उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
07 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. कार्तिकेयपुर राजवंश के शासनकाल की अवधि के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सर्वाधिक सटीक है?
(A) वंश के प्रथम दो परिवारों ने लगभग 300 वर्षों तक शासन किया
(B) वंश के प्रथम तीन परिवारों के 14 नरेशों ने लगभग 300 वर्षों तक शासन किया
(C) वंश के सभी 15 नरेशों ने मिलकर 300 वर्षों से अधिक समय तक शासन किया
(D) केवल सलोड़ादित्य वंश ने 300 वर्षों तक शासन किया
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Explanation: कार्तिकेयपुर राजवंश मध्य हिमालय का प्रथम ऐतिहासिक राजवंश माना जाता है जिसके प्रथम तीन परिवारों – बसंतदेव राजवंश, निम्बरदेव राजवंश और सलोड़ादित्य राजवंश – के कुल 14 नरेशों ने प्रायः 300 वर्षों तक शासन किया। यशवंत सिंह कठौच के अनुसार यदि सलोड़ादित्य को पृथक संस्थापक माना जाए तो कुल 15 नरेशों की गणना होती है। विकल्प A गलत है क्योंकि यह केवल दो परिवारों का उल्लेख करता है जबकि तीन परिवार थे। विकल्प C भ्रामक है क्योंकि 15 नरेशों की संख्या एक विशेष दृष्टिकोण पर आधारित है। विकल्प D पूर्णतः गलत है क्योंकि सलोड़ादित्य वंश केवल तीसरा परिवार था, संपूर्ण शासनकाल नहीं।
Q2. निम्नलिखित में से कौन सा युग्म सही सुमेलित नहीं है?
(A) प्रथम परिवार – बसंतदेव राजवंश
(B) द्वितीय परिवार – निम्बरदेव राजवंश
(C) तृतीय परिवार – सलोड़ादित्य राजवंश
(D) चतुर्थ परिवार – ललितशूरदेव राजवंश
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Explanation: कार्तिकेयपुर राजवंश को केवल तीन परिवारों में विभाजित किया गया था – प्रथम परिवार बसंतदेव राजवंश, द्वितीय परिवार निम्बरदेव राजवंश और तृतीय परिवार सलोड़ादित्य राजवंश। कोई चतुर्थ परिवार नहीं था, अतः विकल्प D गलत है। ललितशूरदेव एक महत्वपूर्ण शासक थे जिनके अभिलेख पांडुकेश्वर और कंडारा से प्राप्त हुए हैं, परंतु वे किसी पृथक परिवार के संस्थापक नहीं थे। विकल्प A, B और C सभी सही सुमेलित हैं और वंश की त्रिपक्षीय संरचना को दर्शाते हैं।
Q3. कार्तिकेयपुर राजवंश की राजधानियों के क्रमिक विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. प्रारंभिक राजधानी जोशीमठ के दक्षिण में कार्तिकेयपुर नामक स्थान पर थी
II. दूसरी राजधानी अल्मोड़ा की कत्यूर घाटी में बैजनाथ के समीप स्थापित की गई
III. शीतकालीन राजधानी के रूप में ढिकुली का उपयोग किया जाता था
IV. लखनपुर रामगंगा तट पर एक महत्वपूर्ण राजधानी केंद्र था
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
(A) केवल I और II
(B) केवल I, II और III
(C) केवल II, III और IV
(D) I, II, III और IV सभी
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Explanation: सभी चार कथन सही हैं और कत्यूरी शासकों की बहुकेंद्रीय राजधानी व्यवस्था को प्रदर्शित करते हैं। कथन I सही है क्योंकि प्रारंभिक राजधानी जोशीमठ के दक्षिण में कार्तिकेयपुर नामक स्थान पर थी। कथन II सही है क्योंकि दूसरी राजधानी बैद्यनाथ-कार्तिकेयपुर में बैजनाथ के पास स्थापित की गई थी। कथन III सही है क्योंकि 7वीं सदी में ढिकुली (गानेवाला भड़) शीतकालीन राजधानी थी। कथन IV भी सही है क्योंकि कनिंघम के अनुसार लखनपुर रामगंगा तट पर राजधानी थी, जिसका उल्लेख ह्वेनसांग ने भी किया। यह बहुकेंद्रीयता भौगोलिक, मौसमी और प्रशासनिक आवश्यकताओं को दर्शाती है।
Q4. कत्यूरी शासकों से संबंधित अभिलेखों के विषय में निम्नलिखित कथनों का मूल्यांकन कीजिए:
I. कुल 9 अभिलेख प्राप्त हुए हैं जिनमें कुटिला लिपि का प्रयोग हुआ है
II. त्रिभुवनराज के शिलालेख से प्रथम नरेश बसंतदेव का नाम ज्ञात होता है
III. ललितशूरदेव के तीन दानपत्र प्राप्त हुए हैं
IV. सभी अभिलेख केवल बागेश्वर से प्राप्त हुए हैं
सही कथनों का चयन कीजिए:
(A) केवल I और II
(B) केवल I, II और III
(C) केवल II और III
(D) I, II, III और IV सभी
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Explanation: कथन I सही है क्योंकि कार्तिकेयपुर वंश के अभी तक 9 अभिलेख प्राप्त हुए हैं जिनमें कुटिला लिपि का प्रयोग हुआ है। कथन II सही है क्योंकि बागेश्वर से प्राप्त त्रिभुवनराज के शिलालेख से प्रथम कत्यूरी नरेश बसंतदेव का नाम ज्ञात होता है। कथन III सही है क्योंकि ललितशूरदेव के पांडुकेश्वर से दो दानपत्र और कंडारा से एक दानपत्र प्राप्त हुआ है, कुल मिलाकर तीन। कथन IV गलत है क्योंकि ताम्रपत्र और शिलालेख बागेश्वर, पांडुकेश्वर, कंडारा, बैजनाथ और चंपावत – कुल पांच विभिन्न स्थानों से प्राप्त हुए हैं, न कि केवल बागेश्वर से।
Q5. कार्तिकेयपुर वंश के प्रमुख अभिलेखों और उनसे संबंधित शासकों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
I. पांडुकेश्वर ताम्रपत्र – ललितसूरदेव
II. बागेश्वर शिलालेख – भूदेव
III. बालेश्वर मंदिर ताम्रपत्र – देशटदेव
IV. कंडारा दानपत्र – त्रिभुवनराज
कौन से युग्म सही सुमेलित हैं?
(A) केवल I और II
(B) केवल I, II और III
(C) केवल II, III और IV
(D) I, II, III और IV सभी
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Explanation: युग्म I सही है क्योंकि ललितसूरदेव (ललितशूरदेव) का पांडुकेश्वर ताम्रपत्र प्रमुख अभिलेखों में शामिल है। युग्म II सही है क्योंकि भूदेव का बागेश्वर शिलालेख प्रमुख अभिलेखों में गिना जाता है। युग्म III सही है क्योंकि देशटदेव का बालेश्वर मंदिर का ताम्रपत्र शिलालेख प्रमुख है। युग्म IV गलत है क्योंकि कंडारा से प्राप्त दानपत्र ललितशूरदेव का था, न कि त्रिभुवनराज का। त्रिभुवनराज का शिलालेख बागेश्वर से प्राप्त हुआ था जिससे प्रथम नरेश बसंतदेव का नाम ज्ञात होता है। अतः केवल पहले तीन युग्म सही हैं।
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