सार्जेण्ट शिक्षा योजना (1944) (Sargent Education Scheme (1944)) द्वितीय विश्वयुद्ध की समाप्ति पर सरकार ने युद्धोत्तर विकास की अनेक योजनाएँ बनायी । इन योजनाओं में शिक्षा को भी स्थान दिया
हर्टाग समिति (1929) (Hartog Committee 1929) शिक्षा संस्थाओं की संख्या बढ़ने से शिक्षा के स्तर में गिरावट आयी। शैक्षणिक पद्धति के प्रति असंतोष बढ़ता गया। 8 नवम्बर 1927 को साइमन
सैडलर विश्वविद्यालय कमीशन (1917-19) (Sadler University Commission (1917–19)) कलकत्ता विश्वविद्यालय में सर आशुतोष मुकर्जी के प्रयत्नों से स्नातकोत्तर विभाग खोला गया। अत: सरकार ने कलकत्ता विश्वविद्यालय की जाँच के लिए
1913 का शिक्षा-नीति संबंधी सरकारी प्रस्ताव (Government Resolution on Education Policy of 1913) देश में शिक्षा की माँग बढ़ जाने तथा गोखले के आन्दोलन के कारण भारतीय सरकार के लिए
कर्जन की शिक्षा नीति (Curzon’s Education Policy) भारतीय शिक्षा के इतिहास में लॉर्ड कर्जन (Lord Curzon) का काल महत्वपूर्ण है। कर्जन विद्वान, कुशल प्रशासक तथा पाश्चात्य सभ्यता का परम भक्त
हंटर कमीशन 1882 – 83 (Hunter Commission 1882-83) 1854 के घोषणा-पत्र से शिक्षा के क्षेत्र में जितनी प्रगति की आशा की जाती थी, वास्तव में उतनी न हो सकी। उच्च
वुड घोषणा पत्र (1854) Wood’s despatch (1854) सन् 1853 में जब पुन: कंपनी के आज्ञा पत्र के नवीनीकरण का अवसर आया तो इंग्लैण्ड के राजनीतिक क्षेत्रों में यह विवाद का
मैकॉले का विवरण पत्र (1835) शिक्षा की ओर सर्वप्रथम एक महत्वपूर्ण प्रयास गवर्नर-जनरल लॉर्ड विलियम बेंटिंक के समय में उठाया गया। बेंटिंक स्वयं पाश्चात्य-शिक्षा को आरंभ किये जाने के पक्ष
भारत में ब्रिटिश शिक्षा नीति (British Education Policy in India) 1772 ई. में बंगाल से भारत में प्रत्यक्ष रूप से अंग्रेजी शासन का आरंभ हुआ। परन्तु एक लम्बे समय तक
उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC – Uttar Pradesh Subordinate Services Selection Commission) द्वारा सरकारी नौकरी की भर्ती प्रक्रिया के लिए प्रारम्भिक अहर्ता परीक्षा (PET – Preliminary Eligibility Test)
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