Q11. निम्नलिखित में से कर्नाटक संगीत के किस राग का हिन्दुस्तानी संगीत के राग बिलावल से मेल है ?
(a) नट भैरवी
(b) कामवर्धिनी
(c) हनुमतोड़ी
(d) धीर शंकराभरणम्
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व्याख्या: हिन्दुस्तानी संगीत पद्धति का ‘बिलावल थाट’ (जिसमें सभी स्वर शुद्ध लगते हैं: सा, रे, ग, म, प, ध, नि) कर्नाटक संगीत पद्धति के ‘धीर शंकराभरणम्’ (29वाँ मेलकर्ता राग) के बिल्कुल समान है। दोनों ही पद्धतियों में इसे बुनियादी या शुद्ध स्वर सप्तक माना जाता है।
अन्य विकल्प: ‘हनुमतोड़ी’ हिन्दुस्तानी संगीत के ‘भैरवी थाट’ से मेल खाता है, और ‘नट भैरवी’ का मेल ‘आसावरी थाट’ से होता है।
Q12. हिल्टन-यंग कमीशन (1926) द्वारा कृत्रिम रूप से निर्धारित की गई रुपए-स्टर्लिंग विनिमय दर को ब्रिटिश सरकार द्वारा निम्नलिखित में से किस कारण से अंगीकार किया गया था ?
(a) भारत से प्रेषित धन के प्रवाह में सहायता देने और भारत की ऋणपात्रता (creditworthiness) को बनाए रखने के लिए
(b) भारतीय आयातकों को समर्थन देने के लिए
(c) भारत से कपास उपज के निर्यात को बढ़ावा देने के लिए
(d) स्वर्ण के सापेक्ष रुपए के मूल्यह्रास को रोकने के लिए
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व्याख्या: हिल्टन-यंग कमीशन ने रुपए की विनिमय दर 1 शिलिंग 6 पेंस (1s 6d) निर्धारित करने की सिफारिश की थी, जो तत्कालीन वास्तविक बाजार दर से अधिक (अधिमूल्यांकित) थी। ब्रिटिश सरकार ने इसे इसलिए अपनाया ताकि:
– भारत सरकार द्वारा ब्रिटेन भेजे जाने वाले धन (Home Charges / गृह प्रभार और ऋण भुगतान) का बोझ ब्रिटिश पाउंड के संदर्भ में कम हो।
– इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारत की ऋणपात्रता (Creditworthiness) बनी रहे और ब्रिटिश पाउंड को मजबूती मिले। भारतीय राष्ट्रवादियों और उद्योगपतियों ने इस दर का कड़ा विरोध किया था क्योंकि इससे भारतीय निर्यात को नुकसान हो रहा था।
Q13. निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. पाली ग्रंथों में, कहापण, निक्खा, कन्स और काकणिका जैसे सिक्कों के प्रथम स्पष्ट संदर्भ समाविष्ट हैं।
II. पाली ग्रंथों से प्राप्त साहित्यिक साक्ष्य की पुष्टि, अनेक स्थलों से प्राप्त आहत सिक्कों (punch-marked coins) के पुरातात्विक प्रमाण द्वारा होती है, इन सिक्कों में से अधिकांश चाँदी से बने हैं।
उपर्युक्त कथन निम्नलिखित में से किनसे संबद्ध हैं ?
1. शहरी जीवन के उद्भव से
2. मुद्रा अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण से
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1, न ही 2
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व्याख्या: कथन I और II दोनों सही हैं: बुद्ध काल (छठी शताब्दी ईसा पूर्व) के पाली ग्रंथों में विभिन्न प्रकार के सिक्कों (कहापण/कार्षापण, निक्खा/निष्का) का उल्लेख मिलता है, जिसकी पुष्टि पुरातात्विक खुदाई में मिले चाँदी के आहत सिक्कों से होती है।
संबद्धता: सिक्कों का यह प्रचलन देश में मुद्रा अर्थव्यवस्था की ओर संक्रमण (Transition to a metallic currency economy) को दर्शाता है। साथ ही, यह काल गंगा घाटी में ‘द्वितीय नगरीकरण’ का काल था, जहाँ व्यापार और व्यापारिक केंद्रों के विकास ने शहरी जीवन के उद्भव (Emergence of urban life) को गति दी। अतः ये दोनों ही निष्कर्षों से गहराई से संबद्ध हैं।
Q14. निम्नलिखित में से किस मंदिर /किन मंदिरों में नागर शैली के शिखर हैं ?
