उत्तराखण्ड लोक सेवा आयोग (Uttarakhand Public Service Commission) द्वारा आयोजित उत्तराखंड अपर निजी मुख्य परीक्षा – 2024 का आयोजन 14 मार्च 2026 में किया गया था। उत्तराखंड अपर निजी मुख्य परीक्षा – 2024 के प्रश्नपत्र की उत्तर कुंजी (Answer Key) यहाँ पर उपलब्ध है –
Uttarakhand Public Service Commission Conduct the UKPSC APS (Additional Private Secretary) Mains Exam 2024. UKPSC APS (Additional Private Secretary) Mains Exam 2024 held on 14 March 2026. UKPSC APS (Additional Private Secretary) Mains Exam 2024 with Answer Key Available here.
| Post Name | APS (Additional Private Secretary) Mains Exam 2024 |
| Exam Date | 14 March, 2026 |
| Total Questions | 8 |
UKPSC APS (Additional Private Secretary) Mains Exam 2024
Paper II (Essays and Drafting) (Answer)
प्रश्न-पत्र II निबन्ध एवं आलेखन
1. (अ) निम्नलिखित गद्यांश को ध्यानपूर्वक पढ़िए और उसके आधार पर नीचे दिए गए प्रश्नों के स्पष्ट भाषा में सही और संक्षिप्त उत्तर दीजिए:
“मित्र का कर्तव्य इस प्रकार बताया गया है- “उच्च और महाकार्यों में इस प्रकार सहायता देना, मन बढ़ाना और साहस दिलाना कि तुम अपने निज की सामर्थ्य से बाहर काम कर जाओ।” यह कर्तव्य उसी से पूरा होगा जो दृढचित्त और सत्यसंकल्प का हो। इससे हमें ऐसे ही मित्रों की खोज में रहना चाहिए जिनमें हमसे अधिक आत्मबल हो। हमें उनका पल्ला इसी तरह पकड़ना चाहिए जिस – तरह सुग्रीव ने राम का पल्ला पकड़ा था। मित्र हों तो प्रतिष्ठित और शुद्ध हृदय के हों, मृदुल और पुरुषार्थी हों, शिष्ट और सत्यनिष्ठ हों, जिसमें हम अपने को उनके भरोसे पर छोड़ सकें और यह विश्वास कर सकें कि उनसे किसी प्रकार का धोखा न होगा।”
| (i) उपर्युक्त गद्यांश का उचित शीर्षक दीजिए। | अंक : 02 |
उत्तर: “सच्ची मित्रता” अथवा “मित्र के कर्तव्य और स्वरूप”।
| (ii) सच्चे मित्र का क्या कर्तव्य है ? | अंक : 04 |
उत्तर: गद्यांश के अनुसार, सच्चे मित्र का कर्तव्य यह है कि वह उच्च और महान कार्यों में इस प्रकार सहायता दे कि व्यक्ति का मनोबल और साहस बढ़ जाए। वह अपने मित्र को इस तरह प्रेरित करे कि वह अपनी स्वयं की सामर्थ्य से भी बड़े और कठिन कार्य सरलता से पूर्ण कर सके।
| (iii) मित्र कैसे होने चाहिए ? | अंक : 04 |
उत्तर: लेखक के अनुसार मित्र निम्नलिखित गुणों से युक्त होने चाहिए:
- वे दृढ़चित्त और सत्यसंकल्प वाले हों।
- उनमें हमसे अधिक आत्मबल हो।
- वे प्रतिष्ठित, शुद्ध हृदय, मृदुल, पुरुषार्थी, शिष्ट और सत्यनिष्ठ हों।
- वे ऐसे हों जिन पर हम पूर्णतः विश्वास कर सकें और जिनसे किसी प्रकार के धोखे की आशंका न हो।
| (ब) निम्नलिखित अनुच्छेद का हिन्दी में अनुवाद कीजिए: | अंक : 10 |
Gandhiji was asked by one of his visitors what was the fundamental motive in the work which he had done for India. Was it social, or political, or religious ? His activities have spread so widely into all three spheres, and have exercised so deep an influence both on the fundamental structure of Hindu Society and on the political status of India that such question is natural.
Gandhiji replied: “My motive has been purely religious… I could not be leading a religious life unless I identified myself with the whole of mankind; and this I could not do unless I took part in politics. I do not know any religion apart from human activity.
अनुच्छेद का हिन्दी अनुवाद:
गांधीजी के एक आगंतुक ने उनसे पूछा कि भारत के लिए उन्होंने जो कार्य किए हैं, उनके पीछे उद्देश्य क्या था। क्या वह सामाजिक था, राजनीतिक था, या धार्मिक? उनकी गतिविधियाँ इन तीनों क्षेत्रों में इतनी व्यापक रूप से फैली हुई थीं, और उन्होंने हिंदू समाज की मौलिक संरचना तथा भारत की राजनीतिक स्थिति, दोनों पर इतना गहरा प्रभाव डाला था कि ऐसा प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
गांधीजी ने उत्तर दिया: “मेरा उद्देश्य विशुद्ध रूप से धार्मिक रहा है… मैं तब तक एक धार्मिक जीवन नहीं जी सकता था जब तक कि मैं स्वयं को संपूर्ण मानवता के साथ एकाकार न कर लूँ; और मैं ऐसा तब तक नहीं कर सकता था जब तक कि मैं राजनीति में भाग न लूँ। मैं मानवीय गतिविधि से अलग किसी धर्म को नहीं जानता।”
