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पटना जनपद (Patna District)

पटना जनपद का परिचय (Introduction of Patna District)

पटना की स्थिति (Location of Patna)

  • मुख्यालय (Headquarters) – पटना
  • पुराना नाम व उपनाम (Old Name and Surname) – पाटलीपुत्र
  • मंडल (Division) – पटना
  • क्षेत्रफल (Area) – 3,202 वर्ग किमी.
  • भाषा (Language) हिंदी, उर्दू, मैथली
  • सीमा रेखा
    • पूर्व में – बेगूसराय 
    • पश्चिम में भोजपुर (अर्राह)
    • उत्तर में – सरन (छपरा), वैशाली (हाजीपुर), समस्तीपुर
    • दक्षिण में – जहानाबाद, बिहारशरीफ (नालंदा), लखीसराय
  • राष्ट्रीय राजमार्ग (National Highway) NH-031
  • नदियाँ (Rivers) – गंगा, पुनपुन और दरधा

पटना की प्रशासनिक परिचय (Administrative Introduction of Patna)

  • विधानसभा सीट (Assembly Seat) – 14 (मोकामा, बाढ़, बख्तियारपुर, दीघा, बांकीपुर, कुम्हरार, पटना सिटी, फतुहा, दानापुर, मनेर, फुलवारी, मसौढ़ी, पालीगंज, बिक्रम)
  • लोकसभा सीट (Lok Sabha Seat) – 2 (पाटलिपुत्र, पटना साहिब)
  • तहसील / अंचल (Tehsil / Zone) 23 (पटना सदर, सम्पतचक,  फुलवारी शरीफ, फतुहा, दनिआवा, खुसरूपुर, अथमलगोला, मोकामा, बेलछी, घोसवरी, पंडारक, बख्तियारपुर, बाढ़, मसौढ़ी, पुनपुन, धनरुआ, दानापुर, मनेर, बिहटा, नौबतपुर, पालीगंज, दुलहिनबजार, बिक्रम)
  • अनुमंडल (Subdivision) – 6 (पटना, पटना साहिब, बाढ़, मसौढ़ी, दानापुर, पालीगंज)
  • प्रखंड (Block) 23 (पटना सदर, सम्पतचक,  फुलवारी शरीफ, फतुहा, दनिआवा, खुसरूपुर, अथमलगोला, मोकामा, बेलछी, घोसवरी, पंडारक, बख्तियारपुर, बाढ़, मसौढ़ी, पुनपुन, धनरुआ, दानापुर, मनेर, बिहटा, नौबतपुर, पालीगंज, दुलहिनबजार, बिक्रम)
  • कुल ग्राम (Total Village) 1,395
  • कुल ग्राम पंचायत (Total Gram Panchayat) 321
  • नगर निगम (Municipal Corporation) 1 (पटना नगर निगम)
  • नगर पालिका परिषद (Municipal Council) 6 (बाढ़, खगौल, दानापुर, मसौढ़ी, फुलवारी शरीफ)

पटना की जनसंख्या (Population of Patna)

  • कुल जनसंख्या (Total Population) – 58,38,465
    • पुरुष जनसंख्या (Male Population) – 30,78,512
    • महिला जनसंख्या (Female Population) – 27,59,953
  • शहरी जनसंख्या (Urban Population) – 25,14,590 (43.07%)
  • ग्रामीण जनसंख्या (Rural Population) – 33,23,875 (56.93%)
  • साक्षरता दर (Literacy Rate) – 70.68%
    • पुरुष साक्षरता (Male Literacy) – 78.48%
    • महिला साक्षरता (Female Literacy) – 61.96%
  • जनसंख्या घनत्व (Population Density) – 1,823
  • लिंगानुपात (Sex Ratio) – 897
  • जनसंख्या वृद्धि दर (Population Growth Rate) – 23.73%
  • धार्मिक जनसंख्या (Religious Population)
    • हिन्दू जनसंख्या – 53,56,075
    • मुस्लिम जनसंख्या – 4,39,952
    • ईसाई जनसंख्या – 12,551
    • सिख जनसंख्या – 4,803
    • बौद्ध जनसंख्या – 1,062
    • जैन जनसंख्या – 2,151

Population Source – census2011.co.in

पटना के संस्थान व प्रमुख स्थान (Institution & Prime Location of Patna)

