भारत में पर्यावरण संरक्षण एवं अनुसंधान संस्थान

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भारत में पर्यावरण संरक्षण एवं अनुसंधान संस्थान
(Environmental Protection and Research Institute in India)

आज सम्पूर्ण विश्व में पर्यावरण एवं उसके दूषित होने तथा ओजोन परत के नष्ट होने से पड़ने वाले प्रभावों से हर एक व्यक्ति चिन्तित है। ‘रियो सम्मेलन (Rio Conference)’ के पश्चात विश्व स्तर पर पर्यावरण के प्रति जन चेतना जाग्रत करने हेतु अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। विश्व भर में गर्माती धरती, ग्रीन हाऊस प्रभाव एवं बदलती जलवायु के मद्देनजर पर्यावरण के प्रति आम नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण हो चुकी है। भारत में पर्यावरण एवं प्रदूषण पर अनुसंधान एवं विकास हेतु अनेक सलाहकार संस्थाएं एवं समितियाँ गठित की गई हैं। भारत सरकार के पर्यावरण एवं वन मंत्रालय के तत्वावधान में केन्द्र सरकार द्वारा भी संस्थाएं गठित की गई हैं. कुछ प्रमुख पर्यावरण संरक्षण एवं अनुसंधान संस्थानों का विवरण इस प्रकार है।

1. भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् (ICFRE) देहरादून, उत्तराखण्ड

यह पर्यावरण एवं वन मंत्रालय का एक स्वायत्त संगठन है, जो वानिकी के क्षेत्र में अनुसंधान एवं शिक्षा आयोजन, निर्देशन तथा व्यवस्था/प्रबन्ध करता है। यह राष्ट्रीय वानिकी अनुसंधान संस्थान नीति निर्माण करने एवं वानिकी शोध के निष्कर्षों का प्रचार-प्रसार, प्रयोक्ताओं अर्थात् राज्य वन विभागों, राज्यों के वन विकास निगमों, गैरसरकारी संगठनों, काष्ठ, आधारित उद्योगों, कृषि विश्वविद्यालयों एवं ग्रामीण क्षेत्र के लोगों के बीच समन्वय करने के लिए उत्तरदायी है। देश के विभिन्न भागों में इसके अधीन निम्नलिखित अनुसंधान संस्थान कार्य कर रहे हैं –

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1. शुष्क वन अनुसंधान संस्थान, (Arid Forest Research Institute – AFRI) जोधपुर

राजस्थान सन् 1988 में जोधपुर में स्थापित इस संस्थान को रेगिस्तान को बढ़ने से रोकने एवं राजस्थान के शुष्क क्षेत्र में उत्पादन बढ़ाने हेतु अनुसंधान एवं विकास करने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। इसका प्रभावी क्षेत्र राजस्थान, गुजरात एवं दादरा नगर हवेली क्षेत्र है।

2. वन अनुसंधान संस्थान (Forest Research Institute-FRI) देहरादून

उत्तराखंड सन् 1906 में स्थापित इस संस्थान को विश्व भर में वानिकी शोध के लिए जाना जाता है। इसका उद्देश्य पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश एवं हिमालयी भागों तथा गंगा के मैदान भागों में वानिकी शोध एवं इसका प्रचार-प्रसार करना है। कई एकड़ में फैले इस भव्य संस्थान में वन विज्ञान के क्षेत्र में कई नए अनुसंधान कार्य किए जा रहे हैं। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् का मुख्यालय भी यहीं पर है तथा अब यह वानिकी शोध डॉक्टरेट हेतु 1991 में डीम्ड यूनिवर्सिटी भी बन गया है। 

3. काष्ठ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान (Institute of Woods Science and Technology-IWST) बंगलुरू, कर्नाटक 

इसकी स्थापना सन् 1988 में की गई थी। इस संस्थान में ठीक एवं अन्य काष्ठ के उपयोग संग्रहण एवं प्रोसेसिंग सम्बन्धी अनुसंधान कार्य किए जाते हैं। इसके प्रभाव क्षेत्र में कर्नाटक के अतिरिक्त गोआ, दमन एवं दीव के क्षेत्र भी आते हैं। 

4. वन आनुवंशिकी एवं वृक्ष प्रजनन संस्थान (Institute of Forest Genetics and Tree Breeding-IFGTB) कोयम्बटूर, तमिलनाडु 

