International Organization

खाड़ी सहयोग परिषद (Gulf Cooperation Council)

स्थापना – 25 मई, 1981
सदस्य देश – सऊदी अरब, ओमान, कुवैत, सं. अरब अमीरात, बहरीनं, कतर
मुख्यालय – रियाद ( सऊदी अरब)

खाड़ी सहयोग परिषद् Gulf Co-operation Council (G.C.C.)

खाड़ी सहयोग परिषद्’ (G.C.C.) की स्थापना 25 मई, 1981 को खाड़ी (GULF) के 6 देशों (ओमान, बहरीन, कुवैत, कतर, सऊदी अरब तथा संयुक्त अरब अमीरात) के समझौते पर हस्ताक्षर द्वारा हुई। इसे खाडी (GULF) के अरब देशों की सहयोग परिषद् भी कहा जाता।

उद्देश्य/लक्ष्य

  • आपस में आर्थिक एवं राजनीतिक सहयोग द्वारा क्षेत्र में सुरक्षा एवं स्थायित्व को पुख्ता करना, जनता के हितों की रक्षा, व्यावसायिक एवं औद्योगिक कानूनों एवं कस्टम नियमों का निर्माण तथा मजबूत नींव के लिए राष्ट्रों में आर्थिक गठजोड़ आदि।
  • ‘खाड़ी सहयोग परिषद्’ की सुप्रीम काउंसिल इसकी सर्वप्रमुख नीतिगत संस्था है तथा इसमें राष्ट्रों के मुखिया शामिल होते हैं।

मार्च 1991 में इसके 6 सदस्य राष्ट्रों ने सीरिया व मिस्र के साथ मिलकर ‘दमश्क घोषणा’ (Damascus Declaration) द्वारा ‘क्षेत्रीय शांति बल’ (Regional Peace Keeping Force – R. P. K. F.) की स्थापना की, जो आर्थिक एवं राजनीतिक सहयोग में भी वृद्धि का प्रयास करेगी। परिषद् के दिसंबर 2003 में कुवैत सिटी में संपन्न शिखर सम्मेलन में आतंकवाद के विरुद्ध वैश्विक प्रयासों के प्रति समर्थन जताया गया।

भारत के सम्बन्ध में

भारत ने इस संगठन के साथ अगस्त 2004 में ‘आर्थिक सहयोग संवर्द्धन के एक रूपरेखा समझौते’ (Frame Work Agreement on Economic Co-operation) पर हस्ताक्षर किए।

महासचिव –

  • अब्दुल्लाह बिशहरा (कुवैत) 26 मई 1981 – अप्रैल 1993
  • फहीम बिन सुल्तान अल कासिमी (संयुक्त अरब अमीरात) अप्रैल 1993 – अप्रैल1996
  • जमील इब्राहिम हैजालेन (सऊदी अरब) अप्रैल 1996 – 31 मार्च 2002
  • अब्दुल रहमान बिन हामाद अल अत्तीयाह (कतर) 1 अप्रैल 2002 – 31 मार्च 2011
  • अब्दुल्लातिफ बिन राशीद अल जायनी (बहरीन) 1 अप्रैल 2011 – वर्तमान

खाड़ी सहयोग परिषद की अध्यक्षता अरबी वर्णमाला के आधार पर छह सदस्यों के मध्य बदलती रहती है हालांकि ओमान से अनुरोध पर रियाद में 39वां शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था

खाड़ी सहयोग परिषद के सम्मेलन

  • 40वां शिखर सम्मेलन 2019 – संयुक्त अरब अमीरात
  • 39वां शिखर सम्मेलन 2018 – रियाद
  • 38वां शिखर सम्मेलन 2017 – कुवैत
  • 37वां शिखर सम्मेलन 2016 – बहरीन
  • 36वां शिखर सम्मेलन 2015 – रियाद
  • 35वां शिखर सम्मेलन 2014 – कतर

 

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इस्लामिक सम्मेलन संगठन (Organisation of Islamic Conference)

स्थापना – मई 1971
सदस्य देश – 57 (अफगानिस्तान, अल्बानिया, अल्जीरिया, अज़रबैजान, बहरीन, बांग्लादेश, बेनिन, ब्रूनेई, दार-ए- सलाम, बुर्किना फासो, कैमरून, चाड, कोमोरोस, आईवरी कोस्ट, जिबूती, मिस्र, गैबॉन, गाम्बिया, गिनी, गिनी-बिसाऊ, गुयाना, इंडोनेशिया, ईरान, इराक, जार्डन, कजाखस्तान, कुवैत, किरगिज़स्तान, लेबनान, लीबिया, मलेशिया, मालदीव, माली, मॉरिटानिया, मोरक्को, मोजाम्बिक, नाइजर, नाइजीरिया, ओमान, पाकिस्तान, फिलिस्तीन, कतर, सऊदी अरब, सेनेगल, सियरा लिओन, सोमालिया, सूडान, सूरीनाम, सीरिया, ताजिकिस्तान, टोगो, ट्यूनीशिया, तुर्की, तुर्कमेनिस्तान, युगांडा, संयुक्त अरब अमीरात, उज्बेकिस्तान और यमन।)
पर्यवेक्षक राष्ट्र – इसके पर्यवेक्षक देशों में बोस्निया और हर्जेगोविना, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, रूस और थाइलैंड शामिल हैं।
पर्यवेक्षक मुस्लिम संगठन – मोरो नैशनल लिब्रेशन फ्रंट, तुर्किश सिप्रियॉट स्टेट
पर्यवेक्षक अंतरराष्ट्रीय संगठन –  इकनॉमिक कोऑपरेशन ऑर्गनाइजेशन, अफ्रीकन यूनियन, लीग ऑफ अरब स्टेट्स, नॉन अलाइंड मूवमेंट और संयुक्त राष्ट्र
आधिकारिक भाषाएं – अरबी, अंग्रेजी और फ्रांसीसी है।
मुख्यालय –  जेद्दा, (सऊदी अरब)

 

इस्लामिक सम्मेलन संगठन (Organisation of Islamic Conference) (O.I.C.)

