WEEKLY UKPCS CURRENT AFFAIRS - (01 Sep – 05 Sep 2026)

WEEKLY UKPCS CURRENT AFFAIRS – (01 Sep – 05 Sep 2026)

September 6, 2026

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) की भूमिका केवल तथ्य याद रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अवधारणात्मक स्पष्टता और उत्तर-लेखन की गहराई को निर्धारित करती है। 01 सितंबर से 05 सितंबर 2026 के मध्य घटित राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय घटनाक्रम UKPSC की प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य (Mains) दोनों परीक्षाओं के पाठ्यक्रम के अनुसार अत्यंत प्रासंगिक हैं।

Executive Summary

1 से 5 सितम्बर 2026 का यह सप्ताह नीतिगत निर्णयों, तकनीकी स्वावलंबन और अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण रहा है।

  • राजव्यवस्था एवं शासन: सर्वोच्च न्यायालय द्वारा “निजता के अधिकार” (Right to Privacy) और डिजिटल डेटा संरक्षण के संतुलन पर एक ऐतिहासिक टिप्पणी एवं दिशा-निर्देश।
  • अर्थव्यवस्था: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा मुद्रास्फीति (Inflation) नियंत्रण और विकास दर के संतुलन हेतु नई मौद्रिक नीति समीक्षा ढाँचे का विश्लेषण तथा प्रत्यक्ष कर संग्रह के ताज़ा आँकड़े।
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी / अंतरिक्ष: इसरो (ISRO) द्वारा आगामी गगनयान (Gaganyaan) मानव रहित परीक्षण मिशन के सफल लैंडिंग एवं रिकवरी सिमुलेशन का संपादन।
  • पर्यावरण एवं जैव विविधता: भारत द्वारा राष्ट्रीय कार्बन बाजार (National Carbon Market – CETS) के संचालन हेतु अंतिम दिशा-निर्देश जारी करना तथा कॉप-30 (COP30) की पूर्व तैयारियों पर बैठक।
  • अंतर्राष्ट्रीय संबंध: भारत-प्रशांत क्षेत्र (Indo-Pacific) में समुद्री सुरक्षा सहयोग के तहत QUAD सुरक्षा सलाहकारों की रणनीतिक बैठक तथा BRICS डिजिटल अर्थव्यवस्था शिखर सम्मेलन।
  • उत्तराखंड विशेष: उत्तराखंड राज्य में सतत पर्यटन नीति (Sustainable Tourism Policy) 2026 के क्रियान्वयन का फैसला तथा आपदा प्रबंधन हेतु नई RADAR प्रणाली की स्थापना।

Major Current Affairs

राष्ट्रीय कार्बन बाजार (Carbon Credit and Trading Scheme – CETS) का अंतिम ढाँचा जारी।

Category: पर्यावरण, जलवायु परिवर्तन एवं अर्थव्यवस्था

क्या हुआ? (WHAT)

  • ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (BEE) और पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) ने भारत के Carbon Credit and Trading Scheme (CETS) के संचालन संबंधी दिशा-निर्देश अधिसूचित किए।
  • इसके तहत ऊर्जा-गहन उद्योगों (Energy-Intensive Industries) के लिए अनिवार्य कार्बन उत्सर्जन लक्ष्य (Obligated Entities) निर्धारित किए गए हैं।
  • जो इकाइियाँ निर्धारित सीमा से कम उत्सर्जन करेंगी, उन्हें Carbon Credit Certificates (CCCs) मिलेंगे, जिन्हें वे कार्बन बाजार में बेच सकेंगी।
  • यह योजना भारत के Nationally Determined Contributions (NDCs) और वर्ष 2070 तक Net-Zero Emission लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए भारत अब गैर-बाजार तंत्रों से स्थानांतरित होकर Market-Based Instruments की ओर बढ़ रहा है।
  • यूरोपीय संघ के Carbon Border Adjustment Mechanism (CBAM) से भारतीय निर्यातकों को बचाने के लिए घरेलू कार्बन बाजार का होना अनिवार्य था।

Background

  • Energy Conservation (Amendment) Act, 2022 ने भारत में कार्बन बाजार की स्थापना का कानूनी आधार तैयार किया।
  • इससे पहले Perform, Achieve and Trade (PAT) योजना चल रही थी, जिसे अब चरणबद्ध तरीके से CETS में समाहित किया जा रहा है।

