भाग- II (विधि)
Q51. संपत्ति की प्राइवेट प्रतिरक्षा का अधिकार किन परिस्थितियों में मृत्यु कारित करने तक विस्तृत नहीं होता है ?
(a) किसी ऐसे भवन में अग्नि या विस्फोटक पदार्थ द्वारा की गई रिष्टि जो मानव आवास के रूप में उपयोग में लाया जाता है
(b) चोरी, रिष्टि, जो ऐसी परिस्थितियों में की गयी है जिससे युक्तियुक्त रूप से यह आशंका कारित हो कि परिणाम घोर उपहति होगा’
(c) लूट
(d) किसी भी समय गृह-भेदन
Show Answer/Hide
व्याख्या: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 38 (पूर्ववर्ती IPC 103) के अनुसार, संपत्ति की रक्षा में मृत्यु कारित करने का अधिकार केवल विशिष्ट गंभीर अपराधों में मिलता है, जैसे: लूट, रात्रौ गृह-भेदन (Night house-breaking), अग्नि द्वारा रिष्टि, या ऐसी चोरी/रिष्टि जिसमें मृत्यु या घोर उपहति का भय हो। “किसी भी समय” किया गया सामान्य गृह-भेदन इस श्रेणी में नहीं आता जब तक कि वह ‘रात्रौ’ न हो या अन्य गंभीर परिस्थितियों के साथ न हो।
Q52. भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 4 में वर्णित विभिन्न दण्डों पर विचार कीजिए तथा उन्हें सही क्रमानुसार व्यवस्थित कीजिए :
i. संपत्ति की जब्ती
ii. सामुदायिक सेवा
iii. कारावास
iv. जुर्माना
नीचे दिए गए कूटों में से सही उत्तर का चयन कीजिए :
(a) iii, i, iv, ii
(b) ii, iv, iii, i
(c) iii, i, ii, iv
(d) i, ii, iii, iv
Show Answer/Hide
व्याख्या: BNS की धारा 4 में दण्डों का वर्णन इस क्रम में है: 1. मृत्यु, 2. आजीवन कारावास, 3. कारावास (iii), 4. संपत्ति का समपहरण/जब्ती (i), 5. जुर्माना (iv), और 6. सामुदायिक सेवा (ii)। सामुदायिक सेवा भारत के दंड विधान में जोड़ा गया एक नया दण्ड है।
Q53. रमेश, जो कि भारत का नागरिक है एवं प्रयागराज का निवासी है, इंग्लैण्ड में हत्या कारित करता है। बाद में वह जयपुर पाया जाता है । उसे कहाँ पर हत्या के लिए विचारित और दोषसिद्ध किया जा सकेगा ?
(a) इंग्लैण्ड में
(c) जयपुर में
(b) दिल्ली में
(d) प्रयागराज में
Show Answer/Hide
व्याख्या: BNSS की धारा 187 (पूर्ववर्ती CrPC 188) के अनुसार, यदि कोई भारतीय नागरिक भारत के बाहर अपराध करता है, तो उसके विरुद्ध भारत में उस स्थान पर कार्यवाही की जा सकती है जहाँ वह पाया जाए। चूंकि रमेश जयपुर में पाया गया है, इसलिए उसे जयपुर में विचारित किया जा सकता है।
Q54. उ. प्र. पुलिस रेगुलेशन के अंतर्गत हैं :
(a) दो भाग
(b) छ: भाग
(c) चार भाग
(d) आठ भाग
Show Answer/Hide
व्याख्या: उत्तर प्रदेश पुलिस रेगुलेशन कुल 4 भागों में विभाजित है, जिसमें 37 अध्याय और 554 पैरा (Paragraphs) शामिल हैं।
Q55. भा.ना.सु.सं., 2023 की धारा 395 ( 3 ) के अन्तर्गत, जब न्यायालय ऐसा दण्ड अधिरोपित करता है जिसका भाग जुर्माना नहीं है, तब न्यायालय अभियुक्त को प्रतिकर देने का आदेश दे सकेगा जो कि :
(a) दस हजार रुपये से अधिक हो सकेगा
(b) दस हजार रुपये से कम नहीं हो सकेगा
(c) पाँच हजार रुपये से अधिक हो सकेगा
(d) कोई भी राशि जो आवेश में विनिर्दिष्ट की जाए
Show Answer/Hide
व्याख्या: यह धारा न्यायालय को शक्ति देती है कि यदि वह जुर्माना नहीं लगाता है, तब भी वह पीड़ित को उचित प्रतिकर देने का आदेश दे सकता है। इसकी कोई निश्चित ऊपरी सीमा अधिनियम में इस धारा के तहत नहीं बांधी गई है, यह न्यायालय के विवेक पर निर्भर है।
Q56. नीचे दो कथन दिए गए हैं, जिनमें से एक को अभिकथन (A) और दूसरे को कारण (R) कहा गया है :
अभिकथन (A) : भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 101 आपराधिक मानव वध के द्वारा ‘हत्या’ को परिभाषित करती है ।
कारण (R) : धारा 101 में वर्णित आपराधिक मानव वध के केवल चार वर्ग ही हत्या हैं?
