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Vitamin C

विटामिन (Vitamins)

विटामिन (Vitamins)

विटामिन (Vitamins) कार्बनिक पदार्थ है जिनकी भोजन में थोड़ी मात्रा में आवश्यकता होती हैं। पंरतु इन्हे पर्याप्त मात्रा में संश्लेषित नही कर सकते । पौधे विटामिन का संश्लेषण करते हैं जन्तु विटामिन भोजन से प्राप्त करते है। ये हार्मोन की भांति कार्य करते है ये जंतु को कोई ऊर्जा प्रदान नही करते बल्कि ये जन्तु की फिजियोलॉजिकल क्रियाओं का नियमन करते हैं। यह उप्रेरक की भॉति कार्य करते है। उच्च ताप पर ये नष्ट हो जाते है।

विटामिन की खोज प्राकृतिक भोजन में प्राप्त कुछ विशेष प्रकार के रासायनिक पदार्थो के रूप में 18 वीं सदी के मध्य से लिण्ड (Lind 1753) के साथ ही शुरू हो गई थी। पर एक सदी से भी लम्बे समय के बाद फंक (Funk, 1912) ने सर्वप्रथम विटामिन शब्द का प्रयोग किया। फंक ने चावल की भूसी से विटामिन प्राप्त की और ये पाया की ये बेरी-बेरी को रोक सकता है। आगे चल कर ऑस्वॉर्न (Osbone), मेण्डल (Mendel), व मैककोलम (Mccollum), ने भी फंक के विचारों का समर्थन किया।

घुलनशीलता के आधार पर विटामिन को दो प्रकारों में बाँटते है।

  1. वसा में धुलनशील (Fat soluble Vitamins) जैसे – A, D, E, एवं K
  2. जल में घुलनशील (Water soluble Vitamines) जैसे – विटामिन B एवं C

वसा में घुलनशील विटामिन्स (Fat soluble vitamins)

विटामिन A (Vitamin A)

विटामिन A या रेटिनॉल (Retinol) या एण्टीजिरोफ्थैलमिक विटामिन (Antixerophthalmic Vitamin)

  • इसकी खोज 1973 में मेककॉलम (Mc Collum) ने की थी। यह केरोटिन का डेरिवेटिव है।
  • यह दृष्टि व त्वचा के लिए महत्वपूर्ण है।
  • यह शरीर की वृद्धि में सहायक है। 
  • यह संक्रमण रोधी व रोगों से सुरक्षा करने वाला विटामिन है। 
  • यह प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक विटामिन है। 
  • यह फर्टेलिटी बढ़ाता है। 
  • यह हड्डियों के आकार तथा वृद्धि को सामान्य बनाये रखता है। 
  • यह डी. एम. ए. मेटाबॉलिज्म के लिए आवश्यक है।
  • दृष्टि रंगाओ के संश्लेषण में भाग लेता है। 
विटामिन A के स्त्रोत (Source of Vitamin A)
  • यकृत तथा इन्टेस्टाइनल म्यूकस मेम्ब्रेन की कोशाओं में केरोटिनाइड रंगों से संश्लेषित होता है। 
  • दूध, मक्खन, अण्डे की जर्दी, जिगर, मछली, पालक, गाजर आदि। 
विटामिन A के कमी से होने वाले प्रभाव/रोग:
  1. रतौधी (Night Blindness):- या निक्टोलोपिया रोगी मंद प्रकाश में देख नही पाता। 
  2. जिरोफ्थैलमिया (xarophthalmia)
    1. विटामिन A की अत्यधिक कमी से कॉर्निया शुष्क हो जाती है, बाद में नष्ट हो जाता है। 
    2. आंसुओं का निर्माण बंद हो जाता है। 
    3. कंजक्टाइवा का शल्की भवन होने लगता है। 
    4. इससे अंत में मनुष्य अंधा हो जाता है। 
  1. केरेटोमलेसिया – विटामिन A की कमी से कॉर्निया शुष्क हो जाता हैं 
  2. डरमेटोसिस (Dermetosis) – इसमें त्वचा शुष्क और शल्की हो जाती है। 
  3. लार ग्रन्थियों का स्त्रावण रूक जाता है। 
  4. लेक्राइमल (अश्रु) ग्रन्थियाँ डीजनरेट हो जाती है। 
  5. श्वसन मार्ग की एपीथीलियम स्तृत एवं डीजनरेट हो जाती है।
  6. पसीने की तेल ग्रन्थियाँ डिजेनरेट हो जाती है। 