इसकी स्थापना 1988 में वृक्षों की आनुवंशिकी के सम्बन्ध में अनुसंधान करने, मैंग्रोव वन तथा उष्णकटिबंधीय वन क्षेत्रों से आनुवंशिकी पदार्थ बीज इत्यादि इकट्ठा करने एवं उच्च गुणों वाले पादपों का विकास करने के उद्देश्य से की गई है। इसके क्षेत्र में तमिलनाडु, केरल, लक्षद्वीप तथा पुदुचेरी के कुछ हिस्से आते हैं।

5. उष्ण कटिबंधीय वन अनुसंधान संस्थान (Tropical Forest Research Institute-TFRI) जबलपुर, मध्य प्रदेश

अकाष्ठ वन उत्पाद पर राष्ट्रीय स्तर के अनुसंधान करने एवं उष्णकटिबंधीय वनों के मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं ओडिशा क्षेत्रों में अनुसंधान करने हेतु सन् 1973 में इस संस्थान की स्थापना की गई। भव्य परिसर एवं हरियाली से परिपूर्ण यह शोध संस्थान देश भर में अकाष्ठ वनों पर शोध के लिए प्रसिद्ध है।

6. वर्षा वन अनुसंधान संस्थान (Rain Forest Research Institute-RFRI, जोरहाट, असम 

सन् 1988 में भारत के सुदूर पूर्व में स्थापित इस संस्थान का उद्देश्य उत्तरपूर्वी भारत एवं सिक्किम राज्य में पारिस्थितिकी स्थिरीकरण, कच्छ वन वनस्पति पर अनुसंधान तथा क्षेत्र की विशेष वनस्पति एवं झूम खेती (Shifting cultivation) संरक्षण हेतु किया गया है।

7. हिमालयन वन अनुसंधान संस्थान (Himalayan Forest Research Institute – HFRI) शिमला, हिमाचल

इस संस्थान की स्थापना सन् 1998 में पहाड़ी राज्यों पुनर्जीवन तथा ठंडे रेगिस्तान में वृक्षारोपण, वनों के संरक्षण एवं हिमालयी प्रदेशों में पारिस्थितिकरण के उद्देश्यों हेतु की गई। 1977 में स्थापित इसका पूर्व नाम शीतोष्ण वन अनुसंधान संस्थान था। 1998 में इसे हिमालय वन अनुसंधान संस्थान नाम दिया गया। वन अनुसंधान संस्थानों के अतिरिक्त भारतीय वानिकी अनसंधान एवं शिक्षा परिषद् के अधीन ही विभिन्न केन्द्र (स्थानीय सेंटर) भी कार्यरत् हैं।

(i) वन उत्पादकता संस्थान (Institute of Forest Productivity-IFP) रांची, बिहार

सन् 1993 में स्थापित इस संस्थान का उद्देश्य पश्चिमी बंगाल, दक्षिणी बिहार एवं अंडमान निकोबार में लाख के संवर्धन, कृषि वानिकी, वन उत्पादकता तथा अन्य वानिकी अनुसंधानों की महत्ता को ध्यान में रखकर किया गया।

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(ii) सामाजिक वानिकी तथा पारिबहाली केन्द्र (Centre for Social Forestry and Eco-Rehabilitation-CSFER) इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश

इसे 1992 में गंगा के मैदानी भागों, विन्ध्याचल पर्वत आदि क्षेत्रों में पारिस्थितिकी के स्थिरीकरण सामाजिक एवं फार्म वानिकी को बढ़ावा देने तथा उत्पादकता बढ़ाने के उद्देश्य से की गई।

(iii) वानिकी अनुसंधान तथा मानव संसाधन विकास केन्द्र (Centre for Forestry Research and Human Resource Development – CFRHRD) छिंदवाड़ा, मध्य प्रदेश

वानिकी अनुसंधान तथा मानव संसाधन विकास दोनों को मध्य प्रदेश के कबाइली एवं आदिवासी इलाकों के विकास को ध्यान में रखकर 1995 में इसकी स्थापना की गई। इसका क्षेत्र मध्य भारत है।