इस्लामिक सम्मेलन संगठन (O.I.C.) की स्थापना मई 1971 में की गई थी। इस संगठन की स्थापना के पीछे रबात (मोरक्को) में सितंबर 1969 में संपन्न मुसलिम राष्ट्राध्यक्षों के शिखर सम्मेलन, मार्च 1970 में जद्दाह (सऊदी अरब) में संपन्न मुस्लिम विदेश मंत्रियों के सम्मेलन तथा सन् 1970 में कराँची (पाकिस्तान) में हुए मुस्लिम विदेश मंत्रियों के सम्मेलन का प्रमुख योगदान है। वर्तमान में इस संगठन में 57 सदस्य हैं। संगठन का सदस्य मुस्लिम बहुल जनसंख्या (50 प्रतिशत से अधिक) वाला देश ही बन सकता है।

उद्देश्य – 

इसका सबसे बड़ा उद्देश्य सदस्य राष्ट्रों के बीच आपसी एकता के बंधन को मजबूत करना और उनके हितों की रक्षा करना है। यह संगठन सदस्य राष्ट्रों की अखंडता, उनकी स्वायत्ता और स्वतंत्रता को सुनिश्चित रखने के लिए काम करकता है। इस्लामी राष्ट्रों के बीच आर्थिक व्यापार को बढ़ावा देने के लिए सामान्य इस्लामी बाजार की स्थापना इसके अहम उद्देश्यों में से एक है।  

इस्लामिक सम्मेलन संगठन के अहम अंग –

  • इस्लामिक समिट (Islamic Summit)
  • काउंसिल ऑफ फॉरेन मिनिस्टर्स (सीएफएम) (Council of Foreign Ministers-CFM)।
  • महासचिवालय
  • अलकुद्स कमिटी
  • विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी कमिटी
  • आर्थिक एवं व्यापार कमिटी
  • सूचना एवं संस्कृति कमिटी
  • इस्लामिक विकास बैंक
  • इस्लामी शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन

भारत की स्थिति –

सितंबर 1969 में मोरक्को की राजधानी रबात में इस्लामिक समिट कॉन्फ्रेंस का आयोजन हुआ था। उसमें भारत को आधिकारिक प्रतिनिधि के तौर पर आमंत्रित किया गया। लेकिन पाकिस्तान ने भारत को न्योते का विरोध किया था जिस वजह से भारत को दिया गया निमंत्रण रद्द कर दिया गया।

ओआईसी की सदस्यता मुस्लिम बहुल देशों के लिए आरक्षित है, लेकिन रूस, थाईलैंड और कुछ अन्य छोटे देशों को उसकी तरफ से ऑब्जर्वर का दर्जा दिया गया है। पिछले साल मई में ढाका में हुए विदेश मंत्री परिषद के 45वें सम्मेलन में बांग्लादेश ने मेजबान के तौर पर भारत को इस संगठन की सदस्यता देने का प्रस्ताव रखा था।

वर्तमान में 46वाँ सत्र अबु धाबी में आयोजित किया गया। इस संगठन की स्थापना के बाद पिछले 50 वर्षों में यह पहली बार था, जब भारत को OIC की बैठक के उद्घाटन सत्र में बतौर गेस्ट ऑफ ऑनर आमंत्रित किया गया। मेज़बान देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने पाकिस्तान की कड़ी आपत्ति और बहिष्कार करने की धमकी के बावजूद OIC के विदेश मंत्रियों की बैठक में भारत को आमंत्रित करने के अपने निर्णय का बचाव किया।

पहली बार परिषद की पूर्ण बैठक में ‘गेस्ट ऑफ ऑनर’ होने का निमंत्रण, विशेषकर पुलवामा आतंकवादी हमले के बाद पाकिस्तान के साथ बढ़े तनाव के मद्द्देनज़र अपना एक अलग महत्त्व रखता है। यह इस बात का परिचायक है कि इस्लामिक देशों ने भी भारत के महत्त्व को पहचाना और स्वीकार किया है। इसे भारत के लिये एक बड़ी राजनयिक उपलब्धि माना जा सकता है।

महासचिव –

  • तान्कू अब्दुल रहमान (मलेशिया) – 1970 – 1974
  • हस्सान अल-ताहामी (1974 – 75)
  • अमादु करीम गाए (1975 – 79)
  • हबीबी चट्टी (1979 – 84)
  • सैयद शरीफद्दीन पीरजादा (पाकिस्तान) – 1984 – 88
  • हामीद अलगाबिद (नाइजर) – 1988 – 96
  • अजद्दीन लाराकी (मोरक्को) – 1996 – 2000
  • अब्देलउहैद बलकेजीज (मोरक्को) – 2000 – 04
  • इकमेलद्दीन इशानुगलू (तुर्की) – 2004 – 14
  • इयाद इब्न अमीन मदनी (सउदी अरब) – 2014 – 16
  • युस्सेफ बिन अल-ओट्टामीन (सउदी अरब) – 2016 – वर्तमान

इसलामिक शिखर सम्मेलन (Islamic Summit Conference)

  • 1st शिखर सम्मेलन – 22–25 सितम्बर 1969 – मोरक्को (रबाट)
  • 2nd शिखर सम्मेलन – 22–24 फरवरी 1974 – पाकिस्तान (लाहौर)
  • 3rd  शिखर सम्मेलन – 25–29 जनवरी 1981 – सऊदी अरब (मक्का और तैफ)
  • 4th शिखर सम्मेलन – 16–19 जनवरी 1984 – मोरक्को (कैसाब्लांका)
  • 5th शिखर सम्मेलन – 26–29 जनवरी 1987 – कुवैत(कुवैत सिटी)
  • 6th शिखर सम्मेलन – 9–11 दिसम्बर 1991 – सेनेगल (डकार)
  • 7th शिखर सम्मेलन – 13–15 दिसम्बर 1994 – मोरक्को (कैसाब्लांका)
  • 8th शिखर सम्मेलन – 9–11 दिसम्बर 1997 – ईरान (तेहरान)
  • 9th शिखर सम्मेलन – 12–13 नवम्बर 2000 – कतर (दोहा)
  • 10th शिखर सम्मेलन – 16–17 अक्टूबर 2003 – मलेशिया
  • 11th शिखर सम्मेलन – 13–14 मार्च 2008 – सेनेगल (डकार)
  • 12th शिखर सम्मेलन – 6–7 फरवरी 2013 – मिस्र (काहिरा)
  • 13th शिखर सम्मेलन – 14–15 अप्रैल 2016 – तुर्की (इस्तांबुल)
  • 14th शिखर सम्मेलन – नवम्बर 2019 – गाम्बिया