विटामिन D (Vitamin D)

केल्सीफेरॉल (Calciferol) या एण्टीरिकेटिक विटामिन (Antirickitic Vitamin) इसकी खोज भी मेंक कॉलम ने 1992 में की थी। यह विटामिन शरीर में कैल्शियम एवं फॉस्फोरस उपापचय, अस्थियों की सामान्य वृद्धि मिनरलीकरण हेतु आवश्यक है। इसका आधार फॉर्मूला C28H44O होता है। यह सनशाइन विटामिन भी कहलाता है। यह हड्डी तथा दांतो के लिए आवश्यक है। 

विटामिन डी (Vitamin D) के स्त्रोत (source of Vitamin D):
  • यह त्वचा में सूर्य के प्रकाश की बैगनी किरणों द्वारा संश्लेषित होता है। 
  • मछलियों का तेल, मक्खन, अण्डा तथा दूध में विटामिन डी होता है। 
विटामिन डी की कमी का प्रभाव (Effects of Deficiency of Vitamin D) 
  1. रिकेट्स : विटामिन डी की कमी से बच्चों में रिकेट्स नामक रोग हो जाता है। इस रोग में हड्डि कोमल हो जाती हैं। 
  2. ऑस्टियोमलेशिया (osteomalacia):- विटामिन डी की कमी से प्रोढ़ आयु में ऑस्टियोमलेसिया हो जाता है।

विटामिन E (Vitamin E)

विटामिन E या टोकोफेरोल (Tocophirol) इसकी खोज माटिल तथा कॉनक्लिन ने सन् 1920 में की यह विटामिन जनन कोशिकाओं के निर्माण को प्रभावित करता है। इसका आधारभूत फॉर्मूला C29H50O2 होता है। इसे फर्टिलिटी विटामिन भी कहते हैं यह एण्डी स्टेरिलिटी (Anti-Sterility Vitamin) विटामिन है। यह कोएन्जाइम के साथ कार्य नहीं करती। 

विटामिन E के स्त्रोत (Source of Vitamin E)

यह विटामिन सोयाबीन के तेल, अण्डे का योक, जन्तु ऊतक, सलाद, अल्फा – अल्फा (Alfa & Alfa) की पत्तियों, चावल के छिलकों एवं गेहूँ। 

विटामिन ई की कमी का प्रभाव:

  • मादा चूहे में इसकी कमी से इमप्लान्टेशन के बाद मृत्यु हो जाती है। 
  • शशक एवं चूहों में इसकी कमी से डीजेनरेटिव परिवर्तन आते हैं। (पेशियों में आते) है और लकवा मार जाता है। 
  • हृदय पेंशियो का नेकोसिस । 
  • इस विटामिन की कमी से जनन क्षमता कम हो जाती है। 
  • मनुष्य में सम्भवः इसकी कमी से आदतन गर्भ का गिरना, हृदय की अनियमिततायें तथा मीनोपॉस आदि। 

विटामिन K (Vitamin K)

विटामिन K या एण्टी हिमोर्हेजिक (Anti Hemorrhagic Vitamin) की खोज डेम (Dame) ने सन् 1935 में की। इसे नेप्थांक्विनोन भी कहते है। कोएगुलेशन के कारण इसे “K” कहा जाता है। यह द्याव हो जाने पर रूधिर का थक्का (Clotting) बनाने में सहायता देता है। यह विटामिन रूधिर में प्रोथ्रोम्बिन (Prothrombin) के निर्माण में अत्यंत आवश्यक होता है। यह श्वसन श्रंखला में प्रमुख पार्ट अदा करता है। इस फार्मूला CHO, होता है। 

