उत्तराखण्ड के प्रमुख सामाजिक परिषद्

कुमाऊँ परिषद् (Kumaon Council)

  • उत्तराखण्ड में सामाजिक, राजनैतिक, आर्थिक और शिक्षा की समस्याओं को लेकर 1916 में कुमाऊँ परिषद् का गठन किया गया।
  • इस परिषद् में कार्य करने वाले गोविन्द बल्लभ पन्त, बद्रीदत्त पाण्डे, हरगोविन्द पन्त जैसे कार्यकर्ता थे।
  • 1926 में कुमाऊँ परिषद् का विलय कांग्रेस में हो गया।

गढ़वाल जागृत संस्था (Garhwal Jagruti Institution)

  • 1939 में कांग्रेस द्वारा पौड़ी के राजनीतिक सम्मेलन में पर्वतीय लोगों की मांग न मानने पर गढ़वाल जागृत संस्था का गठन किया गया।
  • प्रताप सिंह नेगी और उमानन्द बड़थ्वाल इस संस्था के प्रमुख थे।

पर्वतीय विकास जन समिति (Parvatiy Vikas Jan Committee)

  • 1950 में कांगड़ा से अल्मोड़ा तक एक हिमालयी राज्य की स्थापना के लिए पर्वतीय विकास जन समिति का गठन नयी दिल्ली में किया गया।

पर्वतीय राज्य परिषद् (Parvatiy Rajy Council)

  • 24-25 जून 1967 को रामनगर में एक वृहद् जनसभा हुई जिसमें एक पृथक प्रशासनिक इकाई के गठन का प्रस्ताव पारित किया गया।
  • इसी प्रस्ताव के कार्यान्वयन हेतु दयाकृष्ण पाण्डे की अध्यक्षता में पर्वतीय राज्य परिषद् का गठन किया गया।
  • परिषद् ने पृथक पर्वतीय राज्य की मांग को आन्दोलन के रूप में बदलने का काम किया।
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कुमाऊँ राष्ट्रीय मोर्चा (Kumaon National Front)

  • 3 अक्टूबर 1970 को कामरेड पी०सी० जोशी द्वारा कुमाऊँ राष्ट्रीय मोर्चा नामक संगठन बनाया गया जिसका उद्देश्य नये राज्य के गठन के लिए संघर्ष करना था।

पृथक पर्वतीय राज्य परिषद् (Prthak Parvatiy Rajy Council)

  • इसका 1973 को पुनर्गठन किया गया और उत्तराखण्ड के दो सांसद प्रताप सिंह नेगी और नरेन्द्र सिंह बिष्ट को इसमें शामिल करते हुए नाम बदला गया।

उत्तरांचल परिषद् (Uttaranchal Council)

  • 7 जून 1972 को नैनीताल में उत्तरांचल परिषद का गठन किया गया जिसका उद्देश्य यहां की समस्याओं के लिए संघर्ष करना था।

उत्तराखण्ड क्रान्ति दल (Uttarakhand Kranti Dal) 

  • 24-25 जुलाई 1979 को मसूरी में उत्तराखण्ड के नेताओं का सम्मेलन बुलाया गया और आम सहमति से उत्तराखण्ड क्रान्ति दल की स्थापना हुयी।
  • इसके प्रथम अध्यक्ष डॉ० देवीदत्त पन्त थे।

उत्तरांचल उत्थान परिषद् (Uttaranchal Utthan Council)

  • 30-31 मई 1988 को शोबन सिंह जीना की अध्यक्षता में उत्तरांचल उत्थान परिषद् का गठन किया गया।

उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति (Uttarakhand Sanyukt Sangharsh Samiti)

  • 11-12 जनवरी 1989 को दिल्ली में जनसंघर्ष वाहिनी, उत्तराखण्ड जन परिषद्, उत्तराखण्ड रक्षा मंच और युवा जनता दल ने संयुक्त रूप से मिलकर उत्तराखण्ड संयुक्त संघर्ष समिति का गठन किया।
  • द्वारिका प्रसाद उनियाल समिति के प्रमुख चुने गये।

उत्तराखण्ड मुक्ति मोर्चा (Uttarakhand Mukti Morcha)

  • जनवरी 1991 को वामपंथी धारा से जुड़े लोगों ने उत्तराखण्ड मुक्ति मोर्चा नामक संगठन बनाया।

संयुक्त उत्तराखण्ड राज्य मोर्चा (Sanyukt Uttarakhand Rajy Morcha)

  • 3 अप्रैल 1994 को बहादुर राम टम्टा द्वारा संयुक्त उत्तराखण्ड राज्य मोर्चा का गठन किया गया।
  • इसका उद्देश्य राज्य निर्माण में सहयोग करना था।

उत्तराखण्ड पीपुल्स फ्रंट (Uttarakhand People’s Front)

  • 16-17 अप्रैल 1994 को उत्तराखण्ड पीपुल्स फ्रंट का गठन किया गया।
  • पृथक उत्तराखण्ड राज्य के लिए केन्द्र को प्रस्ताव पारित कर भेजने वाली पहली उत्तर प्रदेश सरकार भाजपा की सरकार थी।
  • 1-2 अक्टूबर 1994 को दिल्ली रैली में जा रहे आन्दोलनकारियों पर पुलिस ने अमानवीय अत्याचार किए।
  • इस कृत्य की ‘क्रूर शासक की क्रूर साजिश’ के कथन से पूरे विश्व में निन्दा हुई।
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