उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद् (UBSE – Uttarakhand Board of School Education) द्वारा 29 सितम्बर, 2026 को UTET (Uttarakhand Teachers Eligibility Test) की परीक्षा का आयोजन किया गया। UTET (Uttarakhand Teachers Eligibility Test) Exam Paper 2026 – भाषा प्रथम – हिन्दी की उत्तरकुंजी (Language First Hindi Part Answer Key).
UBSE (Uttarakhand Board of School Education) Conduct the UTET (Uttarakhand Teachers Eligibility Test) 2026 Exam on 29 September, 2026. Here UTET Paper 1 Language Subject Paper with Official Answer Key.
UTET (Uttarakhand Teachers Eligibility Test)
Exam :− UTET (Uttarakhand Teachers Eligibility Test)
Part :− भाषा प्रथम – हिन्दी
Organized by :− UBSE
Number of Question :− 30
Exam Date :– 29th September, 2026
| UTET Primary Level Paper Answer Key | Link |
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UTET Exam 2026 Paper – I (Primary Level) Answer Key
Part – II (भाषा प्रथम – हिन्दी)
निर्देश : निम्नलिखित पद्यांश को पढ़कर पूछे गये प्रश्नों (प्रश्न संख्या 31 से 34 तक) के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए:
माना आज मशीनी युग में, समय बहुत महँगा है लेकिन तुम थोड़ा अवकाश निकालो, तुमसे दो बातें करनी हैं। उम्र बहुत बाकी है, लेकिन, उम्र बहुत छोटी भी तो है एक स्वप्न मोती का है तो, एक स्वप्न रोटी भी तो है घुटनों में माथा रखने से पोखर पार नहीं होता है; सोया है विश्वास जगा लो, हम सबको नदियाँ तरनी हैं! तुम थोड़ा अवकाश निकालो, तुमसे दो बातें करनी हैं! मन छोटा करने से मोटा काम नहीं छोटा होता है, नेह-कोष को खुलकर बाँटो, कभी नहीं टोटा होता है, आँसू वाला अर्थ न समझो, तो सब ज्ञान व्यर्थ जाएँगे; मत सच का आभास दबा लो, शाश्वत आग नहीं मरनी है। तुम थोड़ा अवकाश निकालो, तुमसे दो बातें करनी हैं।
Q31. कविता में ‘उम्र बहुत छोटी भी तो है’ का क्या तात्पर्य है ? व्याख्या: पद्यांश में कवि कहता है— “उम्र बहुत बाकी है, लेकिन, उम्र बहुत छोटी भी तो है”। यहाँ कवि जीवन की क्षणभंगुरता और अनिश्चितता को रेखांकित कर रहा है कि समय कब बीत जाए कुछ पता नहीं, इसलिए भागदौड़ छोड़कर अपनों के लिए समय निकालना चाहिए।
(A) जीवन में जिम्मेदारियों का अधिक होना
(B) जीवन की अनिश्चितता और क्षणभंगुरता
(C) समय का बहुत तेजी से बीतना
(D) जीवन में दुःखों का अधिक होना
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Q32. ‘एक स्वप्न मोती का है तो, एक स्वप्न रोटी भी तो है’ पंक्ति का क्या आशय है ? व्याख्या: यहाँ ‘मोटी’ समृद्धि, यश और उच्च भौतिक आकांक्षाओं (विलासिता) का प्रतीक है तथा ‘रोटी’ जीवन की प्राथमिक व मूलभूत आवश्यकता (पेट भरने/जीविका) का प्रतीक है। मनुष्य के जीवन में इन दोनों प्रकार के सपनों का अस्तित्व रहता है।
(A) मोती और रोटी दोनों ही अनमोल हैं।
(B) जीवन में भौतिक सुख-सुविधाएँ और मूलभूत आवश्यकताएँ दोनों आवश्यक हैं।
(C) अमीर और गरीब के सपनों में अंतर होता है।
(D) मनुष्य को केवल भोजन के बारे में सोचना चाहिए।