विटामिन K के स्त्रोत (Source of Vitamin K):

हरी पत्ती, टमाटर, गोभी, सोयाबीन, जिगर, अण्डों की जर्दी तथा पनीर, बथुआ आदि। 

विटामिन K की कमी के प्रभाव

  • इसकी कमी से चोट लगने पर घाव के स्थान से रक्त बहता रहता है। तथा रूधिर का थक्का बनने में अधिक समय लगता है। अधिक रक्त स्त्राव से प्राणी की मृत्यु हो जाती है। 
  • इसकी कमी से रूधिर वाहिनियां फट जाती है। 

विटामिन Q (Vitamin Q)

इसें विटामिन की खोज सन् 1973 में एजे क्यूइक (AJ Quick) की थी। यह सोयाबीन से प्राप्त होता है। प्राणियों में आक्सीजन फास्फोरीकरण (Oxidative Phosphorilation) में ऑक्सीजन अभिगमन (Electron Transport) मे सहायक है।

विटामिन U (Vitamin U)

इसे मॉस्को की अनुसंधान प्रयोगशाला में दही से निकाला गया है ये ड्योडिनम के अल्सर एवं गेस्ट्राईटिस को ठीक करने में मद्द करता है।

जल में धुलनशील विटामिन (water Soluble Vitamin) 

इस वर्ग में मुख्यतः दो विटामिन आते है। विटामिन बी (vitamin Complex) कॉम्पलेक्स व विटामिन सी (Vitamin C) 

विटामिन B (Vitamin B)

विटामिन कॅम्पलेक्स (Vitamin ‘B’ Complex), ये अनेक विटामिन्स से मिलकर बना होता है। इसे पूंक ने 1991 में खोजा था। इस कॅम्पलेक्स के प्रत्येक सदस्य का कार्य अलग है। यह नाइट्रोजन युक्त विटामिन है तथा सह-विकर (Co-enzyme) के रूप में उपापचय क्रिया में भाग लेता है। यह विटामिन यकृत सत्त (Liver Extract) में पाया जाता है।

प्रमुख बी कॅम्पलेक्स विटामिन

विटामिन B1 (Vitamin B1

विटामिन B1 या थाईमीन (Thiamine) इसका संश्लेषण विलियम्स से 1936 में किया। यह विटामिन अमीनों अम्ल एवं काबीहाइड्रेट के उपापचय में सह विकर का कार्य करता है। इसका फार्मूला C12H17ON4S होता है। यह एन्जाइम सिस्टम में सहायक है। पचाने के लिए भी यह आवश्यक है। यह पकाने से नष्ट भी हो जाता है।

विटामिन B1 के स्त्रोत (Source of Vitamin B1)

गेहूँ का आटा, हरी सब्जियों, फलियों (Pods) चावल की भूसी, अनाज के छिलकों, मॉस, जिगर, ईस्ट, मछली, अण्डा व यकृत आदि। 

विटामिन B1 की कमी का प्रभाव (Effects Of Deficiency of Vitamin B1)

  • इसकी कमी से बेरी-बेरी (Beri-Beri) रोग होता है। 
  • इस के अलावा अंगद्यात (Paralysis) व पोलीन्यूराइटिस (Polynuritis) आदि रोग भी हो सकते हैं। 
  • बेरी-बेरी के जीवन के लक्षणों में जीवन का उत्साह समाप्त हो जाता है। भार कम हो जाता है, वृद्धि रूक जाती है, तंत्रिकायें डीजेनेरेट हो जाती है। 
  • क्रेब वक्र ठीक से कार्य नही करता। हृदय काम करना बंद कर देता है। 
विटामिन B2 (Vitamin B2

