Q31. ‘कंपकंपी छूटना’ मुहावरे का अर्थ है-
(A) डर से शरीर काँपना
(B) आँसू आना
(C) पेट में दर्द होना
(D) अपना हाल बताना
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व्याख्या: यह मुहावरा अत्यधिक भय या डर की स्थिति को दर्शाता है। जब व्यक्ति बहुत अधिक डर जाता है, तो उसके शरीर में थरथराहट होने लगती है, जिसे ‘कंपकंपी छूटना’ कहते हैं।
Q32. ‘न्यून’ शब्द में किन वर्णों की संधि हुई है ?
(A) ई+अ
(B) इ + ऊ
(C) इ + उ
(D) इ+ए
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व्याख्या: ‘न्यून’ का संधि विच्छेद नि + ऊन होता है। यहाँ ‘नि’ की ‘इ’ और ‘ऊन’ का ‘ऊ’ मिलकर ‘यू’ बन जाते हैं। यह यण संधि का उदाहरण है।
Q33. ‘अवसर के अनुसार बदल जाने वाला’ इस वाक्यांश के लिए एक शब्द का चयन कीजिए-
(A) निष्कपट
(B) सदाचारी
(C) पंडित
(D) अवसरवादी
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व्याख्या: जो व्यक्ति अपने सिद्धांतों को छोड़कर केवल अपने लाभ या मौके (अवसर) के हिसाब से बदल जाता है, उसे ‘अवसरवादी’ (Opportunist) कहा जाता है। ‘निष्कपट’ का अर्थ है जिसके मन में छल न हो
Q34. कंकन किंकिन नुपुर धुनि सुनि, कहत लखन सन राम हृदय गुनि
इस काव्य पंक्ति में कौन-सा अलंकार है?
(A) यमक
(B) श्लेष
(C) अनुप्रास
(D) रूपक
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व्याख्या: इस पंक्ति में ‘न’ और ‘क’ वर्ण की आवृत्ति बार-बार हुई है (कंकन, किंकिन, नुपुर, धुनि, सुनि, सन)। जहाँ वर्णों की आवृत्ति से काव्य में सौंदर्य उत्पन्न हो, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।
Q35. भगवती चरण वर्मा द्वारा लिखित एक चर्चित उपन्यास का नाम बताएँ –
(A) अनामिका
(B) गोदान
(C) पलाश के फूल
(D) चित्रलेखा
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व्याख्या: ‘चित्रलेखा’ भगवती चरण वर्मा का सबसे प्रसिद्ध और कालजयी उपन्यास है, जो पाप और पुण्य के प्रश्न पर आधारित है। ‘गोदान’ प्रेमचंद की रचना है और ‘अनामिका’ निराला जी का काव्य संग्रह है।
[प्र. सं. 36 से 40 गद्यांश प्रश्न]
निम्नलिखित गद्यांश को ध्यान से पढ़िए तथा उत्तर इस गद्यांश के आधार पर ही दीजिए।
मनुष्य जन्म से ही अहंकार का इतना विशाल बोझ लेकर आता है कि उसकी दृष्टि सदैव दूसरों की बुराइयों पर ही टिकती है। आत्मनिरीक्षण को भुलाकर साधारण मानव केवल परछिद्रान्वेषण में ही अपना जीवन बिताना चाहता है। इसके मूल में उसकी ईर्ष्या की दाहक दुष्प्रवृत्ति कार्यशील रहती है। दूसरे की सहज उन्नति को मनुष्य अपनी ईर्ष्या के वशीभूत होकर पचा नहीं पाता और उसके गुणों को अनदेखा करके केवल दोषों और दुर्गुणों को ही प्रचारित करने लगता है। इस प्रक्रिया में वह इस तथ्य को भी विस्मृत कर बैठता है कि ईर्ष्या का दाहक स्वरूप स्वयं उसके समय, स्वास्थ्य और सद्वृत्तियों के लिए कितना विनाशकारी सिद्ध हो रहा है। परनिंदा को हमारे शास्त्रों में भी पाप बताया गया है। वास्तव में मनुष्य अपनी न्यूनताओं, अपने दुर्गुणों की ओर दृष्टि उठाकर देखना भी नहीं चाहता क्योंकि स्वयं को पहचानने की यह प्रक्रिया उसके लिए बहुत कष्टकारी है।
Q36. गद्यांश के अनुसार दूसरों की उन्नति को मनुष्य क्यों नहीं देखना चाहता ?
(A) ईर्ष्या भाव के कारण
(B) स्वयं धनवान होने के कारण
(C) अपने बड़प्पन के कारण
(D) स्वयं गुणी होने के कारण
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व्याख्या: गद्यांश में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि मनुष्य अपनी ईर्ष्या की ‘दाहक दुष्प्रवृत्ति’ के वशीभूत होकर दूसरे की सहज उन्नति को पचा नहीं पाता है।
Q37. ऊपर दिए गए गद्यांश में किस-किस उपसर्ग से बने शब्दों की अधिकता है?
(A) अहं
(B) पर
(C) दुर्
(D) सद्
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व्याख्या: गद्यांश में ‘पर’ उपसर्ग से बने कई शब्द आए हैं, जैसे: परछिद्रान्वेषण, परनिंदा। ये शब्द मनुष्य की दूसरों की कमियाँ निकालने की प्रवृत्ति को दर्शाने के लिए बार-बार उपयोग हुए हैं।
Q38. गद्यांश के अनुसार अहंकार दूर करने के लिए जरूरी है-
(A) निरंतर चिंतन-मनन करना
(B) मन को शांत रखना
(C) आत्मनिरीक्षण करना
(D) परछिद्रान्वेषण से बचना
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व्याख्या: गद्यांश बताता है कि मनुष्य आत्मनिरीक्षण को भुलाकर दूसरों की बुराइयाँ देखता है। अतः अहंकार और दोषों को पहचानने व दूर करने के लिए ‘आत्मनिरीक्षण’ (स्वयं की जांच) सबसे आवश्यक प्रक्रिया बताई गई है।
Q39. ऊपर दिए गए गद्यांश के अनुसार अहंकार के कारण मनुष्य पर क्या प्रभाव पड़ता है ?
(A) वह अपने गुणों का बखान करता है।
(B) वह अपने को सर्वश्रेष्ठं समझता है।
(C) उसकी बात सभी मानते हैं।
(D) वह दूसरों के दोष देखता रहता है।
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व्याख्या: गद्यांश की पहली पंक्ति ही यह स्पष्ट करती है कि अहंकार के विशाल बोझ के कारण मनुष्य की दृष्टि सदैव दूसरों की बुराइयों (दोषों) पर ही टिकती है।
Q40. गद्यांश के अनुसार स्वास्थ्य और सदाचार नष्ट हो जाते हैं-
(A) अनैतिक कार्य करने पर
(B) ईर्ष्या के वश में होने पर
(C) क्रोध के वश में होने पर
(D) स्वास्थ्य के नियमों का पालन न करने पर
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व्याख्या: गद्यांश के अनुसार, ईर्ष्या का दाहक स्वरूप मनुष्य के स्वयं के समय, स्वास्थ्य और सद्वृत्तियों (सदाचार) के लिए विनाशकारी सिद्ध होता है।
