91. ‘सुरति-निरति’ निबंध के रचनाकार हैं
(A) राहुल सांकृत्यायन
(B) पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल
(C) हजारी प्रसाद द्विवेदी
(D) हरिशंकर परसाई
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व्याख्या: हिंदी के प्रसिद्ध विद्वान, आलोचक और खोजकर्ता डॉ. पीताम्बर दत्त बड़थ्वाल (जो हिंदी साहित्य में डी.लिट की उपाधि पाने वाले पहले व्यक्ति भी थे) ने ‘सुरति-निरति’ नामक प्रसिद्ध दार्शनिक और वैचारिक निबंध की रचना की थी। यह इनके गंभीर संत-साहित्य अध्ययन को दर्शाता है।
92. जिन में से हिन्दी की बोलियों का विकास नहीं हुआ है व्याख्या: हिंदी की उपभाषाओं और बोलियों का विकास मुख्य रूप से तीन अपभ्रंशों से हुआ है: शौरसेनी (पश्चिमी हिंदी, राजस्थानी), अर्धमागधी (पूर्वी हिंदी) और मागधी (बिहारी हिंदी)। महाराष्ट्री अपभ्रंश से मराठी भाषा का विकास हुआ है, हिंदी की बोलियों का नहीं।
(A) शौरसेनी अपभ्रंश से
(B) अर्धमागधी अपभ्रंश से
(C) मागधी अपभ्रंश से
(D) महाराष्ट्री अपभ्रंश से
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93. ‘गंगा गए गंगादास, जमुना गए, जमुनादास’ लोकोक्ति का अर्थ है व्याख्या: इस प्रसिद्ध लोकोक्ति का अर्थ होता है अवसरवादी होना या जिसका कोई दृढ़ सिद्धांत न हो (सिद्धांतहीन व्यक्ति)। ऐसा व्यक्ति जो अपने फायदे के लिए परिस्थितियों के हिसाब से तुरंत अपना पाला या दल बदल लेता है, उसके लिए इस कहावत का प्रयोग किया जाता है।
(A) निराशावादी
(B) सत्यवादी
(C) अवसरवादी
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
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94. निम्नलिखित शब्दों में से तत्सम शब्द है व्याख्या: ‘आज्ञा’ एक शुद्ध संस्कृत (तत्सम) शब्द है, जिसका तद्भव रूप ‘आन’ होता है। बाकी विकल्पों का विश्लेषण इस प्रकार है:
(A) आज्ञा
(B) राय
(C) दाहिना
(D) किसान
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95. अष्टछाप के कवियों में सर्वाधिक लोकप्रिय कवि हैं व्याख्या: महाप्रभु वल्लभाचार्य और उनके पुत्र विट्ठलनाथ द्वारा स्थापित ‘अष्टछाप’ (कृष्ण भक्त 8 कवियों का समूह) में सूरदास जी का स्थान सर्वोपरि है। वे वात्सल्य और शृंगार रस के सम्राट माने जाते हैं और अष्टछाप के जहाज़ कहलाते हैं।
(A) भूषण
(B) जायसी
(C) रसखान
(D) सूरदास
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96. “नवगति नव लय ताल छंद नव, व्याख्या: यह प्रसिद्ध पंक्तियाँ महाप्राण सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी की प्रसिद्ध सरस्वती वंदना “वर दे, वीणावादिनी वर दे” से ली गई हैं। इस कविता में वे मां सरस्वती से देश में नए चेतना और नए स्वर फूंकने की प्रार्थना करते हैं।
नवल कंठ नव जलद मंद रव,
नव नभ के नव विहग वृंद को,
नव पर नव स्वर दे ।”
निम्नलिखित में से उपर्युक्त पंक्तियों के रचनाकार हैं
(A) माखनलाल चतुर्वेदी
(B) सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’
(C) जयशंकर प्रसाद
(D) मैथिलीशरण गुप्त
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97. किसी कार्यालय के कर्मचारियों के लिए समय-समय पर निकाले गए आदेशों की सूचना को कहा जाता है व्याख्या: शासकीय पत्र-व्यवहार (Official Correspondence) के नियमों के अनुसार, किसी कार्यालय या संस्थान के भीतर कर्मचारियों के आंतरिक अनुशासन, तबादले, छुट्टी या प्रशासनिक व्यवस्था के लिए समय-समय पर जारी की जाने वाली सूचना को कार्यालय आदेश (Office Order) कहा जाता है।
(A) परिपत्र
(B) कार्यालय आदेश
(C) कार्यालय ज्ञापन
(D) अनुस्मारक
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98. मुहावरा ‘छींका टूटना’ का अर्थ है व्याख्या: ‘छींका टूटना’ या ‘बिल्ली के भाग्य से छींका टूटना’ मुहावरे का अर्थ होता है अचानक कोई अप्रत्याशित लाभ होना या भाग्य का अनुकूल होना। जब बिना किसी विशेष परिश्रम के अचानक कोई बड़ी सफलता या वस्तु मिल जाती है, तब इसका प्रयोग किया जाता है।
(A) पेड़ गिरना
(B) भाग्य अनुकूल होना
(C) सफलता मिलना
(D) परिश्रम करना
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99. ‘स्थावर’ का विलोम शब्द है व्याख्या: ‘स्थावर’ का अर्थ होता है जो एक ही स्थान पर स्थिर रहे (जैसे मकान, भूमि या पेड़), और इसका ठीक विपरीत/विलोम ‘जंगम’ होता है जिसका अर्थ है जो चल-फिर सके (गतिशील)। अन्य विकल्प: स्थूल का विलोम सूक्ष्म होता है।
(A) जंगम
(B) स्थूल
(C) सूक्ष्म
(D) उपर्युक्त में से कोई नहीं
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100. निजवाचक सर्वनामयुक्त शब्द है व्याख्या: जो सर्वनाम शब्द कर्ता स्वयं अपने लिए (Self के अर्थ में) प्रयोग करता है, उसे निजवाचक सर्वनाम कहते हैं। जैसे: “मैं यह काम आप ही (खुद) कर लूँगा।” यहाँ ‘आप’ आदरसूचक मध्यम पुरुष न होकर निजवाचक है। बाकी विकल्प: ‘किसी’ अनिश्चयवाचक, ‘किन्हें’ प्रश्नवाचक और ‘तुम’ पुरुषवाचक सर्वनाम हैं।
(A) किसी
(B) आप
(C) किन्हें
(D) तुम
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