विटामिन B2 या राइबोफ्लेविन (Riboflavin) वारवर्ग तथा किस्यियन ने इसका 1932में पृथक्करण किया। इसको विटामिन C1 और G भी कहते है। यह शरीर की वृद्धि, कार्बोहाइड्रेट उपापचय, श्वसन किया, तन्त्रिका तंत्र आदि को प्रभावित करता हैं। यह अनेक क्रियाओं में सहविकर (w-enzyme) के रूप में कार्य करता है। इसका आधार फार्मूला है C17H20O6N4  इसे पीला इन्जाइम भी कहते है ए. ए. डी. तथा एफ. ए. एन. में निर्माण से संबधित है। फास्फोरिक अम्ल के साथ कोएन्जाइम एफ. ए. डी. बनाता हैं। वृद्धि के लिए आवश्यक है। 

विटामिन बी-2 के स्त्रोत (Source of Vitamin B2)

ईस्ट, पनीर, अण्डा, हरी, सब्जी, टमाटर, अनाज, मॉस, जिगर, दूध, गेहूँ, चना आदि ।

विटामिन बी-2 की कमी के प्रभाव (Effects of Deficiency of Vitamin B2):

  • कीलोसिस (Cheilosis) होठों तथा मुख के कोनों पर दरार के रूप में फट जाना। इसमें मानसिक थकावट व स्मरण शक्ति कमजोर होना। 
  • ग्लासाइटिस (Glosities) तथा सीबोरिक डर्मेटाइटिस (Seboric Dermatitis) रोग भी हो सकता है। 
  • जीभ पर फफोले। 
  • बालों का झड़ना। 
  • वृद्धि का रूकना। 
  • मंद प्रकाश में न दिखना। 
विटामिन B(Vitamin B3

इसे नियासीन अम्ल (Niacin Acid) भी कहते है, इसकी खोज विलडायर्स ने सन् 1901 में की तथा इसका पृथक्करण स्टिलर ने 1960 में किया । यह विटामिन शरीर की उपापचयी क्रियाओं में भाग लेने वाले सह विकर (Co-enzyme) का मुख्य घटक होता है। कोएन्जाइम ‘ए’ का संगठक है। मेटाबॉलिज्म में अनेक आधार प्रतिक्रियाओं के लिए आवश्यक है। इसे यीस्ट कारक भी कहते है। इसका फाला CaH17O5N है। 

विटामिन B3 के स्त्रोत (Source of Vitamin B3)

यकृत, ईस्ट, वृक्क, गेहू, मटर, अण्डा, चावल की भूसी, मॉस, टमाटर, मूंगफली, दुध आदि 

विटामिन B3 की कमी के प्रभाव (Effects of Deficiency of Vitamin B3):

  • इसकी कमी से डर्मेटाइटिस (Dermatites) तथा एनीमिया (Animia) होता है। 
  • डर्मेटाइटिस से बाल सफेद हो जाते है। 
विटामिन B5 (Vitamin B5)

इसे पेन्टोथेनिक एसिड (Pantothenic Acid) या विटामिन P-P (Vitamin P-P) या निकोटिनिक अम्ल (Nicotinic Acid) भी कहते है। इसकी खोज हबर ने 1807 में की वाइसराय द्वारा 1926 में ईस्ट से आइसोलेट (प्रथक्करण) की गई। यह वृद्धि के लिए आवश्यक है। यह कार्बोहाइड्रेट से वसा का निर्माण तेज करती है। यह पैलेग्रा को रोकती है। अतः इसे एण्टी पेलेग्राकारक भी कहते है। इसका फॉर्मूला C8H12O3N है। 

विटामिन B5 के स्त्रोत (Source of Vitamin B5):

जिगर, ताजा मॉस, वृक्क, दूध, ईस्ट, अनाज, दालें, यकृत, गेहूँ, फल व हरी सब्जी। 

विटामिन B5 की कमी का प्रभाव (Effects of Deficiency of Vitamin B5):

