उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग द्वारा आयोजित की जानेवाली आगामी परीक्षाओं (UKPSC/ UKSSSC) को मध्यनजर रखते हुए Exam Pillar आपके लिए Daily MCQs प्रोग्राम लेकर आया है। इस प्रोग्राम के माध्यम से अभ्यर्थियों को उत्तराखंड लोकसेवा आयोग व अधीनस्थ सेवा चयन आयोग के परीक्षाओं के प्रारूप के अनुरूप वस्तुनिष्ठ अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराये जायेंगे।
Daily UKPSC / UKSSSC MCQs : उत्तराखंड (Uttarakhand)
27 January, 2026
| Read This UKPSC / UKSSSC Daily MCQ – (Uttarakhand) in English Language |
Q1. महासामन्त का पद कार्तिकेयपुर सेना में किस प्रकार की भूमिका निभाता था?
(A) महासामन्त केवल एक सेनानी होता था
(B) महासामन्त केवल एक सदस्य था जो अन्य सभी सैनिकों से कम महत्वपूर्ण था
(C) महासामन्त चारों सेना अंगों के प्रधान होते थे, जो उच्च सैन्य नेतृत्व प्रदान करते थे
(D) महासामन्त केवल राजदरबार में औपचारिक भूमिका निभाता था
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Explanation: महासामन्त कार्तिकेयपुर की सैन्य संरचना में सर्वोच्च नेतृत्व पद था। महासामन्त का अर्थ है महान सामंत या सर्वोच्च सैन्य अधिकारी। कार्तिकेयपुर सेना के चारों अंगों – पदातिक, अश्वारोही, गजारोही और उष्ट्रारोही – के प्रधान (गौल्मिक, अश्वबलाधिकृत, हस्तिबलाधिकृत और उष्ट्रबलाधिकृत) को महासामन्त कहा जाता था। ये सभी उच्च सैन्य अधिकारी होते थे जो अपने-अपने सेना विभाग का संचालन करते थे। विकल्प A और B महासामन्त के महत्व को कम आंकते हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि महासामन्त सैन्य नेतृत्व की प्रमुख भूमिका निभाते थे।
Q2. कार्तिकेयपुर प्रशासन की सैन्य और नागरिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा निष्कर्ष सर्वाधिक उपयुक्त है?
(A) कार्तिकेयपुर राज्य में केवल सैन्य संरचना थी, कोई नागरिक प्रशासन नहीं था
(B) कार्तिकेयपुर राज्य में सुसंगठित नागरिक प्रशासन था, परंतु सेना की कोई संरचना नहीं थी
(C) कार्तिकेयपुर राज्य में सुव्यवस्थित सैन्य और नागरिक दोनों प्रशासन थे, जिसमें सीमा सुरक्षा, आंतरिक व्यवस्था, संचार, राजस्व प्रशासन और बहुस्तरीय सेना विभाग शामिल थे
(D) कार्तिकेयपुर राज्य अव्यवस्थित था और इसमें कोई स्पष्ट प्रशासनिक संरचना नहीं थी
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Explanation: कार्तिकेयपुर राज्य का प्रशासन अत्यंत सुव्यवस्थित और सुसंगठित था, जिसमें नागरिक और सैन्य दोनों संरचनाएँ थीं। नागरिक प्रशासन में सीमा सुरक्षा के लिए प्रान्तपाल, घट्टपाल और वर्मपाल; आंतरिक व्यवस्था के लिए दोषापराधिक और दुःसाध्यसाधनिक; संचार के लिए गमागमि; भूमि प्रबंधन के लिए प्रमवातार; निर्माण कार्यों के लिए सौदा-भंगाधिकृत और कारिका; मंदिर और धार्मिक कार्यों के लिए विभिन्न अधिकारी; राजस्व के लिए नरपति; और उच्च नीति निर्माण के लिए राजमात्या, अक्षपटलाधिकृत और महासंधिविग्रहिक शामिल थे। सैन्य विभाग में चारों प्रकार की सेनाएँ (पदातिक, अश्वारोही, गजारोही, उष्ट्रारोही) थीं, जिनके नायकों को महासामन्त कहा जाता था। यह संरचना मध्यकालीन भारतीय राज्यों में अत्यंत विकसित और केंद्रीयकृत थी। विकल्प A और B एकतरफा दावे हैं जो गलत हैं। विकल्प D गलत है क्योंकि राज्य अत्यंत सुव्यवस्थित था।
Q3. कत्यूरी शासन में आय के प्रमुख साधनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
I. कृषि राज्य की आय का प्रमुख स्रोत था
II. वन संपदा और खनिजों का दोहन आय का महत्वपूर्ण साधन था
III. व्यापार और वाणिज्य प्राथमिक आय का स्रोत था
IV. समुद्री व्यापार आय का प्रमुख साधन था
उपर्युक्त में से कौन से कथन सही हैं?