(iv) वन अनुसंधान केन्द्र (Forest Research Centre-FRC) हैदराबाद, तेलंगाना

1997 में स्थापित इस संस्थान का पूर्व नाम प्रगतिशील जैव-प्रौद्योगिकी तथा कच्छ वनस्पति वन केन्द्र था। इसका उद्देश्य जैव प्रौद्योगिकी तथा कच्छ वनस्पति एवं आन्ध्र प्रदेश में अनुसंधान की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया गया। इनके अतिरिक्त भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् के संस्थान एवं केन्द्र विभिन्न स्थानीय आवश्यकताओं के मद्देनजर क्षेत्रीय स्टेशन/प्रायोगिक क्षेत्र भी स्थापित करते हैं। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद् द्वारा विश्व बैंक, यू.एन.डी.पी., आई.डी.आर.सी., नाबार्ड, जल संसाधन मंत्रालय, औषधीय पादप बोर्ड एवं अन्य अनेक संस्थाओं से वित्त पोषित योजनाएं शोध के विभिन्न आयामों पर क्रियान्वित की जा रही हैं।

2. गोविन्द वल्लभ पंत हिमालयन पर्यावरण एवं विकास संस्थान (Govind Ballabh Pant Institute of Himalayan Environment and Development), अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड

इसकी स्थापना अगस्त 1988 में उत्तराखण्ड के अल्मोड़ा में की गई थी। यह संस्थान हिमालय के कृषि प्रणालियों एवं विभिन्न पारिस्थितिकी अंचलों का अध्ययन जैव-विविधता संरक्षण अध्ययन, क्षेत्रीय पर्यावरण सम्बन्धी अध्ययन, जलाशय प्रबंध पर अध्ययन बहुपयोगी वृक्ष प्रजातियों का विकास, पादप फसलों के उत्पाद में सुधार जैसे अनेक विषयों पर अनुसंधान एवं विकास कार्य करता है।

3. सलीम अली पक्षी विज्ञान तथा प्राकृतिक इतिहास केन्द्र (Salim Ali Centre for Ornithology and Natural History SACON) कोयम्बटूर

प्रसिद्ध पक्षी विज्ञानी प्रो. सलीम अली के नाम पर स्थापित इस केन्द्र की स्थापना जून 1990 में की गई। इस केन्द्र की स्थापना जैव-विविधता के संरक्षण से जुड़े मसलों एवं पक्षी विज्ञान तथा जीवों के अन्य रूपों के प्राकृतिक विज्ञान के सभी पक्षों से सम्बन्धित अनुसंधान करने के उद्देश्य से की गई थी। इस केन्द्र को आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल एवं तमिलनाडु के चार दक्षिणी राज्यों में वन्य जीवन पर अनुसंधान कार्यों के समन्वय के लिए नोडल एजेन्ट के रूप में स्थापित किया गया है।

4. सी.पी.आर. पर्यावरणीय शिक्षा केन्द्र (C.P.R. Environmental Education Centre – CPREEC) चेन्नई, तमिलनाडु

पर्यावरण के बारे में चेतना और ज्ञान में वृद्धि तथा देश की प्रमुख पर्यावरणीय समस्याओं का समाधान करने के उद्देश्य से 1988 ई. में की गई थी। यह केन्द्र सर सी. पी. रामास्वामी अय्यर फाउण्डेशन, चेन्नई से सम्बद्ध है। यह केन्द्र प्रकृति एवं प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के संवर्धन के प्रयोजन से पर्यावरण तथा पारिस्थितिकी के सभी पक्षों पर जनता विशेषकर गैर-सरकारी संगठनों, शिक्षकों, ग्रामीण कामगारों, महिलाओं, युवकों एवं बच्चों में जागरूकता लाने और अभिरुचि पैदा करने सम्बन्धी अनेक कार्यक्रमों का संचालन करता है।

5. वन शिक्षा निदेशालय (Directorate of Forest Education-DEF) देहरादून

यह निदेशालय देश में राज्य वन सेवा, फोरेस्ट रेंज अधिकारियों के सभी नियमित प्रशिक्षण, समन्वय एवं प्रबन्ध के लिए उत्तरदायी है। यह सेवाकालीन अधिकारियों के लिए समय-समय पर अल्पकालिक विशेष पुनश्चर्या/वानिकी पाठ्यक्रमों एवं कम्प्यूटर के अनुप्रयोग सम्बन्धी अनेक पाठ्यक्रम भी आयोजित करता है। इसके नियंत्रण में चार महाविद्यालय आते हैं –
1. राज्य वन सेवा कॉलेज, देहरादून, उत्तराखण्ड
2. राज्य वन सेवा कॉलेज, कोयम्बटूर, तमिलनाडु
3. राज्य वन सेवा कॉलेज, बर्नीहाट, असम
4. पूर्वी वन रेन्जर्स कॉलेज, कुर्सियोंग, प. बंगाल 