 

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G–20 (जी-20) [Group – 20 Countries]

G-20 को समझने से पहले हमें G-7 और G-8 के बारे में जानलेने जरुरी है, क्योंकि सितंबर 1999 में G–7 देशों के वित्त मंत्रियों ने G–20 का गठन एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच के तौर पर किया था जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के साथ ब्रेटन वुड्स संस्थागत प्रणाली की रूपरेखा के भीतर आने वाले व्यवस्थित महत्वपूर्ण देशों के बीच अनौपचारिक बातचीत एवं सहयोग को बढ़ावा देता।

G-8

सदस्य देश – फ्रांस, जर्मनी, इटली, ब्रिटेन, जापान, कनाडा, संयुक्त राज्य अमेरिका, एवं रूस
उद्देश्य – आर्थिक विकास एवं संकट प्रबंधन, वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा एवं आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दों पर आमसहमति को बढ़ावा देना

1975 के आर्थिक संकट के मद्देनजर दुनिया के छह बड़े देशों ने एक साथ आने का फैसला किया। जिसमे फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका देश थे, बाद में इसमें अन्य देश जुड़ते गए। जिससे यह देश G-7 और G-8 देशों के समूहों बनते गए। 1976 में इस समूह में कनाडा के शामिल होने के बाद यह G– 7 और 1998 में रूस के शामिल होने पर G– 8 बन गया। G–8, विश्व के सर्वोच्च सम्पन्न औद्योगिक देशों– फ्रांस, जर्मनी, इटली, यूनाइटेड किंग्डम, जापान, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा एवं रूस, का एक संघ है। यह समूह आर्थिक विकास एवं संकट प्रबंधन, वैश्विक सुरक्षा, ऊर्जा एवं आतंकवाद जैसे वैश्विक मुद्दों पर आमसहमति को बढ़ावा देने के लिए सालाना बैठक का आयोजन करता हैं। ये देश दुनिया के सबसे अधिक औद्योगिक गतिविधियों वाले देश हैं।

  • G–7 का पहला शिखर सम्मेलन नवंबर 1975 में पेरिस के नजदीक रैमबोनीलेट (Rambonilet) में आयोजित किया गया था।

G-8 का विभाजन

शीत युद्ध की समाप्ति के सालों बाद रूस को G-7 में शामिल कर लिया गया था। G-7, 2004 तक G-8 बन रहा। यूक्रेन के क्रीमिया इलाके को अपने साथ मिलाने के कारण रूस को इस अनौपचारिक संस्था से निकाल दिया गया। 2005 में पर्यावरण और विकास के मुद्दों पर चर्चा के लिए ब्राजील, चीन, भारत, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका के साथ G-8 + 5 मंच बना।

G–20 (ग्रुप-20)

स्थापना – 1999 (जर्मनी की राजधानी बर्लिन)

सदस्य देश – 19 देश व 1 देशों का संगठन (अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, कनाडा, चीन, फ्रांस, जर्मनी, भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान, रिपब्लिक ऑफ कोरिया, मैक्सिको, रूस, सउदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, तुर्की, ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ।)
G-20 के सदस्य वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद का करीब 85 फीसदी, वैश्विक व्यापार के 75 फीसदी और विश्व की आबादी के दो-तिहाई से अधिक का प्रतिनिधित्व करते हैं।

उद्देश्य – बातचीत के द्वारा अन्तराष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता को प्रोत्साहन देना है। 

G–20 की शुरुआत, 1999 में एशिया में आए वित्तीय संकट के बाद वित्त मंत्रियों और सेंट्रल बैंक के गवर्नरों की बैठक के तौर पर हुई थी।सितंबर 1999 में G–7 देशों के वित्त मंत्रियों ने G–20 का गठन एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय मंच के तौर पर किया था जो अंतरराष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के साथ ब्रेटन वुड्स संस्थागत प्रणाली की रूपरेखा के भीतर आने वाले व्यवस्थित महत्वपूर्ण देशों के बीच अनौपचारिक बातचीत एवं सहयोग को बढ़ावा देता।

वर्ष 2008 में G–20 के नेताओं का पहला शिखर सम्मेलन आयोजित किया गया था और समूह ने वैश्विक वित्तीय संकट का जवाब देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। इसकी निर्णायक और समन्वित कार्रवाई ने उपभोक्ता और व्यापार में भरोसा रखने वालों को शक्ति दी और आर्थिक सुधार के पहले चरण का समर्थन किया।

G–20 के नेता वर्ष में एक बार बैठक करते हैं; इसके अलावा, वर्ष के दौरान, देशों के वित्त मंत्री और केंद्रीय बैंक के गवर्नर वैश्विक अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने, अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों में सुधार लाने, वित्तीय नियमन में सुधार लाने और प्रत्येक सदस्य देश में जरुरी प्रमुख आर्थिक सुधारों पर चर्चा करने के लिए नियमित रूप से बैठक करते रहते हैं। इन बैठकों के अलावा वरिष्ठ अधिकारियों और विशेष मुद्दों पर नीतिगत समन्वय पर काम करने वाले कार्य समूहों के बीच वर्ष भर चलने वाली बैठकें भी होती हैं।

G–20 शिखर सम्मेलन में रोजगार के सृजन और मुक्त व्यापार पर अधिक जोर देने के साथ वैश्विक आर्थिव विकास को समर्थन देने के उपायों पर फोकस जारी है। प्रत्येक G–20 अध्यक्ष हर वर्ष कई अतिथि देशों को आमंत्रित करता है। 

