उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
28 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. खनिज और वन संपदा की रक्षा के संदर्भ में कार्तिकेयपुर प्रशासन में किन अधिकारियों की व्यवस्था थी?
(A) क्षेत्रपाल और भोगपति
(B) खण्डपति और खण्डहरक्षस्थानाधिपति
(C) भाट और चाट
(D) शौल्किक और सरभंग
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Explanation: कार्तिकेयपुर राज्य में खनिज और वन संपदा की रक्षा के लिए विशिष्ट अधिकारियों की व्यवस्था थी। खण्डपति और खण्डहरक्षस्थानाधिपति दोनों ही नामक अधिकारी इस कार्य को संभालते थे। ‘खण्ड’ का अर्थ खदान है और ‘पति’ का अर्थ स्वामी या प्रभारी है। ‘खण्डहरक्षस्थानाधिपति’ का अर्थ है खान क्षेत्रों की रक्षा करने वाला अधिकारी। ये अधिकारी खनिज खनन, वन कटाई और संरक्षण का निरीक्षण करते थे। विकल्प A कृषि और कर संग्रह से संबंधित है। विकल्प C बेगार संग्रह से संबंधित है। विकल्प D कर संग्रह से संबंधित है।
Q2. कार्तिकेयपुर राज्य में कर संग्रह के लिए नियुक्त अधिकारियों और उनके कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(A) भोगपति केवल कृषि कर वसूल करता था और शौल्किक व्यापार कर वसूल करता था
(B) शौल्किक कृषि कर वसूल करता था और भोगपति व्यापार कर वसूल करता था
(C) केवल भोगपति ही सभी प्रकार के कर वसूल करता था
(D) कर संग्रह के लिए कोई विशिष्ट अधिकारी नहीं था
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Explanation: कार्तिकेयपुर राज्य में कर वसूली के लिए भोगपति और शौल्किक दोनों अधिकारियों का उल्लेख मिलता है। भोगपति (भोग = अनाज/कृषि उपज, पति = स्वामी) का कार्य कृषि उत्पादन से संबंधित कर वसूल करना था। शौल्किक (शुल्क = कर/महसूल) का कार्य व्यापार और वाणिज्य से संबंधित कर वसूल करना था। यह द्विविध कर प्रणाली राज्य की आर्थिक संरचना की जटिलता को दर्शाती है। विकल्प B भूमिकाओं को उल्टा करता है। विकल्प C अधूरा है। विकल्प D गलत है।
Q3. सरभंग नामक अधिकारी की भूमिका कार्तिकेयपुर प्रशासन में क्या थी?
(A) वह सेना का प्रमुख होता था
(B) वह वन संपदा की रक्षा करता था
(C) वह तीरदांज के लिए कहा जाता था
(D) वह कृषि संबंधी कार्यों का निरीक्षण करता था
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Explanation: सरभंग कार्तिकेयपुर प्रशासन में एक विशिष्ट अधिकारी था जो तीरदांज (तीरदाज) या धनुर्धर के लिए कहा जाता था। ‘सरभंग’ शब्द संभवतः ‘सर’ (तीर) और ‘भंग’ (टूटना/प्रयोग) से बना है। इस अधिकारी की भूमिका राजकीय शिकार, सैन्य अभ्यास में तीरंदाजी का संचालन, और तीरदाज सैनिकों का प्रशिक्षण देना था। यह एक सैन्य तकनीकी विशेषज्ञ का पद था। विकल्प A, B और D अन्य भूमिकाओं से संबंधित हैं।
Q4. भाट और चाट नामक अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(A) वे राजस्व संग्रह में सहायता करते थे
(B) वे प्रजा से बिष्टी या बेगार (अनिवार्य श्रम) लेते थे
(C) वे मंदिर के पुजारी होते थे
(D) वे सेना में भर्ती का काम करते थे
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Explanation: भाट और चाट नामक अधिकारी कार्तिकेयपुर प्रशासन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते थे – वे प्रजा से बिष्टी या बेगार लेते थे। बिष्टी का अर्थ है अनिवार्य श्रम या सामंती श्रम, जिसे प्रजा राजा के लिए निःशुल्क करती थी। यह प्रणाली सार्वजनिक निर्माण कार्यों, सेना की तैयारी और अन्य राजकीय कार्यों के लिए श्रम प्रदान करने का एक तरीका था। यद्यपि यह सामंती प्रणाली की एक कठोर पहलू थी, परंतु यह प्राचीन राज्यों में सामान्य था। विकल्प A, C और D गलत हैं।
Q5. पशु पालन और दुग्ध उत्पादन के संदर्भ में कार्तिकेयपुर आर्थिक व्यवस्था में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(A) राज्य स्वयं सभी पशु पालन करता था
(B) पशुओं से दुग्धादि निकालने का कार्य आभीर नामक समुदाय द्वारा किया जाता था
(C) पशु पालन की कोई व्यवस्था नहीं थी
(D) सभी प्रजा को पशु पालन में भाग लेना अनिवार्य था
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Explanation: आभीर एक पारंपरिक पशुपालक समुदाय थे जो गोपालन और दुग्ध उत्पादन में विशेषज्ञ थे। कार्तिकेयपुर राज्य में आभीरों को पशुओं से दुग्धादि (दूध और दही आदि) निकालने का कार्य सौंपा जाता था। यह एक विशेषीकृत व्यावसायिक समूह था जो इस कार्य को पेशे के रूप में करता था। यह व्यवस्था अर्थव्यवस्था में पशुपालन के महत्व को दर्शाती है। विकल्प A केंद्रीकृत पशुपालन का सुझाव देता है, जो पहाड़ी क्षेत्रों के लिए असंभव था। विकल्प C गलत है। विकल्प D भी गलत है।
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