उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
31 December, 2025
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. कुल्यवाप और खारीवाप प्रणाली में क्रमशः कितने द्रोण और सेर होते थे?
(A) 18 द्रोण और 256 सेर; 120 द्रोण और 640 सेर
(B) 16 द्रोण और 32 सेर; 18 द्रोण और 256 सेर
(C) 120 द्रोण और 640 सेर; 18 द्रोण और 256 सेर
(D) 16 द्रोण और 32 सेर; 120 द्रोण और 640 सेर
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Explanation: कुल्यवाप प्रणाली में 18 द्रोण और 256 सेर होते थे, जबकि खारीवाप प्रणाली में 120 द्रोण और 640 सेर होते थे। द्रोणवाप पहले से ही 16 नाली और 32 सेर थी।
Q2. पौरव वंश में सेनाओं के कितने विभाग थे और उनका प्रमुख कौन था?
(A) 3 विभाग; जमनपति, गजपति, अश्वपति
(B) 2 विभाग; जमनपति और गजपति
(C) 3 विभाग; प्रतिहार, महासत्रपति, सूपकारपति
(D) 4 विभाग; जमनपति, गजपति, अश्वपति, प्रतिहार
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Explanation: पौरव वंश की सेना तीन विभागों में बंटी थी: पैदल सेना (मुख्य: जमनपति), हाथी सेना (मुख्य: गजपति), और अश्व सेना (मुख्य: अश्वपति)। अन्य विकल्प या तो पदाधिकारियों को दर्शाते हैं या विभागों की संख्या गलत है।
Q3. पौरव शासकों के आय का मुख्य स्रोत क्या था?
(A) वस्त्र कर
(B) भूमिकर
(C) व्यापार कर
(D) सैनिक कर
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Explanation: पौरव शासकों के आय का स्रोत भूमिकर था, जिसे भाग कहा जाता था। भूमि कर संग्रहण का कार्य भागिक करते थे। अन्य विकल्प इस प्रशासनिक व्यवस्था में प्रयुक्त नहीं थे।
Q4. पौरव काल में भूमि के प्रकार कौन‑कौन से थे?
(A) केदार और सारी
(B) सिंचित और असिंचित
(C) द्रोणवाप और खारीवाप
(D) A और B दोनों
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Explanation: पौरव काल में भूमि दो प्रकार की थी: सिंचित भूमि को केदार और असिंचित भूमि को सारी कहा जाता था। भूमि मापन के लिए द्रोणवाप, खारीवाप और कुल्यावाप जैसी विधियाँ प्रयोग होती थीं। इसलिए विकल्प D सही है।
Q5. पौरव काल में भूमि मापन की द्रोणवाप प्रणाली में कितने नाली और सेर होते थे?
(A) 16 नाली और 32 सेर
(B) 18 नाली और 256 सेर
(C) 120 नाली और 640 सेर
(D) 32 नाली और 16 सेर
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Explanation: द्रोणवाप प्रणाली में 16 नाली और 32 सेर भूमि माप की इकाई मानी जाती थी। कुल्यवाप में 18 द्रोण और 256 सेर तथा खारीवाप में 120 द्रोण और 640 सेर होते थे। अन्य विकल्प गलत हैं।
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