प्रमुख तथ्य

  • मंत्रालय: पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) तथा विद्युत मंत्रालय (Ministry of Power)।
  • नियामक निकाय: Bureau of Energy Efficiency (BEE) कार्बन क्रेडिट का प्रशासक (Administrator) होगा।
  • ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म: Indian Energy Exchange (IEX) और Power Exchange India Limited (PXIL) जैसे प्लेटफॉर्म पर रजिस्ट्री होगी।
  • लक्ष्य: 2030 तक GDP की उत्सर्जन तीव्रता (Emission Intensity) को 2005 के स्तर से 45% कम करना।

Static Knowledge 

  • Article 48A: राज्य का पर्यावरण संरक्षण का संवैधानिक कर्तव्य।
  • UNFCCC Article 6: पेरिस समझौते के तहत अंतर्राष्ट्रीय कार्बन बाजार का ढाँचा।
  • Cap-and-Trade Model: यह एक आर्थिक तंत्र है जहाँ उत्सर्जन पर कुल सीमा (Cap) तय होती है और परमिट का व्यापार (Trade) होता है।

भारत पर प्रभाव

  • Economic: उद्योगों में हरित तकनीक (Green Technology) में निवेश को बढ़ावा।
  • Environmental: कार्बन उत्सर्जन में प्रत्यक्ष कमी।
  • Strategic: वैश्विक जलवायु वार्ता में भारत की स्थिति मजबूत होगी।

Challenges

  • छोटे एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) के लिए प्रारंभिक अनुपालन लागत (Compliance Cost) अधिक होना।
  • कार्बन क्रेडिट की कीमतों में अत्यधिक उतार-चढ़ाव (Price Volatility)।

गगनयान मिशन: क्रू-मॉड्यूल एयरड्रॉप एवं रिकवरी सिमुलेशन सफल।

Category: Science & Technology / Space Technology

क्या हुआ? (WHAT)

  • भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने भारतीय नौसेना के साथ मिलकर Gaganyaan मिशन के तहत क्रू-मॉड्यूल (Crew Module) का एकीकृत रिकवरी परीक्षण सफलतापूर्वक पूरा किया।
  • यह परीक्षण अरब सागर में आयोजित किया गया जहाँ मॉड्यूल की पैराशूट लैंडिंग और समुद्र से रिकवरी के सभी चरणों का परीक्षण हुआ।
  • परीक्षण का मुख्य उद्देश्य अंतरिक्ष यात्रियों की सुरक्षित वापसी (Atmospheric Re-entry) और लैंडिंग प्रणालियों का सत्यापन करना था।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • भारत मानव को अंतरिक्ष में भेजने वाला दुनिया का चौथा देश (अमेरिका, रूस और चीन के बाद) बनने की ओर अग्रसर है।
  • यह भारत की स्वदेशी अंतरिक्ष क्षमता और जीवन सहायता प्रणालियों (Life Support Systems) की विश्वसनीयता को सिद्ध करता है।

Background

  • गगनयान मिशन का लक्ष्य 3 सदस्यीय दल को 400 km की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में 3 दिनों के लिए भेजना और उन्हें सुरक्षित वापस लाना है।
  • इसमें प्रक्षेपण वाहन LVM3 (Launch Vehicle Mark-3) का उपयोग किया जा रहा है, जिसे मानव-रेटेड (Human-Rated LVM3) बनाया गया है।

प्रमुख तथ्य

  • संगठन: ISRO और Indian Navy।
  • स्थल: अरब सागर (गुजरात तट के पास)।
  • रॉकेट: HLVM3 (Human-Rated Launch Vehicle Mark-3)।
  • मुख्य घटक: Crew Escape System (CES), Apex Cover Separation, और Main Parachute Deployment

Static Knowledge 

  • Low Earth Orbit (LEO): 160 किमी से 2,000 किमी की ऊँचाई वाली कक्षा।
  • Orbital Velocity: कक्षीय वेग जो LEO के लिए लगभग 7.8 km/s होता है।
  • Atmospheric Re-entry Physics: वायुमंडलीय घर्षण से उत्पन्न अत्यधिक ऊष्मा से सुरक्षा के लिए थर्मल प्रोटेक्शन सिस्टम (TPS) का उपयोग।

भारत पर प्रभाव

  • Strategic: अंतरिक्ष कूटनीति और वाणिज्यिक प्रक्षेपण बाजार में भारत का प्रभाव बढ़ेगा।
  • Economic: घरेलू एयरोस्पेस और रक्षा निर्माण उद्योगों (Private Space Sector) को प्रोत्साहन।

