(v) भ्रष्टाचार निवारण और डिजिटल शासन
भ्रष्टाचार किसी भी राष्ट्र की प्रगति के मार्ग में सबसे बड़ी बाधा है। यह न केवल आर्थिक संसाधनों का क्षरण करता है, बल्कि सामाजिक न्याय और नैतिक मूल्यों की नींव को भी खोखला कर देता है। भारत जैसे विकासशील देश में भ्रष्टाचार एक दीमक की तरह है जिसने लंबे समय तक व्यवस्था को प्रभावित किया है। इस समस्या के समाधान हेतु पारंपरिक तरीके अक्सर विफल रहे, लेकिन ‘डिजिटल शासन’ के उदय ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध एक अमोघ अस्त्र प्रदान किया है। तकनीक और पारदर्शिता के मेल ने शासन की विसंगतियों को दूर करने में नई आशा जगाई है।
डिजिटल शासन: पारदर्शिता का आधार
डिजिटल शासन का अर्थ है—सरकारी सेवाओं और सूचनाओं को सूचना प्रौद्योगिकी (IT) के माध्यम से नागरिकों तक पहुँचाना। भ्रष्टाचार अक्सर वहाँ पनपता है जहाँ ‘मानवीय हस्तक्षेप’ अधिक होता है और ‘पारदर्शिता’ की कमी होती है। डिजिटल शासन इन दोनों ही कमियों को दूर करता है। जब फाइलें और रिकॉर्ड्स ऑनलाइन होते हैं, तो उन्हें न तो गायब किया जा सकता है और न ही उनमें मनमाना बदलाव संभव है।
भ्रष्टाचार रोकने में डिजिटल साधनों की भूमिका
- प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (DBT): भ्रष्टाचार का सबसे बड़ा स्रोत कल्याणकारी योजनाओं का पैसा बिचौलियों द्वारा हड़प लिया जाना था। डिजिटल शासन के तहत ‘जनधन-आधार-मोबाइल’ (JAM) की मदद से अब सरकार सीधे लाभार्थी के खाते में पैसा भेजती है। इससे ‘लीकेज’ समाप्त हुई है और करोड़ों रुपये की बचत हुई है।
- ई-निविदा (E-Tendering): सरकारी ठेकों और खरीद में पहले बहुत धांधली होती थी। अब ई-टेंडरिंग के माध्यम से निविदा प्रक्रिया पारदर्शी हो गई है। कोई भी योग्य व्यक्ति ऑनलाइन आवेदन कर सकता है, जिससे भाई-भतीजावाद और साठगांठ की संभावना न्यूनतम हो गई है।
- सार्वजनिक सेवाओं का डिजिटलीकरण: जन्म प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और भूमि रिकॉर्ड (Land Records) अब ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इससे सामान्य नागरिक को छोटे-छोटे कार्यों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने पड़ते और न ही ‘सुविधा शुल्क’ या रिश्वत देने की मजबूरी रहती है।
- जवाबदेही और निगरानी: पोर्टल और डैशबोर्ड के माध्यम से उच्च अधिकारी किसी भी फाइल की स्थिति की रीयल-टाइम निगरानी कर सकते हैं। देरी होने पर संबंधित कर्मचारी की जवाबदेही तय करना आसान हो गया है।
चुनौतियाँ और सीमाएँ
यद्यपि डिजिटल शासन भ्रष्टाचार निवारण में प्रभावी है, फिर भी कुछ चुनौतियाँ विद्यमान हैं:
- डिजिटल निरक्षरता: देश का एक बड़ा वर्ग आज भी तकनीक के प्रयोग में सक्षम नहीं है, जिसके कारण वे डिजिटल सेवाओं का लाभ उठाने के लिए दूसरों पर निर्भर रहते हैं।
- साइबर सुरक्षा: डेटा हैकिंग और डिजिटल धोखाधड़ी के बढ़ते मामले नई तरह के भ्रष्टाचार को जन्म दे सकते हैं।
- बुनियादी ढाँचा: ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों (जैसे उत्तराखण्ड के सीमांत जिले) में इंटरनेट की कमजोर पहुँच डिजिटल शासन की राह में बाधा है।
निष्कर्ष
निष्कर्षतः, डिजिटल शासन भ्रष्टाचार को जड़ से मिटाने की दिशा में एक क्रांतिकारी परिवर्तन है। यह सरकार और नागरिक के बीच की दूरी को कम करता है और ‘अंधेरे’ को ‘प्रकाश’ में बदल देता है, क्योंकि जहाँ पारदर्शिता होती है, वहाँ भ्रष्टाचार का टिकना मुश्किल है। हालांकि, केवल तकनीक पर्याप्त नहीं है; इसके साथ-साथ कड़े कानूनों, नैतिक शिक्षा और प्रशासनिक सुधारों का होना भी अनिवार्य है। ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ (Minimum Government, Maximum Governance) का लक्ष्य तभी पूर्ण होगा जब तकनीक का उपयोग ईमानदारी और निष्ठा के साथ किया जाएगा।
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