• महर्षि वाल्मीकि, दुर्वासा वशिष्ठ आदि ऋषि मुनियों की तपोस्थली का गौरव इसी जिले को प्राप्त है।
  • सन 1903 में प्रकाशित सुल्तानपुर जिला गजेटिएर ने इतिहास और जिले की उत्पत्ति पर कुछ प्रकाश डाला है।
  • उन्नीसवीं शताब्दी की शुरुआत में बाबू माधो सिंह, जिव नारायन के वंशज में ग्यारहवें स्थान पर, जिस संपत्ति के शासक थे उसमें 101 गांव शामिल थे।
  • राष्ट्रीय चेतना के विकास मे सुलतानपुर का ऐतिहासिक योगदान रहा है।
  • सन 1857 के स्वाधीनता संग्राम मे क्रांतकारियों ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद को उखाड़ फेकने मे जान की बाजी लगाकर अंग्रेज़ो से मोर्चा लिया।
  • सन 1921 के किसान आंदोलन मे इस जनपद ने खुलकर भाग लिया और सन 1930 से 1942 तक एवं बाद के सभी आंदोलनो मे यहा के स्वतंत्रा सेनानियो ने जिस शौर्य एवं वीरता का परिचय दिया वो ऐतिहासिक है।
  • किसान नेता बाबा राम चंद्र और बाबा राम लाल इस संदर्भ मे उल्लेखनीय है , जिनके त्याग का वर्णन प. जवाहर लाल नेहरू ने अपनी आत्मकथा मे किया है ।
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