  • शिक्षण संस्थान (Teaching Institute) – पटना विश्वविद्यालय, पटना साइंस कॉलेज, पटना कॉलेज, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ़ साउथ बिहार, चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, आई.आई.टी., नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, बिरला इंस्टिट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, आर्यभट्ट नॉलेज यूनिवर्सिटी, मौलाना मजहरुल हक अरबी फारसी यूनिवर्सिटी, पटना मेडिकल कॉलेज, आल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंसेज , चन्द्रगुप्त इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट, नतिओन इंस्टिट्यूट ऑफ़ फैसन टेक्नोलॉजी, FACES (कला, संस्कृति, नैतिकता और विज्ञान के लिए फाउंडेशन)
  • धार्मिक स्थल (Religious Place) – तख्त श्री पटना साहिब
  • प्रसिद्ध स्थल (Famous Place) – अगमकुआँ, तख़्त हरमंदिर साहिब, पटना अजायबघर, पत्थर की मस्जिद, पादरी की हवेली, पटना तारामंडल (इंदिरा गांधी तारामंडल), श्री कृष्ण विज्ञान केंद्र, संजय गाँधी जैविक उद्यान, गोलघर, इको पार्क, बुद्ध स्मृति पार्क
  • उद्योग (Industry) – चीनी, पटाखे, बिस्किट, आटा मिल्स, लाइट-बल्ब, जूते और वैगन फैक्टरी
  • हवाईअड्डा (Airport) – लोक नारायण अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डा

Notes –

  • पटना का पुराना नाम पाटलिपुत्र या पाटलीपट्टन था।
  • सिखों के दसवे और अंतिम गुरु गोविन्द सिंह का जन्मस्थल है।
  • तख्त श्री पटना साहिब सिखों के पांच तख्तों में से एक है और सिखों के दसवें गुरु, गोविंद सिंह के जन्मस्थान को पवित्रा देता है।
  • पटना का नाम समय के साथ परिवर्तित होकर पाटलिग्राम, कुसुमपुर, अजीमाबाद और आधुनिक दौर में पटना नाम से जाना जाता है।
  • चंद्रगुप्त मौर्य ने 4वी. ईसा में यहाँ अपनी राजधानी बनाई।
  • औरंगजेब का पोता शहजादा अजिमुशान को 1703 ई. में पटना का गवर्नर बनाया गया।
  • शहजादा अजिमुशान ने पटना को आधुनिक और सुन्दर शहर का रूप देने का प्रयास किया और इसका नाम अजीमाबाद रखा।
  • पटना यूनिवर्सिटी कि स्थापना 1917 में हुई थी और यह भारतीय उपमहाद्वीप  का सातवां सबसे पुराना यूनिवर्सिटी है।

 

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बिहार के प्रमुख संग्रहालय (Major Museums of Bihar)

बिहार के प्रमुख संग्रहालय (Major Museums of Bihar)

पटना संग्रहालय, पटना (Patna Museum, Patna)

  • स्थापना वर्ष – 1917
  • बिहार का सबसे बड़ा संग्रहालय,
  • मुख्य आकर्षण – दीदारगंज से प्राप्त मौर्यकालीन यक्षिणी की मूर्ति, मौर्यकाल से पालकाल तक के प्राचीन अवशेष, जीवाश्म वृक्ष (लगभग 20 लाख वर्ष पुराना), मुगल चित्रकला व पटना कलम के सुंदर नमूने, सुन्दर कांस्य प्रतिमाएं, सिक्के, मृदभांड अभिलेख, चित्र, सामान्य उपयोग की वस्तुओं के साथ-साथ भूगर्भीय सामग्री और प्राकृतिक सम्पदा के नमूने।

पुरातात्विक संग्रहालय, नालंदा (Archaeological Museum, Nalanda)

  • स्थापना वर्ष – 1917
  • नालंदा के आसपास उत्खनन में प्राप्त सामग्री के महत्त्वपूर्ण नमूने, अधिकांश सामग्री उत्तरकालीन गुप्त शासकों और पाल शासकों से सम्बद्ध

पुरातात्विक संग्रहालय, वैशाली (Archaeological Museum, Vaishali)

  • स्थापना वर्ष – 1945
  • वैशाली संघ द्वारा स्थापित, मौर्यकालीन से पालकालीन अवशेष सुरक्षित

गया संग्रहालय, गया (Gaya Museum, Gaya)

  • स्थापना वर्ष – 1952
  • गया के प्रमुख अधिवक्ता बलदेव प्रसाद द्वारा स्थापित
  • 1970 से बिहार सरकार के नियंत्रण में, 7वीं से 12वीं शताब्दी के बीच को काले पत्थर द्वारा निर्मित मूर्तियां एवं अन्य वस्तुएं, प्राचीन और मध्यकालीन सिक्के एवं पाण्डुलिपियां

जालान संग्रहालय, पटना सिटी (Jalan Museum, Patna City)