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Q33. ‘घुटनों में माथा रखने से पोखर पार नहीं होता है’ के माध्यम से कवि क्या संदेश देना चाहता है ? व्याख्या: घुटनों में सिर रखकर बैठना निराशा, लाचारी और निष्क्रियता का प्रतीक है। कवि का संदेश है कि सिर्फ बैठकर दुखी होने या डरने से जीवन की छोटी-सी बाधा (पोखर) भी पार नहीं होती; विश्वास जगाकर कर्म और संघर्ष करना अनिवार्य है।
(A) रोने-धोने से मुसीबतें कम नहीं होतीं
(B) केवल चिंता या निराशा में डूबे रहने से कठिनाइयों का हल नहीं निकलता, प्रयास करना जरूरी है
(C) पोखर तैरकर ही पार किया जा सकता है
(D) हिम्मत हारकर बैठ जाना ही समझदारी है
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Q34. कवि ‘नेह-कोष को खुलकर बाँटने की सलाह क्यों दे रहा है ? व्याख्या: पंक्ति है— “नेह-कोष को खुलकर बाँटो, कभी नहीं टोटा होता है”; ‘टोटा’ का अर्थ हानि या कमी होना है। कवि का भाव यह है कि स्नेह और प्रेम का खजाना ऐसा है जिसे जितना बाँटा जाए, वह कभी घटता नहीं है।
(A) क्योंकि प्रेम बाँटने से कभी कम नहीं होता, बल्कि बढ़ता है।
(B) क्योंकि धन-दौलत बाँटने से कम हो जाती है।
(C) क्योंकि दुनिया में प्रेम की बहुत कमी है।
(D) क्योंकि लोग प्रेम का मोल नहीं समझते।
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Q35. ध्वनि विज्ञान शिक्षण की प्रमुख विधि नहीं है। व्याख्या: ध्वनि विज्ञान (Phonetics) शुद्ध उच्चारण और ध्वनि-संकेतों के अभ्यास से संबंधित है। इसके लिए अनुकरण विधि, सामूहिक अभ्यास विधि और भाषा प्रयोगशाला (Language Lab) अत्यंत उपयोगी हैं। जबकि समीक्षा विधि (Criticism/Evaluation method) उच्च स्तर पर साहित्य (काव्य/गद्य) के गुण-दोष विवेचन की विधि है, ध्वनि शिक्षण की नहीं।
(A) सामूहिक अभ्यास विधि
(B) भाषा प्रयोगशाला विधि
(C) अनुकरण विधि
(D) समीक्षा विधि
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Q36. निर्गुण सन्त कवियों के संदर्भ में कौन-सा कथन सही नहीं है ? व्याख्या: कबीर आदि संत कवि मुख्यतः समाज सुधारक और उपदेशक थे। उन्होंने काव्यशास्त्रीय नियमों, अलंकरण या काव्यसौष्ठव (चमत्कार प्रदर्शन) के लिए कविता नहीं रची। उनका ध्येय केवल अपनी बात जनसामान्य तक सरलता से पहुँचाना था, न कि काव्योत्कर्ष दिखाना।
(A) अधिकतर कवियों की भाषा का रूप स्थिर नहीं है।
(B) अधिकतर कवि काव्यरस या लौकिक रस के प्रति सजग नहीं रहे।
(C) अधिकतर कवियों का ध्यान जनहित की रचनाओं के साथ-साथ काव्योत्कर्ष अथवा काव्यसौष्ठव पर भी रहता था।
(D) अधिकतर सन्त कवियों की भाषा सरल और सहज है।
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Q37. निम्नलिखित वाक्य में कौन-सी शब्द शक्ति है ? व्याख्या: यहाँ ‘शेर’ का अर्थ वास्तविक पशु न होकर ‘वीर/पराक्रमी योद्धा’ है और ‘गीदड़’ का अर्थ ‘कायर सैनिक’ है। जब मुख्य अर्थ (अभिधा) में बाधा उत्पन्न हो और रूढ़ि या प्रयोजन के आधार पर लक्ष्यार्थ ग्रहण किया जाए, वहाँ लक्षणा शब्द शक्ति होती है।
“जब शेर आया तो युद्ध क्षेत्र से गीदड़ भाग गए”
(A) व्यंजना
(B) लक्षणा
(C) अभिधा
(D) इनमें से कोई नहीं
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Q38. ‘पुष्टिमार्ग’ का आधार है : व्याख्या: पुष्टिमार्ग के प्रवर्तक वल्लभाचार्य हैं। उनका दार्शनिक मत शुद्धाद्वैतवाद (Shuddhadvaita) कहलाता है। ‘पुष्टि’ का अर्थ भगवद्-अनुग्रह या ईश्वर की कृपा होता है।
