बिहार पर तुर्क आक्रमण (Turkish attacks on Bihar)

11वीं सदी के प्रारंभ में भारत पर गजनी वंश के शासक महमूद गजनी के नेतृत्व में तुर्क आक्रमण हुआ।

  • तुर्क आक्रमण की जानकारी फिरदौसी की रचना ‘शाहनामा’ से मिलती है।
  • ‘शाहनामा’ फारसी साहित्य की प्रथम सबसे प्रसिद्ध रचना है।

महमूद गजनी का आक्रमण (Mahmoud Ghazni invasion)

  • यामिनी वंश का महमूद गजनी, जो सुबुक्तगीन का पुत्र था, उसने ‘गाजी’ की उपाधि धारण की।
  • महमूद गजनी ने सर्वप्रथम 1001 ई. में उद्भडपुर के हिंदूशाही वंश के शासक जयपाल पर आक्रमण किया था।
  • उसके बाद 1011-12 ई. में थानेश्वर के चक्रस्वामी मंदिर पर एवं 1021-22 ई. में पंजाब पर आक्रमण किया। पंजाब पर आक्रमण का मूल उद्देश्य सैनिक केंद्र की स्थापना करना था।
  • 1025-26 ई. में गुजरात के सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण किया।
  • गजनी का अंतिम आक्रमण 1027 ई. में जाट शासकों के खिलाफ था।
  • गजनी के आक्रमण का मुख्य उद्देश्य धन लूटना था। इसलिए भारत एवं बिहार के राजनीतिक इतिहास पर इस आक्रमण का विशेष प्रभाव नहीं पड़ा।

मुहम्मद गोरी का आक्रमण (Invasion of Muhammad Ghori)

  • 12वीं सदी के उत्तरार्ध में भारत पर मुहम्मद गोरी का आक्रमण शुरू हुआ, जिसे तुर्क आक्रमण का द्वितीय चरण भी कहते हैं।
  • मुहम्मद गोरी का मूल नाम मोइजुद्दीन मुहम्मद बिन शाम था।
  • इसने 1175 ई. से 1194 ई. तक भारत पर कई बार आक्रमण किया।
  • इसके आक्रमण का मुख्य उद्देश्य राजनीतिक सत्ता की स्थापना करना था और इस उद्देश्य में वह पूरी तरह सफल रहा।
  • इसके आक्रमण से पूर्वी भारत में बिहार और बंगाल तक का क्षेत्र प्रभावित हुआ। इसके सफल होने का कारण राजनीतिक एकता का अभाव था।
  • भारत की तरह ही इसके आक्रमण के समय बिहार पर भी विकेंद्रीकृत शक्तियाँ प्रभावी थीं। बिहार भी संगठित राजनीतिक इकाई नहीं था।
  • इस समय उत्तरी बिहार के अधिकांश हिस्सों पर कर्णाट वंश का शासन था, जबकि अन्य भाग में छोटे-छोटे राज्य स्थापित थे। इस समय बंगाल के सेन वंश के शासकों ने बिहार पर आक्रमण कर इसकी स्थिति अत्यधिक दयनीय बना दी थी।
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बख्तियार खिलजी (Bakhtiar Khaliji)

  • भारत में मुहम्मद गोरी के तीन सेनापति विजय अभियान चला रहे थे, जिसमें एक सेनापति इख्तियार-अल-दीन मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी पूर्वी भारत में बिहार-बंगाल तक अपना अभियान चला रहा था।
  • बख्तियार खिलजी को गाजी इख्तियार के नाम से भी जाना जाता है।
  • अतः बिहार में तुर्क सत्ता की स्थापना का श्रेय बख्तियार खिलजी को जाता है।
  • जिस समय बख्तियार खिलजी ने बिहार-बंगाल क्षेत्र पर आक्रमण किया, उस समय सेन वंश का शासक लक्ष्मण सेन और पाल वंश का शासक इंद्रद्युम्न पाल ने उसका विरोध किया था।
  • बख्तियार खिलजी ने सबसे पहले बिहार में 1198 ई. में ओदंतपुरी (बिहारशरीफ) को जीता एवं वहाँ स्थापित शिक्षण संस्थान नालंदा विश्वविद्यालय को जलाकर नष्ट कर दिया।
  • 1203-04 ई. में लक्ष्मण सेन की राजधानी नादिया पर आक्रमण किया और उसे पराजित किया।
  • बख्तियार खिलजी ने बिहार और बंगाल के क्षेत्रों को जीतकर एक प्रांत के रूप में संगठित किया तथा लखनौती को राजधानी के रूप में स्थापित किया।
  • बख्तियार खिलजी की हत्या अलीमर्दान खिलजी द्वारा 1206 ई. में कर दी गई।

कुतुबुद्दीन ऐबक (Qutubuddin Aibak)

  • बख्तियार खिलजी के बाद इस क्षेत्र में मुहम्मद गोरी का अन्य सेनापति कुतुबुद्दीन ऐबक का शासन स्थापित रहा।
  • 1206 ई. में मुहम्मद गोरी की मृत्यु होने के बाद कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली में स्वतंत्र तुर्क सत्ता की स्थापना की, जिसे दिल्ली सल्तनत के नाम से जाना जाता है।
  • बिहार-बंगाल का क्षेत्र भी बख्तियार खिलजी की मृत्यु के बाद प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से दिल्ली सल्तनत के अधीन आ गया। दिल्ली सल्तनत की स्थापना के साथ ही पूर्व मध्यकाल की समाप्ति और मध्यकाल का प्रारंभ होता है।
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