जी20 शिखर सम्मेलन

तिथि स्‍थान
1 14-15, नवंबर, 2008 वाशिंगटन, अमेरिका
2 2 अप्रैल, 2009 लंदन, यूनाईटेड किंगडम
3 24-25, सितंबर, 2009 पीट्सबर्ग, अमेरिका
4 26-27, जून, 2010 टोरंटो, कनाडा
5 11-12, नवंबर, 2010 सियोल, दक्षिण कोरिया
6 3-4, नवंबर, 2011 कान्स, फ्रांस
7 18-19 जून, 2012 लॉस कॉबोस, मेक्सिको
8 5-6, सितंबर, 2013 सेंट पीटर्सबर्ग, रूस
9 15-16 नवंबर, 2014 बि्रसबेन, ऑस्‍ट्रेलिया
10 15-16 नवंबर, 2015 अंतालिया तुर्की
11 4-5 सितम्बर 2016 हांगझाऊ, चीन
12 7-8 जुलाई, 2017 हैम्बर्ग, जर्मनी
13 30 नवम्बर 1दिसम्बर 2018  ब्यूनस आयर्स, अर्जेण्‍टीना

G-20 देशों की जीडीपी आबादी

देश  GDP आबादी
फ्रांस 2,420.4 अरब डालर  6.68 करोड़
अमेरिका 19,417 अरब डालर  32.3 करोड़
इंडोनेशिया 1,020.5 अरब डालर  25.8 करोड़
मेक्सिको 987.30 अरब डालर  12.3 करोड़
द. अफ्रीका 317.56 अरब डालर  5.43 करोड़
अर्जेंटीना 628.93 अरब डालर  4.38 करोड़
जर्मनी 3,423.2 अरब डालर  8.07 करोड़
चीन 11,795 अरब डालर  138 करोड़
रूस 1,560.7 अरब डालर  14.2 करोड़
तुर्की 793.69 अरब डालर  8.02 करोड़
ब्राजील 2,140.9 अरब डालर  20.58 करोड़
द. कोरिया  1,498.1 अरब डालर  5.09 करोड़
भारत 2,454.4 अरब डालर  126 करोड़

G-20 की अध्यक्षता 

G-20 की अध्यक्षता एक प्रणाली के तहत हर साल बदलती रहती है। जो समय के साथ क्षेत्रीय संतुलन को सुनिश्चित करता है। अनौपचारिक राजनीतिक मंच की अपनी प्रकृति को दर्शाते हुए जी-20 का कोई स्थायी सचिवालय नहीं है। इसके बजाय अन्य सदस्यों के साथ जी 20 एजेंडा पर परामर्श और वैश्विक अर्थव्यवस्था में हुए विकास पर प्रतिक्रिया देने के लिए उन्हें एक साथ लाने की जिम्मेदारी जी- 20 के अध्यक्ष की होती है।

संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nation Organization)

संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nation Organization)

  • स्थापना वर्ष – 24 अक्तूबर 1945
  • मुख्यालय – न्यू यॉर्क सिटी, संयुक्त राज्य
  • सदस्य देश – शुरुआत में इसमें 50 सदस्य देश थे , वर्तमान में 194 सदस्य देश हैं
  • महासचिव – एंटोनियो गुटेरेश (António Guterres)
  • संयुक्त राष्ट्र संघ की आधकारिक भाषा – रूसी, स्पेनिश, फ्रेंच, अरबी, चीनी और इंग्लिश 

संयुक्त राष्ट्र संघ का इतिहास (History of the United Nations)

राष्ट्रसंघ के निर्माण में सहायक घोषणाएं

राष्ट्रसंघ विश्वशांति स्थापित करने में असफल रहा। द्वितीय विश्व युद्ध सितम्बर 1939 में आरम्भ हो गया और 12 जून, 1941 को हिटलर के विरुद्ध युद्ध करने वाले राष्ट्रों ने एक ऐसे विश्व के निर्माण की घोषणा की जो आक्रमण के भय से मुक्त हो तथा जिसमें सबको आर्थिक व सामाजिक सुरक्षा प्राप्त हो।

अटलांटिक घोषणा-पत्र (Atlantic Charter) – 14 अगस्त, 1941 को ब्रिटेन के प्रधानमन्त्री चर्चिल व अमेरिका के राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने घोषणा की कि वे किसी अन्य देश की भूमि पर अधिकार नहीं करेंगे, सभी राष्ट्रों की जनता को अपनी राष्ट्र-प्रणाली स्वयं निर्धारित करने का अधिकार देंगे, भय से मुक्ति दिलायेंगे, सबकी आवश्यकताओं की पूर्ति का प्रयास करेंगे तथा अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता देंगे। भय तथा आवश्यकता से मुक्ति और विश्वास तथा धर्म की स्वतन्त्रता मान्य होगी (Freedom from Fear, Want and Freedom of Belief and Worship)

संयुक्त राष्ट्रसंघ की घोषणा, जनवरी 1942 (U.N.O. Declaration) – 1 जनवरी, 1942 को संयुक्त राष्ट्र की घोषणा वाशिंगटन में 26 राष्ट्रों ने की जिसमें अटलांटिक चार्टर का समर्थन किया गया और संयुक्त राष्ट्रसंघ के निर्माण की आशा की गई। 1945 में 47 राष्ट्रों ने इस पर हस्ताक्षर किये। मास्को सम्मेलन 1943 द्वारा एक अन्तर्राष्ट्रीय संस्था के निर्माण का विचार किया गया जिसमें छोटे-बड़े सभी राष्ट्रों की सार्वभौमिक समानता (Sovereign equality) को मान्यता देने की बात की गई। यही संगठन बाद में संयुक्त राष्ट्रसंघ के रूप में विकसित हुआ।

इसके बाद ब्रेटन वुड्स सम्मेलन, जुलाई 1944 व वाशिंगटन में डम्बर्टन-ओक्स सम्मेलन व याल्टा सम्मेलन फरवरी 1945 को हुआ। परन्तु, 25 अप्रैल से 26 जून, 1945 तक के सानफ्रांसिस्को सम्मेलन द्वारा संयुक्त राष्ट्रसंघ का निर्माण किया गया। इसमें विश्व के 51 राष्ट्रों के 850 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। 24 अक्तूबर, 1945 संयुक्त राष्ट्रसंघ को संयुक्त राष्ट्रसंघ की स्थापना हुई तथा संयुक्त राष्ट्रसंघ का चार्टर लागू हुआ। 10 जनवरी, 1946 को लन्दन के वेस्टमिन्स्टर हाल में इसका प्रथम अधिवेशन हुआ और न्यूयार्क (अमेरिका) में इसका प्रधान कार्यालय स्थापित किया गया।

संयुक्त राष्ट्रसंघ के उद्देश्य (Purpose of the United Nations)