  • स्थापना वर्ष – 1954
  • दीवान बहादुर राधाकृष्णन जालान द्वारा स्थापित लगभग 10000 कलाकृतियां और ऐतिहासिक अवशेष सुरक्षित

पुरातात्विक संग्रहालय, बोधगया (Archaeological Museum, Bodhgaya)

  • स्थापना वर्ष – 1956
  • बोधगया से प्राप्त मूर्तियां, ऐतिहासिक अवशेष और अन्य पुरातात्विक सामग्री सुरक्षित

चंद्रधारी संग्रहालय, दरभंगा (Chandraseer Museum, Darbhanga)

  • स्थापना वर्ष – 1957
  • रत्नी (मधुबनी) के जमींदार चंद्रधारी सिंह के निजी संग्रह की वस्तुएं, 12000 से अधिक सुरक्षित वस्तुओं में धातु, लकड़ी, मिट्टी व हाथी दांत के ऐतिहासिक अवशेष एवं पांडुलिपियां

राजेन्द्र स्मारक संग्रहालय, पटना (Rajendra Memorial Museum, Patna)

  • स्थापना वर्ष – 1963
  • भारत के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के जीवन से संबंधित महत्त्वपूर्ण वस्तुओं का संग्रह

गांधी संग्रहालय, पटना (Gandhi Museum, Patna)

  • स्थापना वर्ष – 1967
  • गांधी स्मारक निधि द्वारा स्थापित, विशेष आकर्षण महात्मा गांधी के जीवन की मुख्य घटनाओं पर आधारित चित्रों का संग्रह

नवादा संग्रहालय, नवादा (Nawada Museum, Nawada)

  • स्थापना वर्ष – 1974
  • नवादा जिले से प्राप्त पालकालीन मूर्तियां, सल्तनतकालीन पुरावशेष, सिक्कों का संग्रह

महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह संग्रहालय, दरभंगा (Maharaja Lakshmeshwar Singh Museum, Darbhanga)

  • स्थापना वर्ष – 1979
  • दरभंगा के महाराजा लक्ष्मेश्वर सिंह द्वारा भेंट की गई लगभग 17,000 सामग्री सुरक्षित

श्रीकृष्ण विज्ञान केंद्र (Krishna Science Center)

  • स्थापना वर्ष – 1981
  • बिहार का प्रथम विज्ञान संग्रहालय, विभिन्न वैज्ञानिक उपकरण व यंत्र सुरक्षित तथा इनकी कार्यविधि का व्यावहारिक प्रदर्शन

 

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बिहार में पायें जाने वाले प्रमुख खनिज अयस्क

बिहार के प्रमुख खनिज अयस्क

खनिज स्थान
अभ्रक गया (दिबौर, भलुआरीकला, विषनपुर, मझुली) नवादा, मुंगेर, जमुई, बिंजैसा, महेश्वरी, नावाडीह एवं चकाई
चूना पत्थर रोहतास (जदुनाथपुर, कनकपुर, जारदाग, नावाडीह, काटुडार, पीपराडीह), रोहतासगढ़, चूना इट्टन, रामडिहरा, डुमरवार, बैंगलिया। सर्वोत्तम किस्म का चूना पत्थर रोहतास तथा कैमूर के पठार में पाया जाता है ।
चीनी मिट्टी भागलपुर (कसरी, झरना, पनथरघाटा, लेहवाबख, समुखिया, हरणकारी), बांका (कटोरिया), एवं मुंगेर (खड़गपुर की पहाड़ियाँ, भण्डारी, पनारी)
बाँक्साइट मुंगेर (खड़गपुर की पहाड़ियाँ, खपरा, मेरा, ठाढ़ी, बैंता, सारंग) व रोहतास।
सजावटी पत्थर बांका (कधार, झिलसी, जामदान), भागलपुर (श्याम बाजार), मुंगेर (खड़गपुर की पहाड़ी)।
पेट्रोलियम बिहार के पूर्णिया, कटिहार और निकटवर्ती क्षेत्रों में संभावित भण्डार।
सोना जमुई (करमटिया), पश्चिमी चम्पारण, वाल्मीकिनगर। जमुई के सोनी नामक स्थान पर नयी खोज की गयी है।
मैगनीज मुंगेर एवं गया
टिन गया, देवराज व चकखण्द
डोलोमाइट रोहतास (बंजारी)
एस्बेस्टस मुंगेर
मोनोजाइट यह थोरियम, सीरियम, यूरेनियम लैथेनक का मिश्रण है, जो पैग्मेटाइट शैलों में पाया जाता है। पैग्मेटाइट शिलाएँ गया और मुंगेर जिलों में मिलती है।
पायराइट्स रोहतास, जिलान्तर्गत अमझोर के अतिरिक्त सोन नदी की घाटी, बंजारी तथा कोरियारी आदि क्षेत्र।
सोप स्टोन जमुई (शंकरपुर)
क्वार्टजाइट मुंगेर (खड़गपुर की पहाड़ियाँ), जमालपुर, जमुई (सोनी, चकाई), गया (रामशिला, प्रेतशिला की पहाड़ियाँ) ।
शोरा रेह सीवान, गोपालगंज, पूर्वी चम्पारण (महेसी, पीपरा, पचरूखिया), मुजफ्फरपुर (साहिबगंज, याहयापुर), पटना, बेगूसराय (मझौला, भोजा), सारण (सरैया, मांझी, छाता, भगवान बाजार), समस्तीपुर (नाजीपुर, किशनपुर, तमका), गया एवं मुंगेर (बरियारपुर)।
अग्नि-सह मिट्टी मुंगेर, भागलपुर
यूरेनियम गया
कोयला औरंगाबाद
गंधक रोहतास का अमझोर
क्वार्ट्ज़ जमुई
बैरीलियम गया एवं नवादा
सीसा भागलपुर
कांच पत्थर भागलपुर
सिलीमैनाइट गया
लिथियम गया

