उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
31 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. कार्तिकेयपुर राज्य की भूमि माप प्रणाली और सरभंग (तीरदाज) के पद के साथ, राज्य की समग्र प्रशासनिक दक्षता के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा निष्कर्ष सबसे उपयुक्त है?
(A) राज्य केवल सैन्य शक्ति पर निर्भर था, आर्थिक प्रबंधन में कमजोर था
(B) राज्य केवल आर्थिक प्रबंधन में सफल था, सैन्य संगठन में विफल था
(C) कार्तिकेयपुर राज्य एक सुसंगठित, बहु-विभागीय प्रशासन था जिसमें आर्थिक प्रबंधन (विविध आय स्रोत, सुव्यवस्थित कर संग्रह, परिष्कृत माप प्रणाली), सैन्य संगठन (चार प्रकार की सेना, सीमा सुरक्षा), और सामाजिक व्यवस्था (बेगार, विशेषीकृत व्यवसाय) सभी समन्वित थे
(D) राज्य की प्रशासनिक क्षमता के बारे में कुछ कहना संभव नहीं है
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Explanation: कार्तिकेयपुर राज्य की प्रशासनिक दक्षता एक समन्वित और बहु-विभागीय संरचना द्वारा प्रदर्शित होती है। आर्थिक पक्ष पर विचार करें: कृषि, वन, खनिज, पशुपालन और व्यापार जैसे विविध क्षेत्रों के प्रबंधन के लिए विशेषीकृत अधिकारी थे। भूमि की माप प्रणाली (द्रोण, नाली, खारीवाप) अत्यंत परिष्कृत और न्यायसंगत थी, जो कर निर्धारण को वस्तुनिष्ठ बनाती थी। सैन्य संगठन में चार प्रकार की सेना, सीमा सुरक्षा के लिए प्रान्तपाल, घट्टपाल आदि, और गुप्तचर विभाग (दुःसाध्यसाधनिक) थे। सामाजिक व्यवस्था में बेगार प्रणाली, विभिन्न व्यावसायिक समुदाय (आभीर, भाट, चाट) शामिल थे। यह समग्र संरचना दर्शाती है कि कार्तिकेयपुर एक अत्यंत विकसित और संगठित राज्य था। विकल्प A और B एकतरफा हैं। विकल्प D अनिर्णयात्मक है।
Q2. कत्यूरकालीन प्रशासन व्यवस्था में महाकर्ताकतृक की भूमिका निम्नलिखित में से किस प्रकार परिभाषित की जा सकती है?
(A) वह केवल एक सैन्य अधिकारी था जो सेना का संचालन करता था
(B) वह एक उच्च निरीक्षक था जो विभिन्न विभागों और कर्मचारियों की निगरानी करता था
(C) वह राजकीय कोष का रक्षक था
(D) वह केवल न्याय प्रशासन के लिए जिम्मेदार था
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Explanation: महाकर्ताकतृक का पद कत्यूरकालीन प्रशासन में एक महत्वपूर्ण उच्च स्तरीय निरीक्षक पद था। ‘महा’ का अर्थ महान/प्रमुख, ‘कर्ता’ का अर्थ कार्य करने वाला, और ‘कतृक’ संभवतः निरीक्षक या अधिकारी को दर्शाता है। महाकर्ताकतृक की जिम्मेदारी राज्य के विभिन्न विभागों, उप-विभागों और कर्मचारियों की निगरानी करना था। यह एक सर्वव्यापी पर्यवेक्षणीय पद था जो राजा की ओर से प्रशासनिक दक्षता सुनिश्चित करता था। इसका अर्थ यह है कि महाकर्ताकतृक एक प्रशासनिक सर्वोच्च निरीक्षक था, न कि विशेष रूप से सैन्य, वित्तीय या न्यायिक अधिकारी। विकल्प A एकतरफा सैन्य भूमिका दर्शाता है। विकल्प C और D विशेष विभागों तक सीमित हैं।
Q3. कत्यूरकालीन प्रशासन में सामंत और माण्डलिक के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(A) सामंत और माण्डलिक दो भिन्न पद थे, माण्डलिक नीचे और सामंत ऊपर थे
(B) सामंत को माण्डलिक कहा जाता था, यह एक समान पद था जो एक क्षेत्र (मण्डल) का प्रशासक होता था
