Q91. निम्नलिखित में से कौन-सा सही सुमेलित नहीं है ?
(a) शासकीय संसूचनाएँ – भा.सा.अ., 2023 की धारा 130
(b) विधिक सलाहकारों से गोपनीय संसूचनाएँ – भा.सा.अ., 2023 की धारा 127
(c) वृत्तिक संसूचनाएँ – भा.सा.अ., 2023 की धारा 132
(d) विवाहित स्थिति के दौरान संसूचनाएँ – भा.सा.अ., 2023 की धारा 128
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व्याख्या: विधिक सलाहकारों से गोपनीय संसूचनाओं का संरक्षण धारा 131 (पूर्व 129) में है। धारा 127 (पूर्व 125) अपराधों के किए जाने के बारे में जानकारी (Informants) से संबंधित है।
Q92. भारतीय न्याय संहिता, 2023 के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
अपराधी, इस संहिता के उपबंधों के अधीन जिन दण्डों से दायी हैं, वे हैं :
1. आजीवन कारावास, अर्थात् अधिकतम बीस वर्ष तक का कारावास
2. कठिन कारावास, अर्थात् कठोर श्रम के साथ
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) न तो 1, न ही 2
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) केवल 1
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व्याख्या: कथन 1. गलत है, क्योंकि आजीवन कारावास का अर्थ ‘शेष प्राकृतिक जीवन’ के लिए कारावास होता है (जब तक कि क्षमा न मिले)। 2. सही है, कठिन कारावास का अर्थ कठोर श्रम के साथ होता है।
Q93. पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 7 के अंतर्गत कौन-सा दण्ड नहीं दिया जा सकता है ?
(a) पचास दिनों से अनधिक कालावधि के लिए क्वार्टर परिरोध
(b) सदाचरण वेतन से वंचित करना
(c) विशिष्ट या विशेष उपलब्धि के किसी पद से हटाना
(d) एक माह के वेतन से अनधिक किसी राशि का जुर्माना
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व्याख्या: धारा 7 के तहत क्वार्टर परिरोध की अधिकतम अवधि 15 दिन है, 50 दिन नहीं।
Q94. भा.ना.सु.सं., 2023 के अंतर्गत सौदा – अभिवाक् के लिए निम्नलिखित में से कौन आवेदन कर सकता है ?
(a) अन्वेषण अधिकारी
(b) किसी अपराध का अभियुक्त व्यक्ति
(c) लोक अभियोजक
(d) अपराध से पीड़ित व्यक्ति
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व्याख्या: BNSS की धारा 289-290 (पूर्व 265B) के तहत केवल अभियुक्त ही स्वेच्छा से प्ली बार्गेनिंग के लिए आवेदन कर सकता है।
Q95. पुलिस अधिनियम, 1861 की धारा 1 के अनुसार शब्द ‘सम्पत्ति’ में सम्मिलित है :
(a) केवल चल सम्पत्ति
(b) चल सम्पत्ति, धन या मूल्यवान प्रतिभूति
(c) चल सम्पत्ति, अचल सम्पत्ति, धन या मूल्यवान प्रतिभूति
(d) चल एवं अचल सम्पत्ति
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व्याख्या: पुलिस अधिनियम की धारा 1 (निर्वचन खण्ड) के अनुसार ‘सम्पत्ति’ शब्द में चल सम्पत्ति, धन या मूल्यवान प्रतिभूति शामिल है। इसमें अचल संपत्ति शामिल नहीं है।
Q96. निम्नलिखित घटनाओं पर विचार कीजिए तथा इन्हें पुलिस अधिनियम, 1861 एवं विनियम के उपबंधों के अनुसार सबसे पहले से लेकर आखिरी गतिविधि तक सही कालानुक्रम व्यवस्थित कीजिए :
I. राज्य सरकार में अधीक्षण विहित होना
II. पॅलिस महानिरीक्षक
III. महानिरीक्षक की शक्तियाँ
IV. अवर अधिकारियों की नियुक्ति और पदच्युति इत्यादि
नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) I, II, III, IV
(b) IV, III, II, I
(c) II, III, IV, I
(d) II, III, I, IV
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व्याख्या: यह अधिनियम की धाराओं के क्रम पर आधारित है: धारा 3 (अधीक्षण), धारा 4 (महानिरीक्षक), धारा 5 (शक्तियाँ), धारा 7 (नियुक्ति/पदच्युति)।
Q97. भा. न्या. सं., 2023 की धारा 41 के अन्तर्गत, सम्पत्ति की मा.न्या. प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार निम्नलिखित अपराध के विरुद्ध उपलब्ध नहीं है :
(a) आपराधिक न्यास भंग
(b) लूट
(c) चोरी
(d) आपराधिक अतिचार
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व्याख्या: BNS की धारा 41 (पूर्व 103) के तहत प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार चोरी, लूट, रिष्टि और आपराधिक अतिचार के विरुद्ध मिलता है। आपराधिक न्यास भंग इसमें शामिल नहीं है।
Q98. निम्नलिखित में से कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है ?
(a) उपधारणा करेगा – धारा 2(1)(घ) भा.सा.अ., 2023
(b) उपधारणा कर सकेगा – धारा 2 (1) (ज) भा.सा.अ., 2023
(c) निश्चायक सबूत – धारा 2 ( 1 ) (ख) भा.सा.अ., 2023
(d) नासाबित – धारा 2 (1) (ग) भा.सा.अ., 2023
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व्याख्या: ‘निश्चायक सबूत’ (Conclusive Proof) को धारा 2(1)(च) में रखा जाना चाहिए था (क्रम के अनुसार)। विकल्प (c) सुमेलित नहीं है।
Q99. भा.ना.सु.सं., 2023 की धारा 398 निम्नलिखित के बारे में उपबंध करती है :
(a) पीड़ित संरक्षण स्कीम
(b) साक्षी संरक्षण स्कीम
(c) पीड़ित संरक्षण स्कीम और साक्षी संरक्षण स्कीम, दोनों
(d) न ही पीड़ित संरक्षण स्कीम, न ही साक्षी संरक्षण स्कीम
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व्याख्या: नई संहिता की धारा 398 विशेष रूप से राज्य सरकारों को ‘साक्षी संरक्षण योजना’ तैयार करने और लागू करने का निर्देश देती है।
Q100. निम्नलिखित में से किस वाद में भारतीय सर्वोच्च न्यायालय ने साक्ष्य की सुसंगतता तथा ग्राह्यता में विभेद के बिन्दुओं को स्पष्ट किया ?
(a) राम बिहारी यादव बनाम बिहार राज्य (1994)
(b) नाहर सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (1998)
(c) अतुल सिंह बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2009)
(d) उमेदभाई बनाम गुजरात राज्य (2001)
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व्याख्या: इस वाद में सर्वोच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि सुसंगतता और ग्राह्यता एक समान नहीं हैं। एक तथ्य सुसंगत हो सकता है लेकिन तकनीकी कारणों से अग्राह्य (Inadmissible) हो सकता है।
