भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक भारत की जलवायु को प्रभावित करने वाले कारक इस प्रकार हैं – 1. स्थिति एवं अक्षांशीय विस्तार (Position and Latitudinal Extent) भारत
लोकायुक्त भारत में राज्यों द्वारा गठित भ्रष्टाचाररोधी एक संस्था है। इसका गठन स्कैंडिनेवियन देशों में प्रचलित ओंबड्समैन (Ombudsman) की तर्ज पर किया गया था। बिहार में सर्वप्रथम लोकायुक्त न्यायमूर्ति श्रीधर
बिहार राज्य का सन 1912 में उदय होने के बाद राज्य में प्रशासन की स्वतंत्र व्यवस्था स्थापित की गई। 1936 में उड़ीसा तथा 2000 में झारखंड विभाजन के पश्चात् वर्तमान
हमारे देश का विशाल पठार चारों ओर से घिरा हुआ है। उत्तर में उत्तरी विशाल मैदान तथा दक्षिण, पूर्व और पश्चिम में तटीय मैदान हैं। पूर्वी तटीय मैदान उत्तर में
उत्तरी विशाल मैदान के दक्षिण में भारतीय विशाल पठार फैला है। यह हमारे देश का सबसे बड़ा भौतिक विभाग है। इसका क्षेत्रफल लगभग 16 लाख वर्ग किलोमीटर है। अर्थात् देश
यह मैदान हिमालय के दक्षिण में तथा भारतीय विशाल पठार के उत्तर में पश्चिम से पूर्व तक विस्तृत है। यह मैदान पश्चिम में राजस्थान के शुष्क और अर्ध शुष्क भागों
भारत की उत्तर सीमा पर स्थित कश्मीर की उत्तरी पर्वत श्रृंखलाएँ तथा पठार, खास हिमालय पर्वत और अरूणाचल प्रदेश, नागालैंड, असम, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा और मेघालय की पहाड़ियाँ सम्मिलित हैं।
भारत भौतिक विविधताओं का देश है। यहाँ लगभग सभी प्रकार की स्थलाकृतियाँ पाई जाती हैं। एक मोटे अनुमान के अनुसार भारत के कुल क्षेत्रफल के 29.3% भाग पर पर्वत, 27.7%
प्राचीनकाल में हमारा देश आर्यावर्त के नाम से जाना जाता था। बाद में इसे भारत, हिन्दुस्तान और ‘इण्डिया’ कहने लगे। हिन्द महासागर का नाम हमारे देश के नाम पर ही
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