UTET Exam 30 Sep 2022 Paper – 1 (Language II – Hindi) (Official Answer Key)

उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद् (UBSE – Uttarakhand Board of School Education) द्वारा 30 सितम्बर, 2022 को UTET (Uttarakhand Teachers Eligibility Test) की परीक्षा का आयोजन किया गया। UTET (Uttarakhand Teachers Eligibility Test) Exam Paper 2022 – भाषा द्वितीय – हिंदी की उत्तरकुंजी (Language First – Hindi Part Official Answer Key).

UBSE (Uttarakhand Board of School Education) Conduct the UTET (Uttarakhand Teachers Eligibility Test) 2022 Exam on 30 September, 2022. Here UTET Paper 1 Language Second – Hindi Subject Paper with Official Answer Key.

UTET (Uttarakhand Teachers Eligibility Test) Primary Level
(Class 1 to Class 5)

Exam :−  UTET (Uttarakhand Teachers Eligibility Test)
Part :− भाषा द्वितीय – हिंदी (Language Second – Hindi)
Organized
by : UBSE

Number of Question : 30
Exam Date :– 30th September, 2022

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UTET Exam 2022 Paper – 1 (Primary Level) Official Answer Key
Part –
भाषा द्वितीय – हिंदी (Language Second – Hindi)

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (61 से 65) के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए –

जो लोग अपनी असफलताओं के लिए या जीवन में गतिरोध के हालातों को जिम्मेदार ठहराते हैं, वे लोग या तो गलत हैं या हालात से डरते हैं। वे या तो जीवन को समझ नहीं पाए या उलझनों में फँसे हुए हैं। वे या तो आलसी हैं या अकर्मण्य हैं। एक कारण और भी हो सकता है कि उनकी नीयत और नीति में मेल न हो। यह अति आवश्यक है कि नीयत और नीति दोनों एक सूत्र में पिरोई हुई हों अर्थात् मेल खाती हों। ऐसा कदापि संभव नहीं है और नीयत मानसिक इच्छा है। जो खोटी भी हो सकती है और खरी भी। खोटी नीयत वाला व्यक्ति कदापि इस संसार में नहीं टिक सकता और यदि टिकेगा, तो बहुत कम समय के लिए, केवल तब तक जब तक उसकी नीयत खुलकर सामने नहीं आती क्योंकि नीति की जननी नीयत है और जब जननी में ही दोष है, तो संतान में कोई न कोई विकृति अवश्य आ जायेगी। ऐसे में वह मनुष्य गलत नीयत एवं नीति के कारण पतन का भागी होगा। हालातों को असफलता के लिए जिम्मेदार ठहराना ठीक नहीं लगता, क्योंकि हालात तो उनके साथ भी वही होते हैं, जो सफलता प्राप्त करते हैं। यदि कोई व्यक्ति अपनी असफलताओं की जिम्मेदारी खुद नहीं ले सकता, तो वह अपनी सफलता की जिम्मेदारी लेने के काबिल नहीं है। जीवन का असली आनंद तो तभी है, जब परिस्थितियाँ विषम हो।

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61. किस तरह के लोगों की नीयत और नीति में मेल नहीं रहता है?
(A) हालात को जिम्मेदार ठहराने वाले लोग
(B) जीवन को न समझने वाले लोग
(C) अकर्मण्य व आलसी लोग
(D) उपर्युक्त सभी

62. खोटी नीयत वाला व्यक्ति इस संसार में क्यों नहीं टिक पाता?
(A) गलत नीयत या नीति के कारण
(B) अवगुणों के कारण
(C) उदारता के कारण
(D) समय अभाव के कारण

63. जो लोग जीवन को समझ नहीं पाए वे कौन हैं?
(A) साधु लोग
(B) विद्वान लोग
(C) अकर्मण्य व आलसी लोग
(D) नादान लोग

64. लेखक ने नीति की जननी किसे कहा है?
(A) नीयत को
(B) सोच को
(C) व्यवहार को
(D) समय को

65. जीवन का असली आनंद कब मिलता है?
(A) खुशियों में
(B) उत्सवों में
(C) विषम परिस्थितियों में
(D) मित्रों के साथ

निर्देश : निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर पूछे गए प्रश्नों (66 से 70) के सर्वाधिक उचित उत्तर वाले विकल्प का चयन कीजिए –

