UTET Exam 29 Sep 2026 Paper – 1 (Language I - Hindi) (Answer Key)

UTET Exam 29 September 2026 Paper – I (भाषा प्रथम – हिन्दी) (Answer Key)

September 29, 2026

Q46. प्रस्तुत पंक्ति के सन्दर्भ में असत्य कथन का चयन कीजिए:
‘चमकि बीजु बन गरजि तरासा । विरह काल होई जीव गरासा।।’
(A) विरह का मानवीकरण
(B) अवधी भाषा का प्रयोग
(C) वियोग श्रृंगार
(D) प्रकृति का आलम्बन रूप में चित्रण

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Answer – (D)

व्याख्या: यह पंक्ति मलिक मोहम्मद जायसी कृत ‘पद्मावत’ के नागमती वियोग खंड से ली गई है।

  • इसमें अवधी भाषा है, वियोग शृंगार है और विरह को काल (यमराज) के रूप में दिखाकर ग्रास करते हुए मानवीकरण किया गया है।
  • यहाँ बिजली का चमकना और बादलों का गरजना नागमती के विरह-दुःख को और अधिक भड़का रहे हैं, अतः यहाँ प्रकृति का चित्रण उद्दीपन रूप में हुआ है, आलम्बन रूप में नहीं। इसलिए कथन (D) असत्य है।

Q47. द्विवेदी युग में कौन सा महाकाव्य लिखा गया है ?
(A) लोकायतन
(B) प्रिय प्रवास
(C) कामायनी
(D) इनमें से कोई नहीं

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Answer – (B)

व्याख्या: ‘प्रिय प्रवास’ (1914 ई.) अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध’ द्वारा रचित खड़ी बोली हिंदी का प्रथम महाकाव्य है, जो द्विवेदी युग की सर्वश्रेष्ठ कृति है। (कामायनी छायावाद की है तथा लोकायतन छायावादोत्तर/प्रगतिशील युग की है)।

Q48. “कंकन- किंकिनि नूपुर धुनि सुनि कहत लखन सन रामु हृदयँ गुनि।” में कौन-से काव्य गुण की प्रधानता है ?
(A) माधुर्य
(B) प्रसाद
(C) ओज
(D) इनमें से कोई नहीं

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Answer – (A)

व्याख्या: यह प्रसंग रामचरितमानस के पुष्पवाटिका प्रसंग का है, जहाँ शृंगार रस का परिपाक हो रहा है। कोमलकांत पदावली, कर्णप्रियता तथा चित्त को द्रवित व आनंदित करने वाले शब्दों के कारण यहाँ माधुर्य गुण की प्रधानता है।

Q49. भरत के रस सूत्र के व्याख्याता आचार्य शंकुक का सिद्धांत कहलाता है :
(A) उत्पत्तिवाद
(B) अभिव्यंजनावाद
(C) अनुमितिवाद
(D) भुक्तिवाद

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Answer – (C)

व्याख्या: रस सूत्र के चार प्रमुख व्याख्याकारों के सिद्धान्त इस प्रकार हैं:

  • भट्ट लोल्लट – उत्पत्तिवाद (आरोपवाद)
  • आचार्य शंकुक – अनुमितिवाद (चित्र-तुरग न्याय पर आधारित)
  • भट्ट नायक – भुक्तिवाद (भोगवाद)
  • अभिनवगुप्त – अभिव्यक्तिवाद

Q50. ‘अघोष’ व्यंजन हैं
(A) क ख च छ
(B) य र ल व
(C) न ब भ म
(D) इनमें से कोई नहीं

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Answer – (A)

व्याख्या: प्रत्येक स्पर्श व्यंजन वर्ग का पहला और दूसरा वर्ण तथा श, ष, स ‘अघोष’ होते हैं।

  • वर्ग का प्रथम और द्वितीय: क, ख (क-वर्ग) तथा च, छ (च-वर्ग) अघोष वर्ण हैं।
  • शेष य, र, ल, व तथा न, ब, भ, म सघोष/घोष वर्ण हैं।

Q51. छायावाद को “शक्ति काव्य” किसने कहा है ?
(A) डॉ० रामदरश मिश्र
(B) डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी
(C) डॉ० नामवर सिंह
(D) डॉo बच्चन सिंह

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Answer – (B)

व्याख्या: प्रसिद्ध आलोचक डॉ० रामस्वरूप चतुर्वेदी ने अपने आलोचनात्मक ग्रंथ ‘हिंदी साहित्य और संवेदना का विकास’ में निराला की ‘राम की शक्तिपूजा’ जैसी कविताओं के संदर्भ में छायावाद को “शक्ति काव्य” कहा है।

