मनुष्य अनन्त काल से प्राकृतिक विपदाओं की मार झेलता रहा है। अनेक विपदाएँ ऐसी हैं जिनका वह प्रतिकार करने में असमर्थ हैं। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार प्रतिवर्ष पूरे संसार में औसतन एक लाख से अधिक लोग प्राकृतिक विपदाओं से मर जाते हैं और 20,000 करोड़ रुपयों की संपत्ति नष्ट हो जाती है।
संसार के सबसे अधिक प्राकृतिक विपदा प्रवण देशों में भारत का स्थान दूसरा है। पहले स्थान पर चीन है। अतः विपदाओं के कारण, परिणाम एवं इसके रोकथाम के उपाय के बारे में आम नागरिकों में जागरूकता पैदा करना आवश्यक है। इससे व्यक्ति एवं समाज अच्छी तरह से निपट सकता है।
कुछ प्राकृतिक विपदा इस प्रकार है –
भारत में विपदाएँ
विभिन्न प्रकार की विपदाओं के कारण भारत को ‘विपदा प्रवण राष्ट्र’ कहा जाता है। इसके कारण है –
- 55% से ज्यादा भू-भाग भूकम्प की आशंका से ग्रस्त है,
- 12% भूभाग बाढ़ प्रवण है,
- 8% भाग चक्रवातों से प्रभावित है, और
- 70% कृषि भूमि सूखा प्रवण है।
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