संयुक्त राष्ट्रसंघ का मुख्य ध्येय संसार में युद्ध की समाप्ति करना और विश्व में शांति तथा व्यवस्था की स्थापना करना है। अन्तर्राष्ट्रीय विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाना और विश्व कल्याण भी इसका अत्यन्त महत्वपूर्ण कार्य है। इसके उद्देश्यों का उल्लेख चार्टर में किया गया है। संक्षेप में इसके उद्देश्य निम्नलिखित हैं|

  1. सदस्य राष्ट्रों में होने वाले पारस्परिक विवादों को शान्तिपूर्ण ढंग से हल करके युद्ध की संभावनाओं को समाप्त करना और संसार में शांति तथा व्यवस्था बनाए रखना। शांति भंग करने वाले प्रत्येक कार्य को दबाना।
  2. संसार के समस्त राज्यों में सहयोग और भाईचारे की भावना को जागृत करना। इस प्रकार के कार्यों को प्रोत्साहन देना जिनसे कि राज्यों में मित्रतापूर्ण व्यवहार बना रहे और आपसी विवाद का निपटारा परस्पर वार्ताओं द्वारा शांतिपूर्वक हो जाये।
  3. विश्व शांति तथा व्यवस्था बनाये रखने के अतिरिक्त आर्थिक, सामाजिक, राजनीतिक, सांस्कृतिक समस्याओं को सुलझाना तथा पिछड़े राष्ट्रों के विकास में सहायता करना भी संयुक्त राष्ट्रसंघ का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इसको यह कार्य सौंपा गया है कि मनुष्य के भौतिक अधिकारों की मान्यता में सहायता दे और इस बात को देखे कि धर्म, जाति, भाषा, लिंग आदि के आधार पर मनुष्य-मनुष्य के बीच अनावश्यक भेदभाव न किया जाये। मनुष्य को मनुष्य होने के नाते समान अधिकार प्रदान करना संघ का महत्वपूर्ण कार्य है।

विभिन्न राष्ट्रों को एक सामान्य केन्द्र प्रदान करना, जहाँ पर एकत्रित होकर वे आपसी भेदभावों को निपटा सके।

संयुक्त राष्ट्रसंघ के मूल सिद्धान्त (The Principle of the United Nations)

उपरोक्त उद्देश्यों की पूर्ति करते समय संयुक्त राष्ट्रसंघ निम्नलिखित मूल सिद्धांतों पर आचरण करेगा।

  1. छोटे-बड़े राष्ट्रों को समानाधिकार प्रदान करना तथा प्रत्येक राज्य के सम्प्रभुत्व का समान आदर करना।
  2. सदस्य राष्ट्र के चार्टर के सिद्धान्तों का पालन करना।
  3. ऐसी व्यवस्था करना कि सभी राष्ट्र अपने विवाद शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाएँ।
  4. चार्टर के प्रतिकूल आचरण करने वाले राज्य की कोई सहायता न करना।
  5. संयुक्त राष्ट्रसंघ के उद्देश्यों की अवहेलना न करना।
  6. किसी राज्य के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करना।
  7. जो राज्य संघ के सदस्य नहीं हैं उनसे भी शांति तथा व्यवस्था बनाये रखने वाले सिद्धान्तों का पालन कराना।

संयुक्त राष्ट्र संघ की संरचना (Structure of the United Nations)

संयुक्त राष्ट्रसंघ अपना कार्य अनेक अंगों के माध्यम से करता है। इसके अंगों के नाम और संगठन की व्यवस्था चार्टर में ही कर दी गई है। 

संयुक्त राष्ट्र संघ के 6 प्रमुख अंग है

  1. महासभा (General Assembly)
  2. सुरक्षा परिषद (Security Council)
  3. आर्थिक और सामाजिक परिषद (Economic & Social Council)
  4. प्रन्यास परिषद (Trusteeship Council)
  5. अन्तराष्ट्रीय न्यायालय (International Court)
  6. सचिवालय (Secretariat)

महासभा (General Assembly)

एक लोकतान्त्रिक संस्था है क्योंकि इसमें सभी राज्यों का समान प्रतिनिधित्व होता है यह एक प्रकार से विश्व संसद की तरह है यह संयुक्त राष्ट्र का मुख्य विचार-विमर्श निकाय है जो मुक्त एवं उदार बातचीत के जरिये समस्याओं के समाधान ढूँढने का प्रयास करता है यह विश्व का स्थायी मंच एवं बैठक कक्ष है इसका गठन कुछ इस मान्यता पर आधारित है – “शब्दों से लड़ा जाने वाला युद्ध तलवारों से लड़े जाने वाले युद्ध से श्रेयस्कर है

महासभा की अध्यक्षता एक महासचिव द्वारा की जाती है, जो सदस्य देशों एवं 21 उप-अध्यक्षों के द्वारा चुने जाते हैं इसमें सामान्य मुद्दों पर फैसला लेने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरुरत होती है

सभा को संयुक्त राष्ट्र के घोषणा-पत्र की परिधि में आने वाले तमाम मुद्दों पर बहस एवं अनुशंसा करने का अधिकार प्राप्त है हालाँकि इसके फैसले को मानना सदस्य राज्यों के लिए अनिवार्य नहीं है, तथापि उन फैसलों में विश्व जनमत की अभिव्यक्ति होती है।

महासभा राष्ट्रीय संसद की तरह कानून का निर्माण नहीं करती है फिर भी संयुक्त राष्ट्र में छोटे-बड़े धनी-निर्धन और विभिन्न राजनीतिक एवं सामाजिक व्यवस्था वाले देशों के प्रतिनिधियों को अपनी बात करने और वोट देने का अधिकार प्राप्त होता है

महासभा में कार्यों को करने हेतु कई प्रकार की समितियाँ हैं –

  1. निःशस्त्रीकरण एवं अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा समिति
  2. आर्थिक एवं वित्तीय समिति
  3. सामाजिक, मानवीय एवं सांस्कृतिक समिति
  4. राजनीतिक एवं औपनिवेशक स्वतंत्रता समिति
  5. प्रशासनिक एवं आय-व्यय सम्बन्धी समिति
  6. विधि समिति

