अटल बिहारी जी की जीवनी

जन्म – 25 दिसंबर 1924 (ग्वालियर में)
माता – कृष्णा देवी
पिता – कृष्णाबिहारी
निधन – 16 अगस्त 2018

अटल बिहारी वाजपेयी (Atal Bihari Vajpayee) का जन्म 25 दिसंबर 1924 को ग्वालियर में हुआ था। उनके पिता का नाम कृष्णाबिहारी और माता का नाम कृष्णा देवी था, उनके दादाजी पंडित श्यामलाल वाजपेयी उनके पैतृक गांव बटेश्वर, उत्तर प्रदेश से ग्वालियर में बस गए थे। उनके पिता कृष्णाबिहारी वाजपेयी एक कवि और मोरेना गांव के स्कूल के प्रधानाध्यापक थे।

शिक्षा

वाजपेयी की प्रारंभिक शिक्षा ग्वालियर के बारा गोरखी के गोरखी ग्राम की गवर्नमेंट हायर सेकेंडरी स्कूल से शिक्षा ग्रहण की थी। बाद में वे शिक्षा प्राप्त करने ग्वालियर विक्टोरिया कॉलेज (लक्ष्मीबाई कॉलेज) गए और हिंदी, इंग्लिश और संस्कृत में डिस्टिंक्शन से पास हुए। उन्होंने कानपुर के दयानंद एंग्लोवैदिक कालेज से पॉलिटिकल साइंस में अपना पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके लिए उन्हें फर्स्ट क्लास डिग्री से भी सम्मानित किया गया था।

राजनैतिक जीवन

ग्वालियर के आर्य कुमार सभा से उन्होंने राजनैतिक काम करना शुरू किया। ये उस समय आर्य समाज की युवा शक्ति माने जाते थे और 1944 में वे उसके जनरल सेक्रेटरी भी बने। विभाजन के बीज फैलने की वजह से उन्होंने लॉ की पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और प्रचारक के रूप में उन्हें उत्तर प्रदेश भेजा गया और जल्द ही वे दीनदयाल उपाध्याय के साथ राष्ट्रधर्म (हिंदी मासिक), पांचजन्य (हिंदी साप्ताहिक) और दैनिक स्वदेश और वीर अर्जुन जैसे अखबारों के लिए काम करने लगे।

वाजपेयी का राजनीति में पहली बार पदार्पण अगस्त 1942 में हुआ जब उन्हें और उनके बड़े भाई को भारत छोड़ो आंदोलन के तहत 23 दिनों के लिए गिरफ्तार कर लिया गया, 1951 में दीनदयाल उपाध्याय के साथ मिलकर आरएसएस ने हिंदू राजनीतिक पार्टी ‘भारतीय जनसंघ’ का निर्माण किया। इस पार्टी में उनको उत्तरी प्रभाग का राष्ट्रीय सचिव चुना गया।

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1968 में दीनदयाल उपाध्याय के देहांत के बाद उन्हें जनसंघ का राष्ट्रीय अध्यक्ष चुना गया। 1977 में वाजपेयी ने जयप्रकाश नारायण के साथ मिलकर जनसंघ को जनता पार्टी में मिला दिया और चुनावों में जनता पार्टी की पहली जीत हुई और उन्हें मोरारजी देसाई के कैबिनेट में विदेश मंत्री बनाया गया। उसके बाद वह पहली बार संयुक्त राष्ट्र में हिंदी में भाषण देने वाले पहले मंत्री बने।

मोरारजी देसाई के 1979 में इस्तीफा देने के बाद जनता पार्टी खत्म होने लगी और जनसंघ ने इसका फायदा उठाया। वाजपेयी ने भारतीय जनसंघ और आरएसएस के मित्रों के साथ मिलकर 1980 में भारतीय जनता पार्टी का गठन किया। वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के पहले अध्यक्ष बने। 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या हो गई और लोकसभा चुनावो में उनकी पार्टी को 2 सीटें मिलीं।  इसके बाद राम जन्मभूमि विवाद में भाजपा जमकर सामने आई और उन्होंने विहिप और आरएसएस के साथ मिलकर अयोध्या में राम मंदिर निर्माण बनाने की बात कही।