Q52. केंद्रीय हिंदी संस्थान का मुख्यालय कहाँ है ?
(A) आगरा
(B) बरेली
(C) लखनऊ
(D) प्रयागराज

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Answer – (A)

व्याख्या: केंद्रीय हिंदी संस्थान (Central Institute of Hindi) भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन एक उच्चतर स्वायत्त शिक्षण संस्थान है, जिसका मुख्यालय आगरा (उत्तर प्रदेश) में स्थित है।

Q53. एफ० जी० फ्रेंच द्वारा भाषा शिक्षण के संरचनात्मक आयाम के सिद्धांतों में से नहीं है :
(A) वाचन पर बल देना
(B) कल्पना का विकास करना
(C) भाषायी आदतों का विकास करना
(D) छात्रों की क्रियाशीलता

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Answer – (B)

व्याख्या: एफ० जी० फ्रेंच (F. G. French) के संरचनात्मक उपागम (Structural Approach) में भाषा को एक आदत-निर्माण प्रक्रिया माना गया है। इसके मुख्य तत्व वाचन/मौखिक अभ्यास पर बल देना, भाषायी आदतों का निर्माण और छात्रों की सक्रिय क्रियाशीलता हैं। इसमें अमूर्त कल्पना का विकास करना प्रत्यक्ष सिद्धांत के रूप में शामिल नहीं है।

Q54. निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति की मूल बिन निज भाषा ज्ञान के, मिटे न हिय को शूल।। इन पंक्तियों में कौन-सा छन्द है ?
(A) दोहा
(B) रोला
(C) चौपाई
(D) बरवै

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Answer – (A)

व्याख्या: यह भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियाँ हैं। यह एक अर्धसम मात्रिक छंद है, जिसके पहले और तीसरे चरण में 13-13 मात्राएँ तथा दूसरे और चौथे चरण में 11-11 मात्राएँ हैं:

  • निज भाषा उन्नति अहै (1+1 + 2+2 + 1+1+1 + 1+2 = 13 मात्राएँ)
  • सब उन्नति को मूल (1+1 + 1+1+1 + 2 + 2+1 = 11 मात्राएँ)
  • अतः यह दोहा छंद है।

Q55. निम्न में कविता शिक्षण की विधि है
(A) तुलना विधि
(B) समीक्षा विधि
(C) व्यास विधि
(D) उपरोक्त सभी

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Answer – (D)

व्याख्या: पद्य या कविता शिक्षण में भाव-सौंदर्य और शिल्प को समझाने के लिए गीत/नाट्य विधि, अर्थ-बोध विधि, तुलना विधि, समीक्षा विधि तथा व्यास विधि (कथावाचक शैली) सभी का प्रयोग स्तरानुसार किया जाता है। अतः सही उत्तर उपरोक्त सभी है।

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों (प्रश्न संख्या 56 से 59 तक) के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए:

जब समाचार-पत्रों में सर्वसाधारण के लिए कोई सूचना प्रकाशित की जाती है, तो उसको विज्ञापन कहते हैं। यह सूचना नौकरियों से संबंधित हो सकती है, खाली मकान को किराए पर उठाने के संबंध में हो सकती है या किसी औषधि के प्रचार से संबंधित हो सकती है। कुछ लोग विज्ञापन के आलोचक हैं। वे इसे निरर्थक मानते हैं। उनका मानना है कि यदि कोई वस्तु यथार्थ रूप में अच्छी है, तो वह बिना किसी विज्ञापन के ही लोगों के बीच लोकप्रिय हो जाएगी, जबकि खराब वस्तुएँ विज्ञापन की सहायता पाकर भी भंडाफोड़ होने पर बहुत दिनों तक टिक नहीं पाएँगी, परंतु लोगों की यह सोच गलत है।

