बिहार में सेन वंश (Sen Dynasty in Bihar)

पाल वंश के पतन के बाद सामंत सेन के नेतृत्व में सेन वंश की स्थापना हुई। सामंत सेन पालों के अधीन एक सामंत था। हेमंत सेन के समय सेन वंश पूरी तरह से स्वतंत्र हो गया। विजय सेन, वल्लाल सेन, लक्ष्मण सेन आदि शासकों ने बिहार एवं बंगाल क्षेत्र पर शासन किया। विजय सेन इस वंश का एक शक्तिशाली शासक था। विजय सेन की जानकारी देवपाड़ा (बंगाल) ताम्रपत्र लेख से भी मिलती है। विजय सेन ने कर्णाट वंश के शासक नान्यदेव को पराजित किया था। वह शैव धर्म का अनुयायी था। उसने ‘दानसागर’ और ‘अद्भुतसागर’ नामक दो पुस्तकों की रचना की थी। लक्ष्मण सेन इस वंश का अंतिम शासक था। ‘गीतगोविंद’ के लेखक जयदेव लक्ष्मण सेन के दरबार में रहते थे। लक्ष्मण वैष्णव धर्म का अनुयायी था। सेन शासक ने अपनी राजधानी नादिया और लखनौती में स्थापित की थी। सेन शासकों ने गया तक के क्षेत्र को जीत लिया था, जिसमें गहड़वाल शासक गोविंदपाल से संघर्ष करना पड़ा था। जिस समय बिहार-बंगाल क्षेत्र में लक्ष्मण सेन का शासन था, उसी समय तुर्क मुहम्मद गोरी का सेनापति बख्तियार खिलजी का सैन्य अभियान पूर्वी भारत में बिहार-बंगाल तक चल रहा था। इसमें बख्यितार खिलजी ने लक्ष्मण सेन को पराजित कर इस क्षेत्र को तुर्कों के अधीन ला दिया था।

Notes – 

  • सेन वंश के संस्थापक – सामंत सेन
  • शक्तिशाली शासक – विजय सेन
  • अंतिम शासक – लक्ष्मण सेन 
  • राजधानी – नादिया और लखनौती
  • विजय सेन की जानकारी देवपाड़ा (बंगाल) ताम्रपत्र लेख से भी मिलती है।
  • विजय सेन ने ‘दानसागर’ और ‘अद्भुतसागर’ नामक दो पुस्तकों की रचना की थी।
  • ‘गीतगोविंद’ के लेखक जयदेव लक्ष्मण सेन के दरबार में रहते थे।
  • लक्ष्मण वैष्णव धर्म का अनुयायी था और विजय सेन शैव धर्म का।
  • बख्यितार खिलजी ने लक्ष्मण सेन को पराजित कर तुर्कों के अधीन ला दिया था।
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