WEEKLY UKPCS CURRENT AFFAIRS - (20 Sep – 26 Sep 2026)

WEEKLY UKPCS CURRENT AFFAIRS – (20 Sep – 26 Sep 2026)

September 27, 2026

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) की भूमिका केवल तथ्य याद रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अवधारणात्मक स्पष्टता और उत्तर-लेखन की गहराई को निर्धारित करती है। 20 सितंबर से 26 सितंबर 2026 के मध्य घटित राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय घटनाक्रम UKPSC की प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य (Mains) दोनों परीक्षाओं के पाठ्यक्रम के अनुसार अत्यंत प्रासंगिक हैं।

Executive Summary

संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र से पूर्व जारी UN-UNEP Global Plastic Pollution Accord Draft ने ई-अपशिष्ट और प्लास्टिक नियंत्रण पर कड़े कानून बनाने की दिशा में भारत सहित विकासशील देशों के लिए नए लक्ष्य निर्धारित किए हैं। राष्ट्रीय स्तर पर, वित्त मंत्रालय एवं SEBI ने पूंजी बाजार में T+0 ट्रेड सेटलमेंट चक्र (Trade Settlement Cycle) को संस्थागत निवेशकों के लिए व्यापक रूप से विस्तारित किया है, जिससे भारतीय वित्तीय बाजारों में तरलता (Liquidity) और पारदर्शिता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।

शासन एवं प्रौद्योगिकी के मोर्चे पर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) तथा NITI Aayog द्वारा संयुक्त रूप से Responsible AI Alignment Framework 2026 जारी किया गया है, जो एआई-जनित डीपफेक और साइबर-सुरक्षा जोखिमों को नियंत्रित करने हेतु वैधानिक आधार तैयार करता है। अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में ISRO ने अपने गगनयान (Gaganyaan) कार्यक्रम के तहत Uncrewed Mission (G1) Test की अंतिम चरण की सिमुलेशन प्रक्रिया सफलता से पूरी की है। राज्य विशेष में, उत्तराखंड सरकार द्वारा राज्य आपदा जोखिम प्रबंधन कोष (SDRMF) के अंतर्गत पिथौरागढ़ और चमोली जिलों के अति-संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में AI-आधारित लैंडस्लाइड अर्ली वार्निंग सिस्टम (LEWS) स्थापित करने का नीतिगत फैसला लिया गया है।

Week at a Glance

  • 20 सितम्बर: SEBI और वित्त मंत्रालय द्वारा इक्विटी बाजारों में सेकंड-टू-सेकंड T+0 सेटलमेंट चरण-II के विस्तार की अधिसूचना जारी; विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) हेतु प्रक्रिया सरल।
  • 21 सितम्बर: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा गांधीनगर में आयोजित WCEF 2026 के समापन पर Global Plastic Treaty 2026 Action Plan का ड्राफ्ट साझा किया गया।
  • 22 सितम्बर: इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा National Deepfake Mitigation and AI Alignment Guidelines 2026 का औपचारिक अनावरण।
  • 23 सितम्बर: ISRO द्वारा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) से गगनयान G1 (Uncrewed Mission) की एनवायरनमेंटल कंट्रोल एंड लाइफ सपोर्ट सिस्टम (ECLSS) सिमुलेशन टेस्ट की सफलता।
  • 24 सितम्बर: गृह मंत्रालय द्वारा क्रिटिकल इंफॉर्मेशन इन्फ्रास्ट्रक्चर (CII) के संरक्षण हेतु साइबर सुरक्षा अभ्यास ‘सुरक्षा दृष्टि 2026’ का सफल आयोजन।
  • 25 सितम्बर: रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकों और NBFCs के लिए Green Deposit Framework 2.0 के विस्तृत परिचालन दिशानिर्देश जारी।
  • 26 सितम्बर: उत्तराखंड सरकार के आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा उच्च हिमालयी घाटियों में भूस्खलन की पूर्व सूचना हेतु GIS & AI-LEWS (Landslide Early Warning System) परियोजना को वित्तीय स्वीकृति।

Major Current Affairs

AI अलाइनमेंट फ़्रेमवर्क और डीपफ़ेक से निपटने के लिए गाइडलाइन्स 2026

Category: शासन, प्रौद्योगिकी एवं साइबर सुरक्षा

क्या हुआ? (WHAT)

