WEEKLY UKPCS CURRENT AFFAIRS - (13 Sep – 19 Sep 2026)

WEEKLY UKPCS CURRENT AFFAIRS – (13 Sep – 19 Sep 2026)

September 20, 2026

उत्तराखंड लोक सेवा आयोग (UKPSC) की प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में समसामयिक घटनाओं (Current Affairs) की भूमिका केवल तथ्य याद रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अवधारणात्मक स्पष्टता और उत्तर-लेखन की गहराई को निर्धारित करती है। 13 सितंबर से 19 सितंबर 2026 के मध्य घटित राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय एवं राज्यस्तरीय घटनाक्रम UKPSC की प्रारंभिक (Prelims) और मुख्य (Mains) दोनों परीक्षाओं के पाठ्यक्रम के अनुसार अत्यंत प्रासंगिक हैं।

Executive Summary

13 सितम्बर से 19 सितम्बर 2026 की अवधि में बहुपक्षीय कूटनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, डिजिटल शासन, न्याय व्यवस्था तथा पर्यावरण एवं जल प्रबंधन के क्षेत्र में कई ऐतिहासिक नीतिगत परिवर्तन देखने को मिले हैं। इस सप्ताह भारत की अध्यक्षता/सक्रिय सहभागिता में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन (2026) ने ‘ग्लोबल साउथ’ की प्राथमिकताओं, बहुपक्षीय वित्तीय संरचना में सुधार (De-dollarisation & NDB expansion) और जिम्मेदार एआई गवर्नेंस पर केंद्रित नया एजेंडा निर्धारित किया है।

राष्ट्रीय स्तर पर, वित्त मंत्रालय द्वारा Bankers’ Books Evidence Act, 2026 की अधिसूचना ने 1891 के औपनिवेशिक कानून को प्रतिस्थापित कर कोर बैंकिंग और डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों को प्राथमिक कानूनी वैधता दी है। दूरसंचार विनियामक TRAI ने AI/ML-आधारित तकनीक के माध्यम से अनचाहे वाणिज्यिक संचार (UCC) तथा डिजिटल स्पैमिंग के खिलाफ सख्त एंटी-स्पैम फ्रेमवर्क लागू किया है।

पर्यावरण क्षेत्र में गुजरात के गांधीनगर में आयोजित World Circular Economy Forum (WCEF) 2026 के माध्यम से भारत ने विस्तारित उत्पादक उत्तरदायित्व (EPR) और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन में वैश्विक नेतृत्व का प्रदर्शन किया। राज्य-विशेष के संदर्भ में, उत्तराखंड सरकार ने राज्य में सूख रहे पर्वतीय जल स्रोतों (धारे व नौले) के पुनरुद्धार और भूजल रीचार्ज हेतु जीआईएस (GIS)-आधारित स्प्रिंगशेड प्रबंधन परियोजना को तेजी से आगे बढ़ाया है।

Major Current Affairs

18वाँ BRICS शिखर सम्मेलन 2026 (18th BRICS Summit 2026)

Category: अंतरराष्ट्रीय संबंध (International Relations)

क्या हुआ? (WHAT)

  • 17-18 सितम्बर 2026 को आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों के शीर्ष नेताओं ने ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की प्राथमिकताओं और बहुपक्षीय वैश्विक व्यवस्था के पुनर्गठन पर विस्तृत चर्चा की।
  • सम्मेलन में वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने हेतु स्थानीय मुद्राओं में भुगतान (Local Currency Settlement Mechanics) को सशक्त बनाने का संकल्प दोहराया गया।
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB) के पोर्टफोलियो विस्तार और विकासशील देशों को हरित वित्तपोषण (Green Financing) उपलब्ध कराने हेतु रणनीतिक ढांचे को मंजूरी दी गई।
  • BRICS AI Governance Framework पर सहमति बनी, जिसका उद्देश्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता के नैतिक और समावेशी उपयोग को बढ़ावा देना है।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • बहुपक्षीय संस्थानों (UNSC, IMF, World Bank) में सुधार तथा पश्चिमोत्तर वित्तीय प्रणालियों के विकल्प के रूप में BRICS का विस्तार UPSC निबंध और अंतरराष्ट्रीय संबंधों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Background

  • BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) का विस्तार 2024 में नए सदस्यों (मिस्र, इथियोपिया, ईरान, यूएई) के जुड़ने से हुआ था।
  • वैश्विक अर्थव्यवस्था में BRICS का योगदान क्रय शक्ति समता (PPP) के आधार पर G7 देशों से अधिक हो चुका है।