1995 में गुजरात और महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत हुई और वह एक बड़ी पार्टी बनकर सामने आई। 1995 के अधिवेशन में लालकृष्ण आडवाणी ने वाजपेयी को प्रधानमंत्री बनाने की बात कही, 1996 के लोकसभा चुनावों में भाजपा जीत गई और वाजपेयी ने 1996 से 2004 के बीच तीन बार प्रधानमंत्री की शपथ ली, पहली बार 1996 में भारत का 10वां प्रधानमंत्री चुना गया लेकिन बहुमत के आभाव में उन्होंने 13 दिनों की सरकार के बाद इस्तीफा दे दिया।

1998 में लोकसभा भंग होने पर फिर से चुनाव हुए और भाजपा फिर से बड़ी पार्टी बनकर उभरी, इस बार भी वाजपेयी को प्रधानमंत्री चुना गया। उनके इस कार्यकाल के दौरान उन्होंने ‘ऑपरेशन शक्ति’ चलाया जिसमें पोखरण में परमाणु बम परीक्षण किया गया ताकि विश्व को भारत की ताकत पता चल सके, इसके अलावा उन्होंने 1999 में दिल्ली से लाहौर के बीच बस सेवा प्रारंभ की। 1999 में कारगिल वार छिड़ गया और वाजपेयी ने ‘ऑपरेशन विजय’ चलाकर विजय प्राप्त की। इन तीन महीनों तक चले कारगिल संघर्ष में भारत के 500 सैनिक और पाकिस्तान के लगभग 1000 से ज्यादा सैनिक मारे गए। 13 महीनों की सरकार चलाने के बाद एक बार फिर अन्नाद्रमुक का साथ छोड़ने की वजह से लोकसभा भंग हो गई और फिर से चुनाव हुए।

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1999 में फिर से चुनाव हुए और इस बार भाजपा तथा मित्र दलों को 543 में से 303 सीट मिलीं। तीसरी बार वाजपेयी प्रधानमंत्री बने। 2001 में वाजपेयी अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बुश से मिले थे। उनके द्वारा शुरू की गई स्वर्ण चतुर्भुज योजना ने चार महानगरों को आपस में जोड़कर इतिहास रचा। सन 2001 में उन्होंने सर्व शिक्षा अभियान चलाया और प्राथमिक स्कूलों की गुणवत्ता में सुधार किया। 2005 में अटल जी ने सक्रीय राजनीति से सन्यास ले लिया।

पुरस्कार/सम्मान

  • 2015 – भारत रत्न 
  • 2015 – ‘फ्रेंडस ऑफ बांग्लादेश लिबरेशन वार अवार्ड’ सम्मान बांग्लादेश सरकार द्वारा दिया गया।
  • 2015 – डी लिट् (मध्यप्रदेश भोज मुक्त विश्वविद्यालय)
  • 1994 – भारत रत्न पंडित गोविंद बल्लभ पंत पुरस्कार
  • 1994 – श्रेष्ठ सांसद पुरस्कार
  • 1994 – लोकमान्य तिलक पुरस्कार
  • 1993 – डी लिट (कानपुर विश्वविद्यालय)
  • 1992 – पद्म विभूषण

वाजपेयी की किताबें

  • मेरी इक्यावन कविताएँ (1995)
  • अटल बिहारी वाज मेम टीना दसका (1992)
  • प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी : चुने हुए भाषण (2000)
  • वैल्यू, विज़न x वर्सेज ऑफ वाजपेयी : इंडिया मैन ऑफ डेस्टिनी (2001)
  • इंडिया’स फॉरेन पालिसी : न्यू डायमेंशन (1977)
  • असाम समस्या (1981)

Facts

  • सबसे लंबे समय तक सांसद रहने का रिकॉर्ड – 6 अलग-अलग सीटों से 10 बार लोकसभा और 2 बार राज्यसभा में पहुंचे, कुल 50 साल सांसद रहे।
  • सबसे लंबी राजनीतिक पारी – 1942 से 2005 तक 63 साल की सक्रिय राजनीति। (पहला चुनाव 1954 में लड़ा)
  • पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री – जिन्होंने 5 साल सरकार चलाई। (पहले 13 दिन और 13 महीने की सरकार भी)

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