 

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बिहार के लोक नाट्य

बिहार के लोक नाट्य (Folk Drama of Bihar)

जट-जाटिन – प्रत्येक वर्ष सावन से लगभग कार्तिक माह की पूर्णिमा तक केवल अविवाहितों द्वारा अभिनीत इस लोकनाट्य में जट-जाटिन के वैवाहिक जीवन को प्रदर्शित किया जाता है।

सामा-चकेवा – प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह में शुक्ल पक्ष की सप्तमी से पूर्णमासी तक अभिनीत इस लोक नाट्य में पात्रों को मिट्टी द्वारा बनाया जाता है, लेकिन उनका अभिनय बालिकाओं द्वारा किया जाता है। इस अभिनय में सामा अर्थात श्यामा तथा चकेवा की भूमिका निभायी जाती है। इस लोक नाट्य में गाए जाने वाले गीतों में प्रश्नोत्तर के माध्यम से विषयवस्तु प्रस्तुत की जाती है।

बिदेसिया – इस लोक नाट्य में भोजपुर क्षेत्र के अत्यन्त लोकप्रिय ‘लौंडा नाच’ के साथ ही आल्हा, पचड़ा, बारहमासा, पूरबी, गोंड, नेटुआ, पंवड़िया आदि का प्रभाव होता है। नाटक का प्रारम्भ मंगलाचरण से होता है। नाटक में महिला पात्रों की भूमिका भी पुरुष कलाकारों द्वारा की जाती है।

भकुली बंका – प्रत्येक वर्ष सावन से कार्तिक माह तक आयोजित किए जाने वाले इस लोक नाट्य में जट-जाटिन द्वारा नृत्य किया जाता है।

डोकमच –  यह पारिवारिक उत्सवों से जुड़ा एक लोक नाट्य है। इस घरेलू लोकनाट्य को मुख्यतः घर-आंगन परिसर में देर रात्रि में महिलाओं द्वारा आयोजित किया जाता हैं। इसमें हास-परिहास के साथ ही अश्लील हाव-भाव का प्रदर्शन भी किया जाता है।

किरतनिया – यह एक भक्तिपूर्ण लोक नाट्य है, जिसमें भगवान श्रीकष्ण की लीलाओं का वर्णन भक्ति-गीतों (कीर्तन) के साथ भाव का प्रदर्शन करके किया जाता है।