प्रमुख तथ्य

  • आयोजन तिथि: 17-18 सितम्बर 2026।
  • मुख्य एजेंडा: De-dollarisation, NDB Expansion, Local Currency Trade एवं Responsible AI
  • न्यू डेवलपमेंट बैंक (NDB): इसका मुख्यालय शंघाई, चीन में स्थित है।

कैसे काम करता है? / Mechanism

  • Local Currency Settlement System: दो व्यापारिक देश डॉलर को मध्यस्थ बनाए बिना अपनी-अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (उदा. रुपये और रूबेल/दिरहाम) में द्विपक्षीय व्यापार लेखा-जोखा चुकता करते हैं, जिससे विनिमय दर (Exchange Rate) के जोखिम से बचाव होता है।

भारत पर प्रभाव

  • Strategic: भारत ने BRICS को “चीन-केंद्रित” या “पश्चिमी-विरोधी” ब्लॉक बनने से रोककर “गैर-पश्चिमी” (Non-Western) और गुटनिरपेक्ष स्वरूप बनाए रखने पर जोर दिया।
  • Economic: भारतीय रुपये (INR) में सीमा पार व्यापार को बढ़ावा और NDB से अवसंरचना परियोजनाओं के लिए सुलभ ऋण।

Challenges

  • चीन और भारत के बीच सीमा तनाव एवं भू-राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता।
  • नए सदस्य देशों के बीच राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में भिन्नता।

World Circular Economy Forum (WCEF) 2026 का आयोजन

Category: पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन / अर्थव्यवस्था

क्या हुआ? (WHAT)

  • भारत में 15 सितम्बर 2026 को गांधीनगर (गुजरात) में World Circular Economy Forum (WCEF) 2026 का औपचारिक शुभारंभ हुआ।
  • दक्षिण एशिया के किसी देश द्वारा पहली बार इस वैश्विक मंच की मेजबानी की गई।
  • इस वर्ष का मुख्य विषय (Theme) ‘Circular Economy: Transition for People and Prosperity’ रखा गया।
  • इसका आयोजन संयुक्त रूप से केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB), पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEF&CC), फिनिश इनोवेशन फंड (Sitra) तथा गुजरात सरकार द्वारा किया गया।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • UPSC एवं State PCS परीक्षाओं में Sustainable Resource Management, E-waste Rules, तथा SDG-12 (Responsible Consumption and Production) के संदर्भ में यह एक प्रत्यक्ष प्रासंगिक विषय है।

Background

  • WCEF की शुरुआत वर्ष 2017 में फिनलैंड के प्रसिद्ध फंड Sitra द्वारा की गई थी।
  • पारंपरिक Linear Economy (Take-Make-Dispose) मॉडल के स्थान पर Circular Economy में संसाधनों को रिड्यूस, रियूज़ और रीसायकल (3R) कर दीर्घकालिक उपयोग में रखने पर बल दिया जाता है।

प्रमुख तथ्य

  • 65 से अधिक देशों के लगभग 2,000 प्रतिनिधि इसमें शामिल हुए।
  • दक्षिण एशिया में सर्कुलर फाइनेंस (Circular Finance) के वित्तपोषण हेतु Global South Initiative पर विशेष बल दिया गया।
  • भारत के Extended Producer Responsibility (EPR) पोर्टल और ई-वेस्ट मैनेजमेंट फ्रेमवर्क को प्रदर्शित किया गया।

Static Knowledge Link

  • Environment: प्लास्टिक अपशिष्ट प्रबंधन नियम (2016 व संशोधित), Extended Producer Responsibility (EPR) की वैधानिक स्थिति, तथा जल एवं वायु अधिनियम के तहत CPCB की शक्तियां।

कैसे काम करता है? 

  • चक्रीय मॉडल (Circular Model): अपशिष्ट को कचरा मानने के बजाय एक द्वितीयक कच्चे माल (Secondary Raw Material) के रूप में विनिर्माण प्रक्रिया में पुनः शामिल किया जाता है, जिससे प्राकृतिक संसाधनों का निष्कर्षण घटता है।

भारत पर प्रभाव

  • Economic: कच्चे माल के आयात पर निर्भरता में कमी और रीसाइक्लिंग उद्योग में नए एमएसएमई (MSME) रोजगारों का सृजन।
  • Environmental: लैंडफिल दबाव में कमी और कार्बन उत्सर्जन में गिरावट।

Bankers’ Books Evidence Act, 2026 की अधिसूचना

Category: शासन, बैंकिंग एवं कानून

क्या हुआ? (WHAT)