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पूर्व में स्थापित राज्य संचालित वन रेन्जर्स कॉलेज (हल्द्वानी, बालाघाट, राजपीपला आदि वर्तमान में कार्यरत् नहीं हैं) भी इसके अन्तर्गत आते थे।

6. इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी (Indira Gandhi National Forest Academy-IGNFA) देहरादून, उत्तराखण्ड

इसका गठन मई 1987 में भारतीय वन महाविद्यालय का स्तर बढ़ाकर इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय वन अकादमी के नाम से किया गया था। यह अकादमी भारतीय वन सेवा के परिवीक्षकों को सेवाकालीन व्यावसायिक प्रशिक्षण देती है।

7. भारतीय वन प्रबन्ध संस्थान (Indian Institute of Forest Management) भोपाल, मध्य प्रदेश

पर्यावरण मंत्रालय का यह एक स्वायत्तशासी निकाय है। इसकी स्थापना वानिकी प्रबन्ध में व्यावसायिकता लाने के ध्येय से 1982 में की गई है। यहाँ पर वन प्रबन्ध एवं शिक्षा सम्बन्धी पाठ्यक्रम एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। 

8. पर्यावरणीय शिक्षा केन्द्र (Centre for Environment Education-CEE) अहमदाबाद, गुजरात 

नेहरू विकास फाउण्डेशन अहमदाबाद से सम्बन्धित इस केन्द्र की स्थापना 1984 में राष्ट्रव्यापी पर्यावरणीय शिक्षा कार्यक्रमों और गतिविधियों के निर्माण एवं संचालन हेतु की गई थी। 

9. उत्खनन पर्यावरण केन्द्र (Centre for Mining Environment) धनबाद, झारखण्ड

खनन पर्यावरण के क्षेत्र में अनुसंधान एवं प्रशिक्षण के ध्येय से खान विद्यालय, धनबाद में वर्ष 1987 में इस पर्यावरण केन्द्र की स्थापना की गई। जिसे मार्च 1994 में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा केन्द्र के स्टाफ के वेतन एवं अन्य व्यय करने हेतु अपने हाथ में लिया गया है। इस केन्द्र में अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रमों का खर्च पर्यावरण एवं वन मंत्रालय वहन करता है। 

10. राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (National Museum of Natural History-NMNH) नई दिल्ली 

इसकी स्थापना वर्ष 1972 ई में की गई थी। इसका मुख्य कार्य विभाग में ही और विभाग के बाहर अनेक गतिविधियों के द्वारा पर्यावरणीय शिक्षा का संवर्धन एवं लोगों में पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता पैदा करना है। इसके संग्रहालय में अनेक प्रदर्शन दीर्घाएं हैं जिन्हें पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में प्रयुक्त किया जाता है। 

11. भारतीय वन्य जीव संस्थान (Wild life Institute of India-WII) देहरादून

इसके अनुसंधान कार्य में भारत में वन्य जीवन संरक्षण की पारिस्थितिकीय, सामाजिक – आर्थिक एवं प्रबन्ध पक्षों के क्षेत्र सम्मिलित हैं और इसका उद्देश्य वैज्ञानिक जानकारी को एकत्र कर संरक्षण के प्रयासों को बढ़ावा देना है। यह अधिकारियों को प्रशिक्षण एवं विभिन्न संस्थाओं को परामर्श भी देता है।

इनके अतिरिक्त राज्यों में वन अनुसंधान संस्थान यथा राज्य वन अनुसंधान संस्थान, जबलपुर एवं अन्य विभिन्न योजनाओं के तहत पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्यरत् है। सी.एस.ई., डब्ल्यू. डब्ल्यू. एफ. (WWF) एवं कई अन्तराष्ट्रीय स्तर के गैर-सरकारी संगठन एवं स्वयंसेवी संस्थाएं भी पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्यरत हैं तथा भारत को एक प्रदूषण रहित राष्ट्र बनाने को कृत संकल्प है।

 

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