  • 22 सितम्बर 2026 को इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने NITI Aayog के सहयोग से Responsible AI Alignment Framework 2026 जारी किया।
  • इसके तहत एआई मॉडल डेवलपर्स और सोशल मीडिया मध्यस्थों (Social Media Intermediaries) के लिए डिजिटल वॉटरमार्किंग (Digital Watermarking) और एआई-जनित सामग्री (AI-generated content) को अनिवार्य रूप से टैग करना अनिवार्य कर दिया गया है।
  • डीपफेक और भ्रामक जानकारी (Misinformation) को 24 घंटे के भीतर हटाने में विफल रहने पर कंपनियों के Safe Harbour Protection (IT Act धारा 79) को निलंबित करने का प्रावधान किया गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं, राष्ट्रीय सुरक्षा, व्यक्तिगत निजता (Right to Privacy – Article 21) और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी के संरक्षण हेतु यह एक मील का पत्थर नीतिगत ढांचा है।

Background

  • IT Rules, 2021 (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) में तेजी से विकसित होती जनरेटिव एआई (Generative AI) प्रौद्योगिकियों से निपटने के लिए विशिष्ट तंत्र की कमी थी।
  • यूरोपीय संघ के EU AI Act और भारत के Digital Personal Data Protection (DPDP) Act, 2023 के वैधानिक सिद्धांतों को ध्यान में रखते हुए यह नया फ्रेमवर्क तैयार किया गया है।

प्रमुख तथ्य

  • नोडल मंत्रालय: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY)।
  • मुख्य वैधानिक प्रावधान: IT Act, 2000 की धारा 66D, 66E, 79 तथा DPDP Act, 2023 का एकीकरण।
  • अनुपालन समय-सीमा: प्रमुख मध्यस्थों हेतु 30 दिनों के भीतर AI Watermarking Systems का कार्यान्वयन अनिवार्य।

Static Knowledge Link

  • Polity & Law: संविधान का अनुच्छेद 21 (के.एस. पुट्टास्वामी मामला – निजता का अधिकार), IT Act 2000 की धारा 79 (Safe Harbour Provision), और न्यायधीश बी.एन. श्रीकृष्ण समिति की सिफारिशें।

कैसे काम करता है? 

  • क्रिप्टोग्राफिक वॉटरमार्किंग (Cryptographic Watermarking): जब भी कोई एआई मॉडल (जैसे LLMs या इमेज जनरेटर) सामग्री तैयार करेगा, तो उसमें एक अदृश्य डिजिटल हस्ताक्षर (Invisible Metadata Hash) एम्बेड कर दिया जाएगा, जिससे उसके उद्गम (Origin) का तुरंत पता लगाया जा सकेगा।

Challenges

  • ओपन-सोर्स एआई मॉडलों (Open-source AI Models) पर निगरानी की कठिनाई और डार्क वेब पर एआई टूल्स का प्रसार।

Way Forward

  • राष्ट्रीय साइबर फॉरेंसिक प्रयोगशाला (NCFL) को एआई-फॉरेंसिक टूल्स से लैस करना और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एआई गवर्नेंस प्रोटोकॉल (Global AI Safety Pacts) का निर्माण।

पूंजी बाजार में T+0 सेटलमेंट चक्र (Trade Settlement Cycle) का विस्तार

Category: अर्थव्यवस्था एवं पूंजी बाजार

क्या हुआ? (WHAT)

  • भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 20 सितम्बर 2026 से भारतीय शेयर बाजारों में शीर्ष 500 सूचीबद्ध कंपनियों के लिए T+0 ट्रेड सेटलमेंट (Same-Day Settlement) का चरण-II व्यापक रूप से लागू किया।
  • इसके तहत निवेशक द्वारा शेयर बेचने के तुरंत बाद उसी दिन (Same Day) धन उसके बैंक खाते में स्थानांतरित कर दिया जाएगा और खरीदार को शेयर उसी दिन डिमैट खाते में मिल जाएंगे।
  • भारत T+0 सेटलमेंट को बड़े पैमाने पर लागू करने वाला विश्व का पहला प्रमुख वित्तीय बाजार बन गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • शेयर बाजार में पूंजी की दक्षता (Capital Efficiency), निवेशकों की सुरक्षा और निपटान जोखिम (Settlement Risk) को समाप्त करने के दृष्टिकोण से यह एक क्रांतिकारी वित्तीय सुधार है।

Background

  • भारत वर्ष 2021 तक T+2 सेटलमेंट चक्र पर कार्य करता था।
  • जनवरी 2023 में भारत ने T+1 चक्र को पूरी तरह अपनाया और मार्च 2024 में T+0 का वैकल्पिक/बीटा संस्करण शुरू किया गया था, जिसे अब 2026 में पूर्ण रूप से संस्थागत बना दिया गया है।