(A) केवल I और II
(B) केवल II और III
(C) केवल III और IV
(D) केवल I, II और III
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Explanation: कत्यूरी शासन के आर्थिक ढांचे में कृषि, वन एवं खनिज संपदा तीन प्रमुख आय के साधन थे। कृषि हिमालयी क्षेत्र में मुख्य आजीविका का साधन थी और राज्य की आय का सबसे बड़ा स्रोत था। वन और खनिज संपदा का दोहन भी महत्वपूर्ण था क्योंकि पहाड़ी क्षेत्र में प्राकृतिक संसाधन प्रचुर मात्रा में थे। कथन III और IV गलत हैं क्योंकि व्यापार-वाणिज्य और समुद्री व्यापार पर्वतीय क्षेत्र में प्राथमिक नहीं थे। यद्यपि कुछ सीमित व्यापार चल सकता था, परंतु यह आय का मुख्य स्रोत नहीं था।
Q4. कृषि विकास के संदर्भ में क्षेत्रपाल की भूमिका कार्तिकेयपुर राज्य में क्या थी?
(A) क्षेत्रपाल केवल सैन्य सीमाओं की रक्षा करता था
(B) क्षेत्रपाल राज्य की कृषि की उन्नति का ध्यान रखता था
(C) क्षेत्रपाल भूमि कर संग्रह के लिए जिम्मेदार था
(D) क्षेत्रपाल केवल राज्य के खजाने की देखभाल करता था
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Explanation: क्षेत्रपाल कार्तिकेयपुर राज्य में एक कृषि विकास अधिकारी था, जिसका मुख्य कार्य राज्य की कृषि की उन्नति का ध्यान रखना था। यह एक महत्वपूर्ण पद था क्योंकि कृषि ही राज्य की आय का प्रमुख स्रोत था। क्षेत्रपाल कृषि संबंधी तकनीकों में सुधार, सिंचाई सुविधाओं का विकास, और उत्पादकता में वृद्धि के लिए जिम्मेदार होता था। विकल्प A गलत है क्योंकि यह सैन्य भूमिका है। विकल्प C भूमि कर संग्रह से संबंधित है, जो क्षेत्रपाल की प्राथमिक जिम्मेदारी नहीं थी। विकल्प D भी गलत है।
Q5. उपचारिक या पटकोषचारिक अधिकारी के कार्यों के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन सा कथन सही है?
(A) भूमि के अभिलेख रखना
(B) खनिजों की खुदाई का निरीक्षण करना
(C) कर संग्रह का प्रभारी होना
(D) वन संपदा की रक्षा करना
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Explanation: उपचारिक या पटकोषचारिक अधिकारी का प्रमुख कार्य भूमि के अभिलेख रखना था। ‘पटकोष’ का अर्थ है भूमि का रिकॉर्ड और ‘चारिक’ का अर्थ है अधिकारी या संरक्षक। इस अधिकारी की जिम्मेदारी भूमि संबंधी विविध सूचनाएँ जैसे भूमि का स्वामित्व, क्षेत्रफल, प्रकार (कृषि योग्य, वन आदि), और भूमि से संबंधित लेनदेन को रिकॉर्ड करना था। यह एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्य था जो राजस्व संग्रह और भूमि प्रबंधन के लिए आवश्यक था। विकल्प B, C और D अन्य अधिकारियों की जिम्मेदारियाँ थीं।
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