महासभा की बैठक प्रतिवर्ष सितम्बर माह से होती है इसी बैठक में विभिन्न अध्यक्ष और कई उपाध्यक्षों का निर्वाचन होता है अनुच्छेद 18 के अनुसार महासभा में किसी भी देश के 5 से अधिक प्रतिनिधि नहीं होंगे

सुरक्षा परिषद (Security Council)

संयुक्त राष्ट्र घोषणा पत्र के अनुसार शांति एवं सुरक्षा बहाल करने की प्राथमिक जिम्मेदारी सुरक्षा परिषद् की होती है इसकी बैठक कभी भी बुलाई जा सकती है इसके फैसले का अनुपालन करना सभी राज्यों के लिए अनिवार्य है इसमें 15 सदस्य देश शामिल होते हैं जिनमें से पाँच सदस्य देश – चीन, फ्रांस, सोवियत संघ, ब्रिटेन और संयुक्त राज्य अमेरिका – स्थायी सदस्य हैं शेष दस सदस्य देशों का चुनाव महासभा में स्थायी सदस्यों द्वारा किया जाता है चयनित सदस्य देशों का कार्यकाल 2 वर्षों का होता है

ज्ञातव्य है कि कार्यप्रणाली से सम्बंधित प्रश्नों को छोड़कर प्रत्येक फैसले के लिए मतदान की आवश्यकता पड़ती है अगर कोई भी स्थायी सदस्य अपना वोट देने से मना कर देता है तब इसे “वीटो” के नाम से जाना जाता है

परिषद् (Security Council) के समक्ष जब कभी किसी देश के अशांति और खतरे के मामले लाये जाते हैं तो अक्सर वह उस देश को पहले विविध पक्षों से शांतिपूर्ण हल ढूँढने हेतु प्रयास करने के लिए कहती है। परिषद् मध्यस्थता का मार्ग भी चुनती है वह स्थिति की छानबीन कर उस पर रपट भेजने के लिए महासचिव से आग्रह भी कर सकती है लड़ाई छिड़ जाने पर परिषद् युद्ध विराम की कोशिश करती है

वह अशांत क्षेत्र में तनाव कम करने एवं विरोधी सैनिक बलों को दूर रखने के लिए शांति सैनिकों की टुकड़ियाँ भी भेज सकती है महासभा के विपरीत इसके फैसले बाध्यकारी होते हैं आर्थिक प्रतिबंध लगाकर अथवा सामूहिक सैन्य कार्यवाही का आदेश देकर अपने फैसले को लागू करवाने का अधिकार भी इसे प्राप्त है उदाहरणस्वरूप इसने ऐसा कोरियाई संकट (1950) तथा ईराक कुवैत संकट (1950-51) के दौरान किया था

कार्य

  1. विश्व में शांति एवं सुरक्षा बनाए रखना
  2. हथियारों की तस्करी को रोकना
  3. आक्रमणकर्ता राज्य के विरुद्ध सैन्य कार्यवाही करना
  4. आक्रमण को रोकने या बंद करने के लिए राज्यों पर आर्थिक प्रतिबंध लगाना

संरचना

सुरक्षा परिषद् (Security Council) के वर्तमान समय में 15 सदस्य देश हैं जिसमें 5 स्थायी और 10 अस्थायी हैं वर्ष 1963 में चार्टर संशोधन किया गया और अस्थायी सदस्यों की संख्या 6 से बढ़ाकर 10 कर दी गई. अस्थायी सदस्य विश्व के विभिन्न भागों से लिए जाते हैं जिसके अनुपात निम्नलिखित हैं –

  1. 5 सदस्य अफ्रीका, एशिया से
  2. 2 सदस्य लैटिन अमेरिका से
  3. 2 सदस्य पश्चिमी देशों से
  4. 1 सदस्य पूर्वी यूरोप से

चार्टर के अनुच्छेद 27 में मतदान का प्रावधान दिया गया है सुरक्षा परिषद् में “दोहरे वीटो का प्रावधान” है। पहले वीटो का प्रयोग सुरक्षा परिषद् के स्थायी सदस्य किसी मुद्दे को साधारण मामलों से अलग करने के लिए करते हैं दूसरी बार वीटो का प्रयोग उस मुद्दे को रोकने के लिए किया जाता है

परिषद् के अस्थायी सदस्य का निर्वाचन महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले दो-तिहाई सदस्यों द्वारा किया जाता है विदित हो कि 191 में राष्ट्रवादी चीन (ताईवान) को स्थायी सदस्यता से निकालकर जनवादी चीन को स्थायी सदस्य बना दिया गया था

इसकी बैठक वर्ष-भर चलती रहती है सुरक्षा परिषद् में किसी भी कार्यवाही के लिए 9 सदस्यों की आवश्यकता होती है किसी भी एक सदस्य की अनुपस्थिति में वीटो अधिकार का प्रयोग स्थायी सदस्यों द्वारा नहीं किया जा सकता

आर्थिक और सामाजिक परिषद (Economic & Social Council)

आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् (Economic and Social Council) के 54 सदस्य हैं जिसमें 18 सदस्य 3 वर्षों के लिए निर्वाचित होते हैं। सामान्यतः इसकी बैठक साल में दो बार होती हैं यह संयुक्त राज्य और उसकी विशेषज्ञ एजेंसियों, जैसे – अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO), खाद्य एवं श्रमिक संघटन (FAO), यूनेस्को (UNESCO), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के कार्यों का समन्वयन करती है

कार्य

इसके कार्य कुछ इस प्रकार हैं –

  1. विकासशील देशों में आर्थिक गतिविधियों में संवर्द्धन करना
  2. विकास और मानवीय आवश्यकताओं की सहायता-प्राप्त परियोजनाओं का प्रबंधन करना
  3. मानवाधिकार के अनुपालन को मजबूत करना
  4. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के लाभों का विस्तार करना
  5. बेहतर आवास, परिवार नियोजन तथा अपराध-निस्तारण के क्षेत्र में विश्व सहयोग को बहाल करना

आर्थिक एवं सामाजिक परिषद् के अधीन अनेक आयोगों की स्थापना की गई है जिसमें सहस्राब्दी विकास लक्ष्य (Millennium Development Goals – MDGs) को प्राप्त करने के लिए प्रयत्न करना प्रमुख है

प्रन्यास परिषद (Trusteeship Council)

