शान्त रस (Shant Ras)

शान्त रस (Shant Ras)

May 13, 2023
शान्त रस (Shant Ras) अनित्य और असार तथा परमात्मा के वास्तविक रूप के ज्ञान से हृदय को शान्ति मिलती है और विषयों से वैराग्य हो जाता है। यह अभिव्यक्त होकर
वीभत्स रस (Vibhats Ras)

वीभत्स रस (Vibhats Ras)

May 13, 2023
वीभत्स रस (Vibhats Ras) जुगुप्सा नामक स्थाई भाव जब विभवादि भावों के द्वारा परिपक्वास्था में होता तब वह वीभत्स रस कहलाता हैं। इसकी स्थिति दु:खात्मक रसों में मानी जाती है।
भयानक रस (Bhayanak Ras)

भयानक रस (Bhayanak Ras)

May 13, 2023
भयानक रस (Bhayanak Ras) जब किसी भयानक या अनिष्टकारी व्यक्ति या वस्तु को देखने या उससे सम्बंधित वर्णन करने या किसी अनिष्टकारी घटना का स्मरण करने से मन में जो
हास्य रस (Hasya Ras)

हास्य रस (Hasya Ras)

May 11, 2023
हास्य रस (Hasya Ras) किसी पदार्थ या व्यक्ति की असाधारण आकृति, वेशभूषा, चेष्टा आदि को देखकर हृदय में जो विनोद का भाव जाग्रत होता है, उसे हास कहा जाता है।
वीर रस (Veer Ras)

वीर रस (Veer Ras)

May 11, 2023
वीर रस (Veer Ras) उत्साह नामक स्थाई भाव जब विभवादि के संयोग से परिपक्व होकर रस रूप में परिणत होता है, तब उसे वीर रस कहा जाता है।  वीर रस
Raudra Ras

रौद्र रस (Raudra Ras)

May 11, 2023
रौद्र रस (Raudra Ras) किसी व्यक्ति द्वारा क्रोध में किए गए अपमान आदि से उत्पन्न भाव की परिपक्वास्था को रौद्र रस कहा जाता है। धार्मिक महत्व के आधार पर इसका
Adbhut Ras

अद्भुत रस (Adbhut Ras)

May 10, 2023
अद्भुत रस (Adbhut Ras) किसी आश्चर्यजनक वर्णन से उत्पन्न विस्मय भाव की परिपक्वावस्था को अद्भुत रस कहा जाता है। भरतमुनि ने वीर रस से अद्भुत की उत्पत्ति बताई है तथा
Karuna Ras

करुण रस (Karuna Ras)

May 10, 2023
करुण रस (Karuna Ras) किसी प्रिय व्यक्ति के चिर विरह या मरण से उत्पन्न होने वाले शोक आदि के भाव की परिपक्वास्था को करुण रस कहा जाता है। करुण रस
Shringar Ras

श्रृंगार रस (Shringar Ras)

May 10, 2023
श्रृंगार रस (Shringar Ras) नायक-नायिका के सौन्दर्य एवं प्रेम संबंधी वर्णन की सर्वोच्च (परिपक्व) अवस्था को श्रृंगार रस कहा जाता है। श्रृंगार रस को रसों का राजा/रसराज कहा जाता है। श्रृंगार
Ras in Hindi

रस – हिन्दी व्याकरण

May 10, 2023
“विभावानुभावव्यभिचारि संयोगाद्रसनिष्पत्तिः।” अर्थात् विभाव, अनुभाव एवं व्यभिचारी भावों के संयोग से रस की निष्पत्ति होती है। यह रस-दशा ही हृदय का स्थाई भाव है। रस का शाब्दिक अर्थ ‘आनन्द’ है।
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