प्रमुख तथ्य

  • नियामक निकाय: SEBI (भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड)।
  • वैधानिक आधार: SEBI Act, 1992 तथा Depositories Act, 1996।
  • तुलना: अमेरिका और यूरोपीय संघ वर्तमान में T+1 सेटलमेंट प्रणाली पर कार्य कर रहे हैं।

Static Knowledge Link

  • Economy: SEBI की वैधानिक शक्तियाँ, Clearing Corporation की भूमिका, डिमैट अकाउंट्स (NSDL व CDSL), तथा पूँजी प्रवाह और लिक्विडिटी रिस्क का अर्थशास्त्र।

कैसे काम करता है? 

  • रियल-टाइम फंड ग्रॉस सेटलमेंट (RTGS) एवं सीबीएस एकीकरण: जैसे ही स्टॉक एक्सचेंज (NSE/BSE) पर सौदा निष्पादित होता है, क्लियरिंग कॉर्पोरेशन API-एकीकरण के माध्यम से रियल-टाइम में सिक्योरिटीज और फंड्स की समानांतर डिलीवरी सुनिश्चित करता है।

भारत पर प्रभाव

  • Economic: निवेशकों की कार्यशील पूंजी (Working Capital) फंसे रहने का समय शून्य हो जाएगा, जिससे खुदरा (Retail) और संस्थागत भागीदारी बढ़ेगी।
  • Financial Infrastructure: भारतीय वित्तीय बाज़ारों की वैश्विक साख (Global Financial Credibility) में ज़बरदस्त वृद्धि होगी।

Challenges

  • ब्रोकरेज फर्मों और कस्टोडियन बैंकों के तकनीकी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर अत्यधिक दबाव और उच्चतर लिक्विडिटी प्रबंधन की आवश्यकता।

Way Forward

  • कस्टोडियन प्रणालियों का 24×7 ऑटोमेशन और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) के लिए मुद्रा विनिमय (FX Conversion) को रियल-टाइम बनाना।

ISRO का गगनयान G1 (Uncrewed Mission) ECLSS टेस्ट सिमुलेशन

Category: विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी / अंतरिक्ष

क्या हुआ? (WHAT)

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने 23 सितम्बर 2026 को गगनयान मिशन के पहले मानव-रहित परीक्षण उड़ान (Gagaanyaan-G1) हेतु Environment Control and Life Support System (ECLSS) का अंतिम ग्राउंड-आधारित सिमुलेशन परीक्षण सफलतापूर्वक संपन्न किया।
  • यह परीक्षण महेंद्रगिरि स्थिति इसरो प्रोपल्शन कॉम्प्लेक्स (IPRC) और विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) में आयोजित किया गया।
  • इस सिमुलेशन में ह्यूमनाइड रोबोट ‘व्योममित्र’ (Vyommitra) को एकीकृत क्रू-मॉड्यूल दबाव वातावरण में संचालित करके देखा गया।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • भारत के प्रथम मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम (Human Spaceflight Programme) की सुरक्षा, जीवन-रक्षा प्रणाली और तकनीकी स्वायत्तता को प्रमाणित करने के लिए यह सफलता अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Background

  • गगनयान मिशन का लक्ष्य 3-सदस्यीय क्रू को 400 किमी की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 3 दिनों के लिए भेजना और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर (भारतीय समुद्री सीमा में) वापस लाना है।
  • भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला विश्व का चौथा देश बनने की ओर अग्रसर है।

प्रमुख तथ्य

  • लांच व्हीकल: LVM3 (Launch Vehicle Mark-3) जिसे ‘ह्यूमन-रेटेड LVM3’ (HLVM3) के रूप में पुनर्गठित किया गया है।
  • पेलोड: क्रू मॉड्यूल (Crew Module), सर्विस मॉड्यूल (Service Module) एवं व्योममित्र रोबोट।
  • परीक्षण केंद्र: ISRO Propulsion Complex (IPRC), Mahendragiri & SDSC-SHAR, Sriharikota।

Static Knowledge Link

  • Science & Tech: Low Earth Orbit (LEO), Escape Velocity, Cryogenic Engine (CE-20), और कार्बन डाइऑक्साइड स्क्रबर तथा ऑक्सीजन पुनरुत्पादन का रासायनिक सिद्धांत।

कैसे काम करता है?