साहित्य को मानव जीवन की कोमल-कांत आंतरिक भावनाओं का वाहक माना गया है, हालाँकि उनका आधार जीवन का ऊबड़-खाबड़ कठोर और यथार्थ धरातल ही हुआ करता है। मानव मन कोमल, भावुक और अन्य चमत्कारी भावनाओं से भरा होता है, जोकि साहित्य के अलौकिक या पारलौकिक विचारों, धारणाओं तथा चेतनाओं पर चिंतन करने योग्य है।

साहित्य जीवन को कई प्रकार के आश्वासन, कई प्रकार के विश्वास तथा कई प्रकार के आश्रय प्रदान करता है। साहित्य शब्द एवं भावनाओं से रचा जाता है, शब्द अक्षरों से बना है और अक्षर को सनातन धर्म के अनुसार सत्य, ब्रह्म का रूप माना गया है। आध्यात्मिक या धार्मिक परम्परा में जैसे ब्रह्म कभी नहीं खत्म किया जा सकता, वैसे ही आधुनिक विज्ञान द्वारा यह सिद्ध किया गया है कि शब्द कभी मारा या विनाशित नहीं किया जा सकता। ठीक इसी प्रकार साहित्य का रूप भी अजर-अमर रहता हैं।

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वह युगानुयुग मानव पीढ़ी को अनुप्राणित करता रहता है। साहित्य युगों – युगों तक मनुष्यों की चेतना को संबल प्रदान करते रहते हैं। उदाहरण के रूप में हम भक्ति काल से रचे गए कबीर, जायसी, सूर, तुलसी द्वारा रचित साहित्य को भी ले सकते हैं। उपर्युक्त सभी प्रकार के साहित्य अभी तक भक्ति एवं धार्मिक मार्गदर्शन के लिए हमारे काम आते हैं।

66. साहित्य को मानव-जीवन में क्या माना गया है?
(A) कोमल-कांत आंतरिक भावनाओं का वाहक
(B) जीवन का ऊबड़ – खाबड़ धरातल
(C) जीवन का कठोर और यथार्थ धरातल
(D) मानव जीवन का चिंतन

67. मानव मन किससे भरा रहता है?
(A) कोमल भावनाओं से भरा रहता है।
(B) भावुक भावनाओं से भरा रहता है।
(C) चमत्कारी भावनाओं से भरा रहता है।
(D) इन सभी भावनाओं से भरा रहता है।

68. साहित्य जीवन को क्या प्रदान करता है?
(A) आश्वासन
(B) विश्वास और आश्रय
(C) (A) तथा (B) दोनों
(D) अन्य

69. भक्तिकाल के प्रसिद्ध कवि हैं –
(A) कबीर, जायसी और चन्दबरदाई
(B) सूर, तुलसी और बिहारी
(C) कबीर, जायसी, सूर और तुलसी
(D) इनमें से कोई नहीं

70. सनातन धर्म के अनुसार किसे सत्य, ब्रह्म का रूप माना गया है –
(A) विज्ञान
(B) अक्षर
(C) मानव मन
(D) भक्ति

71. रामधारी सिंह दिनकर को उनकी किस रचना के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला?
(A) लोकायतन
(B) उर्वशी
(C) संस्कृति के चार अध्याय
(D) रश्मिरथी

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Answer – (C)

72. त, थ, द, ध, न का उच्चारण होता है –
(A) तालु से
(B) नासिका से
(C) दंत से
(D) कंठ से

73. हिन्दी साहित्य का स्वर्ण युग माना गया है –
(A) आदिकाल
(B) भक्तिकाल
(C) रीतिकाल
(D) आधुनिक काल

74. व्याकरण शिक्षण की वह पद्धति अपेक्षाकृत उचित है, जिसमें –
(A) बच्चे नियमों को कण्ठस्थ कर लेते हैं।
(B) बच्चे उदाहरणों से नियमों की ओर जाते हैं।
(C) बच्चे नियमों से उदाहरणों की ओर जाते हैं।
(D) बच्चे सूत्रों का प्रयोग करते हैं।

75. “तुम्ह तौ कालु हाँक जनु लावा” पंक्ति में निहित अलंकार है –
(A) उपमा
(B) उत्प्रेक्षा
(C) अनुप्रास
(D) रुपक

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