प्रन्यास पद्धति तीन प्रकार के क्षेत्रों में सम्बंधित हैं –
1. प्रथम विश्व युद्ध के उपरान्त राष्ट्र संघ द्वारा स्थापित समाज्ञा के अधीन देश,
2. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद शत्रु राष्ट्रों से छीने गये प्रदेश
3. उपनिवेशवादी देशों द्वारा स्वेच्छा से इस व्यवस्था के अधीनस्थ क्षेत्र।

प्रन्यास परिषद् का गठन निम्न तीन प्रकार के सदस्यों से होता है
1. प्रन्यास क्षेत्रों का प्रशासन करने वाले सदस्य (ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैण्ड, अमेरिका, ब्रिटेन)
2. सुरक्षा परिषद् के ऐसे स्थायी सदस्य, जो किसी प्रन्यास क्षेत्र का प्रशासन नहीं करते हैं (फ्रांस, चीन, रूस)।
3. महासभा द्वारा 3 वर्ष के लिए निर्वाचित ऐसे सदस्य,जिनकी संख्या प्रन्यास क्षेत्रों के प्रशासनकर्ता व गैर प्रशासनकर्ता सदस्यों के बीच समान विभाजन के लिए पर्याप्त हो। ऐसे सदस्यों की संख्या 5 है। इस प्रकार प्रन्यास परिषद् के कुल 12 सदस्य हैं।

अन्तराष्ट्रीय न्यायालय (International Court)

अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय (International Court of Justice) का मुख्यालय हॉलैंड शहर के  हेग में स्थित है अंतर्राष्ट्रीय राजनीति में वैधानिक विवादों के समाधान के लिए अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय की स्थापना की गई है अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय का निर्णय परामर्श माना जाता है एवं इसके द्वारा दिए गये निर्णय को बाध्यकारी रूप से लागू करने की शक्ति सुरक्षा परिषद् के पास है अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय के द्वारा राज्यों के बीच उप्तन्न विवादों को सुलझाया जाता है, जैसे – सीमा विवाद, जल विवाद आदि. इसके अतिरिक्त संयुक्त राष्ट्र संघ की विभिन्न एजेंसियाँ अंतर्राष्ट्रीय विवाद के मुद्दों पर इससे परामर्श ले सकती हैं

संरचना

न्यायालय की आधिकारिक भाषा अंग्रेजी है किसी एक राज्य के एक से अधिक नागरिक एक साथ न्यायाधीश नहीं हो सकते। अंतर्राष्ट्रीय न्यायालय में 15 न्यायाधीश होते हैं जिनका कार्यकाल 9 वर्षों का होता है

सचिवालय (Secretariat)

संयुक्त राष्ट्र सविचालय संयुक्त राष्ट्र संघ की प्रशासनिक संस्था है जिसका कार्य संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यों का प्रशासनिक प्रबंध करना है संयुक्त राष्ट्र संघ का महासचिव, संयुक्त राष्ट्र संघ (United Nations – UN) का प्रशासनिक प्रधान होता है और महासचिव की नियुक्ति महासभा में उपस्थित और मतदान करने वाले दो तिहाई सदस्यों द्वारा होती है चार्टर में महासचिव के कार्यकाल का कोई प्रावधान नहीं है परन्तु महासभा के द्वारा पारित प्रस्ताव के आधार पर महासचिव की नियुक्ति 5 वर्षों के लिए होती है और वह दोबारा भी नियुक्त किया जा सकता है

संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव की भूमिका सचिवालय के प्रधान तथा कूटनीतिज्ञ के रूप में देखी जाती है

संयुक्त राष्ट्र संघ से संबंधित अन्य संस्थाएँ (Other organizations related to the United Nations)

  1. संयुक्त राष्ट्र शैक्षिक, वैज्ञानिक एवं सांस्कृतिक संगठन (United Nations Educational Scientific and Cultural Organization)
  2. संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (United Nations Food and Agriculture Organization)
  3. अन्तर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा अभिकरण (International Atomic Energy Agency)
  4. अन्तर्राष्ट्रीय नागर विमानन संगठन (International Civil Aviation Organization)
  5. अंतर्राष्ट्रीय कृषि विकास कोष (International Agricultural Development Fund)
  6. अंतरराष्ट्रीय श्रम संघ (International Labor Union)
  7. अंतर्राष्ट्रीय सागरीय संगठन (International Ocean Organization)
  8. अन्तर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (International Monetary Fund)
  9. अन्तर्राष्ट्रीय दूरसंचार संघ (International telecommunications association)
  10. संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संगठन (United Nations Industrial Development Organisation)
  11. वैश्विक डाक संघ (Universal Postal Union – UPU)
  12. विश्व बैंक (World Bank)
  13. विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization)
  14. विश्व मौसम संगठन (World Meteorological Organization)
  15. विश्व पर्यटन संगठन (World Tourism Organization)
  16. संयुक्त राष्ट्र औद्योगिक विकास संस्था (United Nations Industrial Development Organization)
  17. व्यापार तथा विकास हेतू संयुक्त राष्ट्र सम्मलेन (United Nations Conference on Trade and Development)
  18. व्यापार तथा सीमा शुल्क पर सामान्य समझौता (General agreement on Trade and Customs)
  19. विश्व बौद्धिक संपत्ति संस्था (World Intellectual Property Firm)
  20. संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme)
  21. संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या गतिविधियों से सम्बद्ध कोष (United Nations Population Activities Affiliate Fund)। 

संयुक्त राष्ट्र संघ के सदस्य देश (United Nation Member Countries)

