पर्वतीय प्रदेशों में अधिकांश शैलों में परिवर्तन के प्रमाण मिलते हैं। ये सभी शैलें कालान्तर में रूपान्तरित हो जाती हैं। अवसादी अथवा आग्नेय शैलों पर अत्याधिक ताप से या दाब
अवसादी शैलें (Sedimentary Rock) इन शैलों की रचना अवसादों के निरन्तर जमाव से होती है। ये अवसाद किसी भी पूर्ववर्ती शैल – आग्नेय, रूपान्तरित या अवसादी शैलों का अपरदित मलवा
आग्नेय शैल (Igneous Rock) “इंगनियस (Igneous)” अंग्रेजी भाषा का शब्द है। यह लैटिन भाषा के “इंग्निस” शब्द से बना है। “इंग्निस” शब्द का अर्थ अग्नि से है। इससे इन शैलों
स्थलमंडल का सबसे ऊपर भाग भूपर्पटी कहलाता है। यह पृथ्वी का सबसे महत्वपूर्ण भाग है; क्योंकि इसकी ऊपरी सतह पर मानव रहते हैं। जिन पदार्थों से भूपर्पटी बनी है, उन्हें
भूगर्भ का तापमान (Temperature of the Underground) गहरी खानों और गहरे कूपों से जानकारी मिलती है कि पृथ्वी के भीतर गहराई बढ़ने के साथ तापमान बढ़ता है। यह बात ज्वालामुखी
बिहार के प्रमुख साहित्यकार एवं उनकी कृतियां साहित्यकार कृतियां बाणभट्ट कादम्बरी, हर्षचरितम, चंडीशतक विष्णु शर्मा पंचतंत्र, हितोपदेश चाणक्य अर्थशास्त्र अश्वघोष महायान श्रद्घत्पाद संग्रह, बुद्ध चरित, वज्र सूची आर्यभट्ट आर्यभट्ट तंत्र
बिहार से प्रकाशित होने वाली प्रमुख हिंदी पत्रिकाएं क्षत्रिय पत्रिका (1881, मासिक), लक्ष्मी (1903, मासिक), बालक (1926, मासिक), युवक (1929, मासिक), भूदेव (1933, मासिक), आरती (1940,मासिक), पारिजात (1946, मासिक), ज्योत्सना
बिहार में पत्रकारिता 1875 में गुरू प्रसाद सेन द्वारा बिहार के पहले अंग्रेजी अखबार ‘दि बिहार हेराल्ड’ का प्रकाशन आरंभ हुआ। 1881 में पटना से ‘इंडियन क्रॉनिकल’ नामक अखबार प्रकाशित
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