UKPSC APS Mains Exam Paper II - 14 March 2026 (Answer Key)

UKPSC APS Mains Exam Paper II (Essays and Drafting) – 14 March 2026 (Answer)

March 16, 2026

(ii) उत्तराखण्ड में स्वरोजगार और सरकारी योजनाएँ

उत्तराखण्ड, जिसे हम ‘देवभूमि’ कहते हैं, अपनी विषम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ‘पहाड़ का पानी और पहाड़ की जवानी’ को रोकने की चुनौती से सदैव जूझता रहा है। राज्य के युवाओं का रोजगार की तलाश में बड़े शहरों की ओर पलायन एक गंभीर समस्या रही है। इस समस्या के स्थायी समाधान के रूप में ‘स्वरोजगार’ एक सशक्त माध्यम बनकर उभरा है। वर्तमान में राज्य सरकार और केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के माध्यम से युवाओं को नौकरी मांगने वाले के बजाय नौकरी देने वाला (Entrepreneur) बनने हेतु प्रोत्साहित किया जा रहा है।

स्वरोजगार की आवश्यकता और महत्व

उत्तराखण्ड जैसे पहाड़ी राज्य में बड़े उद्योगों की स्थापना की एक सीमा है। यहाँ की पारिस्थितिकी (Ecology) भारी उद्योगों के लिए अनुकूल नहीं है। ऐसे में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) ही आर्थिक विकास की रीढ़ हैं। स्वरोजगार न केवल पलायन को रोकने में सहायक है, बल्कि यह स्थानीय संसाधनों (जैसे जड़ी-बूटी, पर्यटन, हस्तशिल्प और जैविक खेती) के सदुपयोग को भी बढ़ावा देता है। जब एक स्थानीय युवा स्वरोजगार शुरू करता है, तो वह अपने साथ अन्य ग्रामीणों को भी रोजगार प्रदान करता है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होती है।

प्रमुख सरकारी योजनाएँ

स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए उत्तराखण्ड सरकार ने कई महत्वाकांक्षी योजनाएँ संचालित की हैं:

  • मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना : यह राज्य की सबसे प्रमुख योजना है। इसके अंतर्गत विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing) के लिए 25 लाख रुपये और सेवा क्षेत्र (Service Sector) के लिए 10 लाख रुपये तक के ऋण का प्रावधान है। इसमें 15% से 25% तक की सब्सिडी दी जाती है, जिससे युवाओं पर आर्थिक बोझ कम होता है।
  • मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना: पहाड़ी क्षेत्रों में बंजर भूमि का उपयोग करने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए यह योजना शुरू की गई है। इसके तहत छोटे सौर ऊर्जा संयंत्र (25 किलोवाट) स्थापित करने के लिए ऋण और सहायता दी जाती है।
  • होमस्टे योजना : पर्यटन उत्तराखण्ड की अर्थव्यवस्था का आधार है। ‘दीनदयाल उपाध्याय होमस्टे योजना’ के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में अपने घरों को पर्यटकों के ठहरने योग्य बनाने के लिए सरकार आर्थिक मदद और करों में छूट प्रदान करती है। इससे पर्यटन का लाभ सीधे गाँवों तक पहुँच रहा है।
  • वीर चंद्र सिंह गढ़वाली पर्यटन स्वरोजगार योजना: इसके तहत पर्यटन से संबंधित बस, टैक्सी खरीदने या होटल-रेस्टोरेंट बनाने के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
  • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम : केंद्र सरकार की इस योजना का भी राज्य में व्यापक स्तर पर क्रियान्वयन हो रहा है, जो ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में नए उद्यम स्थापित करने में मदद करती है।

स्वरोजगार के उभरते क्षेत्र

उत्तराखण्ड में स्वरोजगार की असीम संभावनाएँ हैं। औषधीय एवं सगंध पादप की खेती, जैसे तेजपत्ता, लेमन ग्रास और मशरूम उत्पादन में युवा अच्छा लाभ कमा रहे हैं। इसके अतिरिक्त, हस्तशिल्प, ‘ऐपण’ कला, जैविक कृषि (Organic Farming) और फूड प्रोसेसिंग यूनिट्स (जैसे जैम, जूस और अचार बनाना) स्वरोजगार के महत्वपूर्ण क्षेत्र बन चुके हैं। डिजिटल युग में ‘वर्क फ्रॉम होम’ और आईटी क्षेत्र में भी स्थानीय युवाओं की भागीदारी बढ़ी है।

चुनौतियाँ और सुझाव

योजनाओं के बावजूद कुछ चुनौतियाँ अभी भी बनी हुई हैं। बैंकों द्वारा ऋण प्रक्रिया में जटिलता, पहाड़ी क्षेत्रों में विपणन (Marketing) की कमी और कौशल विकास का अभाव मुख्य बाधाएँ हैं। सरकार को चाहिए कि वह ‘सिंगल विंडो सिस्टम’ को और अधिक प्रभावी बनाए और उत्पादों की ब्रान्डिंग (जैसे ‘हाथ से बना’ उत्तराखण्ड का उत्पाद) के लिए उचित मंच प्रदान करे।

निष्कर्ष

उत्तराखण्ड में स्वरोजगार केवल आय का साधन नहीं, बल्कि आत्मसम्मान और स्वावलंबन का प्रतीक है। सरकारी योजनाओं का लाभ यदि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पारदर्शी तरीके से पहुँचे, तो ‘रिवर्स पलायन’ (Reverse Migration) का सपना साकार हो सकता है। युवाओं की ऊर्जा और सरकारी सहयोग के समन्वय से ही उत्तराखण्ड एक ‘आत्मनिर्भर राज्य’ के रूप में अपनी पहचान बना सकेगा।

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