1. मालेगिट्टी शिवालय, बादामी
2. हुचिमल्लिगुड़ी मंदिर, ऐहोल
3. दशावतार मंदिर, देवगढ़
4. विरुपाक्ष मंदिर, पट्टदकल
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) 1 और 2
(b) 2 और 3
(c) केवल 3
(d) 3 और 4
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व्याख्या: हुचिमल्लिगुड़ी मंदिर, ऐहोल (2): बादामी के चालुक्यों द्वारा निर्मित इस मंदिर पर प्रारंभिक नागर शैली का रेखा-प्रसाद (कर्णात्मक) शिखर दिखाई देता है।
दशावतार मंदिर, देवगढ़ (3): यह उत्तर प्रदेश के ललितपुर में स्थित एक प्रसिद्ध गुप्तकालीन मंदिर है, जिसे भारत में नागर शैली के शुरुआती शिखरों का बेहतरीन उदाहरण माना जाता है।
अन्य विकल्प: मालेगिट्टी शिवालय (बादामी) और विरुपाक्ष मंदिर (पट्टदकल) मुख्य रूप से द्रविड़ शैली (या वेसर के द्रविड़ प्रभाव) के पिरामिडाकार विमान/शिखर वाले मंदिर हैं।
Q15. जैन धर्म में मान्यता प्राप्त जीवन के अस्तित्व के चार मुख्य रूपों में, निम्नलिखित में से कौन-सा सम्मिलित नहीं है ?
(a) देव (ईश्वर)
(b) यक्ष (अर्धदेव)
(c) मनुष्य (मानव)
(d) तिर्यंच (पशु और पादप)
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व्याख्या: जैन दर्शन के अनुसार, संसार में जीव अपने कर्मों के अनुसार चार गतियों (चतुर्गति) में जन्म लेता है। ये चार मुख्य रूप हैं:
देव (Deva): स्वर्गीय प्राणी / देवता।
मनुष्य (Manushya): मानव रूप।
तिर्यंच (Tiryancha): पशु, पक्षी, कीड़े-मकोड़े और पादप (पौधे)।
नारक (Naraki): नारकीय या नरक के जीव। इस वर्गीकरण में ‘यक्ष’ को एक स्वतंत्र मुख्य गति या रूप नहीं माना गया है; वे ‘देव’ योनि के अंतर्गत ही एक उप-श्रेणी (व्यंतर देव) माने जाते हैं।
Q16. बाघ गुफाओं में विद्यमान हल्लिसालस्य चित्र क्या प्रदर्शित करता है ?