(C) माण्डलिक केवल सैन्य कार्यों के लिए नियुक्त था
(D) सामंत और माण्डलिक के कार्यों में कोई संबंध नहीं था
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Explanation: कत्यूरकालीन प्रशासन में ‘सामंत’ और ‘माण्डलिक’ समान पद थे। ‘सामंत’ शब्द का अर्थ सामंती शासक या प्रशासक है, जबकि ‘माण्डलिक’ का अर्थ है मण्डल (प्रदेश/जिला) का प्रशासक। इन दोनों शब्दों का प्रयोग समानार्थी रूप में किया जाता था। माण्डलिक (या सामंत) केंद्रीय शक्ति के अधीन एक क्षेत्रीय प्रशासक होता था जो अपने मण्डल में शासन, कर संग्रह, न्याय प्रशासन और सुरक्षा के लिए जिम्मेदार था। यह सामंती प्रणाली का मूल आधार था। विकल्प A पदानुक्रम को गलत दर्शाता है। विकल्प C केवल सैन्य भूमिका तक सीमित है। विकल्प D गलत है।
Q4. महाप्रतिहार के पद की भूमिका कत्यूरकालीन राज प्रशासन में क्या थी?
(A) वह मंत्रिमंडल का प्रमुख था
(B) वह राजा का प्रधान अंगरक्षक था, जो राजा की व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए जिम्मेदार था
(C) वह राज्य की सेना का सर्वोच्च नायक था
(D) वह न्याय व्यवस्था का प्रमुख था
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Explanation: महाप्रतिहार का पद कत्यूरकालीन राज्य में राजा की व्यक्तिगत सुरक्षा और प्रशासन से संबंधित था। ‘महा’ का अर्थ महान, ‘प्रति’ का अर्थ विरुद्ध/रक्षा, और ‘हार’ का अर्थ वहन करना/वहन करने वाला है। महाप्रतिहार का मुख्य कार्य राजा के निकट रहना और उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करना था। यह एक विश्वस्त और सशक्त पद था क्योंकि यह राजा के सबसे निकट होता था। महाप्रतिहार राजा के महल के प्रवेश, बाहरी आगंतुकों की जांच, और राजा की निजी सुरक्षा देखभाल करता था। विकल्प A मंत्रीपरिषद से संबंधित है। विकल्प C सैन्य नेतृत्व से संबंधित है। विकल्प D न्याय व्यवस्था से संबंधित है।
Q5. कत्यूरकालीन प्रशासन में सरभंग का पद और उदाधिक के पद के कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(A) सरभंग और उदाधिक दोनों सैन्य विभाग में काम करते थे
(B) सरभंग तीरंदाज था जबकि उदाधिक एक सुपरिंटेंडेंट (पर्यवेक्षक) था, जो विभिन्न क्षेत्रों की देखभाल करता था
(C) दोनों ही केवल न्याय प्रशासन से जुड़े थे
(D) सरभंग एक सिविल अधिकारी था और उदाधिक एक सैन्य अधिकारी था
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Explanation: कत्यूरकालीन प्रशासन में सरभंग और उदाधिक दोनों का अलग-अलग और महत्वपूर्ण क्षेत्र था। सरभंग तीरंदाज (धनुर्धर/तीर का कुशल धनुष धारी) का पद था, जो सैन्य विभाग से जुड़ा था। उसकी जिम्मेदारी तीरंदाजों का प्रशिक्षण, उनका संगठन और तीरंदाजी सैनिकों की कार्यक्षमता सुनिश्चित करना था। दूसरी ओर, उदाधिक एक सुपरिंटेंडेंट (पर्यवेक्षक/निरीक्षक) था जो विभिन्न प्रशासनिक क्षेत्रों की निगरानी करता था। ‘उदा’ का अर्थ ऊपर/उत्तम और ‘धिक’ का अर्थ निरीक्षक हो सकता है। उदाधिक की जिम्मेदारी आर्थिक, सामाजिक और अन्य क्षेत्रों की गतिविधियों की निगरानी करना था। विकल्प A गलत है क्योंकि उदाधिक सैन्य विभाग में नहीं था। विकल्प C और D गलत हैं।
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