Q51. रेस इप्सा लोकीटर” का अर्थ है व्याख्या: ‘Res ipsa loquitur’ अपकृत्य विधि का एक प्रसिद्ध लैटिन सिद्धांत है, जिसका अर्थ होता है “घटना या वस्तु स्वयं बोलती है”। सामान्यतः किसी मामले में लापरवाही साबित करने की ज़िम्मेदारी पीड़ित की होती है, लेकिन इस सिद्धांत के तहत परिस्थितियां इतनी साफ़ और प्रत्यक्ष होती हैं कि यह मान लिया जाता है कि सामने वाले की लापरवाही के बिना ऐसी घटना हो ही नहीं सकती थी (जैसे कि किसी के पेट का ऑपरेशन करने के बाद डॉक्टर का कैंची अंदर ही भूल जाना)।
(a) वस्तु स्वयं बोलती है।
(b) सन्देह से परे प्रमाण
(c) दोषपूर्ण आशय
(d) सबूत का भार
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Q52. सूक्ति ‘वोलेन्टी नॉन फिट इंजूरिया’ का अर्थ है व्याख्या: ‘Volenti non fit injuria’ का अर्थ है “स्वेच्छा से ली गई जोखिम के लिए कोई कानूनी क्षति नहीं होती”। यह अपकृत्य विधि में बचाव का एक आधार है। इसके अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से किसी ऐसे काम के लिए सहमति देता है जिसमें नुकसान का जोखिम है, तो नुकसान होने पर वह मुआवजे का दावा नहीं कर सकता। उदाहरण के लिए, क्रिकेट मैच देखने गए दर्शक को यदि स्टेडियम में बॉल लग जाए, तो वह खिलाड़ी पर केस नहीं कर सकता क्योंकि वह स्वेच्छा से वहाँ गया था।
(a) क्षति हमेशा दंडनीय है
(b) सहमत व्यक्ति को क्षति नहीं कारित होती
(c) सहमति अप्रासंगिक है
(d) देखभाल का दायित्व
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Q53. “परमादेश” का शाब्दिक अर्थ है व्याख्या: परमादेश को अंग्रेजी में ‘Mandamus’ (मैनडेमस) कहा जाता है, जो भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 और 226 के तहत जारी की जाने वाली 5 रिटों में से एक है। इसका शाब्दिक अर्थ होता है “हम आज्ञा देते हैं”। यह रिट न्यायालय द्वारा किसी सार्वजनिक अधिकारी, निचली अदालत या सरकार को उनके कानूनी और संवैधानिक कर्तव्यों को पूरा करने का आदेश देने के लिए जारी की जाती है।
(a) सशरीर उपस्थित करना
(b) हम आज्ञा देते हैं
(c) किस अधिकार से
(d) प्रमाणित किया जाना
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Q54. सूक्ति “लिस पेंडेस” का अर्थ है व्याख्या: ‘Lis Pendens’ एक लैटिन वाक्यांश है जिसका अर्थ होता है “विचाराधीन वाद” या “लंबित मुकदमा”। संपत्ति अंतरण अधिनियम की धारा 52 में इसका सिद्धांत दिया गया है। इसके अनुसार, जब किसी अचल संपत्ति को लेकर अदालत में कोई मुकदमा लंबित (चल रहा) हो, तो उस दौरान उस संपत्ति को किसी तीसरे पक्ष को ट्रांसफर या बेचा नहीं जा सकता, ताकि केस के फैसले पर कोई असर न पड़े।
(a) पूर्ण विधान
(b) विचाराधीन बाद
(c) निर्णीत बाद
(d) नई अपील
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Q55. भारतीय मामलों में ब्रिटिश संसद का सक्रिय एवं सीधा नियन्त्रण प्रारम्भ हुआ व्याख्या: ईस्ट इंडिया कंपनी के कार्यों को नियमित और नियंत्रित करने के लिए ब्रिटिश संसद ने 1773 का रेगुलेटिंग एक्ट पारित किया था। इसी अधिनियम के माध्यम से ब्रिटिश संसद ने भारतीय मामलों और कंपनी के प्रशासन में पहली बार सक्रिय और सीधा हस्तक्षेप (नियंत्रण) शुरू किया था। इसी एक्ट के तहत बंगाल के गवर्नर को ‘गवर्नर-जनरल’ बनाया गया और कलकत्ता में एक सुप्रीम कोर्ट की स्थापना का प्रावधान किया गया।
(a) 1773 से
(b) 1774 से
(c) 1775 से
(d) 1776 से