  • ECLSS तंत्र: यह अंतरिक्ष यान के अंदर ऑक्सीजन की निरंतर आपूर्ति, कार्बन डाइऑक्साइड व नमी को अवशोषित करने, तापमान एवं वायुमंडलीय दबाव (1 atm) को स्थिर रखने का कार्य करता है ताकि अंतरिक्ष यात्री जीवित रह सकें।

भारत पर प्रभाव

  • Strategic/Scientific: अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत का कद आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रणी होगा तथा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन – BAS) के निर्माण की राह आसान होगी।

Challenges

  • अंतरिक्ष यात्रियों की जीवन-सुरक्षा हेतु शून्य-त्रुटि (Zero-defect) तकनीक का विकास और री-एंट्री (Re-entry) के समय अत्यधिक तापीय दबाव (Thermal Protection System) को सहन करना।

Way Forward

  • G1 (मानवरहित) उड़ान के सफल प्रक्षेपण के बाद G2 परीक्षण और अंततः मानवयुक्त मिशन (H1) को निष्पादित करना।

UN Global Plastic Treaty 2026 Action Plan Draft

Category: पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन

क्या हुआ? (WHAT)

  • 21 सितम्बर 2026 को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (UNEP) द्वारा आगामी उच्चस्तरीय वैश्विक सम्मेलनों हेतु Global Plastic Treaty Action Plan (Draft) जारी किया गया।
  • इस मसौदे का उद्देश्य वैश्विक स्तर पर प्लास्टिक प्रदूषण को 2040 तक 80% तक कम करना है।
  • इसमें प्राथमिक प्लास्टिक बहुलकों (Primary Plastic Polymers) के उत्पादन की सीमा तय करने, एकल-उपयोग वाले प्लास्टिक (SUPs) के अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर प्रतिबंध लगाने और Extended Producer Responsibility (EPR) को कानूनी रूप से बाध्यकारी बनाने का प्रस्ताव है।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • वैश्विक महासागरीय पारिस्थितिकी तंत्र, माइक्रोप्लास्टिक संकट (Microplastics in Food Chain) और मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा के लिए यह संधि पेरिस जलवायु समझौते के समान ऐतिहासिक मानी जा रही है।

Background

  • मार्च 2022 में नैरोबी में संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा (UNEA-5.2) में एक कानूनी रूप से बाध्यकारी वैश्विक प्लास्टिक समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए ऐतिहासिक प्रस्ताव पारित किया गया था।
  • अंतर्राष्ट्रीय वार्ता समिति (Intergovernmental Negotiating Committee – INC) की बैठकों के बाद यह ड्राफ्ट तैयार हुआ है।

प्रमुख तथ्य

  • संस्था: UNEP (संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम – मुख्यालय: नैरोबी, केन्या)।
  • लक्ष्य वर्ष: वर्ष 2040 तक वैश्विक प्लास्टिक अपशिष्ट संकट को समाप्त करना।
  • मुख्य बिंदु: हानिकारक रसायनों (जैसे phthalates, bisphenols) से युक्त प्लास्टिक उत्पादों पर पूर्ण प्रतिबंध।

Static Knowledge Link

  • Environment: पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986, प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम (2016 व संशोधित), बायो-डिग्रेडेबल बनाम नॉन-बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक, माइक्रोप्लास्टिक्स का बायो-मैग्निफिकेशन (Biomagnification)।

भारत पर प्रभाव

  • Economic/Industrial: भारत के पेट्रोकेमिकल और प्लास्टिक निर्माण उद्योगों को हरित विकल्पों (Bioplastics/Alternative Packaging) में त्वरित निवेश करना होगा।
  • Environmental: भारत के तटीय एवं नदीय क्षेत्रों (जैसे गंगा व ब्रह्मपुत्र) में प्लास्टिक कचरे के प्रवाह पर रोक लगेगी।

Challenges

  • विकसित देशों और पेट्रोकेमिकल उत्पादक राष्ट्रों (तेल उत्पादक देश) द्वारा प्राथमिक प्लास्टिक उत्पादन सीमित करने का विरोध।

Way Forward

  • वृत्तीय अर्थव्यवस्था (Circular Economy) के माध्यम से प्लास्टिक विकल्प अनुसंधान को वैश्विक सब्सिडी देना और ‘जस्ट ट्रांजिशन’ (Just Transition) के तहत अपशिष्ट बीनने वालों (Waste Pickers) का सामाजिक पुनर्वास।

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