प्रकाश संश्लेषण (PHOTOSYNTHESIS) 

प्रकाश संश्लेषण (PHOTOSYNTHESIS) 

पौधों में जल, प्रकाश, पर्णहरित तथा कार्बन डाई आक्साइड की उपस्थिति में कार्बोहाइड्रेट्स के निर्माण की प्रक्रिया को प्रकाश-संश्लेषण (Photosynthesis) कहते हैं।

प्रकाश संश्लेषण केवल दृश्य प्रकाश वर्णों (बैनी आहपीनाला) (VIBGYOR) में होता है। बैंगनी रंग के प्रकाश में सबसे कम तथा लाला रंग के प्रकाश में सबसे अधिक प्रकाश संश्लेषण होता है।
V – Violet
I – Indigo
B – Blue
G – Green
Y – Yellow
O – Orange
R – Red

पर्णहरित (Chloroplast) — यह प्रकाश संश्लेषण का केन्द्र होता है। क्लोरोफिल में चार पाइरोल रिंग का बना चपटा पोरफारिन हेड जिसके केन्द्र में मैग्नेशियम (Mg) का एक परमाणु तथा एक रिंग पर हाइड्रोकार्बन चेन होती है। क्लोरोफिल का सूत्र : – C55H70O5N4Mg तथा क्लोरोफिल का सूत्र C55H70O6N4Mg है अन्य लवक है कैरिटीनोइड्रस तथा फाइकोबिलिन्स। 

कार्बन डाई-आक्साइड (CO2) — प्रकृति में कार्बन डाई आक्साइड की मात्रा 0.03% है जबकि पानी मं CO2 की मात्रा 0.3% होती है। 

प्रकाश संश्लेषण क्रिया (Photosynthesis)

प्रकाश संश्लेषण एक उपचयन-अपचयन क्रिया है जिसमें जल का उपचयन (Oxidation) आक्सीजन के बनने में तथा कार्बन डाई-आक्साइड का अपचयन शर्करा के निर्माण में होता है। इस क्रिया की दो अवस्थाएं होती हैं – 

  1. प्रकाश रासायनिक क्रिया (Photochemical Reaction), और 
  2. रासायनिक प्रकाशहीन क्रिया (Chemical Dark Reaction)। 

प्रकाश रासायनिक क्रियाः यह क्रिया क्लोरोफिल के ग्राना में होती है। इसे हिल क्रिया (Hill Reaction) भी कहते हैं। इस प्रक्रिया में जल का अपघटन होकर हाइड्रोजन आयन तथा इलेक्ट्रान बनता है। जल के अपघटन के लिए ऊर्जा प्रकाश द्वारा मिलती है। इस प्रक्रिया के अन्त में ऊर्जा के रूप में एटीपी (ATP) तथा एन. ए.डी.पी.एच. (NADPH) निकलता है जो अंधकार में क्रिया संचालित करने में मदद करते हैं। 

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रासायनिक प्रकाशहीन प्रतिक्रियाः यह क्रिया क्लोरोफिल के स्ट्रोमा में होती है। इस क्रिया में कार्बनडाइआक्साइड का अपचयन होकर शर्करा, स्टार्च आदि बनता है। 

प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारक

प्रकाश संश्लेषण की स्थिर दर के लिए, आदर्श स्तर पर अलग-अलग कारकों की जरूरत होती है। यहाँ प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कुछ कारक दिए जा रहें हैं।

  • प्रकाश की तीव्रता — प्रकाश की बढ़ी हुई तीव्रता से प्रकाश संश्लेषण की दर ज्यादा हो जाती है और प्रकाश की कम तीव्रता का मतलब प्रकाश संश्लेषण की कम दर होती है।
  • CO2 की सांद्रता — कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता ज्यादा होने से प्रकाश संश्लेषण की दर बढ़ जाती है। कार्बन डाइऑक्साइड की आमतौर पर 0.03 – 0.04 प्रतिशत सांद्रता प्रकाश संश्लेषण के लिए पर्याप्त होती है।
  • तापमान — समुचित प्रकाश संश्लेषण के लिए 25oC से 35oC के बीच के अनुकूल तापमान की जरूरत होती है।
  • पानी — पानी प्रकाश संश्लेषण के लिये अनिवार्य है। पानी की कमी से कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करने में समस्या होती है। अगर पानी कम होता है, तो पत्तिया अंदर भण्डारित पानी बचाए रखने के लिए अपना स्टोमेटा नहीं खोलती हैं।
  • प्रदूषित वातावरण — प्रदूषक और गैसें (अशुद्ध कार्बन) पत्तियों पर जम जाते हैं और स्टोमेटा को बंद कर देते है। इससे कार्बन डाइऑक्साइड ग्रहण करना मुश्किल हो जाता है।  प्रदूषित वातावरण से प्रकाश संश्लेषण की दर में 15 प्रतिशत तक की कमी आ सकती है।

 

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