(a) एक आनंदमय लोकनृत्य
(b) चिंतनशील मुद्रा में बुद्ध
(c) कैलाश पर शिव और पार्वती का चित्रण
(d) समुद्रमंथन (समुद्र का मंथन)
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व्याख्या: मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित गुप्तकालीन बाघ गुफाओं (Bagha Caves) की गुफा संख्या 4 (रंग महल) में एक प्रसिद्ध भित्तिचित्र (Fresco) है, जिसे ‘हल्लिसालस्य’ (Hallisalasya) कहा जाता है। यह चित्र एक आनंदमय सामूहिक लोकनृत्य/मंडलाकार नृत्य को प्रदर्शित करता है, जिसमें एक पुरुष नर्तक के चारों ओर महिलाएँ वाद्ययंत्र बजाती हुई और नृत्य करती हुई दिखाई गई हैं।
Q17. भारत में स्थानीय-मान पद्धति (place-value system) के उपयोग से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत में स्थानीय मान पद्धति का सर्वप्रथम उत्कीर्ण-अभिलेखीय उपयोग गुजरात की मनकणी पट्टिकाओं (595 – 596 AD) में मिलता है।
2. नवीं शताब्दी में, संपूर्ण भारत में उत्कीर्ण लेखों में स्थानीय मान सामान्य हो जाते हैं।
3. दक्षिण-पूर्व एशिया में संस्कृत के उत्कीर्ण लेखों में स्थानीय मान सातवीं शताब्दी के प्रारंभ से ही मिलते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से सही हैं ?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 1 और 3
(c) केवल 2 और 3
(d) 1, 2 और 3
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व्याख्या:
कथन 1 सही है: भारत में गणितीय रूप से स्थानीय मान पद्धति बहुत पुरानी है, लेकिन अभिलेखों (Inscriptions) पर इसका सबसे पहला प्रामाणिक उत्कीर्ण साक्ष्य गुजरात की संखेड़ा/मनकणी ताम्रपट्टिकाओं (595-596 ईसवी) में मिलता है।
कथन 2 सही है: 9वीं शताब्दी तक आते-आते ग्वालियर अभिलेखों और देश के अन्य हिस्सों में शून्य और स्थानीय मान का प्रयोग उत्कीर्ण लेखों में पूरी तरह सामान्य हो गया था।
कथन 3 सही है: भारत के सांस्कृतिक संपर्कों के कारण, कंबोडिया, चंपा (वियतनाम) और जावा (इंडोनेशिया) में प्राप्त 7वीं शताब्दी के प्रारंभिक संस्कृत अभिलेखों में भी स्थानीय मान और शून्य के प्रयोग के स्पष्ट साक्ष्य मिलते हैं।
Q18. हड़प्पा नगरों में पुरातात्विक खोजों के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. घरों में तकली की प्रचुर उपलब्धता है किंतु चरखे अनुपलब्ध हैं।
II. अंशांकित बाट और मापन पैमानों की खोज हुई है।
III. अपेक्षाकृत रूप से विस्तृत प्रांगण के चारों ओर, अधिकतर पकी हुई ईंटों से निर्मित घर मिले हैं, जिनके अपने कुएँ हैं, स्नान करने के चबूतरे हैं, और बड़े कमरे हैं।
उपर्युक्त कथनों से निम्नलिखित में से कौन-से निष्कर्ष निकाले जा सकते हैं ?
1. कथन I संकेत करता है कि कताई घर पर किया जाने वाला एक श्रम-साध्य कार्य था ।
2. कथन II हड़प्पा के लोगों में वैज्ञानिक ज्ञान के प्रसार की ओर संकेत करता है।
3. कथन III साझी संपत्ति व्यवस्था के उद्भव की ओर संकेत करता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और
(d) 1, 2 और 3
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व्याख्या:
निष्कर्ष 1 सही है: कताई के लिए ‘तकली’ (Spindle whorls) का हर घर में मिलना और ‘चरखे’ (जो कि बहुत बाद की तकनीक है) का न होना यह दर्शाता है कि सूत कातना हाथ से किया जाने वाला एक अत्यधिक समय और श्रम-साध्य कार्य था।
निष्कर्ष 2 सही है: मानकीकृत और अंशांकित बाट (Weights) तथा मापन पैमानों (Scales) का मिलना यह प्रमाणित करता है कि हड़प्पा वासियों के पास सटीकता, गणित और मापन का परिष्कृत वैज्ञानिक ज्ञान था।
निष्कर्ष 3 गलत है: बड़े प्रांगण, निजी कुएँ और स्नानागार वाले पक्के मकान साझी संपत्ति व्यवस्था को नहीं, बल्कि व्यक्तिगत समृद्धि, निजी स्वामित्व और वर्ग-विभाजन (आर्थिक असमानता) की ओर संकेत करते हैं।
Q19. एका आंदोलन और बारदोली सत्याग्रह के बारे में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है ?