  • इसकी कमी से पेलेग्रा त्वचा रूखी, डर्मेटाइटिस तथा डायरिया। पेलेग्रा से जीभ व त्वचा पे दाने पड़ जाते हैं। 
  • नासिका तथा मुख की श्लेष्म कला (Mucousmembrane) मे धाव हो जाते है।
  • कुत्तों में काली जीभ। 
  • भार में कमी, ताकत, में कमी, एनीमिया । 
विटामिन B6 (Vitamin B6)

इसे पाइरिडॉकिसन (Pyridoxin) भी कहते है। इसकी खोज गिआर्जी ने सन् 1934 में की थी। यह विटामिन अमीनो अम्लों तथा प्रोटीन के उपापयचय में सह-विकर का कार्य करता है। यह केन्द्रीय तंत्रिका तंत्र के मेंटाबॉलिज्म से जुडा हैं यह एमीनोअम्ल के सक्रिय मेटाबॉलिज्म से संबधित है। मस्तिष्क तथा त्वचा के लिये यह विटामिन अति आवश्यक होता है। इसका आधार फॉर्मूला C8H12O3N होता हैं। 

विटामिन B6 के स्त्रोत (Source of Vitamin B6):

दूध, हरी सब्जी, अनाज, इस्ट, मॉस, जिगर, मछली, अन्न के बैक्टीरिया द्वारा संश्लेषित । 

विटामिन B6 की कमी के प्रभाव (Effects of Deficiency of Vitamin B6):

इसकी कमी से एनीमिया, नर्वसनेस, चर्मरोग, उत्तेजनशीलता, मानसिक अस्थिरता तथा मानसिक रोग (प्रायः टहलने में परेशानी हो जाती है। शरीर में दर्द होता हैं और देह भित्ती की तंत्रिकाओं व स्पाइनल कार्ड (Spinal Card) कमजोर हो जाती है। जबढ़ें, कान तथा नाक में डर्मेटाइटिस हो जाती है। 

विटामिन B7 बायोटिन (Vitamin B7)

इसे बायोटिन (Biotin) भी कहते है। इसकी खोज बेटमेन ने सन् 1916 में की थी। इसे विटामिन H (Vitamin H) भी कहते है। यह वसा के संश्लेषण के लिए आवश्यक है। यह कार्बएमाइल फास्फेट के संश्लेषण में लिप्त रहता है। यह ऊर्जा के उत्पादन के लिए आवश्यक 

विटामिन B7 के स्त्रोत (Source of Vitamin B7):

गेहूँ, ईस्ट, सब्जी, फल, अण्डे, चाकलेट, मूंगफली, बैक्टीरिया द्वारा संश्लेषण।

विटामिन B7 की कमी का प्रभाव (Effects Of Deficiency of Vitamin B7):

इसकी कमी से पेशीयों में दर्द, रूधिर का कलेस्ट्रोल बढ़ जाता है। त्वचा पर चकते, भूख कम होना, कमजोरी, बाल झड़ना। 

विटामिन B9 (Vitamin B9)

इसे फोलिक अम्ल (Folic Acid) भी कहते है। इसकी खोज डे ने की इसे पी. जी. ए. विटामिन टेरोग्लूटोग्मिक एसिड भी कहते है। इसे फोलेसिन भी कहते है। यह आर. बी. सी. के निर्माण के लिए आवश्यक है। इस कोएन्जाइम की भांति कार्य करता है। यह आर. एन. ए. के सश्लेषण के लिए आवश्यक है। 

विटामिन B9 के स्त्रोत (Source of Vitamin B9):

हरी पत्ती वाली, ईस्ट, सोयाबीन, जिगर, वृक्क, मॉस, आन्त्रीय बैक्टीरिया द्वारा संश्लेषण । 

विटामिन B9 की कमी का प्रभाव (Effects Of Deficiency of Vitamin B9):

इसकी कमी से एनीमिया हो जाता है।

विटामिन B12 (Vitamin B12)

