उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
13 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. कार्तिकेयपुर राज्य के द्वितीय परिवार के संस्थापक निम्बर के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. वह शैव धर्म का अनुयायी था
II. उसकी रानी का नाम नाथू देवी था
III. उसने जागेश्वर मंदिर में विमानों का निर्माण करवाया
IV. उसने बैजनाथ मंदिर का निर्माण करवाया
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
(A) केवल I और II
(B) केवल I, II और III
(C) केवल II, III और IV
(D) I, II, III और IV सभी
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Explanation: कथन I सही है क्योंकि निम्बर शैव धर्म मानने वाला शासक था, जो उसकी धार्मिक आस्था और शिव की उपासना के प्रति समर्पण को दर्शाता है। कथन II सही है क्योंकि निम्बर की रानी का नाम नाथू देवी था। कथन III सही है क्योंकि जागेश्वर मंदिर में विमानों (मंदिर के शिखर भाग) का निर्माण निम्बरदेव ने करवाया था, जो उनकी वास्तुकला के प्रति रुचि और शैव परंपरा के संरक्षण को प्रदर्शित करता है। कथन IV गलत है क्योंकि बैजनाथ मंदिर का निर्माण निम्बर ने नहीं बल्कि ललितसूरदेव के पुत्र भूदेव ने करवाया था। निम्बर द्वितीय परिवार का संस्थापक था जबकि भूदेव उसी परिवार की बाद की पीढ़ी का शासक था। निम्बरदेव प्रथम कत्यूरी राजा थे जिन्होंने वास्तुकला का प्रारंभ किया और जागेश्वर को कुमाऊँ के अति पवित्र धाम के रूप में चयनित किया।
Q2. निम्बरदेव के वास्तुकला और धार्मिक योगदान के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है?
(A) वह केवल सैन्य विजयों के लिए प्रसिद्ध था
(B) उसने वास्तुकला का प्रारंभ किया और जागेश्वर को कुमाऊँ के धाम के रूप में स्थापित किया
(C) उसने बौद्ध धर्म का प्रचार किया
(D) उसने केवल राजनीतिक सुधार किए
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Explanation: निम्बरदेव कार्तिकेयपुर राजवंश के प्रथम शासक थे जिन्होंने वास्तुकला का प्रारंभ किया, जो कत्यूरी स्थापत्य परंपरा की शुरुआत का प्रतीक है। उन्होंने जागेश्वर को कुमाऊँ के अति पवित्र क्षेत्र अर्थात् धाम के रूप में चयनित किया और वहाँ मंदिर विमानों का निर्माण करवाया। यह दोहरा योगदान – वास्तुकला की शुरुआत और धार्मिक केंद्र की स्थापना – कार्तिकेयपुर वंश की सांस्कृतिक विरासत में अत्यंत महत्वपूर्ण है। विकल्प A अपूर्ण है क्योंकि यद्यपि एटकिंसन ने उनकी वीरता का उल्लेख किया है, परंतु उनका वास्तुकला और धार्मिक योगदान अधिक महत्वपूर्ण है। विकल्प C गलत है क्योंकि निम्बर शैव धर्म के अनुयायी थे, न कि बौद्ध धर्म के। विकल्प D अपूर्ण है क्योंकि यह उनके सांस्कृतिक और धार्मिक योगदान को नजरअंदाज करता है।
Q3. एटकिंसन ने किस कत्यूरी शासक की वीरता के बारे में लिखा कि “ये अपने शत्रुओं को इस प्रकार पराजित करते हैं जिस प्रकार सूर्य के आगमन से कुहासा पिघल जाता है”?