(a) एका आंदोलन आद्योपांत कांग्रेस द्वारा समर्थित एवं संगठित था, जबकि बारदोली सत्याग्रह आरंभ कांग्रेस के प्रभाव से मुक्त था और केवल अंतिम चरण में कांग्रेस द्वारा समर्थित था ।
(b) एका आंदोलन का नेतृत्व अवध के तालुकदारों द्वारा किया गया था, जबकि बारदोली सत्याग्रह भूमिहीन श्रमिकों का आंदोलन था।
(c) बारदोली सत्याग्रह भू-राजस्व की वृद्धि के विरुद्ध एक अभियान था, जबकि एका आंदोलन लगान (rent) की अत्यधिक वसूली के विरोध में था ।
(d) एका आंदोलन वर्तमान उत्तर प्रदेश के वाराणसी और मिर्ज़ापुर ज़िलों में केंद्रित था, जबकि बारदोली सत्याग्रह सौराष्ट्र में हुआ था ।
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व्याख्या: बारदोली सत्याग्रह (1928, गुजरात): बॉम्बे प्रेसीडेंसी द्वारा कपास की गिरती कीमतों के बावजूद भू-राजस्व (Land Revenue/Tax) में 22-30% की अनुचित वृद्धि करने के खिलाफ सरदार पटेल के नेतृत्व में चलाया गया था।
एका आंदोलन (1921-22, अवध/UP): यह मुख्य रूप से तालुकदारों और जमींदारों द्वारा दर्ज लगान से 50% से अधिक अत्यधिक लगान (Rent) और बेगार वसूली के खिलाफ मदारी पासी के नेतृत्व में चलाया गया था।
अन्य विकल्प गलत हैं: एका आंदोलन मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश के अवध क्षेत्र (हरदोई, बहराइच, सीतापुर) में केंद्रित था, न कि वाराणसी-मिर्जापुर में; और बारदोली सत्याग्रह सूरत जिले में हुआ था, सौराष्ट्र में नहीं।
Q20. ऋग्वेदिक काल के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
I. कूपों से की जाने वाली सिंचाई ने कृषि को प्लावनीय मैदानों और नदी किनारों की पट्टियों से दूर वर्तमान पंजाब और हरियाणा के मैदानों में विस्तृत होने का अवसर दिया जहाँ भूमिगत जल स्तर सतह के पर्याप्त समीप था।
II. कूपों से पानी निकालने के लिए भारवाही पशु शक्ति का प्रयोग किया गया ।
निम्नलिखित में से कौन-सी सूचना, उपर्युक्त कथनों का समर्थन करती है/हैं?
1. ऋग्वेद में, पानी निकालने के लिए अश्म चक्र (पत्थर की घिरनी) और आहाव (पट्टी से कसा हुआ लकड़ी का डोल) के उपयोग के साक्ष्य हैं।
2. ऋग्वेद में पर्शु/कुलीश (कुल्हाड़ी) और दात्र/सृणी (हँसिया) जैसे उपकरणों के उपयोग का उल्लेख मिलता है।
3. ऋग्वेद से पहले भी, भूमि को जोतने और गाड़ियों को खींचने के लिए बैल के उपयोग का इतिहास मिलता है।
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर उत्तर चुनिए :
(a) केवल 1 और 2
(b) 1, 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) केवल 3
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व्याख्या: ऋग्वेद के 10वें मंडल और अन्य सूक्तों में कृषि और कूप (कुओं) से सिंचाई का विस्तृत विवरण है:
कथन 1 सही है: ऋग्वेद में कुएँ से पानी खींचने के लिए ‘अश्म-चक्र’ (पत्थर की घिरनी या चरखी) और ‘आहाव’ (पानी की द्रोणी/डोल) का स्पष्ट उल्लेख है।
कथन 2 सही है: फसलों की कटाई और कल्टीवेशन के लिए ‘दात्र’ / ‘सृणी’ (हँसिया/दरांती) और लकड़ी काटने या साफ करने के लिए ‘परशु’ (कुल्हाड़ी) का उल्लेख मिलता है, जो इन कथनों का समर्थन करते हैं।
कथन 3 अप्रासंगिक है: यद्यपि बैल का उपयोग पुराना था, लेकिन यह तथ्य विशेष रूप से “कुओं से पानी निकालने के लिए भारवाही पशु शक्ति के प्रयोग” के तकनीकी ऋग्वैदिक साक्ष्य का सीधा समर्थन नहीं करता, जितना कि कथन 1 और 2 तकनीकी उपकरणों के माध्यम से करते हैं।
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