बिहार की नाट्य संस्था एवं नाट्य संगठन

स्थान नाट्य संस्था एवं संगठन
पटना रुपाक्षर, कला-निकुंज, कला-त्रिवेणी, भंगिमा, प्रयास, अर्पण, अनामिका, प्रांगण, सृर्जना, माध्यम, बिहार आर्ट थियेटर, कला-संगम, भारतीय जन-नाट्य संघ आदि।
बेगूसराय जिला नाट्य परिषद्, सरस्वती कला मंदिर, आदि।
भागलपुर सर्जना, सागर नाट्य परिषद्, दिशा, प्रेम आर्ट, आदर्श नाट्य कला केंद्र, अभिनय कला मंदिर आदि।
खंगोल भूमिका, दर्पण कला केंद्र, सूत्रधार, थियेटरेशिया, मंथन कला परिषद् आदि।
आरा कामायनी, यवनिका, भोजपुर मंच, युवानीति, नटी, नवोदय संघ आदि।
छपरा मयूर कला केंद्र, शिवम सांस्कृतिक मंच, हिन्द कला केंद्र, इंद्रजाल, मनोरमा सांस्कृतिक दल आदि।
औरंगाबाद नाट्य भारती, ऐक्टर्स ग्रुप आदि।
गया कला-निधि, शबनम आस, ललित कला मंच, नाट्य स्तुति आदि।
दानापुर बहुरुपिया, बहुरंग आदि।
सासाराम जनचेतना
बक्सर नवरंग कला मंचा
बिहिया भारत नाट्य परिषद्
नवादा शोभादी रंग संस्था
महनार अनंत अभिनय कला परिषद्
जमालपुर रॉबर्ट रिक्रिएशन क्लब, उत्सव
सुल्तानगंज जनचेतना
मुजफ्फरपुर रंग

 

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बिहार का लोक नृत्य

बिहार का लोक नृत्य (Folk Dance of Bihar)

छऊ नृत्य – यह लोकनृत्य युद्ध भूमि से संबंधित है, जिसमें नृत्य शारीरिक भाव भंगिमाओं, ओजस्वी स्वरों तथा पगों का धीमी-तीव्र गति द्वारा संचालन होता है। इस नृत्य की दो श्रेणियां हैं – प्रथम ‘हतियार श्रेणी’ जिसमें वीर रस की प्रधानता है और दूसरी ‘कालाभंग श्रेणी’ जिसमें श्रृंगार रस को प्रमुखता दी जाती है। इस लोकनृत्य में मुख्यतः पुरुष नृत्यक ही भाग लेते हैं।

कठ घोड़वा नृत्य –  लकड़ी तथा बांस की खपच्चियों द्वारा निर्मित तथा रंग-बिरंगे वस्त्रों के द्वारा सुसज्जित घोड़े के साथ नर्तक लोक वाद्यों के साथ नृत्य करता है।

लौंडा नृत्य – भोजपुर क्षेत्र में अधिक प्रचलित इस नृत्य में लड़का रंग-बिरंगे वस्त्रों एवं श्रृंगार के माध्यम से लड़की का रूप धारण कर नृत्य करता है।

धोबिया नृत्य –  भोजपुर क्षेत्र के धोबी समाज में विवाह तथा अन्य मांगलिक अवसरों पर किया जाने वाला सामूहिक नृत्य।

झिझिया नृत्य –  यह ग्रामीण महिलाओं द्वारा एक घेरा बनाकर सामूहिक रूप से किया जाने वाला लोकनृत्य है। इसमें सभी महिलाएं राजा चित्रसेन तथा उनकी रानी की कथा, प्रसंगों के आधार पर रचे गए गीतों को गाते हुए नृत्य करती हैं।

करिया झूमर नृत्य –   यह एक महिला प्रधान नृत्य है जिसमें महिलाएं हाथों में हाथ डालकर घूम-घूमकर नाचती गाती हैं।

खोलडिन नृत्य –  यह विवाह अथवा अन्य मांगलिक कार्यों पर आमंत्रित अतिथियों के समक्ष मात्र उनके मनोरंजन हेतु व्यावसायिक महिलाओं द्वारा किया जाने वाला नृत्य है।

पंवड़ियां नृत्य –  वह जन्मोत्सव आदि के अवसर पर पुरुषों द्वारा लोकगीत गाते हुए किया जाने वाला नृत्य है।

जोगीड़ा नृत्य –  मौज-मस्ती की प्रमुखता वाले इस नृत्य में होली के पर्व पर ग्रामीण जन एक-दूसरे को रंग-गुलाल लगाते हुए होली के गीत गाते हैं तथा नृत्य करते हैं।

विदापत नृत्य – पूर्णिया क्षेत्र के इस प्रमुख लोकनृत्य में मिथिला के महान कवि विद्यापति के पदों को गाते हुए तथा पदों में वर्णित भावों को प्रस्तुत करते हुए सामूहिक रूप से नृत्य किया जाता है।

झरनी नृत्य – यह लोकनृत्य मोहर्रम के अवसर पर मुस्लिम नर्तकों द्वारा शोक गीत गाते हुए प्रस्तुत किया जाता है।

करमा नृत्य – यह राज्य के जनजातियों द्वारा उसलों की कटाई-बुवाई के समय ‘कर्म देवता’ के समक्ष किया जाने वाला सामूहिक नृत्य है। इसमें पुरुष एवं महिला एक-दुसरे की कमर में हाथ डालकर श्रापूर्वक नृत्य करते हैं।

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