  • वित्त मंत्रालय द्वारा Bankers’ Books Evidence Act, 2026 के प्रावधानों को लागू कर अधिसूचित किया गया।
  • इस नए अधिनियम ने 135 वर्ष पुराने औपनिवेशिक Bankers’ Books Evidence Act, 1891 को पूरी तरह निरस्त कर दिया।
  • इसके तहत डिजिटल बैंकिंग रिकॉर्ड्स, कोर बैंकिंग सॉल्यूशंस (CBS), सर्वर लॉग्स और इलेक्ट्रॉनिक डेटा प्रविष्टियों को अदालती प्रक्रियाओं में प्राथमिक कानूनी साक्ष्य का दर्जा दिया गया है।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • न्यायालयों में वित्तीय साइबर अपराधों, बैंक धोखाधड़ी और वाणिज्यिक विवादों के त्वरित और पारदर्शी निस्तारण हेतु यह सुधार अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Background

  • वर्ष 1891 का अधिनियम केवल भौतिक (Physical) बही-खातों और कागजी प्रविष्टियों तक सीमित था।
  • IT Act, 2000 और हालिया भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 के लागू होने के बाद बैंकिंग साक्ष्यों की कानूनी स्वीकार्यता में एक आधुनिक विधायी ढांचे की आवश्यकता थी।

प्रमुख तथ्य

  • नोडल मंत्रालय: वित्त मंत्रालय (वित्तीय सेवाएं विभाग / Department of Financial Services)।
  • मुख्य प्रावधान: बैंकों को भौतिक रजिस्टरों के बिना सर्वर डेटा और डिजिटल प्रिंटआउट्स के प्रमाणीकरण हेतु एक डिजिटल प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने की सुविधा।

Static Knowledge Link

  • Polity & Law: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 61-63 (इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड्स की स्वीकार्यता) तथा बैंकों का विधिक दायित्व।

भारत पर प्रभाव

  • Governance/Legal: मुकदमों की सुनवाई में लगने वाले समय में कमी और डिजिटल फॉरेंसिक साक्ष्यों की प्रामाणिकता में वृद्धि।
  • Banking: बैंकों के प्रशासनिक और कागजी अनुपालन बोझ में भारी कमी।

Challenges

  • साइबर सुरक्षा में सेंध, डेटा हेरफेर (Data Tampering) के जोखिम और फॉरेंसिक विशेषज्ञों की कमी।

अनचाहे वाणिज्यिक संचार (UCC) पर TRAI के AI-आधारित कड़े नियम

Category: शासन एवं प्रौद्योगिकी नीति

क्या हुआ? (WHAT)

  • भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने 14 सितम्बर 2026 को अनचाही वाणिज्यिक कॉल्स और संदेशों (Unsolicited Commercial Communications – UCC) को रोकने के लिए नए तकनीकी नियम जारी किए।
  • टेलीकॉम सेवा प्रदाताओं (TSPs) के लिए Distributed Ledger Technology (DLT) प्लेटफॉर्म पर AI/ML आधारित एंटी-स्पैम फिल्टर लगाना अनिवार्य किया गया।
  • अपंजीकृत टेलीमार्केटर्स (Unregistered Telemarketers – UTMs) के टेलीकॉम संसाधनों को तुरंत डिस्कनेक्ट करने के कड़े निर्देश दिए गए।

क्यों महत्वपूर्ण है? (WHY)

  • यह नागरिकों की निजता के अधिकार (Right to Privacy) और साइबर वित्तीय धोखाधड़ी (Financial Phishing) से सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा नियामक कदम है।

Background

  • 2018 में TRAI ने DLT प्लेटफॉर्म पेश किया था, लेकिन अनधिकृत 10-अंकों वाले मोबाइल नंबरों से फर्जी कॉल्स की बढ़ती संख्या ने सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया था।

प्रमुख तथ्य

  • नियामक निकाय: TRAI (भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण)।
  • प्रौद्योगिकी: AI/ML सिस्टम एवं ब्लॉकचेन-आधारित DLT नेटवर्क।
  • कार्रवाई: ब्लैकलिस्ट किए गए प्रमोटरों का दो साल के लिए नेटवर्क निलंबन।

Static Knowledge Link

  • Polity: संविधान का अनुच्छेद 21 (के.एस. पुट्टास्वामी मामला – निजता का अधिकार) और TRAI Act, 1997 की वैधानिक शक्तियां।

भारत पर प्रभाव

  • Social/Security: फर्जी बैंक कॉल्स और स्पैम साइबर अपराधों में कमी आएगी, जिससे आम नागरिकों के वित्तीय हितों की रक्षा होगी।

Challenges

  • इंटरनेट-आधारित OTT कॉल्स (WhatsApp, Telegram कॉल्स) का इस दायरे से बाहर होना और वर्चुअल नंबरों का दुरुपयोग।

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