उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
09 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. कत्यूरी राजवंश के भौगोलिक विस्तार और प्रभाव क्षेत्र के संदर्भ में निम्नलिखित स्थानों पर विचार कीजिए:
I. बागेश्वर
II. पांडुकेश्वर
III. कंडारा
IV. बैजनाथ
V. चंपावत
उपर्युक्त में से कितने स्थानों से कत्यूरी अभिलेख प्राप्त हुए हैं?
(A) केवल तीन
(B) केवल चार
(C) सभी पाँच
(D) केवल दो
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Explanation: कार्तिकेयपुर वंश से संबंधित ताम्रपत्र और शिलालेख सभी पाँच स्थानों – बागेश्वर, पांडुकेश्वर, कंडारा, बैजनाथ और चंपावत से प्राप्त हुए हैं। यह व्यापक भौगोलिक विस्तार कत्यूरी शासन के प्रभाव क्षेत्र और प्रशासनिक पहुंच को दर्शाता है। बागेश्वर से त्रिभुवनराज का शिलालेख और भूदेव का शिलालेख प्राप्त हुआ। पांडुकेश्वर से ललितसूरदेव के ताम्रपत्र मिले। कंडारा से ललितशूरदेव का दानपत्र प्राप्त हुआ। बैजनाथ के पास दूसरी राजधानी थी जहाँ से अभिलेख मिले। चंपावत से भी अभिलेख प्राप्त हुए हैं। यह बहु-स्थानीय अभिलेख वितरण राजवंश की व्यापक शासन व्यवस्था का प्रमाण है।
Q2. निम्नलिखित कथनों का परीक्षण कीजिए और सही कथन की पहचान कीजिए:
I. कार्तिकेयपुर राजवंश के प्रथम तीन परिवारों में 15 नरेश थे
II. यशवंत सिंह कठौच के अनुसार कुल 15 नरेशों ने शासन किया
III. सामान्यतः 14 नरेशों की संख्या मानी जाती है
IV. सभी इतिहासकार 15 नरेशों पर सहमत हैं
सही कथनों का चयन कीजिए:
(A) केवल I और IV
(B) केवल II और III
(C) केवल I, II और III
(D) सभी कथन सही हैं
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Explanation: कथन I गलत है क्योंकि सामान्य मान्यता के अनुसार प्रथम तीन परिवारों के 14 नरेशों ने शासन किया, न कि 15। कथन II सही है क्योंकि यशवंत सिंह कठौच तृतीय परिवार के संस्थापक सलोड़ादित्य को पृथक रूप से मानते हैं, जिनके हिसाब से कुल 15 नरेशों ने शासन किया था। कथन III सही है क्योंकि मुख्यधारा की ऐतिहासिक मान्यता 14 नरेशों की है। कथन IV गलत है क्योंकि स्पष्ट रूप से मतभेद है – कुछ इतिहासकार 14 नरेश मानते हैं तो यशवंत सिंह कठौच 15 नरेश मानते हैं। यह विवाद सलोड़ादित्य को पृथक संस्थापक मानने या पूर्व परंपरा का हिस्सा मानने पर आधारित है।
Q3. गढ़वाल क्षेत्र में कत्यूरी शासन के संस्थापन के संदर्भ में निम्नलिखित का सही कालक्रम क्या है?
I. जोशीमठ में प्रथम सत्ता केंद्र की स्थापना
II. जोशीमठ के दक्षिण में कार्तिकेयपुर में प्रारंभिक राजधानी
III. बैजनाथ-कार्तिकेयपुर में दूसरी राजधानी
IV. ढिकुली में शीतकालीन राजधानी
सही क्रम है:
(A) I – II – III – IV
(B) II – I – III – IV
(C) I – III – II – IV
(D) II – III – I – IV
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Explanation: सही कालक्रम I-II-III-IV है। सबसे पहले जोशीमठ में कत्यूरी शासकों का गढ़वाल में प्रथम मान्यता प्राप्त सत्ता केंद्र स्थापित हुआ (I)। इसके बाद जोशीमठ के दक्षिण में कार्तिकेयपुर नामक स्थान पर प्रारंभिक राजधानी की स्थापना हुई (II)। फिर शासन विस्तार के साथ अल्मोड़ा की कत्यूर घाटी में बैजनाथ के पास बैद्यनाथ-कार्तिकेयपुर में दूसरी राजधानी स्थापित की गई (III)। अंत में 7वीं सदी में मौसमी आवश्यकताओं के अनुसार ढिकुली शीतकालीन राजधानी के रूप में विकसित हुई (IV)। यह क्रम राजवंश के भौगोलिक विस्तार और प्रशासनिक परिपक्वता को दर्शाता है।
Q4. कत्यूरी अभिलेखों में प्रयुक्त लिपि के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक उपयुक्त है?
(A) सभी 9 अभिलेखों में ब्राह्मी लिपि का प्रयोग हुआ है
(B) सभी 9 अभिलेखों में कुटिला लिपि का प्रयोग हुआ है
(C) कुछ अभिलेखों में कुटिला और कुछ में देवनागरी लिपि का प्रयोग हुआ है
(D) सभी अभिलेखों में संस्कृत भाषा थी परंतु लिपि अज्ञात है
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Explanation: कार्तिकेयपुर वंश के अभी तक प्राप्त सभी 9 अभिलेखों में कुटिला लिपि का प्रयोग हुआ है। कुटिला लिपि मध्यकालीन भारत में 7वीं से 10वीं शताब्दी के बीच उत्तर भारत और हिमालयी क्षेत्रों में प्रचलित थी। विकल्प A गलत है क्योंकि ब्राह्मी लिपि का नहीं बल्कि कुटिला लिपि का प्रयोग हुआ। विकल्प C गलत है क्योंकि कोई मिश्रित लिपि प्रयोग नहीं हुआ, सभी में केवल कुटिला लिपि है। विकल्प D भी गलत है क्योंकि लिपि ज्ञात है और वह कुटिला है। यह लिपि उस कालखंड की सांस्कृतिक और लेखन परंपरा का महत्वपूर्ण साक्ष्य है।
Q5. निम्नलिखित विद्वानों और उनके योगदान का सही सुमेलन पहचानिए:
I. एटकिंसन – कत्यूरी शब्द का प्रथम प्रयोग और कश्मीर से संबंध
II. कनिंघम – लखनपुर की पहचान
III. बद्रीदत्त पांडे – कबीरपुर नामकरण
IV. यशवंत सिंह कठौच – 15 नरेशों की गणना
सही सुमेलित कथनों की संख्या:
(A) केवल दो
(B) केवल तीन
(C) सभी चार
(D) केवल एक
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Explanation: सभी चार सुमेलन पूर्णतः सही हैं। कथन I सही है क्योंकि एटकिंसन ने सर्वप्रथम कार्तिकेयपुर राजाओं के लिए कत्यूरी शब्द का प्रयोग किया और उन्हें कश्मीर के कटूरी या कटौर राजपूत का वंशज माना। कथन II सही है क्योंकि कनिंघम के अनुसार कत्यूरी राजाओं की राजधानी लखनपुर रामगंगा तट पर स्थित थी। कथन III सही है क्योंकि बद्रीदत्त पांडे ने कार्तिकेयपुर का प्राचीन नाम कबीरपुर बताया। कथन IV सही है क्योंकि यशवंत सिंह कठौच ने सलोड़ादित्य को पृथक संस्थापक मानते हुए कुल 15 नरेशों की गणना प्रस्तुत की। ये सभी योगदान कार्तिकेयपुर राजवंश के इतिहास लेखन में महत्वपूर्ण हैं।
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