Challenges

  • मानव-जीवन सहायता प्रणाली (ECLSS) की शून्य-त्रुटि (Zero-failure) परिशुद्धता सुनिश्चित करना।
  • अंतरिक्ष विकिरण (Space Radiation) से सुरक्षा।

उच्चतम न्यायालय: डेटा सुरक्षा, निगरानी और निजता का अधिकार (Right to Privacy)।

Category: भारतीय राजव्यवस्था एवं संविधान / न्यायपालिका

क्या हुआ? (WHAT)

  • भारत के उच्चतम न्यायालय की पीठ ने राज्य द्वारा नागरिकों के डिजिटल डेटा संग्रहण और निगरानी (Surveillance) से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण टिप्पणी की।
  • न्यायालय ने दोहराया कि राज्य सुरक्षा के नाम पर अनुपातिकता के सिद्धांत (Principle of Proportionality) का उल्लंघन करके नागरिकों के मौलिक अधिकारों को असीमित रूप से प्रतिबंधित नहीं कर सकता।
  • न्यायालय ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम (DPDP Act) के कार्यान्वयन की प्रगति की समीक्षा का भी निर्देश दिया।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • डिजिटल युग में नागरिक स्वतंत्रता (Civil Liberties) और राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) के बीच संतुलन स्थापित करने की दृष्टि से यह फैसला अत्यंत प्रासंगिक है।

Background

  • के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017): 9 जजों की पीठ ने अनुच्छेद 21 के तहत निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार घोषित किया था।
  • DPDP Act 2023: भारत का पहला व्यापक डेटा संरक्षण कानून है, जिसके तहत डेटा प्रिजर्वेशन और प्राइवेसी के नियम तय किए गए हैं।

प्रमुख तथ्य

  • संवैधानिक प्रावधान: अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और अनुच्छेद 21 (जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता का अधिकार)।
  • त्रि-स्तरीय परीक्षण (Three-Fold Test for Privacy Restrictions):
    • वैध कानून (Legitimate Law)
    • आवश्यकता (Need/Rational Nexus)
    • आनुपातिकता (Proportionality)

Static Knowledge 

  • Doctrine of Proportionality: यह सुनिश्चित करता है कि राज्य द्वारा किसी अधिकार पर लगाया गया प्रतिबंध उस लक्ष्य के अनुपात में ही हो जिसे प्राप्त करना है।
  • Judicial Review (न्यायिक समीक्षा): अनुच्छेद 13 के तहत न्यायपालिका का मौलिक अधिकारों के उल्लंघन की जाँच करने का अधिकार।

भारत पर प्रभाव

  • Social: नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा के प्रति विश्वास में वृद्धि।
  • Governance: सरकारी एजेंसियों द्वारा डेटा एकत्र करने की प्रक्रियाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।

Challenges

  • साइबर अपराधों और आतंकवाद से निपटने में जाँच एजेंसियों की कार्यकुशलता और कानूनी सीमाओं के बीच संतुलन बनाना।

इंडो-पैसिफिक में समुद्री सुरक्षा: QUAD सुरक्षा सलाहकारों की बैठक।

Category: अंतर्राष्ट्रीय संबंध एवं भारत के विदेश संबंध

क्या हुआ? (WHAT)

  • नई दिल्ली में QUAD (भारत, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया) के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों (NSAs) की उच्चस्तरीय बैठक आयोजित हुई।
  • बैठक में Indo-Pacific Maritime Domain Awareness (IPMDA) पहल को और विस्तार देने तथा संकट प्रतिक्रिया तंत्र को मजबूत करने पर सहमति बनी।
  • इसके अलावा, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों (Critical Technologies), साइबर सुरक्षा, और आपूर्ति श्रृंखला लचीलेपन (Supply Chain Resilience) पर नए सहयोग समझौतों की समीक्षा की गई।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते आक्रामक रुख और नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) पर उत्पन्न चुनौतियों के बीच QUAD की यह बैठक रणनीतिक संतुलन बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

Background

  • QUAD का विचार सर्वप्रथम 2007 में जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने दिया था। 2017 में इसे पुनर्जीवित किया गया।
  • यह एक अनौपचारिक रणनीतिक मंच है जो “स्वतंत्र, खुले और समावेशी हिंद-प्रशांत” (Free and Open Indo-Pacific) का समर्थन करता है।