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) (A) और (R) दोनों सत्य हैं, परन्तु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(b) (A) ग़लत है, परन्तु (R) सत्य है।
(c) (A) और (R) दोनों सत्य हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(d) (A) सत्य है, परन्तु (R) ग़लत है।
Show Answer/Hide
व्याख्या: BNS की धारा 101 (पूर्ववर्ती IPC 300) स्पष्ट करती है कि आपराधिक मानव वध कब हत्या है। इसमें चार विशिष्ट स्थितियां दी गई हैं, और यदि मामला उन चार वर्गों में आता है, तभी वह ‘हत्या’ माना जाता है।
Q57. भा. सा.अ., 2023 में अभिव्यक्ति ‘न्यायालय’ के अंतर्गत निम्नलिखित में से कौन – सा सम्मिलित नहीं है ?
(a) साक्ष्य लेने के लिए वैध रूप से अधिकृत सभी व्यक्ति
(b) सभी न्यायाधीश
(c) सभी मजिस्ट्रेट
(d) मध्यस्थ
Show Answer/Hide
व्याख्या: BSA की धारा 2 के अनुसार, ‘न्यायालय’ में सभी न्यायाधीश, मजिस्ट्रेट और साक्ष्य लेने के लिए कानूनी रूप से अधिकृत व्यक्ति शामिल हैं, लेकिन इसमें मध्यस्थ शामिल नहीं होते हैं।
Q58. भा.सा.अ., 2023 की निम्नलिखित में से किस धारा में न्यायालय अशिष्ट तथा कलंकात्मक प्रश्नों को निषेध कर सकेगा ?
(a) धारा 152
(b) धारा 150
(c) धारा 149
(d) धारा 154
Show Answer/Hide
व्याख्या: भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 152 (पूर्ववर्ती IEA 151) के तहत न्यायालय ऐसे प्रश्नों पर रोक लगा सकता है जो अशिष्ट या कलंकात्मक हों, भले ही वे प्रश्न गवाह के चरित्र पर प्रभाव डालते हों।
Q59. भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 की धारा 5 निम्नलिखित में से किसको सम्मिलित नहीं करती है ?
(a) प्रभाव को
(b) कारण को
(c) आचरण को
(d) अवसर को
Show Answer/Hide
व्याख्या: BSA की धारा 5 (पूर्ववर्ती IEA 7) ‘प्रसंग’ (Occasion), ‘कारण’ (Cause), और ‘प्रभाव’ (Effect) से संबंधित है। ‘आचरण’ का वर्णन धारा 6 (पूर्ववर्ती IEA 8) में किया गया है।
Q60. सूची I को सूची II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट में से सही उत्तर चुनिए :
सूची I – सूची II
A. अग्रिम जमानत – i. धारा 307, भा.ना.सु.सं., 2023
B. मजिस्ट्रेट द्वारा अपराधों का संज्ञान – ii. धारा 129, भा. ना.सु.सं., 2023
C. न्यायालयों की भाषा – iii. धारा 482, भा.ना.सु.सं., 2023
D. आभ्यासिक अपराधियों सदाचार के लिए प्रतिभूति – iv. धारा 210, भा.ना.सु.सं., 2023
कूट :
(a) A -iii, B-iv, C-i, D-ii
(b) A-i, B-iii, C-iv, D-ii
(c) A-ii, B-iv, C-i, D-iii
(d) A-iv, B-ii, C-iii, D-i
Show Answer/Hide
A. अग्रिम जमानत: iii. धारा 482 (पूर्ववर्ती CrPC 438)
B. मजिस्ट्रेट द्वारा संज्ञान: iv. धारा 210 (पूर्ववर्ती CrPC 190)
C. न्यायालयों की भाषा: i. धारा 307 (पूर्ववर्ती CrPC 272)
D. आभ्यासिक अपराधी प्रतिभूति: ii. धारा 129 (पूर्ववर्ती CrPC 110)
