UKPSC UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) – 20 January 2026

UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) – 20 January 2026

January 20, 2026

उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे। 

Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
20 January, 2026 

Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language

 

Q1. पाल और सेन राजवंशों के साथ कत्यूरी क्षेत्र के संबंध को एटकिंसन किस आधार पर समझाते हैं?
(A) ताम्रपत्रों और अभिलेखों में भाषागत समानता
(B) मुंगेर, भागलपुर एवं कत्यूर घाटी के ताम्रपत्रों में समानता
(C) राजनीतिक संधि के दस्तावेज
(D) व्यापारिक संबंधों के साक्ष्य

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Answer: B
Explanation: एटकिंसन के अनुसार बंगाल के पाल और सेन राजवंशों ने कुमाऊँ को विजित किया होगा, जिसके प्रमाण मुंगेर, भागलपुर (बंगाल में) और कत्यूर घाटी (कुमाऊँ में) के ताम्रपत्रों में समानता से मिलते हैं। इस समानता का अर्थ है कि या तो पाल-सेन सेना ने कुमाऊँ पर आक्रमण कर अपना नियंत्रण स्थापित किया, या फिर अभिलेख शैली, राजभाषा और प्रशासनिक प्रणाली में समानता है। यह सांस्कृतिक और प्रशासनिक प्रभाव बंगाल से गढ़वाल-कुमाऊँ क्षेत्र में पहुंचा होगा। विकल्प A, C और D अन्य आधार सुझाते हैं, परंतु एटकिंसन ने विशेष रूप से ताम्रपत्रों की समानता को आधार माना।

Q2. कार्तिकेयपुर राज्य में गमागमि का क्या कार्य था?
(A) वह राजस्व संग्राहक होता था
(B) वह सेना के प्रमुख होते थे
(C) वह चिठ्ठी ले जाने वाला कर्मचारी था जो डाकिया का काम करता था
(D) वह न्याय के संचालन के लिए नियुक्त अधिकारी था

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Answer: C
Explanation: गमागमि कार्तिकेयपुर राज्य में एक विशिष्ट प्रशासनिक पद था जो संचार व्यवस्था के लिए जिम्मेदार था। ‘गमागमि’ शब्द स्वयं गति या आवाजाही को दर्शाता है। ये कर्मचारी चिठ्ठियों (पत्रों), संदेशों और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुँचाते थे, जो आधुनिक डाकिया के कार्य के समान था। यह प्राचीन भारतीय प्रशासन में एक संगठित संचार प्रणाली का प्रमाण है। विकल्प A, B और D अन्य प्रशासनिक पदों को दर्शाते हैं, परंतु गमागमि विशेष रूप से संचार से जुड़ा था।

Q3. कुमाऊँ क्षेत्र में कार्तिकेयपुर वंश के अवसान के संदर्भ में प्रचलित कहावत का क्या अभिप्राय है?
(A) वंश के शासकों के अत्याचार के कारण जनता उनसे असंतुष्ट थी
(B) वंश के लोकहितकारी कार्यों के कारण उनके अवसान पर सूर्यास्त हो गया और रात्रि हो गई, अर्थात् कल्याणकारी शासन समाप्त हो गया
(C) वंश के विलुप्त होने से प्राकृतिक आपदाएं आईं
(D) वंश के आखिरी शासकों ने स्वेच्छा से शासन छोड़ दिया

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Answer: B
Explanation: कुमाऊँ में प्रचलित कहावत ‘कार्तिकेयपुर वंश के अवसान पर सूर्यास्त हो गया और रात्रि हो गयी’ यह प्रदर्शित करती है कि कार्तिकेयपुर राजाओं के लोकहितकारी कार्यों और न्यायप्रिय शासन के कारण उन्हें जनता की दृष्टि में एक दिव्य ज्योति के समान माना जाता था। उनके अवसान का अर्थ था कल्याणकारी शासन की समाप्ति और अंधकार (अव्यवस्था) का आगमन। यह रूपक भाषा वंश की लोकप्रियता और उनके शासन की सकारात्मक विरासत को रेखांकित करती है। विकल्प A गलत है क्योंकि कहावत उनके लोकहितकारी कार्यों की प्रशंसा दर्शाती है। विकल्प C और D कहावत के प्रतीकात्मक अर्थ को समझते नहीं हैं।

Q4. कत्यूरी कालीन प्रशासन में भूमि मापन अधिकारी को किस नाम से जाना जाता था?
(A) भूमिकर संग्राहक
(B) प्रमवातार
(C) भूमि अधीक्षक
(D) भूमि राजस्व अधिकारी

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Answer: B
Explanation: कत्यूरी काल में भूमि मापन अधिकारी को प्रमवातार कहा जाता था। ‘प्रमा’ का अर्थ माप है और ‘वातार’ संभवतः विशेषज्ञ या कर्मचारी को दर्शाता है। प्रमवातार का मुख्य कार्य भूमि का सर्वेक्षण, मापन और रिकॉर्ड रखना था, जो राजस्व निर्धारण और कर संग्रह के लिए आवश्यक था। यह पद प्रशासनिक दक्षता और भूमि प्रबंधन की व्यवस्था को दर्शाता है। विकल्प A, C और D प्रशासनिक पद हैं, परंतु वे ‘प्रमवातार’ नाम से ज्ञात नहीं थे।

Q5. कत्यूरी कालीन मंदिरों के वर्गीकरण के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(A) सभी कत्यूरी मंदिर एक ही प्रकार के थे
(B) मंदिर तीन प्रकार के थे – छत्रयुक्त, शिखरयुक्त और गुंबदयुक्त
(C) मंदिर दो प्रकार के थे – छत्रयुक्त और शिखरयुक्त, जिनमें छत्रयुक्त को पैगोडा प्रकार कहा जाता था
(D) मंदिर केवल शिखरयुक्त प्रकार के ही बनाए जाते थे

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Answer: C
Explanation: कत्यूरी कालीन मंदिर दो प्रकार के होते थे – छत्रयुक्त (जिसे पैगोडा प्रकार कहा जाता था) और शिखरयुक्त। छत्रयुक्त मंदिर में मंदिर की छत पर छत्र या छाता की आकृति होती थी, जबकि शिखरयुक्त मंदिर में उत्तर भारतीय शैली का पिरामिडनुमा शिखर होता था। पैगोडा पद्धति पूर्वी एशिया से प्रभावित थी और बौद्ध वास्तुकला से संबंधित थी। यह द्विविध वर्गीकरण कत्यूरी स्थापत्य शैली की विविधता और विभिन्न प्रभावों का संकेत देता है। विकल्प A गलत है क्योंकि मंदिर विभिन्न प्रकार के थे। विकल्प B गलत है क्योंकि केवल दो प्रकार थे, तीन नहीं। विकल्प D भी गलत है क्योंकि छत्रयुक्त प्रकार भी प्रचलित थे।

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