इसे साएनो कोबालएमीन (Lynocobalauine) भी कहते है।  यह विटामिन स्मिथ तथा पार्कर द्वारा 1948 में लिमर से आइसोलेट किया गया । यह विटामिन शरीर की समुचित वृद्धि में सहायक होता है। यह न्यूकिलयोप्रोटीन के संश्लेषण में भाग लेता है। यह लाल रूधिराणुओं (RBC) के निर्माण में भी सहायक होता है। एण्टीपरनीसियस एनीमिक विटामिन है। कोमोसोम डुप्लीकेशन के लिए जरूरी । ट्रांसमिसाइलेशन विधि में लिप्त माइक्रो जीव की वृद्धि में सहायक।

अस्थिमज्जा को डब्ल्यू. बी. सी. तथा प्लेटलेट्स उत्पन्न करने के लिए प्रेरित करता है। इसका आधारभूत फार्मूला C63H90O14N14 है।

विटामिन B12 के स्त्रोत (Source of Vitamin B12)

दूध, ईस्ट, मछली, जिगर, अण्डा, आन्त्रीय बैक्टेरिया द्वारा संश्लेषित। 

विटामिन B12 की कमी के प्रभाव (Pernicious Anaemia) 

  • इसकी कमी से परनीसियस एनिमिया रूधिर कोशिकाओं की संख्या में अत्यधिक कमी। 
  • हाइपर ग्लाइसीमिया ।
  • वृद्धि को धीमा करता हैं। 

विटामिन C (Vitamin C) 

इसे एस्कोर्बिक अम्ल (Ascorbic Acid) भी कहते है। इसका पृथक्करण सर्वप्रथम सन् 1928 गायोर्जी ने किया। इसका सर्वप्रथम संश्लेषण 1933 में रीचस्टीन ने किया। यह विटामिन कोशिकीय श्वसन (Cellular respiration) के क्रेब चक्र (Kreb’s Cycle) में सहविकर का कार्य करता है। यह एक सफेद रवेदार ठोस है। कोलेजन (Collagan) के निर्माण के लिए आवश्यक है।

यह विटामिन लाल रूधिराणुओं (RBC) अन्तकोशिकीय मैट्रिक्स, दाँतों की डेण्टीन (Dentin) तथा कैलोजन युक्त पदार्थो धावों के भरने, नई कोशिकाओं एवं एण्टीबॉडीज के निर्माण में सहायता देता है। यह अमीनो अम्ल के अपचयन में भी सहायक होता है। इसका C6H8O6 होता है। 

विटामिन C के स्त्रोत (Source of Vitamin C):

यह विटामिन सिट्रस फलों (नीबू), टमाटर, मूली, सेब, हरी सब्जियों में बहुतायत से मिलता है। 

विटामिन C की कमी का प्रभाव (Effects of Deficiency of Vitamin C)

  • इसकी कमी से स्कर्वी रोग हो जाता है। स्कर्वी में सामान्यतः मसूड़ों से रक्त आता है। 
  • एनीमिया हो जाता है। 
  • रूधिर स्कंदन देर से होता हैं। 
  • धाव देर से भरता हैं। 
  • कार्बोहाइड्रेट मेटाबोलिज्म में अवरोध होता है। 
  • इम्यून रक्षा तंत्र टूट जाता है। 
  • नर्वस ब्रेक डाऊन व उच्च ताप। 
  • प्रोटीन उपापचय ठीक प्रकार से नही होता तथा शरीर का वजन गिर जाता है। 

विटामिन बी कॉम्लेक्स के कुछ अन्य विटामिन की भी खोज हुई है जो निम्न प्रकार हैं

  1. इनोसिटोल (Inositol) 
  2. विटामिन B15 (Vitamin B15) 
  3. विटामिन B17 ( Vitamin B17)
  4. कोलीन (Cholin) 
  5. पेरा एमीनों बेन्जोईक अम्ल (PABA)

 

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