Answer – (A)

व्याख्या: आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने अपने इतिहास ग्रंथ में रीतिकाल के लक्षण-ग्रंथकारों की बहुत कड़ी और सटीक समीक्षा की है:

कथन I सही है: शुक्ल जी का मानना था कि केवल संस्कृत ग्रंथों का अनुवाद या सामान्य अनुवाद कर देने से कोई ‘आचार्य’ नहीं बन जाता। रीतिकालीन कवियों में आचार्यत्व के गुण नहीं थे, वे मूलतः कवि ही थे।

कथन II और III गलत हैं: शुक्ल जी के अनुसार, रीतिकालीन लक्षण ग्रंथ साहित्यशास्त्र का सम्यक् (सही और गहरा) बोध कराने में असमर्थ हैं क्योंकि उनमें कई जगह भ्रांतियाँ और अस्पष्टता है। साथ ही, इन कवियों ने रस और अलंकार के क्षेत्र में कोई नई या मौलिक स्थापना नहीं की, बल्कि संस्कृत के आचार्यों का ही अनुकरण किया।

Q107. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. पद्मावत की हस्तलिखित प्रतियाँ अधिकतर फ़ारसी अक्षरों में मिलती हैं

II. पद्मावत का पूर्वार्द्ध ऐतिहासिक तथा उत्तरार्द्ध कल्पित है।
III. पद्मावत की रचना संस्कृत प्रबंधकाव्यों की सर्गबद्ध पद्धति पर नहीं है, फ़ारसी की मसनवी शैली पर है।
पद्मावत के संबंध में उपर्युक्त में से शुक्लजी के कौन-कौन से कथन सत्य हैं ?
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) केवल I और II

(b) केवल II और III
(c) I, II और III सभी
(d) केवल I और III

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Answer – (D)

व्याख्या: मलिक मोहम्मद जायसीकृत ‘पद्मावत’ के संदर्भ में आचार्य शुक्ल की मान्यताओं का विश्लेषण इस प्रकार है:

कथन I सत्य है: पद्मावत की प्राचीन हस्तलिखित प्रतियाँ अधिकतर देवनागरी में नहीं, बल्कि फारसी लिपि में लिखी हुई प्राप्त होती हैं।

कथन II गलत है: शुक्ल जी और अन्य इतिहासकारों के अनुसार पद्मावत का पूर्वार्द्ध (पहला भाग) कल्पित है (जैसे रत्नसेन का सिंहलद्वीप जाना, शुक संवाद आदि) तथा उसका उत्तरार्द्ध (बाद का भाग) ऐतिहासिक है (अलाउद्दीन का आक्रमण, चित्तौड़ का घेराव)। यहाँ कथन में इसे उल्टा लिख दिया गया है, इसलिए यह गलत है।

कथन III सत्य है: यह प्रबंधकाव्य भारतीय संस्कृत महाकाव्यों की तरह सर्गों में बंटा नहीं है, बल्कि सूफी कवियों की पसंदीदा फारसी मसनवी शैली (जिसमें कथा बिना सर्ग बदले लगातार चलती है और बीच-बीच में शीर्षक आते हैं) में रचित है।

Q108. प्रसिद्ध पंक्ति ‘सन्तन को कहा सीकरी सों काम ?’ किसकी है ?
(a) छीतस्वामी की

(b) कुंभनदास की
(c) सूरदास की
(d) परमानंददास की

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Answer – (B)

व्याख्या: यह अष्टछाप के वरिष्ठ कवि कुंभनदास की अत्यंत स्वाभिमानी पंक्ति है। जब मुगल सम्राट अकबर ने इनकी गायन प्रतिभा से प्रभावित होकर इन्हें फतेहपुर सीकरी आमंत्रित किया, तब वहां की चकाचौंध से विरक्त होकर इन्होंने यह पद गाया था:
“सन्तन को कहा सीकरी सों काम? आवत जात पनहियाँ टूटी, बिसरि गयो हरि नाम॥”

Q109. अष्टछाप के कवि नन्ददास की रचनाओं को उनके वर्ण्य विषय के साथ सुमेलित कीजिए:
A. रासपंचाध्यायी       –        I.अमरकोश के आधार पर शब्दों के पर्यायवाचीलिखे गए हैं।

B. मानमंजरी             –        II. लौकिक एवं पारलौकिक प्रेम का वर्णन
C. सिद्धान्तपंचाध्यायी –         III. गोपी- उद्धव-संवाद एवं गोपी-कृष्ण विरह
D. भंवरगीत              –        IV. कृष्ण की रासलीला की आध्यात्मिक अभिव्यक्ति
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए :
A B C D
(a) II, I, IV, III

(b) III, II, I, IV
(c) I, II, III, IV
(d) IV, II, I, III

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Answer – (A)

व्याख्या: नंददास की बहुआयामी कृतियों और उनके विषयों का सही सुमेलन इस प्रकार है:

  1. रासपंचाध्यायी — II. लौकिक एवं पारलौकिक प्रेम का रासलीला के माध्यम से अद्भुत समन्वय (यह रोला छंद में है)।
  2. मानमंजरी — I. यह एक प्रकार का पद्यबद्ध कोश ग्रंथ है जो अमरकोश के आधार पर पर्यायवाची शब्दों के रूप में लिखा गया है।
  3. सिद्धान्तपंचाध्यायी — IV. कृष्ण की रासलीला की दार्शनिक और आध्यात्मिक व्याख्या।
  4. भंवरगीत — III. प्रसिद्ध गोपी-उद्धव संवाद जिसमें सगुण मत द्वारा निर्गुण का खंडन तथा विरह का सुंदर चित्रण है।

अतः सही अनुक्रम A-II, B-I, C-IV, D-III होने से विकल्प (a) सत्य है।

Q110. निम्नलिखित में से कौन-सी रचना / रचनाएँ रामानंदजी द्वारा रचित है/हैं ?
I. पूर्वमीमांसा भाष्य

II. वैष्णवमताष्ज भास्कर
III. तत्त्वदीप निबंध
IV. श्रीरामार्चन पद्धति
नीचे दिये गये कूट से सही उत्तर चुनिए :
कूट :
(a) केवल I

(b) केवल II और IV
(c) केवल III
(d) सभी

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Answer – (B)

व्याख्या: मध्यकाल में रामभक्ति धारा के महान प्रवर्तक स्वामी रामानंद द्वारा रचित प्रामाणिक ग्रंथों में ‘वैष्णवमताब्ज भास्कर’ और ‘श्रीरामार्चन पद्धति’ शामिल हैं। जबकि ‘पूर्वमीमांसा भाष्य’ और ‘तत्त्वदीप निबंध’ जैसी दार्शनिक कृतियाँ पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक आचार्य वल्लभाचार्य द्वारा रचित हैं। अतः विकल्प (b) सही कूट है।

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