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Q56. निम्नलिखित में से किस अधिनियम के अन्तर्गत “दोहरी शासन प्रणाली शुरू की गई थी ? व्याख्या: पिट्स इंडिया एक्ट, 1784 के द्वारा ब्रिटिश सरकार ने ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारिक और राजनीतिक कार्यों को अलग-अलग कर दिया। व्यापारिक मामलों के लिए ‘निदेशक मंडल’ और राजनीतिक मामलों के नियंत्रण के लिए एक नए निकाय ‘नियंत्रण बोर्ड’ का गठन किया गया। प्रशासन की इस व्यवस्था को ही ‘द्वैध शासन’ या दोहरी शासन प्रणाली कहा गया।
(a) पिट्स इण्डिया एक्ट 1784
(b) चार्टर 1793
(c) चार्टर, 1833
(d) चार्टर, 1853
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Q57. धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम किस वर्ष में पारित किया गया ? व्याख्या: धार्मिक निर्योग्यता निवारण अधिनियम को 1856 में लॉर्ड कैनिंग के समय पूरी तरह लागू किया गया था (इसकी रूपरेखा 1850 के लेक्स लोकी कानून से तैयार हुई थी)। इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि यदि कोई व्यक्ति अपना धर्म बदलता है (विशेषकर ईसाई बनता है), तो भी उसे उसकी पैतृक संपत्ति के अधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा। हिंदुओं ने इसे अपने पारंपरिक नियमों पर ब्रिटिश प्रहार माना था।
(a) 1853
(b) 1854
(c) 1855
(d) 1856
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Q58. निम्नलिखित ऐतिहासिक घटनाओं को सही कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें: व्याख्या: इन ऐतिहासिक घटनाओं के वर्ष इस प्रकार हैं:
(i) दि मिन्टो मार्ले सुधार
(ii) बंगाल का विभाजन
(iii) भारत छोड़ो आंदोलन
(iv) असहयोग आंदोलन
(a) (iv), (iii), (i) और (ii)
(b) (ii), (i), (iv) और (iii)
(c) (ii), (iv), (i) और (iii)
(d) (i), (ii), (iv) और (iii)
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(ii) बंगाल का विभाजन – 1905
(i) मिन्टो-मार्ले सुधार – 1909
(iv) असहयोग आंदोलन – 1920
(iii) भारत छोड़ो आंदोलन – 1942।
Q59. किस संवैधानिक संशोधन द्वारा भारत के संविधान, 1950 की प्रस्तावना में “समाजवादी” शब्द जोड़ा गया? व्याख्या: भारतीय संविधान की प्रस्तावना में अब तक केवल एक बार संशोधन किया गया है। 42वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1976 द्वारा प्रस्तावना में तीन नए शब्द जोड़े गए थे: ‘समाजवादी’ (Socialist), ‘पंथनिरपेक्ष’ (Secular) और ‘अखंडता’ (Integrity)।
(a) 42वाँ संशोधन, 1976
(b) 21वाँ संशोधन, 1951
(c) 42वाँ संशोधन, 1972
(d) इनमें से कोई नहीं
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Q60. औपनिवेशिक भारत का कौन सा बाद अनौपचारिक रूप से ‘न्यायिक हत्या’ के नाम से जाना जाता है ? व्याख्या: 1775 में हुआ राजा नंद कुमार का मुकदमा भारतीय कानूनी इतिहास में ‘न्यायिक हत्या’ के रूप में कुख्यात है। राजा नंद कुमार ने तत्कालीन गवर्नर-जनरल वारेन हेस्टिंग्स पर भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे। इसके बाद हेस्टिंग्स के मित्र और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सर एलिजा इम्पे ने एक जालसाजी के पुराने मामले में अंग्रेज़ी कानून के तहत राजा नंद कुमार को फाँसी की सजा सुना दी, जबकि भारतीय कानून में जालसाजी के लिए फाँसी का नियम नहीं था। इसे न्याय का मज़ाक और एक सोची-समझी हत्या माना गया।
(a) पटना बाद
(b) कमलुद्दीन बाद
(c) राजा नंद कुमार का विचारण
(d) राधाचरण मित्र बाद
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