(A) शुद्धाद्वैतवाद
(B) द्वैतवाद
(C) विशिष्टाद्वैतवाद
(D) द्वैताद्वैतवाद
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Q39. निम्नांकित में गढ़वाली की उपबोली है : व्याख्या: सलाणी पौड़ी गढ़वाल (विशेषकर तल्ला-मल्ला सलाण क्षेत्र) में बोली जाने वाली गढ़वाली की प्रमुख उपबोली है। (जबकि खसपरजिया, पछाई और जोहारी कुमाऊँनी बोली की उपबोलियाँ हैं)।
(A) खसपरजिया
(B) पछाई
(C) जोहारी
(D) सलाणी
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Q40. मौन वाचन शिक्षण का उद्देश्य है : व्याख्या: मौन वाचन (Silent Reading) करते समय छात्र बिना ध्वनि किए तेजी से पढ़ते हैं, जिससे उनकी गहन सोच, मनन शक्ति (चिंतन) और तार्किक योग्यता का तेजी से विकास होता है।
(A) तार्किक योग्यता का विकास
(B) मनन शक्ति
(C) दोनों (A) व (B)
(D) इनमें से कोई नहीं
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Q41. वाक्य रचना के शिक्षण हेतु कौन अधिक उपयुक्त हैं ? व्याख्या: पद्य/काव्य में तुक, लय और छंद के कारण शब्दों का क्रम (अन्वय) बदल जाता है, जबकि गद्य व्याकरण के नियमों और पदक्रम (कर्ता + कर्म + क्रिया) पर आधारित स्वाभाविक वाक्य-संरचना सिखाने के लिए सर्वाधिक उपयुक्त होता है।
(A) काव्य
(B) गद्य
(C) चंपू
(D) इनमें से कोई नहीं
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Q42. रिपोर्ताज किस भाषा का शब्द है ? व्याख्या: ‘रिपोर्ताज’ (Reportage) फ्रांसीसी (French) भाषा का शब्द है। द्वितीय विश्वयुद्ध के समय यह विधा पत्रकारिता और साहित्य के संयोग से विकसित हुई थी।
(A) अंग्रेजी
(B) फ्रांसीसी
(C) जर्मन
(D) पुर्तगाली
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Q43. मैथिलीशरण गुप्त के बारे में असंगत है व्याख्या: मैथिलीशरण गुप्त की भाषा क्लिष्ट (कठिन/जटिल) नहीं, बल्कि सरल, सहज, प्रवाहमयी और सुबोध खड़ी बोली है। उन्होंने महावीर प्रसाद द्विवेदी के मार्गदर्शन में खड़ी बोली को सरस काव्यभाषा का स्वरूप दिया।
(A) क्लिष्ट खड़ी बोली में काव्य रचना
(B) राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत रचनाओं का सृजन
(C) हिन्दी के जातीय मात्रिक छन्दों का प्रयोग
(D) गृहस्थ जीवन में प्रचलित आख्यानों की रचना
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Q44. मातृभाषा की प्रमुख शिक्षण विधि निम्नलिखित में से है व्याख्या: बच्चा मातृभाषा का अर्जन मुख्य रूप से परिवार और परिवेश के लोगों का अनुकरण (Imitation) करके ही स्वाभाविक रूप से करता है।
(A) अनुकरण विधि
(B) पर्यवेक्षण विधि
(C) अप्रत्यक्ष विधि
(D) वैस्ट विधि
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Q45. लोकगीत भाषा शिक्षण में किस तरह उपयोगी नहीं हो सकते हैं ? व्याख्या: यह कथन पूर्णतः गलत और असंगत है। लोकगीतों से शिक्षण अप्रभावी नहीं, बल्कि अत्यंत रोचक, सजीव, प्रभावी और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनता है।
(A) लोकगीतों से भाषा शिक्षण अप्रभावी बनता है।
(B) लोकगीतों से बच्चे संस्कृतिगत विशेषताओं से परिचित होते हैं।
(C) लोकगीत बच्चे जल्दी सीखते हैं।
(D) लोकगीत शब्द ज्ञान बढ़ाने में सहायक होते हैं।
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