क्र. देश वर्ष
1.
2.
3.
4.
5.
6.
7.
8.
9.
10.
11.
12.
13.
14.
15.
16.
17.
18.
19.
20.
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22.
23.
24.
25.
26.
27.
28.
29.
30.
31.
32.
33.
34.
35.
36.
37.
38.
39.
40.
42-
41.
43.
44.
45.
46.
47.
48.
49.
50.
51.
52.
53.
54.
55.
56.
57.
58.
59.
60.
61.
62.
63.
64.
65.
66.
67.
68.
69.
70.
71.
72.
73.
74.
75.
76.
77.
78.
79.
80.
81.
82.
83.
84
85.
86.
87.
88.
89.
90.
91.
92.
93.
94.
95.
96.
97.
98.
99.
100.
101.
102.
103.
104.
105.
106.
107
108.
109.
110.
111.
112.
113.
114.
115.
116.
117.
118.
119.
120.
121.
122.
123.
124.
125.
126.
127.
128.
129.
130.
131.
132.
133.
134.
135.
136.
137.
138.
139.
140.
141.
142.
143.
144.
145.
146.
147.
148.
149.
150.
151.
152.
153.
154.
155.
156.
157.
158.
159.
160.
161.
162.
163.
164.
165.
166.
167.
168.
169.
170.
171.
172.
173.
174.
175.
176.
177.
178.
179.
180.
181.
182.
183.
184.
185.
186.
187.
188.
189.
190.
191.
192.
193.
अफगानिस्तान
अल्बानिया
अल्जीरिया
एंडोरा
अंगोला
एंटिगुआ एवं बारबूडा
अर्जेंटीना
आमोनिया
आस्टे्रलिया
आस्ट्रिया
अजरबैजान
बहामास
बहरीन
बांग्लादेश
बारबाडोस
बेलारूस
बेल्जियम
बेलिज
बेनिन
भूटान
बोलीविया
बोस्निया-हर्जे्रोविना
बोत्सवाना
ब्राजील
बुन्नी
बुल्गारिया
बुरकिना फांसो
बुरूडी
कंबोडिया
कैमरून
कनाडा
केप वर्डे
सेन्ट्रलअफ्रीकन
चाड
चिली
चीन
कोलबिया
कोमोरेस
कागो(प्रजा,गण)
कांगो(गण,)
कोटे-डी-आइवरी
कोस्टारिका
कोएशिया
क्यूबा
साइपस्र
चेक(गणराज्य)
डेनमार्क
जिबूती
डोमिनिकन
डोमिनिकन
इकडे वर
इजिप्ट
अल सल्वाडोर
इक्वेटोरियल
इिस्ट्रीया
एस्टोनिया
इथियोपिया
र्इस्ट तिमोर
फिजी
फिनलैण्ड
फ्रांस
गैबन
गैम्बिया
जॉर्जिया
जर्मनी
घाना
ग्रीस
ग्रनेडा
ग्वाटेमाला
गिनी
गिनी-बिसाउ
गुयाना
हैती
होंडूरास
हंगरी
आइसलैंड
इंडिया
इंडोनेशिया
ईरान
इराक
आयरलैंड
इजराइल
इटली
जमैका
जापान
जॉर्डन
कजाकिस्तान
केन्या
किरबाती
कोरिया(उ.)
कोरिया(द)
कुवैत
किर्गिस्तान
लाओस
लाटविया
लेबनान
लेसोथो
लाअबेरिया
लीबिया
लिक्टेंस्टीन
लिथुआनिया
लक्जेमबर्ग
मेसिडोनिया
मेडागास्कर
मलावी
मलेशिया
मालदीव
माली
माल्टा
मार्शल आइलैंड
मॉरिटानिया
मॉरिशस
मैक्सिको
माइक्रोनेशिया
माल्डोवा
मोनाको
मंगोलिया
मोरक्को
मोजांबिक
म्यांमार
नामीबिया
नारूै
नेपाल
नीदरलैंड
न्यूजीलैंड
निकारागुआ
नाइजर
नाइजीरिया
नार्वे
ओमान
पाकिस्तान
पलाउ
पनामा
पापुआ न्यू गिनी
परागुए
पेरू
फिलीपींस
पोलैंड
पुर्तगाल
कतर
रोमानिया
रूस
रवांडा
सेंट किट्स नेविन
सेंट लुसिया
सेंट विसेंट ग्रेनेडिंस
समोआ
सैन मैरिनो
साओ टाम प्रिंसिप
सउदी अरब
सेनेगल
सशेल्स
सियरा लियाने
सिंगापुर
स्लोवाकिया
स्लोवेनिया
सोलोमन आइलैंड
सोमालिया
साउथ अफ्रीका
स्पेन
श्रीलंका
सूडान
सूरीनाम
स्वाजीलैंड
स्वीडन
सीरिया
स्विट्जरलैंड
तजिकिस्तान
तंजानिया
थाइलैंड
टोगो
टोगा
ट्रिनीडाड-टोबैगो
टॅयूनीशिया
तुर्की
तुर्कमेनिस्तान
टुवालू
युगांडा
यूक्रने
यूनाइटेड अरब अमीरत
यूनाइटेड किंगडम
यू.एस.ए.
उरूग्वे
उज्बेकिस्तान
वनाटू
वेनेजुएला
वियतनाम
यमन
युगोस्लाविया
जामबिया
जांबिया
मोंटेनग्रो
दक्षिणी सूडान
1946
1955
1962
1993
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1945
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1992
1930
1971
1974
1966
1945
1945
1981
1960
1971
1945
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1984
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1975
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1945
1975
1960
1960
1960
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1960
1993
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1977
1978
1945
1945
1945
1945
1968
1993
1991
1945
2002
1970
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1945
1960
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1973
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1974
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1945
1945
1955
1946
1945
1950
1945
1945
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1949
1955
1962
1956
1955
1995
1963
1999
1991
1991
1963
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1991
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1955
1955
1956
1956
1968
1946
1945
2002
1992
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1946
1960
1999
1956
1956
1945
1992
2000
1962
1945
1971
1945
1945
1945
1992
1981
1945
1977
1947
1945
1964
1980
2006
2011

संयुक्त राष्ट्र और भारत (United Nations and India)

भारत, संयुक्त राष्ट्र के उन प्रारंभिक सदस्यों में शामिल था जिन्होंने 01 जनवरी, 1942 को वाशिंग्टन में संयुक्त राष्ट्र घोषणा पर हस्ताक्षर किए थे तथा 25 अप्रैल से 26 जून, 1945 तक सेन फ्रांसिस्को में ऐतिहासिक संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय संगठन सम्मेलन में भी भाग लिया था। संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्य के रूप में भारत, संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों और सिद्धांतों का पुरजोर समर्थन करता है और चार्टर के उद्देश्यों को लागू करने तथा संयुक्त राष्ट्र के विशिष्ट कार्यक्रमों और एजेंसियों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

 

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