आंग्ल-मराठा युद्ध (Anglo-Maratha War)

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध (First Anglo-Maratha War) (1775-82) 

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध के कारण

  • मराठों के बीच की लड़ाई (सवाई माधव राव जिसे नाना फड़नवीस की सहायता प्राप्त थी एवं उसके चाचा रघुनाथ राव के बीच) 
  • अंग्रेजों द्वारा रघुनाथ राव की मदद कर इस लड़ाई का फायदा उठाने की काशिश की गई। 

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का घटनाक्रम 

  • 1776 ई० में मराठों ने तेलेगांव में अंग्रेजों को पराजित किया।
  • 1779-80 ई० में गोडार्ड के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना का कलकत्ता के मध्य भारत होते हुए अहमदाबाद आई एवं रास्ते में उसने कई स्थानों पर विजय प्राप्त की। 
  • 1781-82 ई० तक दो वर्षों में तनावपूर्ण स्थिति बनी रही।

प्रथम आंग्ल-मराठा युद्ध का महत्त्व एवं परिणाम

  • 1782 ई० में सलबाई संधि जिसमें वस्तुस्थिति का बना रहना, एवं मराठों के साथ अंग्रेजों का 20 वर्षों तक शांति बनाए रखने का वादा किया। 
  • इस संधि से अंग्रेजों को मराठों की मदद मिली, जिससे हैदर अली पर दबाव बनाने एवं उसके क्षेत्रों पर कब्जा स्थापित करने में सहायता मिली।
  • इस संधि से अंग्रेजों ने अपने को भारतीय शक्ति के सामूहिक विरोध से बचा लिया एवं दूसरी तरफ भारतीय शक्ति को विभाजित करने में सफलता प्राप्त कर ली।
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द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध (Second Anglo-Maratha War) (1803 – 05)

द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध के कारण

  • लॉर्ड वेलेसली द्वारा मराठों के आंतरिक कार्य में दखलंदाजी करने की नीति अपनाना एवं उन पर सहायक संधि लागू करने की इच्छा उस पर निर्भर थी। 
  • अठारहवीं शताब्दी के अंत तक मराठों के सभी बुद्धिमान एंव अनुभवी शासकों के मर जाने से अंग्रेजों को अवसर प्राप्त हुए। 
  • मराठा सरदारों में एक भाई द्वारा दूसरे भाई की हत्या का क्रम जारी रहा। जिसके चलते पेशवा बाजीराव द्वितीय ने बेसिन में 1802 ई० में अंग्रेजों के साथ सहायक संधि पर हस्ताक्षर किए।

द्वितीय आंग्ल-मराठा युद्ध का महत्त्व एवं परिणाम

  • 1803 ई० में वेलेसली के नेतृत्व में सिंधिया और भोंसले की संयुक्त सेना को असाये और अरगांव में अंग्रेजों द्वारा हटाया गया एवं उनके द्वारा सहायक संधि पर हस्ताक्षर किए गए। 
  • होल्कर को हराने में अंग्रेज असफल रहे तथा राजपुरघाट संधि द्वारा शांति स्थापित की गई। 
  • मराठा साम्राज्य में ब्रिटिश हितों की स्थापना हुई। 
  • इस युद्ध के बाद कंपनी का भारत में सर्वश्रेष्ठ शक्ति बनना।

तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध (Second Anglo-Maratha War) (1817 – 18) 

तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध के कारण

  • अपनी स्वतंत्रता खो देने के कारण मराठों का अंग्रेजों से द्वेष उत्पन्न। 
  • अंग्रेज अफसरों द्वारा मराठा सरदारों पर कठोर नियंत्रण किया गया।

तृतीय आंग्ल-मराठा युद्ध का महत्त्व एवं परिणाम

  • पेशवा को गद्दी से हटाकर उसके संपूर्ण अधिकार क्षेत्र पर कब्जा कर अंग्रेजों द्वारा बम्बई प्रेसीडेंसी स्थापित की गई। 
  • मराठों के आत्मगौरव को रखने के लिए पेशवा की भूमि से सतारा राज्य की स्थापना की गई। 
  • मराठा सरदारों के बड़े भू-भाग पर कंपनी का अधिकार हो गया। 
  • इस युद्ध के बाद मराठा सरदारों का अंग्रेजों का दयापात्र बन जाना।
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