(A) बसन्तदेव
(B) निम्बरदेव
(C) ललितसूरदेव
(D) भूदेव
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Explanation: एटकिंसन ने निम्बरदेव की वीरता के लिए यह काव्यात्मक वर्णन किया है, जिसमें उनकी सैन्य शक्ति की तुलना सूर्य से की गई है जो कुहासे को पिघला देता है। यह रूपक निम्बरदेव की शत्रुओं पर निर्णायक विजय और अपराजेय शक्ति को दर्शाता है। सूर्य की तरह, निम्बर का प्रभाव इतना प्रबल था कि शत्रु उनके सामने टिक नहीं सकते थे, जैसे सूर्य के प्रकाश में कुहासा स्वतः विलीन हो जाता है। विकल्प A गलत है क्योंकि यह वर्णन बसन्तदेव के लिए नहीं है। विकल्प C गलत है क्योंकि यद्यपि ललितसूरदेव सबसे प्रतापी शासक थे, परंतु यह विशेष वर्णन निम्बर के लिए है। विकल्प D भी गलत है क्योंकि यह भूदेव के बारे में नहीं है।
Q4. इष्टगण देव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों का मूल्यांकन कीजिए:
I. वह निम्बर का पुत्र था
II. उसकी पत्नी का नाम वेगादेवी थी
III. वह कार्तिकेयपुर राजवंश का प्रथम शासक था जिसने समस्त उत्तराखण्ड को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया
IV. उसने जागेश्वर में नवदुर्गामहिषामर्दिनी, लकुलीश तथा नटराज के मंदिर बनवाये
सही कथनों का चयन कीजिए:
(A) केवल I और II
(B) केवल I, II और III
(C) केवल II, III और IV
(D) I, II, III और IV सभी
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Explanation: सभी चार कथन पूर्णतः सही हैं। कथन I सही है क्योंकि निम्बर के बाद उसका पुत्र इष्टगण देव शासक बना, जो पितृ-पुत्र उत्तराधिकार को दर्शाता है। कथन II सही है क्योंकि इष्टगण देव की पत्नी का नाम वेगादेवी था। कथन III अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि इष्टगण देव कार्तिकेयपुर राजवंश का प्रथम शासक था जिसने समस्त उत्तराखण्ड को एक सूत्र में बांधने का प्रयास किया, जो राजनीतिक एकीकरण की उनकी दूरदर्शी नीति को दर्शाता है। कथन IV सही है क्योंकि इष्टगण ने जागेश्वर में नवदुर्गामहिषामर्दिनी (दुर्गा का मंदिर), लकुलीश (शैव संप्रदाय के संस्थापक) तथा नटराज (नृत्य करते शिव) के मंदिर बनवाये, जो शैव परंपरा के प्रति उनकी गहन आस्था को प्रदर्शित करता है। इष्टगण भी अपने पिता निम्बर की तरह शैव था।
Q5. ललितसूरदेव के शासनकाल और उपलब्धियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. वह लगभग 832 ई० में गद्दी पर बैठा
II. वह कत्यूरी वंश का सबसे प्रतापी और शौर्यवान शासक था
III. उसके शासनकाल के 21वें व 22वें वर्ष के दो ताम्रपत्र प्राप्त हुए
IV. सर्वाधिक ताम्रपत्र उसी के प्राप्त हुए
उपर्युक्त में से कितने कथन सही हैं?
(A) केवल दो
(B) केवल तीन
(C) सभी चार
(D) केवल एक
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Explanation: सभी चार कथन सही हैं और ललितसूरदेव की महानता को प्रमाणित करते हैं। कथन I सही है क्योंकि ललितसूरदेव लगभग 832 ई० में गद्दी पर बैठा, जो उसके शासनकाल को कालक्रम में स्थापित करता है। कथन II सही है क्योंकि वह कत्यूरी वंश का सबसे प्रतापी एवं शौर्यवान शासक था, जिसकी प्रतिष्ठा सभी कत्यूरी शासकों में सर्वोच्च मानी जाती है। कथन III सही है क्योंकि उसके शासनकाल के 21वें व 22वें वर्ष के दो ताम्रपत्र प्राप्त हुए हैं, जो उसके दीर्घकालीन और स्थिर शासन का प्रमाण है। कथन IV सही है क्योंकि सर्वाधिक ताम्रपत्र ललितसूरदेव के ही प्राप्त हुए हैं, जो उसकी प्रशासनिक सक्रियता, दान परंपरा और अभिलेखीय महत्व को दर्शाता है। ये सभी तथ्य मिलकर ललितसूरदेव को कार्तिकेयपुर वंश का सर्वश्रेष्ठ शासक सिद्ध करते हैं।
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