आज के युग में मानव का प्रचार-प्रसार का दायरा व्यापक हो चुका है। अतः विज्ञापनों का होना अनिवार्य हो जाता है। किसी अच्छी वस्तु की वास्तविकता से परिचय पाना आज के विशाल संसार में विज्ञापन के बिना नितांत असंभव है। विज्ञापन ही वह शक्तिशाली माध्यम है, जो हमारी जरूरत की वस्तुएँ प्रस्तुत करता है, उनकी माँग बढ़ाता है और अंततः हम उन्हें जुटाने चल पड़ते हैं। यदि कोई व्यक्ति या कंपनी किसी वस्तु का निर्माण करती है, उसे उत्पादक कहा जाता है। उन वस्तुओं और सेवाओं को खरीदने वाला उपभोक्ता कहलाता है। विज्ञापन इन दोनों को जोड़ने का कार्य करता है। वह उत्पादक को उपभोक्ता के संपर्क में लाता है तथा माँग और पूर्ति में संतुलन स्थापित करने का प्रयत्न करता है। पुराने जमाने में किसी वस्तु की अच्छाई का विज्ञापन मौखिक तरीके से होता था। काबुल का मेवा, कश्मीर की ज़री का काम, दक्षिण भारत के मसाले आदि वस्तुओं की प्रसिधि मौखिक रूप से होती थी। उस समय आवश्यकता भी कम होती थी तथा लोग किसी वस्तु के अभाव की तीव्रता का अनुभव नहीं करते थे। आज समय तेजी का है। संचार क्रांति ने जिंदगी को स्पीड दे दी है। मनुष्य की आवश्यकताएँ बढ़ती जा रही हैं, इसलिए विज्ञापन मानव जीवन की अनिवार्यता बन गया है।

Q56. विज्ञापन का मुख्य उद्देश्य क्या है ?
(A) वस्तुओं का निर्माण करना
(B) वस्तुओं को खरीदना
(C) उत्पादक और उपभोक्ता को जोड़ना
(D) वस्तुओं का भंडारण करना

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Answer – (C)

व्याख्या: गद्यांश की पंक्ति के अनुसार— “यदि कोई व्यक्ति या कंपनी किसी वस्तु का निर्माण करती है, उसे उत्पादक कहा जाता है… विज्ञापन इन दोनों को जोड़ने का कार्य करता है। वह उत्पादक को उपभोक्ता के संपर्क में लाता है…”

Q57. विज्ञापन के आलोचक क्या मानते हैं ?
(A) विज्ञापन आवश्यक है
(B) विज्ञापन निरर्थक है
(C) विज्ञापन वस्तुओं की माँग बढ़ाता है
(D) विज्ञापन शक्तिशाली माध्यम है।

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Answer – (B)

व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट उल्लेख है— “कुछ लोग विज्ञापन के आलोचक हैं। वे इसे निरर्थक मानते हैं।”

Q58. पुराने समय में काबुल के मेवे और कश्मीर की ज़री का काम कैसे प्रसिद्ध होता था ?
(A) विज्ञापन से
(B) घोड़ों से
(C) संदेशवाहकों से
(D) मौखिक रूप से

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Answer – (D)

व्याख्या: गद्यांश के अनुसार— “पुराने जमाने में किसी वस्तु की अच्छाई का विज्ञापन मौखिक तरीके से होता था। काबुल का मेवा, कश्मीर की ज़री का काम, दक्षिण भारत के मसाले आदि वस्तुओं की प्रसिद्धि मौखिक रूप से होती थी।”

Q59. विज्ञापन क्यों अनिवार्य हो गया है ?
(A) मनुष्य की आवश्यकताएँ बढ़ने से
(B) संचार क्रांति के कारण समय की गति तीव्र होने से
(C) उपभोक्ता बढ़ने से
(D) उपर्युक्त सभी कारणों से

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Answer – (D)

व्याख्या: गद्यांश के अंतिम भाग में बताया गया है कि संचार क्रांति से समय की गति तीव्र हुई है, मानव की आवश्यकताएँ बढ़ी हैं और उत्पादक-उपभोक्ता का दायरा विस्तृत हुआ है। अतः ये सभी कारण मिलकर विज्ञापन को अनिवार्य बनाते हैं।

Q60. “दसरथ सुत तिहुँ लोक बखाना।
राम नाम का मरम है आना ।।” किस कवि की पंक्ति है ?
(A) तुलसीदास
(B) कबीरदास
(C) केशवदास
(D) रामानन्द

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Answer – (B)

व्याख्या: यह प्रसिद्ध पंक्ति कबीरदास की है। कबीर निर्गुण राम के उपासक थे। इस साखी के माध्यम से वे स्पष्ट करते हैं कि जिस प्रकार संसार दशरथ-पुत्र सगुण राम का गुणगान करता है, मेरे ‘राम’ नाम का मर्म (रहस्य) उससे सर्वथा भिन्न (निर्गुण, निराकार, घट-घट वासी) है।

 

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