नोनिया विद्रोह (Noniya Rebellion) यह विद्रोह 1770 से 1800 ई. के बीच बिहार के शोरा उत्पादक क्षेत्रों हाजीपुर, तिरहुत, सारण और पूर्णिया में हुआ था। इस काल में बिहार शोरा
यह आंदोलन बिरसा आंदोलन से ही जनमा था। यह भी एक बहुआयामी आंदोलन था, क्योंकि इसके नायक भी अपनी सामाजिक अस्मिता, धार्मिक परंपरा और मानवीय अधिकारों के मुद्दों को लेकर
वीरभूम, ढालभूम, सिंहभूम, मानभूम और बाकुड़ा के जमींदारों द्वारा सताए गए संथाल 1790 ई. से ही संथाल परगना क्षेत्र, जिसे दामिन-ए-कोह कहा जाता था, में आकर बसने लगे। इन्हीं संथालों
तमाड़ विद्रोह (Tamad Rebellion) सन् 1771 में अंग्रेजों ने छोटानागपुर पर अपना अधिकार जमा लिया था और यहाँ के राजाओं एवं जमींदारों को कंपनी का संरक्षण मिल चुका था, जिससे
यह व्यापक विद्रोह छोटानागपुर, पलामू, सिंहभूम और मानभूम की कई जनजातियों का संयुक्त विद्रोह था, जो अंग्रेजों के बढ़ते हस्तक्षेपों के शोषण के खिलाफ उपजा था। कोल विद्रोह का कारण
‘हो’ विद्रोह (‘Ho’ Rebellion) यह विद्रोह सन् 1821-22 छोटानागपुर के ‘हो’ लोगों ने सिंहभूम के राजा जगन्नाथ सिंह के विरुद्ध किया। जगन्नाथ सिंह के प्रति ‘हो’ लोग तटस्थ थे और
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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 148 के तहत एक स्वतंत्र महालेखा परीक्षक की प्रावधान है जो भारत के लेखा-बही का प्रमुख होता है और समय-समय पर केंद्र और राज्य सरकारों के
भारत में महान्यायवादी का पद ब्रिटेन की नकल होते हुए भी उससे काफी भिन्न है। ब्रिटेन में विधिमंत्री ही महान्यायवादी होता है और वह विधिमंत्री होने के कारण मंत्रिमण्डल का
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