प्रमुख तथ्य

  • सदस्य देश: भारत, संयुक्त राज्य अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया।
  • प्रमुख पहल: IPMDA (समुद्री जहाजों की रीयल-टाइम ट्रैकिंग हेतु), Quad Vaccine Partnership, Clean Energy Supply Chain Initiative
  • संबंधित नौसैनिक अभ्यास: MALABAR Exercise (जिसमें चारों देश भाग लेते हैं)।

Static Knowledge 

  • UNCLOS (United Nations Convention on the Law of the Sea): अंतर्राष्ट्रीय समुद्री कानून जो अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और अंतर्राष्ट्रीय जल क्षेत्र को परिभाषित करता है।
  • Exclusive Economic Zone (EEZ): तट रेखा से 200 समुद्री मील (Nautical Miles) तक का क्षेत्र।

भारत पर प्रभाव

  • Strategic: हिंद महासागर में भारत की ‘Net Security Provider’ की भूमिका सुदृढ़ होगी।
  • Economic: नियम-आधारित समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित होना।

Challenges

  • ASEAN देशों की QUAD के प्रति हिचकिचाहट और उनकी मध्यस्थता (ASEAN Centrality) को बनाए रखना।
  • QUAD का आधिकारिक सैन्य गठबंधन न होना।

उत्तराखंड: हरित पर्यटन नीति 2026 एवं आपदा पूर्व चेतावनी प्रणाली का विस्तार।

Category: उत्तराखंड विशेष / पर्यावरण एवं आपदा प्रबंधन

क्या हुआ? (WHAT)

  • उत्तराखंड राज्य मंत्रिमंडल ने ‘उत्तराखंड हरित एवं सतत पर्यटन नीति 2026’ (Green & Sustainable Tourism Policy) को मंजूरी दी।
  • इसके तहत संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटकों की Carrying Capacity (वहन क्षमता) का आकलन अनिवार्य कर दिया गया है।
  • राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के तहत हिमालयी क्षेत्रों में अति-स्थानीय (Hyper-local) मौसम पूर्वानुमान हेतु नए Doppler Weather Radars स्थापित करने की योजना लागू की गई।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • हाल के वर्षों में उत्तराखंड में भूस्खलन, बादल फटने (Cloudbursts) और फ्लैश फ्लड की घटनाओं में वृद्धि हुई है।
  • अनियंत्रित पर्यटन और अवसंरचना विकास के कारण हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर गंभीर दबाव बना है, जिससे निपटना राज्य के लिए प्राथमिक चुनौती है।

Background

  • 2013 की केदारनाथ त्रासदी और 2021 की चमोली आपदा के बाद से हिमालयी राज्यों में सतत विकास और आपदा जोखिम वनीकरण (DRR) की आवश्यकता पर लगातार बल दिया जा रहा है।
  • न्यायमूर्ति चोपड़ा समिति तथा अन्य विशेषज्ञ समितियों ने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में वहन क्षमता के आधार पर निर्माण की सिफारिश की थी।

प्रमुख तथ्य

  • संस्था: Uttarakhand State Disaster Management Authority (USDMA) एवं IMD
  • तकनीक: X-Band Doppler Weather Radar (विशेष रूप से पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा और बादलों की सटीक ट्रैकिंग के लिए)।
  • मुख्य घटक: इको-पर्यटन, होमस्टे पंजीकरण में हरित मानदंड, प्लास्टिक मुक्त पर्यटन क्षेत्र।

Static Knowledge 

  • Carrying Capacity (वहन क्षमता): किसी पारिस्थितिकी तंत्र की अधिकतम आबादी या मानवीय गतिविधि को बिना नुकसान पहुँचाए सहन करने की क्षमता।
  • Doppler Effect: ध्वनि या प्रकाश तरंगों की आवृत्ति में वह परिवर्तन जो स्रोत और प्रेक्षक की सापेक्ष गति के कारण होता है (इसी सिद्धांत पर डॉप्लर रडार काम करता है)।

प्रभाव

  • Environmental: संवेदनशील इको-जोन (Eco-Sensitive Zones) का संरक्षण।
  • Economic: स्थानीय समुदायों के लिए दीर्घकालिक टिकाऊ आजीविका (Sustainable Livelihood)।
  • Governance: आपदा तैयारियों में तकनीकी सक्षमता।

Challenges

  • आर्थिक लाभ (पर्यटन राजस्व) और पारिस्थितिक संरक्षण के बीच संतुलन साधना।
  • दुर्गम पर्वतीय क्षेत्रों में रडार उपकरणों का रखरखाव।

