अरुण जेटली की जीवनी (Biography of Arun Jaitley)

अरुण जेटली (Arun Jaitley)

अरुण जेटली (Arun Jaitley) का परिवार विभाजन के बाद पाकिस्तान से आया था। अरुण जेटली (Arun Jaitley) का जन्म, महाराज कृष्ण जेटली और रतन प्रभा जेटली के घर में हुआ था। उनके पिता भी पेशे से वकील थे। 28 दिसंबर 1952 को दिल्ली में अरुण जेटली का जन्म हुआ। अरुण जेटली की शुरूआती पढ़ाई-लिखाई सेंट जेवियर्स स्कूल, नई दिल्ली से हुई थी। इसके बाद उन्होंने 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय के श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स से बी.कॉम. किया। 1977 में दिल्ली विश्वविद्यालय से ही उन्होंने वकालत की डिग्री हासिल की। अरुण जेटली बचपन से ही काफी मेधावी रहे, उन्हें अकादमिक पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जेटली ने 24 मई 1982 को संगीता जेटली से विवाह कर लिया। उनके दो बच्चे, पुत्र रोहन और पुत्री सोनाली हैं।

जन्म – 28 दिसम्बर 1952 (नई दिल्ली में)
मृत्यु – 24 अगस्त 2019
पिता – श्री महाराज किशन जेटली
माता – श्रीमती रतन प्रभा जेटली
पत्नी – श्रीमती संगीता डोगरा

राजनीतिक जीवन

अरुण जेटली के राजनीतिक जीवन की शुरूआत दिल्ली विश्वविद्यालय से हुई थी। सन् 1973 में जेटली भ्रष्टाचार के विरुद्ध आहूत लोकनायक जय प्रकाश नारायण के ‘संपूर्ण क्रांति आंदोलन’ के सिलसिले में विद्यार्थी और युवा संगठनों की जे.पी. द्वारा स्वयं गठित की गई ‘राष्ट्रीय समिति’ के संयोजक थे। सन् 1974 में दिल्ली विश्वविद्यालय छांत्रसंघ के अघ्यक्ष थे। अरुण जेटली ने करीब 1975 में सक्रिय राजनीति में पदार्पण कर दिया था। 1991 में वह भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य बन चुके थे। मुद्दों और राजनीति की बेहतर समझने रखने वाले अरुण जेटली को 1999 के लोकसभा चुनाव से पहले भाजपा का राष्ट्रीय प्रवक्ता बना दिया गया था। 1999 के चुनाव में अटल बिहारी वायपेयी के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की सरकार सत्ता में आई। तब की वाजपेयी सरकार में जेटली को सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) के साथ ही विनिवेश राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) की अतिरिक्त जिम्मेदारी सौंपी गई थी।

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23 जुलाई 2000 को केंद्रीय कानून, न्याय और कंपनी मामलों के कैबिनेट मंत्री राम जेठमलानी ने इस्तीफा दे दिया। जेठमलानी के इस्तीफे के बाद उनके मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी अरुण जेटली को ही सौंप दिया गया था। महज चार माह में उन्हें वायपेयी सरकार की कैबिनेट में शामिल कर कानून, न्याय और कंपनी मामलों के साथ-साथ जहाजरानी मंत्रालय की भी जिम्मेदारी सौंप दी गई। वायपेयी सरकार में लगातार उनका प्रोफाइल बढ़ता और बदला रहा। उन्होंने हर जिम्मेदारी को बखूबी निभाया। 2004 के चुनाव में वाजपेयी सरकार सत्ता से बाहर हुई तो जेटली पार्टी महासचिव बनकर संगठन की सेवा करने लगे। जून 2009 को, उन्हें राज्यसभा में विपक्ष के नेता के रूप में चुना गया। 2014 के बाद से, वह नरेंद्र मोदी की सरकार के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल में मंत्री थे। मई 2014 से मई, 2019 तक, वह वित्त मंत्री और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्री थे। वह 2014 और 2017 में रक्षा मंत्री और 2014 से 2016 तक भारत सरकार में सूचना और प्रसारण मंत्री रहे। 2019 में स्वास्थ्य कारणों के कारण वह सक्रिय राजनीती से दूर हो गये।

अरुण जेटली ऐसे नेता थे, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर में कभी कोई लोकसभा चुनाव नहीं जीता, बावजूद उन्हें राजनीति का पुरोधा माना जाता है।

कानूनी कैरियर

जेटली भारत के सुप्रीम कोर्ट और 1977 से देश में कई उच्च न्यायालयों के सामने कानून का अभ्यास कर रहे हैं। जनवरी 1990 में, दिल्ली उच्च न्यायालय ने उन्हें वरिष्ठ अधिवक्ताके रूप में नामित किया। 1989 में वी. पी. सिंह सरकार ने उन्हें अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल नियुक्त किया था और बोफोर्स घोटाले में जांच के लिए कागजी कार्रवाई की थी। उन्होंने कानूनी और मौजूदा मामलों पर कई प्रकाशनों की रचना की है। उन्होंने भारत-ब्रिटिश कानूनी फोरम से पहले भारत में भ्रष्टाचार और अपराध से संबंधित कानून पर एक पत्र प्रस्तुत किया है। वह भारत सरकार की ओर से जून 1998 में संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के लिए एक प्रतिनिधि था जहां ड्रग्स एंड मनी लॉन्ड्रिंग से संबंधित कानूनों की घोषणा को मंजूरी दे दी गई थी।

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मृत्यु 

वैसे भी जुलाई 2005 में हार्ट अटैक के बाद जेटली की बाईपास सर्जरी हो चुकी थी। इसके बाद मई 2018 में दिल्ली के एम्स अस्पताल में उनकी किडनी का ऑपरेशन हुआ। इस ऑपरेशन के बाद कुछ महीनों तक वे राजनीति से दूर रहे। ठीक होने के बाद कुछ दिन उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही में भी हिस्सा लिया। जनवरी 2019 में उन्हें सॉफ्ट टिश्यू सारकोमा डायग्नोस हुआ। यह एक तरह का कैंसर है। इलाज के लिए वे न्यूयॉर्क गए। लेकिन उनकी हालत बिगड़ती गई अंत: वे दिल्ली वापस आ गए। 9 अगस्त को उन्हें हालत ज्यादा बिगड़ने के बाद एम्स में भर्ती करवाया गया। 24 अगस्त को 12 बजकर 7 मिनट पर  इस दुनिया को अलविदा कह गए। यह भारतीय राजनीती और देश के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।

 

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