Way Forward

  • जीआईएस (GIS) मैपिंग के जरिए सभी प्रमुख धार्मिक और साहसिक पर्यटन स्थलों की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग।
  • स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों के लिए अनिवार्य आपदा-सुरक्षा दिशानिर्देश लागू करना।

Important Short Updates

  • डिजिटल कृषि मिशन (Digital Agriculture Mission): केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा कृषि क्षेत्र में AI, रिमोट सेंसिंग और मृदा स्वास्थ्य डेटा को एकीकृत करने हेतु राष्ट्रीय डिजिटल कृषि मिशन को बढ़ावा देने की पुष्टि।
  • सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड (Sovereign Green Bonds): आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही के लिए ग्रीन बॉन्ड जारी करने का कैलेंडर जारी किया, जिसका उद्देश्य अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं का वित्तपोषण है।
  • अभ्यास त्रिशूल (Exercise Trishul): भारतीय वायुसेना (IAF) ने पश्चिमी सीमा पर अपनी परिचालन तत्परता का परीक्षण करने के लिए वार्षिक रणनीतिक अभ्यास का आयोजन किया।
  • विश्व धरोहर स्थल निगरानी: UNESCO ने भारत के ऐतिहासिक स्थलों में जलवायु परिवर्तन के प्रभावों पर एक विशेष समीक्षा रिपोर्ट संकलित की।
  • UPI का अंतर्राष्ट्रीय विस्तार: भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) ने नए मित्र राष्ट्रों में UPI भुगतान प्रणाली लागू करने के लिए नए समझौते किए।

Important Short Updates

  • CETS का पूर्ण रूप Carbon Credit and Trading Scheme है।
  • भारत में कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग का प्रशासक निकाय Bureau of Energy Efficiency (BEE) है।
  • भारत का 2030 तक NDC लक्ष्य GDP की उत्सर्जन तीव्रता को 45% (2005 के स्तर से) कम करना है।
  • गगनयान मिशन का लक्ष्य यात्रियों को 400 km की निम्न पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित करना है।
  • गगनयान हेतु प्रयुक्त रॉकेट HLVM3 (Human-Rated LVM3) है।
  • इसरो के महिला-रूपी ह्युमनॉइड रोबोट का नाम Vyommitra (व्योममित्र) है।
  • निजता के अधिकार को के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ (2017) में मौलिक अधिकार माना गया।
  • निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 का आंतरिक भाग है।
  • राज्य प्रतिबंधों की वैधता जाँचने के लिए सर्वोच्च न्यायालय Principle of Proportionality का प्रयोग करता है।
  • IPMDA का पूर्ण रूप Indo-Pacific Maritime Domain Awareness है।
  • QUAD संगठन में चार देश शामिल हैं: भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया।
  • UNCLOS के अनुसार अनन्य आर्थिक क्षेत्र (EEZ) की सीमा तट रेखा से 200 समुद्री मील तक होती है।
  • पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा और तूफानों की सटीक जानकारी हेतु Doppler Weather Radar का उपयोग होता है।
  • डॉप्लर रडार Doppler Effect (तरंगों की आवृत्ति में परिवर्तन) के सिद्धांत पर कार्य करता है।
  • Carrying Capacity किसी इकोसिस्टम द्वारा बिना क्षरण सहे जाने वाले अधिकतम जैविक दबाव को दर्शाती है।
  • Energy Conservation Act, 2022 ने भारत में राष्ट्रीय कार्बन बाजार की कानूनी नींव रखी।
  • MALABAR नौसैनिक अभ्यास QUAD देशों की नौसेनाओं के बीच आयोजित होता है।
  • UPI को विकसित करने वाली संस्था NPCI (National Payments Corporation of India) है।
  • भारत का अंतिम Net-Zero उत्सर्जन लक्ष्य वर्ष 2070 है।
  • Digital Public Infrastructure (DPI) में भारत के तीन स्तंभ हैं: आधार, UPI, और डिजिलॉकर।
  • उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) के अध्यक्ष मुख्यमंत्री होते हैं।
  • CBAM (Carbon Border Adjustment Mechanism) यूरोपीय संघ (EU) की एक पहल है।
  • Cryogenic Engine (CE-20) में ईंधन के रूप में द्रव हाइड्रोजन (LH2) और द्रव ऑक्सीजन (LOX) का प्रयोग होता है।
  • Article 48A राज्य को पर्यावरण के संरक्षण तथा संवर्धन का निर्देश देता है।
  • DPDP Act 2023 भारत में नागरिकों के डिजिटल डेटा संरक्षण से संबंधित मुख्य अधिनियम है।

 

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